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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Sanskrit Subjective Question Answer Class 10th Subjective Question

Matric Sanskrit VyagraPathikkatha Subjective Questions 2024 [ संस्कृत ] व्याघ्रपथिककथा सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

संस्कृत ( Sanskrit ) व्याघ्रपथिककथा सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Sanskrit संस्कृत का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Sanskrit Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th संस्कृत 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Sanskrit Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Sanskrit VyagraPathikkatha Subjective Questions 2024 [ संस्कृत ] व्याघ्रपथिककथा सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

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1. – सात्विक दान क्या है ? पठित पाठ के आधार पर उत्तर दें ।

उत्तर ⇒ देशकाल, स्थान एवं पात्र को ध्यान में रखकर दिया गया दान सात्विक होता है। बूढ़ा बाघ पथिक को फँसाने के लिए हितोपदेश सुनाता है । पथिक को दान लेने के लिए योग्य पात्र मानता है।

2. अनिष्ट से इष्ट की प्राप्ति का परिणाम कैसे बुरा होता है ?

उत्तर ⇒ अनिष्ट से इष्ट की प्राप्ति का परिणाम शुभ नहीं होता, बल्कि बुरा होता है। जैसे- जहाँ विष का संसर्ग होता है वहाँ अमृत भी नष्ट हो जाता है।

3. बाघ ने स्वयं को अहिंसक सिद्ध करने के लिए क्या तर्क दिया ?

उत्तर ⇒बाघ ने बताया कि युवावस्था में वह अतिदुराचारी था। युवावस्था में अनेक गायों और मनुष्यों के वध करने के पाप के कारण वह निःसंतान और पत्नीविहीन हो गया था। तब एक धार्मिक व्यक्ति ने पापमुक्त होने के लिए बाघ को उपदेश दिया कि आप दान-पुण्य किया करें।

4. सोने के कंगन को देखकर पथिक ने क्या सोचा ?

उत्तर ⇒ सोने के कंगन को देखकर पथिक ने सोचा कि यह भाग्य से ही संभव है।

5. बाघ के द्वारा पकड़ लिए जाने पर पथिक अपने मन में क्या सोचता है ?

उत्तर ⇒ बाघ के द्वारा पकड़ लिए जाने पर पथिक मन में सोचता है कि लोभ में नहीं पड़ना चाहिए।

6. ‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना यह उक्ति व्याघ्रपथिक कथा पर कैसे चरितार्थ होती है ?

उत्तर ⇒ पथिक ज्ञानी होते हुए भी लोभवश अविश्वासी पर विश्वास कर सिंह के वाग्जाल में फँसकर अपनी जान गँवा बैठा, यदि वह अपने प्राप्त ज्ञान का सदुपयोग किया होता तो उसे अपनी जान गँवानी नहीं पड़ती। इस प्रकार यह उक्ति ‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना व्याघ्रपथिक कथा के पात्र पथिक पर सत्य चरितार्थ होती है ।

7. ‘व्याघ्रपथिककथा’ के आधार पर बतायें कि दान किसको देना चाहिए ?

उत्तर ⇒ दान गरीबों को देना चाहिए। जो उपकार नहीं किया है उसे दान देना चाहिए। स्थान, समय और पात्र को ध्यान में रखकर दान देना चाहिए।

 

Sanskrit VyagraPathikkatha Subjective Question Answer pdf hindi

 

8. ‘व्याघ्रपथिककथा’ कहाँ से लिया गया है ? इसके लेखक कौन हैं तथा इससे क्या शिक्षा मिलती है ?

उत्तर ⇒‘व्याघ्रपथिककथा’ हितोपदेश ग्रंथ के मित्रलाभ खण्ड से ली गई है। इसके लेखक ‘नारायण पंडितजी’ हैं। इस कथा के द्वारा नारायण पंडित हमें यह शिक्षा देते हैं कि दुष्टों की बातों पर लोभ में आकर विश्वास नहीं करना चाहिए। सोच-समझकर ही काम करना चाहिए। इस कथा का उद्देश्य मनोरंजन के साथ व्यावहारिक ज्ञान देना है। यह रुचिकर रूप में ज्ञान देती है ।

9. व्याघ्रपथिककथा से क्या शिक्षा मिलती है ?
अथवा, ‘व्याघ्रपथिककथा’ को संक्षेप में अपने शब्दों में लिखिए ।
अथवा, व्याघ्रपथिककथा के लेखक कौन हैं ? इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है ? पाँच वाक्यों में उत्तर दें ।

उत्तर ⇒ यह कथा नारायण पण्डित विरचित हितोपदेश के नीतिकथाग्रंथ के मित्रलाभखण्ड से ली गयी है। इस कथा में एक पथिक बूढ़ा व्याघ्र द्वारा दिये गये प्रलोभन में पड़ जाता है। बूढ़ा व्याघ्र हाथ में सुवर्णकंगन लेकर पथिक को अपनी ओर आकृष्ट करता है । पथिक निर्धन होने के बावजूद व्याघ्र पर विश्वास नहीं करता । तब व्याघ्र द्वारा सटीक तर्क दिये जाने पर पथिक संतुष्ट होकर कंगन ले लेना उचित समझता. है । स्नान कर कंगन ग्रहण करने की बात स्वीकार कर पथिक महाकीचड़ में गिर जाता है और बूढ़े व्याघ्र द्वारा मारा जाता है । इस कथा में संदेश और शिक्षा यही है कि नरभक्षी प्राणियों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए और अपनी किसी भी समस्या का समाधान ऐसे व्यक्ति द्वारा नजर आये तब भी उसके लोभ में नहीं फँसना चाहिए ।

10. बूढ़ा बाघ ने पथिकों को फँसाने के लिए किस तरह का भेष रचाया ?

उत्तर ⇒ बूढ़ा बाघ ने पथिकों को फँसाने के लिए एक धार्मिक का भेष रचाया । उसने स्नान कर और हाथ में कुश लेकर तालाब के किनारे पथिकों से बात कर उन्हें दानस्वरूप सोने का कंगन पाने का लालच दिया ।

11. धार्मिक व्यक्ति ने वृद्ध बाघ को क्या उपदेश दिया ?

उत्तर ⇒वृद्ध बाघ अतिदुराचारी था। युवावस्था में अनेक गायों और मनुष्यों के वध करने के पाप के कारण वह निःसंतान और पत्नीविहीन हो गया था। तब एक धार्मिक व्यक्ति ने पापमुक्त होने के लिए बाघ को उपदेश दिया कि आप दान-पुण्य करें ।

12. पथिक वृद्ध बाघ की बातों में क्यों आ गया ?

उत्तर ⇒ पथिक ने सोने के कंगन की बात सुनकर सोचा कि ऐसा भाग्य से ही मिल सकता है, किन्तु जिस कार्य में खतरा हो उसे नहीं करना चाहिए। फिर लोभवश उसने सोचा कि धन कमाने के कार्य में खतरा तो होता ही है। इस तरह वह लोभ से वशीभूत होकर बाघ की बातों में आ गया ।

13. नारायण पंडित रचित व्याघ्रपथिककथा पाठ का मूल उद्देश्य क्या है ?

उत्तर ⇒व्याघ्रपथिककथा का मूल उद्देश्य यह है कि हिंसक जीव अपने स्वभाव को नहीं छोड़ सकता। इस कथा के द्वारा नारायण पंडित हमें यह शिक्षा देते हैं कि दुष्टों की बातों पर लोभ में आकर विश्वास नहीं करना चाहिए । सोच-समझकर ही काम करना चाहिए। इस कथा का उद्देश्य मनोरंजन के साथ व्यावहारिक ज्ञान देना है ।

14. व्याघ्रपथिककथा पाठ का पाँच वाक्यों में परिचय दें ।

उत्तर ⇒ यह कथा नारायण पंडित रचित प्रसिद्ध नीतिकथाग्रंथ ‘हितोपदेश’ के प्रथम भाग ‘मित्रलाभ’ से संकलित है। इस कथा में लोभाविष्ट व्यक्ति की दुर्दशा का निरूपण है । आज के समाज में छल-छद्म का वातावरण विद्यमान है जहाँ अल्प वस्तु के लोभ से आकृष्ट होकर लोग अपने प्राण और सम्मान से वंचित हो जाते हैं। एक बाघ की चला में फँसकर एक लोभी पथिक उसके
द्वारा मारा गया ।

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