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Matric Physics Electricity vvi Subjective Questions 2024 [ भौतिकी ] विधुत सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

भौतिक (Physics) विधुत 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Physics भौतिक का महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्नोत्त सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Physics Short type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th भौतिक 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Physics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Physics Electricity vvi Subjective Questions 2024 [ भौतिकी ] विधुत सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

प्रश्न 1. ओम के नियम को लिखें।

उत्तर ⇒ यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ जैसे ताप आदि में कोई परिवर्तन न हो तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवान्तर उससे प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है ।

जहाँ R एक नियतांक है ।

प्रश्न 2. प्रत्यावर्ती धारा एवं दिष्ट धारा में अंतर स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒

 S.N        दिष्ट धारा       प्रत्यावर्ती धारा
 1. इस धारा का परिमाण एवं दिशा समय के साथ स्थिर रहता है इस धारा का परिमाण एवं दिशा समय के साथ बदलता है
 2. इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रेषित करने पर अधिक ऊर्जा का व्यय होता है इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रेषित करने पर कम ऊर्जा व्यय होता है
 3.  ट्रांसफॉर्मर की मदद से इस धारा के विभवान्तर को बढ़ाना-घटाना संभव नहीं है ट्रांसफॉर्मर की सहायता से इस धारा के विभवांतर को घटाना- बढ़ाना संभव है
 4. इस धारा की सहायता से संचायक सेल को चार्ज किया जाता है इस धारा की सहायता से संचायक सेल को चार्ज नहीं किया जा सकता है
 5. यह कम वोल्टेज के कारण अपेक्षा कृत कम खतरनाक है यह अधिक वोल्टेज के कारण बहुत खतरनाक है

 

प्रश्न 3. प्रतिरोध क्या है ? इसका सूत्र तथा मात्रक लिखें।
अथवा, प्रतिरोध किसे कहते हैं ? प्रतिरोध का SI मात्रक लिखें। किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है ।
अथवा, प्रतिरोध क्या है ? इसका SI मात्रक लिखें ।

उत्तर ⇒ प्रतिरोध चालक का वह गुण जिसके द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध किया जाता है, उसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं ।
यदि परिपथ की अन्य परिस्थितियाँ समान रहें, तो प्रतिरोध बढ़ाने से विद्युत धारा कम हो जाती है तथा प्रतिरोध घटाने से विद्युत धारा बढ़ जाती है ।
प्रतिरोध के S. I. मात्रक प्रतिरोध का मान किसी चालक के दो सिरों के मध्य के विभवांतर और उसमें बह रही विद्युत धारा की मात्रा के अनुपात के बराबर होता है ।

सूत्र- 

किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित तीन बातों पर निर्भर करता है-

(i) चालक की लम्बाई – चालक का प्रतिरोध R चालक की लम्बाई के समानुपाती होता है

इसका अर्थ है कि अगर लम्बाई दो गुनी करेंगे तो प्रतिरोध भी दोगुना हो जाएगा और अगर लम्बाई को आधा करेंगे तो प्रतिरोध भी आधा हो जाएगा ।

 

(ii) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल – चालक का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के प्रतिलोमानुपाती होता है ।

यहाँ a अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है ।

इसका अर्थ हैं जब क्षेत्रफल दोगुना होगा तो प्रतिरोध आधा हो जाएगा।

(iii) पदार्थ की प्रकृति — प्रतिरोध इस बात पर भी निर्भर करता है कि चालक जिस पदार्थ का बनाया गया है उसकी प्रकृति क्या है ।

(iv) चालक का तापमान ।

प्रश्न 4. विद्युत बल्ब में निष्क्रिय गैस क्यों भरी जाती है ?

उत्तर ⇒ विद्युत बल्ब में टंगस्टन का फिलामेंट (तंतु) से हवा – माध्यम में विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो यह हवा के ऑक्सीजन से ऑक्सीकृत होकर भंगुर हो जाएगा और टूट जाएगा। इसलिए फिलामेंट को टूटने से बचाने के लिए काँच के बल्ब के अंदर की हवा को निकालकर निष्क्रिय गैस भर दी जाती है।
गैसों को निम्न दाब पर भरा जाता है जिससे कि संवहन द्वारा ऊष्मा की हानि न्यूनतम हो ।

प्रश्न 5. विद्युत विभव की परिभाषा दें एवं इसका SI मात्रक लिखें ।

उत्तर ⇒ इकाई धन आवेश को अनंत से विद्युतीय क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में सम्पादित कार्य को उस बिन्दु का विभव कहते हैं। इसका SI मात्रक वोल्ट है।

 

Physics Electricity Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 6. विद्युत धारा की प्रबलता की परिभाषा दें।
अथवा, विद्युत धारा क्या है ? इसका समीकरण एवं मात्रक लिखें।

उत्तर ⇒ किसी चालक से प्रवाहित विद्युत धारा की प्रबलता उस चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित आवेश का परिमाण है। यदि 1 सेकण्ड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है तो उस अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित धारा का मान 1 ऐम्पियर होता है।

प्रश्न 7. ऐम्पियर की परिभाषा दें ।

उत्तर ⇒ किसी चालक से प्रवाहित विद्युत धारा की प्रबलता उस चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित आवेश का परिमाण है। यदि 1 सेकण्ड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित धारा का मान 1 ऐम्पियर होता है।

प्रश्न 8. विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र खींचिए ।

उत्तर ⇒

प्रश्न 9. प्रत्यावर्ती धारा में कौन-सी दो कमियाँ होती हैं ?

उत्तर ⇒ प्रत्यावर्ती धारा में निम्नलिखित दो कमियाँ हैं-

(i)  प्रत्यावर्ती धारा से विद्युत – लेपन तथा बैटरियों का आवेशन नहीं किया जा             सकता है।

(ii) इस धारा से विद्युत विच्छेदन नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 10. उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाये रखने में सहायता करती है।

उत्तर ⇒ किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाये रखने के लिए सेल अपनी संचित रासायनिक ऊर्जा नियमित रूप से खर्च करता है, जिससे विद्युत धारा निश्चित रहती है और चालकों के सिरों के बीच विभवांतर बना रहता है। यह परिवर्ती प्रतिरोध द्वारा सम्पन्न होती है।

प्रश्न 11. विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग किया जाता है ।

उत्तर ⇒ विद्युत बल्ब में टंगस्टन का फिलामेंट (तंतु) इसलिए बनाया जाता है, क्योंकि इसका गलनांक बहुत अधिक (लगभग 3400°C) होता है । अतः, यह बिना गले 2700 °C का श्वेत- तप्त ताप प्राप्त कर सकता है। चूँकि टंगस्टन की प्रतिरोधकता कम है,
इसलिए पतला और लंबा तार ( कुंडली के रूप में) लेना पड़ता है ताकि प्रतिरोध अधिक हो और ऊष्मा अधिक उत्पन्न हो ।

प्रश्न 12. सेल, खुला स्विच, प्रतिरोध एवं अमीटर के लिये संकेत लिखें।

उत्तर ⇒

               

प्रश्न 13. घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है ?

उत्तर ⇒ श्रेणीक्रम में समान विद्युत धारा, सभी उपकरणों में प्रवाहित होती है । श्रेणीक्रम से अधिक उपकरण लगाने से धीरे-धीरे धारा का मान घटता जाता है क्योंकि सभी प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं और कुल प्रतिरोध बहुत अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक उपकरण के सिरों पर विभवांतर भिन्न होता है ।

प्रश्न 14. भूसंपर्क तार का क्या कार्य है ? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना क्यों आवश्यक है ?

उत्तर ⇒ किसी भी विद्युत उपकरण के लिए दो तारों की आवश्यकता होती है- एक जिसमें धारा गुजरती है और दूसरी उदासीन । अधिक ऊष्मा उत्पत्ति या टूट-फूट के कारण कभी-कभी धारा युक्त तार उपकरण को या स्पर्श कर लेती है जिससे उपकरण को छू जाने पर शॉक लगता है।
इससे बचने के लिए उपकरण के धात्विक भाग का संबंध धरती से कर दिया जाता है। तीन पिन वाले प्लग के साथ इसे जोड़ दिया जाता है। इसे धरती में बहुत गहराई में दबाई गई तार से संबंधित किया जाता है । लघु पथन के समय धारा उपकरण से धरती में चली जाती है। इससे फ्यूज पिघल जाता है ।
लघुपथन और विद्युत शॉक से बचने के लिए यह बहुत ही आवश्यक है।

प्रश्न 15. विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाये जाते हैं ?

उत्तर ⇒ विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के बनाए जाते हैं, क्योंकि मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है और उनका उच्च ताप पर शीघ्र ही उपचयन (दहन) नहीं होता है।

प्रश्न 16. ऐमीटर और वोल्टमीटर को विद्युत परिपथ के साथ क्रमशः श्रेणी एवं समांतर क्रम में जोड़ा जाता है ?

उत्तर ⇒ ऐमीटर धारा मापने की एक युक्ति है। अतः, इसे विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि कुल धारा इससे होकर प्रवाहित हो। इसका प्रतिरोध बहुत कम होने के कारण प्रवाहित धारा का परिमाण नहीं बदलता है।
वोल्टमीटर विद्युत परिपथ में किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने की युक्ति है। अतः, इसे उन दो बिंदुओं के समांतर क्रम में जोड़ा जाता है। इसका प्रतिरोध बहुत अधिक होने के कारण यह परिपथ से नगण्य धारा लेता है।

 

Physics Electricity Subjective Question Answer pdf hindi

 

प्रश्न 17. किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचें जिसमें 2V के तीन सेलों की बैटरी, एक 52 प्रतिरोधक, एक 82 प्रतिरोधक तथा एक 122 प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हो

उत्तर ⇒

प्रश्न 18. विद्युत आवेश क्या है ? विद्युत आवेश कितने प्रकार के होते हैं ?

उत्तर ⇒ इलेक्ट्रॉन के सतत प्रवाह को विद्युत आवेश कहते हैं। आवेश का S. I. मात्रक कूलंब (कूलॉम) है। एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 x 10 -19 कूलंब (C) ऋण आवेश होता है।

विद्युत आवेश दो प्रकार का होता है-

(i)  धनात्मक आवेश और

(ii)  ऋणात्मक आवेश ।

प्रश्न 19. प्रतिरोधों का संयोजन (समूहन ) क्या है ? यह कितने प्रकार से होता है ? किसी एक समतुल्य प्रतिरोध के लिये व्यंजक प्राप्त करें

उत्तर ⇒ विद्युत परिपथ में दो या दो से अधिक प्रतिरोधों (चालकों) को एक साथ जोड़ना, प्रतिरोधों का संयोजन या समूहन कहते हैं ।

संयोजन दो प्रकार से होता है—-

श्रेणीक्रम के लिए समतुल्य प्रतिरोध का व्यंजक ⇒  श्रेणीक्रम में प्रतिरोध के मान के अनुसार विभवान्तर का वितरण [V = V1, V2, V3, …] होता है जबकि धारा (I) का मान समान रूप से प्रवाहित होता है।

यदि समतुल्य प्रतिरोध = R, विभवान्तर = V

तो    R1, R2, R3 में वितरित विभावनतर = V 1, V2, V3, …

तो    V = V1 + V2, +V3 +……..

या     I.R. = I

∴    R = R1 + R2 + R3

यही व्यंजक प्राप्त हुआ ।

प्रश्न 20. घरों के विद्युत परिपथ में विद्युत उपकरण समान्तरक्रम में क्यों जोड़े जाते हैं ?

उत्तर ⇒ पार्श्वक्रम में संयोजित करने के लाभ होते हैं-

(i) प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में जोड़ने से किसी भी चालक में स्विच की सहायता से         विद्युत-धारा स्वतंत्रतापूर्वक भेजी अथवा रोकी जा सकती है।

(ii) ऐसा करने से सभी समांतर शाखाओं के सिरों के बीच का विभवांतर बराबर होता है ।
इसलिए लैंप, बिजली की प्रैस, रेफ्रीजरेटर, रेडियो आदि को एक ही विभव पर प्रचलन के योग्य बनाया जा सकता है ।

प्रश्न 21. विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है ?

उत्तर ⇒ विद्युत परिपथ चालकों तथा विद्युत-स्रोतों का संयोजन है । इन चालकों तथा विद्युत स्रोतों को कम प्रतिरोध के संयोजक तारों से इस प्रकार जोड़ा जाता कि कोई लघु पथ न हो।

प्रश्न 22. विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए ।

उत्तर ⇒ विद्युत धारा का मात्रक ऐम्पियर है । किसी चालक के अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल से प्रति सेकेण्ड होने वाले आवेश की मात्रा एक कूलॉम हो तो विद्युत-धारा ऐम्पियर कहलाती है ।

                                      1A = 1C/1S

प्रश्न 23. किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है ?

उत्तर ⇒ जब तार का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होगा तो चालक में इलेक्ट्रॉन भी अधिक मुक्त रूप से बहेंगे। इस कारण चालक में धारा अधिक होगी तथा प्रतिरोधकम ।

प्रश्न 24. विद्युत संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा एल्युमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है ?

उत्तर ⇒ कॉपर तथा ऐलुमिनियम विद्युत के अच्छे चालक हैं। कॉपर तथा एल्युमिनियम की प्रतिरोधकता कम है । जब ताँबे तथा एल्युमिनियम तारों में विद्युत प्रेषित होती है, तो ऊष्मा के रूप में शक्ति ह्रास बहुत कम होता है ।

प्रश्न 25. विद्युत-तापन युक्तियों, जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रधातुओं के क्यों बनाये जाते हैं ?

उत्तर ⇒ मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता बहुत उच्च होती है तथा तापमान परिवर्तन से प्रतिरोधकता में विशेष कमी नहीं आ पाती, इसके साथ-साथ यह अधिक तापमान पर ऑक्सीकृत भी नहीं होती है ।

प्रश्न 26. यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है ?

उत्तर ⇒ किसी धारावाही विद्युत परिपथ के दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभवांतर को हम उस कार्य द्वारा परिभाषित करते हैं जो एकांक आवेश की एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में किया जाता है।

प्रश्न 27. श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं ?

उत्तर ⇒ पार्श्वक्रम में संयोजित करने के लाभ होते हैं-

(i) प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में जोड़ने से किसी भी चालक में स्विच की सहायता से         विद्युत धारा स्वतंत्रतापूर्वक भेजी अथवा रोकी जा सकती है ।

(ii) ऐसा करने से सभी समांतर शाखाओं के सिरों के बीच का विभवांतर बराबर होता है। इसलिए लैंप, बिजली की प्रैस, रेफ्रीजरेटर,
रेडियो आदि को एक ही विभव पर प्रचलन के योग्य बनाया जा सकता है।

प्रश्न 28. कुलॉग का नियम क्या है ?

उत्तर ⇒ दो आवेशित वस्तुओं के बीच का विद्युत बल उनके गुणनफल का समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
           

                                 जहाँ k स्थिरांक है।

प्रश्न 29. विद्युत परिपथ का आरेख खींचिए ।

उत्तर ⇒

प्रश्न 30. साधारण वोल्टिक सेल की संरचना लिखिए।

उत्तर ⇒ साधारण वोल्टिक सैल वोल्टा के द्वारा तैयार किया गया था। यह पहला ऐसा यंत्र था जिसके द्वारा विद्युत धारा को प्राप्त किया गया था । काँच के बने बर्तन में तांबे और जिस्ते की दो छड़ें तनु गंधक के अम्ल में डुबोई जाती हैं। जिस्त अम्ल से क्रिया करता है ।
जब टॉर्च के बल्ब को तार की सहायता से तांबे और जिस्ता से जोड़ा जाता है तो विद्युत आवेश उत्पन्न होता है ।

 

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प्रश्न 31. तारों का श्रेणीक्रम संयोजन का आरेख खींचिए ।

उत्तर ⇒

                     

                      चित्र – श्रेणीक्रम में जुड़े हुए चालक

प्रश्न 32. किसी विद्युत हीटर की डोरी उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उतप्त हो जाता है ।

उत्तर ⇒ विद्युत हीटर में लगे तापन अवयव का प्रतिरोध, विद्युत हीटर की डोरी के प्रतिरोध की अपेक्षा काफी अधिक होता है। चूँकि किसी चालक में विद्युत धारा के प्रवाह के कारण चालक में उत्पन्न ऊष्मा, चालक के प्रतिरोध के समानुपाती होती (H – R, I तथा t नियत रहने पर),
इसलिए हीटर का तापन अवयव तो उतप्त हो जाता है, परंतु हीटर की डोरी उत्तप्त नहीं होती है।

प्रश्न 33. तारों का समानान्तर क्रम का आरेख खींचिए ।

उत्तर ⇒

प्रश्न 34. विद्युत ऊर्जा किसे कहते हैं ? इसके मात्रक क्या हैं ?

उत्तर ⇒ किसी निश्चित समय में धारा के द्वारा किया या कुल कार्य विद्युत ऊर्जा कहलाता है।

                W = P x t.

विद्युत ऊर्जा के मात्रक-

(i) वाट सेकेंड – जो विद्युत ऊर्जा एक वाट शक्ति वाले परिपथ में एक सेकेंड      में  खर्च   होती है ।

(ii) वाट घंटा – जो विद्युत ऊर्जा एक वाट शक्ति वाले परिपथ में एक घंटे में खर्च    होती है।
                        1 वाट घंटा = 1 वाट x 1 घंटा = 1 x 3600 सेकेंड
                        3600 वाट सेकेंड. 3600 जूल |

(iii) किलोवाट घंटा – जो विद्युत ऊर्जा एक किलोवाट शक्ति वाले परिपथ में एक    घंटे में खर्च होती है।
1 किलोवाट घंटा = 1 किलोवाट x 1 घंटा = 1000 वाट x 3600 से
= 3600000 जूल = 3.6 x 106 जूल ।

प्रश्न 35. कूलॉम के नियम की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर ⇒ कूलॉम का नियम – दो आवेशों के बीच लगने वाला बल, उन आवेशों के परिमाण के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है ।

व्याख्या – यदि 9, तथा 9, दो आवेश हों, जिनके बीच की दूरी ” हो तथा इनके बीच लगनेवाला बल F हो, तो

जहाँ ‘K’ समानुपातिकता स्थिरांक है ।
दो आवेशों के बीच बल उनके केन्द्रों को जोड़नेवाली रेखा के अनुदिश होता है समान आवेशों के लिए यह बल प्रतिकर्षी (धनात्मक) होता है तथा विपरीत आवेशों के लिए यह बल आकर्षी (ऋणात्मक) होता है ।

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