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Matric History Vyapar Aur Bhumandalikaran Subjective Questions 2024 [ इतिहास ] व्यापार और भूमंडलीकरण सब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th History Subjective Question Class 10th Subjective Question

Matric History Vyapar Aur Bhumandalikaran Subjective Questions 2024 [ इतिहास ] व्यापार और भूमंडलीकरण सब्जेक्टिव क्वेश्चन

इतिहास ( History) व्यापार और भूमंडलीकरण दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th History इतिहास का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th History Long Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th इतिहास 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th History Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद

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Matric History Vyapar Aur Bhumandalikaran Subjective Questions 2024 [ इतिहास ] व्यापार और भूमंडलीकरण सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. भूमंडलीकरण के कारण आमलोगों के जीवन में आनेवाले परिवर्तनों को स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ वर्तमान परिदृश्य में भूमंडलीकरण के प्रभाव को आर्थिक क्षेत्र में अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है । अर्थव्यवस्था की शक्ति को स्थापित करने में भूमंडलीकरण के आर्थिक स्वरूप का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मुक्त बाजार, मुक्त व्यापार, खुली प्रतिस्पर्द्धा बहुराष्ट्रीय निगमों (कम्पनी) का प्रसार – उद्योग तथा सेवा क्षेत्र का निजीकरण उक्त आर्थिक भूमंडलीकरण के मुख्य तत्त्व हैं । अभी जिस समय में हम रह २.. हैं उसमें आर्थिक भूमंडलीकरण का प्रभाव आम जीवन पर साफ दिख रहा है। भूमंडलीकरण के कारण जीविकोपार्जन के क्षेत्र में जो बदलाव आया है उसकी झलक शहर, कस्बा और गाँव सभी जगह साफ दिखाई पड़ रही है। वर्तमान दौर में 1991 के बाद सम्पूर्ण विश्व में सेवा क्षेत्र का विस्तार काफी तीव्र गति से हुआ है, जिससे जीविकोपार्जन के कई नये क्षेत्र खुले हैं। भूमंडलीकरण के कारण कई निजी ( प्राइवेट) कंपनी या बैंक (ICICI, रिलायंस) में लोग लाभकारी योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित हुए हैं जिससे बीमा क्षेत्र का विस्तार हुआ है। इससे जुड़कर गाँव या शहर के लाखों लोग रोजगार प्राप्त कर रहे पर्यटन स्थल के विकास के कारण भी रोजगार के नवीन अवसर उपलब्ध हुए हैं। जैसे- टूर एवं ट्रेवल एजेंसी, रेस्टोरेंट, रेस्ट हाउस, आवासीय होटल इत्यादि । निजी डाक सेवा ( कूरियर सेवा), कम्प्यूटर के कारण भी हजारों लोगों को रोजगार के नवीन अवसर उपलब्ध हुए हैं। इस प्रकार, हम यह कह सकते हैं कि आर्थिक भूमंडलीकरण ने हमारी आवश्यकताओं के दायरे को बढ़ाया है और उसी अनुरूप उसकी पूर्ति हेतु नई-नई सेवाओं का उदय हो रहा है जिनसे जुड़कर लाखों लोग अपनी जीविका चला रहे हैं। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया ने लोगों के जीवन स्तर को भी बढ़ाया है । इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि भूमंडलीकरण ने आम लोगों के जीवन स्तर में कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाया है

प्रश्न 2. 1929 के आर्थिक संकट के कारण और परिणामों को स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ आर्थिक संकट के कारण -1929 ई० की आर्थिक मंदी (संकट) का बुनियादी कारण स्वयं इस अर्थव्यवस्था के स्वरूप में ही समाहित था । प्रथम महायुद्ध के चार वर्षों में यूरोप को छोड़कर बाजार – आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार होता चला गया, उसके मुनाफे बढ़ते चले गये। दूसरी तरफ, अधिकांश लोग गरीबी और अभाव में पिसते रहे । नवीन तकनीकी प्रगति तथा बढ़ते हुए मुनाफे के कारण उत्पादन में जो भारी वृद्धि हुई उससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि जो कुछ उत्पादित होता था उसे खरीद सकने वाले लोग बहुत कम थे ।

कृषि उत्पादन एवं खाद्यान्नों के मूल्य में कमी – कृषि क्षेत्र में उत्पादन की वृद्धि तो हुई लेकिन उसे खरीद सकने वाले लोग बहुत कम थे । इससे कृषि उत्पादों की कीमतें गिरीं जिससे किसानों की आय काफी घट गयी । प्रसिद्ध अर्थशास्त्री काडलिफ ने अपनी पुस्तक ‘दि कॉमर्स ऑफ नेशन’ में लिखा है कि विश्व के सभी भागों में कृषि उत्पादन एवं खाद्यान्नों के मूल्य की विकृति 1929-32 के आर्थिक संकटों का प्रमुख कारण थी ।

यूरोपीय देशों के बीच संकट – 1920 के दशक के मध्य में बहुत सारे देशों ने अमेरिका से कर्जे लेकर अपनी युद्ध से तबाह हो चुकी अर्थव्यवस्था को नये सिरे से विकसित करने का प्रयास किया । जबतक स्थिति अच्छी थी तबतक अमेरिकी पूँजीपतियों ने यूरोप को कर्जे दिए लेकिन अमेरिका की घरेलू स्थिति में संकट के कुछ संकेत मिलने के साथ ही वे लोग कर्ज वापस माँगने लगे। इससे यूरोपीय देशों के बीच गंभीर संकट आ खड़ा हुआ। इस परिस्थिति में यूरोप के कई बैंक डूब गये, महत्त्वपूर्ण देशों का मुद्रा मूल्य गिर गया। इसमें और बड़ा संकट तब आ गया जब यूरोप ने अपने को यांत्रिक उत्पादन पर निर्भर कर लिया ।

आर्थिक संकट के प्रभाव – अमेरिका पर प्रभाव – इस आर्थिक मंदी का सबसे बुरा असर अमेरिका को ही झेलना पड़ा। मंदी के कारण बैंकों ने लोगों को कर्ज देना बंद कर दिया और दिए हुए कर्ज की वसूली तेज कर दी। किसान अपनी उपज को नहीं बेच पाने के कारण बर्बाद हो गये। बैंकों के कर्ज वापस नहीं चुका पाने से बैंकों ने लोगों के सामानों को कुर्क कर लिया। लोग सड़क पर आ गये । कारोबार के ठप पड़ने से बेरोजगारी बढ़ी, कर्ज की वसूली नहीं होने से बैंक बर्बाद हो गये ।

अन्य देशों पर प्रभाव – जर्मनी और ब्रिटेन इस आर्थिक मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए । फ्रांस अपने-आपको इस मंदी से इसलिए बचा पाया क्योंकि उसे जर्मनी से काफी मात्रा में युद्ध – हर्जाना की राशि प्राप्त हुई । जर्मनी में अराजकता फैल गयी जिसका लाभ उठाकर हिटलर ने अपने आपको सत्तासीन किया। 1929 के बाद ब्रिटेन के उत्पादन, निर्यात, रोजगार, आयात तथा जीवन-निर्वाह स्तर इन सबमें तेजी से गिरावट आई।

भारत पर प्रभाव – महामंदी ने भारतीय व्यापार को काफी प्रभावित किया । 1928 से 1934 के बीच देश का आयात-निर्यात घटकर लगभग आधा रह गया । कृषि उत्पादों की कीमत यहाँ काफी गिर गई । गेहूँ की कीमत में प्रतिशत गिरावट आई । कृषि दाम में कमी के बावजूद अंग्रेजी सरकार लगान की दर कम करने को तैयार नहीं थी, जिससे किसानों में असंतोष की भावना बढ़ी। इसी आर्थिक संकट ने भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रारंभ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

प्रश्न 3. आधुनिक युग के पूर्व भूमंडलीकरण के इतिहास का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ आधुनिक युग में हम भूमंडलीकरण का विकसित रूप देख रहे हैं किन्तु किसी-न-किसी रूप में यह प्राचीन काल में भी मौजूद था। उस समय इसके रूप भिन्न थे तथा इसकी व्यापकता भी कम थी । इतिहास हमें बताता है कि विश्व के विभिन्न भागों से शिक्षा प्राप्त करने तथा बौद्ध धर्म की जानकारी प्राप्त करने नालंदा तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय आते थे। व्यापारिक क्षेत्र में चीन का रेशम मार्ग, सिन्धुघाटी सभ्यता का व्यापारिक केन्द्र दिलमुन, मेलुहा, अलेक्जेंडिया आदि विश्व बाजार के रूप में प्रसिद्ध था। इसी प्रकार राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक सम्बन्ध भी विश्व के एक- दूसरे देशों के बीच था किन्तु यातायात तथा संचार साधन सीमित होने के कारण आज जैसा विकसित तथा विस्तृत नहीं था ।

प्रश्न 4. दो महायुद्धों के बीच और 1945 के बाद औपनिवेशिक देशों में होनेवाले राष्ट्रीय आन्दोलनों पर एक निबंध लिखें ।

उत्तर ⇒ औद्योगिक क्रांति के बाद से ही एशिया (भारत) तथा अफ्रीका में औपनिवेशिक साम्राज्य की स्थापना होनी शुरू हो गयी थी । उपनिवेशवाद ऐसी राजनीतिक-आर्थिक प्रणाली जो प्रत्यक्ष रूप से एशिया और अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका में यूरोपीय देशों द्वारा स्थापित किया गया था जिसका एकमात्र उद्देश्य इन देशों का आर्थिक शोषण करना था । विश्व बाजार ने एशिया और अफ्रीका में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद से एक नये युग को जन्म दिया, साथ-ही-साथ भारत जैसे उपनिवेशों का शोषण और तीव्र हुआ । व्यापार में वृद्धि और विश्व अर्थव्यवस्था के साथ निकटता ने औपनिवेशिक लोगों की आजीविका को छीन लिया । इस काल में भारत और अन्य औपनिवेशिक देशों में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार निर्णायक रूप से हुआ क्योंकि प्रथम महायुद्ध के बाद उन्हें आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा। दूसरे, उस समय शासक देशों ( साम्राज्यवादी देशों) द्वारा किया गया स्वराज का वायदा पूरा नहीं हुआ। साम्राज्यवादी देशों की आर्थिक नीतियों, खासकर उनकी शोषणकारी आर्थिक नीतियों से औपनिवेशिक देशों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ तथा वहाँ उस औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन को बड़ा बल मिला। इन्हीं राष्ट्रीय आन्दोलनों ने भारत सहित कई औपनिवेशिक देशों में स्वतंत्रता को दिलाया ।

 

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