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Matric History Eorope Me Rashtravad Subjective Questions 2024 [ इतिहास ] यूरोप में राष्ट्रवाद सब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th History Subjective Question Class 10th Subjective Question

Matric History Eorope Me Rashtravad Subjective Questions 2024 [ इतिहास ] यूरोप में राष्ट्रवाद सब्जेक्टिव क्वेश्चन

इतिहास ( History ) यूरोप में राष्ट्रवाद दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th History इतिहास का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th History Long Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th इतिहास 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th History Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric History Eorope Me Rashtravad Subjective Questions 2024 [ इतिहास ] यूरोप में राष्ट्रवाद सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. यूरोप में राष्ट्रवाद के प्रसार में नेपोलियन बोनापार्ट के योगदानों की विवेचना करें ।

उत्तर ⇒ यूरोप में राष्ट्रवाद फैलाने में नेपोलियन की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। उसने इटली और जर्मनी के राज्यों को भौगोलिक नाम की परिधि से बाहर कर उसे वास्तविक तथा राजनैतिक रूप-रेखा प्रदान की जिससे इनके एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ । नेपोलियन के प्रभुता तथा उत्कर्ष से अन्य राज्य अपनी-अपनी रक्षा का पूर्ण प्रबंध करने लगे इससे उनमें आपसी एकता और राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ। नेपोलियन के नेतृत्व में इटली के विभिन्न भागों से एकत्र सेना में परस्पर प्रेम एवं सहानुभूति की भावना जगी । इटली में नेपोलियन के संगठित शासन की प्रगति हुई। इटली विभिन्न राज्यों में बँटा एक राष्ट्र के रूप में महसूस किया गया । नेपोलियन ने जर्मनी के 300 से अधिक स्वतंत्र राज्यों के स्थान पर 39 राज्यों का संघ बनाकर जर्मनी की जनता में राष्ट्रवाद का भाव भरा। इस प्रकार नेपोलियन के कार्य यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में सहायक रहे ।

प्रश्न 2. इटली के एकीकरण में मेजिनी, काबूर और गैरीबाल्डी के योगदानों को बताएँ ?

उत्तर ⇒ मेजिनी_मेजिनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था । 1820 ई०
राष्ट्रवादियों ने एक गुप्त दल ‘कार्बोनरी’ की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य छापामार युद्ध द्वारा राजतंत्र को समाप्त कर गणराज्य की स्थापना करना था । कार्बोनरी के असफल होने पर मेजिनी ने अनुभव किया कि इटली का एकीकरण कार्बोनरी की योजना के अनुसार नहीं हो सकता है। 1831 में उसने ‘युवा इटली’ नामक संस्था की स्थापना की जिसने नवीन इटली के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । ‘युवा शक्ति’ में मेजिनी का अटूट विश्वास था । युवा इटली संस्था का मुख्य उद्देश्य था, इटली की एकता एवं स्वतंत्रता की प्राप्ति तथा स्वतंत्रता, समानता और जन-कल्याण के सिद्धांत पर आधारित राज्य की स्थापना करना । मेजिनी के दिमाग में संयुक्त इटली का स्वरूप जितना स्पष्ट और निश्चित था उतना किसी अन्य के दिमाग में नहीं था । मेजिनी सम्पूर्ण इटली का एकीकरण कर उसे गणराज्य बनाना चाहता था जबकि सार्डिनिया – पिडमाउंट का शासक चार्ल्स एल्बर्ट उसके नेतृत्व में सभी प्रांतों का विलय करना चाहता था । इसके अलावे पोप भी इटली को धर्म-राज्य बनाने का पक्षधर था । विचारों की टकराहट के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था । कालांतर में ऑस्ट्रिया ने इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किया जिसमें सार्डिनिया का शासक चार्ल्स एल्बर्ट पराजित हुआ। ऑस्ट्रिया ने इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया, मेजिनी की पुनः हार हुई और वह इटली से पलायन कर
गया ।
काउंट कानूर काबूर एक सफल कूटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था । वास्तव में काबूर के बिना मेजिनी का आदर्शवाद और गैरीबाल्डी की वीरता निरर्थक होती काबूर ने इन दोनों के विचारों में सामंजस्य स्थापित किया ।

काबूर यह जानता था कि –

(i) इटली का एकीकरण सार्डिनिया – पिडमौंट के नेतृत्व में ही संभव हो सकता है ।

(ii) एकीकरण के लिए आवश्यक है कि इटली के राज्यों को ऑस्ट्रिया से मुक्त कराया जाए ।

(iii) आस्ट्रिया से मुक्ति बिना विदेशी सहायता के संभव नहीं थी ।

अतः, ऑस्ट्रिया को पराजित करने के लिए काबूर ने फ्रांस से मित्रता कर ली । 1853-54 ई० के क्रीमिया युद्ध में फ्रांस को मदद किया जिसका प्रत्यक्ष लाभ युद्ध के बाद पेरिस के शांति सम्मेलन में मिला। इस सम्मेलन में फ्रांस और आस्ट्रिया के साथ पिडमाउंट को भी बुलाया गया। यह काबूर की सफल कूटनीति का परिणाम था इस सम्मेलन में काबूर में इटली में ऑस्ट्रिया के हस्तक्षेप को गैर-कानू घोषित किया काबूर ने इटली की समस्या को पूरे यूरोप की समस्या बना दिया ।

काबूर ने फ्रांस के शासक नेपोलियन-III से एक संधि की जिसमें यह तय किया गया कि

(i) फ्रांस ऑस्ट्रिया के खिलाफ पिडमाउंट को सैन्य समर्थन देगा तथा इटली के प्रांत नीस और सेवाय फ्रांस को प्राप्त होगा तथा

(ii) फ्रांस ने काबूर को यह भी आश्वासन दिलाया कि यदि उत्तर और मध्य इटली के राज्यों में जनमत संग्रह के आधार पर पिडमाउंट से मिलाया जाता है, तो फ्रांस इसका विरोध नहीं करेगा ।

काबूर के इस कार्य की बहुत आलोचना हुई, लेकिन यदि दो प्रांतों को खोकर भी उत्तरी और मध्य इटली का एकीकरण हो जाता तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी । 1859-60 में ऑस्ट्रिया और पिडमाउंट में सीमा संबंधी विवाद के कारण युद्ध शुरू हो गया। इटली ने फ्रांसीसी सेना के समर्थन से ऑस्ट्रिया को पराजित किया। ऑस्ट्रिया के अधीन लोम्बार्डी पर पिडमाउंट का अधिकार हो गया। नेपोलियन-III इटालियन राष्ट्रवाद से घबराने लगा, अतः वेनेशिया पर विजय प्राप्त करने के बाद नेपोलियन ने अपनी सेना वापस बुला ली। युद्ध से अलग होने के कारण नेपोलियन-III ने ऑस्ट्रिया और पिडमाउंट के बीच मध्यस्थता कराई जो विलाका की सौंध के नाम से जाना जाता है। इस संधि के अनुसार लोम्बार्डी पर पिंडमाउंट का तथा वेनेशिया पर ऑस्ट्रिया का अधिकार माना गया। लोम्बार्डी पर अधिकार हो जाने के बाद काबूर का उद्देश्य मध्य एवं उत्तरी इटली का एकीकरण करना था । मध्य एवं उत्तरी प्रांतों की जनता पिडमाउंट के साथ थी, इसलिए कावूर ने इन प्रांतों में जनमत संग्रह कराकर उसे पिडमाउंट के साथ मिला लिया। इस प्रकार 1860- 61 तक काबूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा मध्य प्रांतों (पारमा, मोडेना, टस्कनी, पियाकेंजा, बोलोग्ना आदि) का एकीकरण हो चुका था तथा इसका शासक

विक्टर इमैनुएल को माना गया। गैरीबाल्डी गैरीबाल्डी ने सशस्त्र क्रांति के द्वारा

दक्षिणी इटली के प्रांतों का एकीकरण कर वहाँ गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास किया। गैरीबाल्डी ने सिसली और नेपल्स पर आक्रमण किया। इन प्रांतों की अधिकांश जनता बूब राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी का समर्थक बन गई थी। गैरीबाल्डी ने यहाँ विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में सत्ता सँभाली। गैरीबाल्डी के दक्षिण अभियान का काबूर भी समर्थन किया ।
ने1862 ई. में गैरीबाल्डी ने रोम पर आक्रमण की योजना बनाई काबूर ने गैरीबाल्डी के इस अभियान का विरोध करते हुए रोम की रक्षा के लिए पिडमाउंट की सेना भेज दी। अभियान के बीच में ही गैरीबाल्डी की काबूर से भेंट हो गई तथा रोम अभियान वहीं खत्म हो गया। दक्षिणी इटली के जीते गए क्षेत्रों को गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया।

इस प्रकार, शेष जर्मनी का एकीकरण 1871 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय के

नेतृत्व में पूरा हुआ ।

प्रश्न 3. जर्मनी के एकीकरण में विस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ जर्मनी के एकीकरण में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका बिस्मार्क की रहीं उसने सुधार एवं कूटनीति के अंतर्गत जर्मनी के क्षेत्रों का प्रशाकरण अथवा प्रशा का एकीकरण करने का प्रयास किया। वह प्रशा का चांसलर था। वह मुख्य रूप से युद्ध के माध्यम से एकीकरण में विश्वास रखता था। इसके लिए उसने रक्त और लौह की नीति का पालन किया। इस नीति से तात्पर्य था कि सैन्य उपायों द्वारा ही जर्मनी का एकीकरण करना। उसने जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दी ।

प्रश्न 4. यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण है ।

उत्तर ⇒ यूनान में राष्ट्रीयता का उदय यूनान का अपना गौरवमय अतीत रहा है जिसके कारण उसे पाश्चात्य राष्ट्रों का मुख्य स्रोत माना जाता था। यूनानी सभ्यता की साहित्यिक प्रगति, विचार, दर्शन, कला, चिकित्सा, विज्ञान आदि क्षेत्र में उपलब्धियाँ पाश्चात्य देशों के लिए प्रेरणास्रोत थीं। पुनर्जागरण काल से ही पाश्चात्य देशों ने यूनान से प्रेरणा लेकर काफी विकास किया था, परन्तु इसके बावजूद यूनान अभी भी तुर्की साम्राज्य के अधीन था। फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित होकर यूनानियों में राष्ट्रवाद की भावना का विकास हुआ। धर्म, जाति और संस्कृति के आधार पर यूनानियों की पहचान एक थी, फलतः यूनान में तुर्की शासन से अपने को अलग करने के लिए कई आंदोलन चलाये जाने लगे। इसके लिए वहाँ रिया क (Hetairia Philike) नामक संस्था की स्थापना ओडेसा नामक स्थान पर की गई। यूनान की स्वतंत्रता का सम्मान समस्त यूरोप के नागरिक करते थे। इंगलैण्ड का महान कवि लॉर्ड बायरन यूनानियों की स्वतंत्रता के लिए यूनान में ही शहीद हो गया। इस घटना से संपूर्ण यूरोप की सहानुभूति यूनान के प्रति बढ़ चुकी थी। रूस जैसा साम्राज्यवादी राष्ट्र भी यूनान की स्वतंत्रता का समर्थक था। रूस तथा यूनान के लोग ग्रीक अर्थोडॉक्स चर्च को मानने वाले थे ।

प्रश्न 5 जुलाई 1830 की क्रांति का विवरण है ।

उत्तर ⇒ फ्रांस के शासक चार्ल्स – X एक निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासक था । इसके काल में इसका प्रधानमंत्री पॉलिग्नेक ने लुई 18वें द्वारा स्थापित समान नागरिक संहिता के स्थान पर शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग की स्थापना की तथा इस वर्ग को विशेषाधिकार प्रदान किया। उसके इस कदम से उदारवादियों एवं प्रतिनिधि सदन ने पोलिग्नेक का विरोध किया। चार्ल्स X ने 25 जुलाई, 1830 ई. को चार अध्यादेशों द्वारा उदारवादियों को दबाने का प्रयास किया। इस अध्यादेश के खिलाफ पेरिस में क्रांति की लहर दौड़ गई तथा फ्रांस में गृहयुद्ध आरम्भ हो गया। इसे ही जुलाई, 1830 की क्रांति कहते हैं। परिणामस्वरूप, चार्ल्स X फ्रांस की गद्दी को छोड़कर इंगलैण्ड पलायन कर गया तथा इसी के साथ फ्रांस में बूब वंश के शासन का अंत हो गया। जुलाई, 1830 की क्रांति के परिणामस्वरूप फ्रांस में बूब वंश के स्थान पर आर्लेयेंस वंश गद्दी पर आया। आर्लेयेंस वंश के शासक लुई फिलिप ने उदारवादियों, पत्रकारों तथा पेरिस की जनता के समर्थन से सत्ता प्राप्त की थी, अतः उसकी नीतियाँ उदारवादियों के समर्थन में संवैधानिक गणतंत्र की स्थापना करना थीं ।

 

 

 

 

 

 

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