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Matric Hindi Shiksha Aur Sanskrti Subjective Questions 2024 [ हिन्दी ] शिक्षा और संस्कृति सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024
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Matric Hindi Shiksha Aur Sanskrti Subjective Questions 2024 [ हिन्दी ] शिक्षा और संस्कृति सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

हिन्दी ( Hindi ) शिक्षा और संस्कृति लघु उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Hindi हिन्दी का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Hindi Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th हिन्दी 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Hindi Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Hindi Shiksha Aur Sanskrti Subjective Questions 2024 [ हिन्दी ] शिक्षा और संस्कृति सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

प्रश्न 1. शिक्षा का ध्येय गाँधीजी क्या मानते थे और क्यों ?

उत्तर ⇒ शिक्षा का ध्येय गाँधीजी चरित्र-निर्माण करना मानते थे। उनके विचार से शिक्षा के माध्यम से मनुष्य में साहस, बल, सदाचार जैसे गुणों का विकास होना चाहिए, क्योंकि चरित्र निर्माण होने से सामाजिक उत्थान स्वयं होगा। साहसी और सदाचारी व्यक्ति के हाथों में समाज के संगठन का काम आसानी से सौंपा जा सकता है।

प्रश्न 2. गांधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ अहिंसक प्रतिरोध को गाँधीजी बढ़िया शिक्षा कहते हैं। यह शिक्षा अक्षर – ज्ञान से पूर्व मिलना चाहिए ।

प्रश्न 3. गाँधीजी किस तरह के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं और क्यों ?

उत्तर ⇒ गाँधीजी भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं, क्योंकि भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य ने भारतीय जीवन को प्रभावित किया है और स्वयं भी भारतीय जीवन से प्रभावित हुई है । यह सामंजस्य कुदरती तौर पर स्वदेशी ढंग का होगा,
जिसमें प्रत्येक संस्कृति के लिए अपना उचित स्थान सुरक्षित होगा ।

प्रश्न 4 . गाँधीजी के अनुसार शिक्षा का जरूरी अंग क्या होना चाहिए ?

उत्तर ⇒ गाँधीजी के अनुसार शिक्षा का जरूरी अंग यह होना चाहिए कि बालक जीवन-संग्राम में प्रेम से घृणा को, सत्य से असत्य को और कष्ट सहन से हिंसा को आसानी के साथ जीतना सीखें ।

प्रश्न 5. इंद्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग सीखना क्यों जरूरी है ?

उत्तर ⇒ इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग उसकी बुद्धि के विकास का जल्द-से-जल्द और उत्तम तरीका है ।

प्रश्न 6. मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास कैसे संभव है ?

उत्तर ⇒ शिक्षा का प्रारंभ इस तरह किया जाए कि बच्चे उपयोगी दस्तकारी सीखें और जिस क्षण से वह अपनी तालीम शुरू करें उसी क्षण उन्हें उत्पादन का काम करने योग्य बना दिया जाए। इस प्रकार की शिक्षा-पद्धति में मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास संभव है ।

प्रश्न 7. गाँधीजी देशी भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद कार्य क्यों आवश्यक मानते थे ?

उत्तर ⇒ गाँधीजी का मानना था कि देशी भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से किसी भी भाषा के विचारों को तथा ज्ञान को आसानी से ग्रहण किया जा सकता है । अंग्रेजी या संसार के अन्य भाषाओं में जो ज्ञान भंडार पड़ा है, उसे अपनी ही मातृभाषा के द्वारा प्राप्त करना सरल है ।
सभी भाषाओं से ग्राह्य ज्ञान के लिए अनुवाद की कला परमावश्यक है । अतः इसकी आवश्यकता बड़े पैमाने पर है ।

प्रश्न 8. दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ क्यों जरूरी है ?

उत्तर ⇒ दूसरी संस्कृतियों की समझ और कद्र स्वयं अपनी संस्कृति की कद्र होने और उसे हजम कर लेने के बाद होनी चाहिए, पहले हरगिज नहीं। कोई संस्कृति इतने रत्न – भण्डार से भरी हुई नहीं है जितनी हमारी अपनी संस्कृति है । सर्वप्रथम हमें अपनी संस्कृति को जानकर उसमें निहित बातों को अपनाना होगा ।
इससे चरित्र-निर्माण होगा जो संसार की अन्य संस्कृति से कुछ सीखने की क्षमता प्रदान करेगा ।

प्रश्न 9. अपनी संस्कृति और मातृभाषा की बुनियाद पर दूसरी संस्कृतियों और भाषाओं से सम्पर्क क्यों बनाया जाना चाहिए ? गाँधीजी की राय स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर ⇒ गाँधीजी के विचारानुसार अपनी मातृभाषा को माध्यम बनाकर हम अत्यधिक विकास कर सकते हैं। अपनी संस्कृति के माध्यम से जीवन में तेज गति से उत्थान किया जा सकता है। लेकिन हम कूपमंडूक नहीं बनें। दूसरी संस्कृति की अच्छी बातों को अपनाने में परहेज नहीं किया जाय ।
बल्कि अपनी संस्कृति एवं भाषा को आधार बनाकर अन्य भाषा एवं संस्कृति को भी अपने जीवन से युक्त करें ।

प्रश्न 10. गाँधीजी कताई और धुनाई जैसे ग्रामोद्योगों द्वारा सामाजिक क्रांति कैसे संभव मानते थे ?

उत्तर ⇒ कताई और धुनाई जैसे ग्रामोद्योगों के संबंध में गाँधीजी की कल्पना थी कि यह एक ऐसी शांत सामाजिक क्रांति की अग्रदूत बने, जिसमें अत्यंत दूरगामी परिणाम भरे हुए हैं। इससे नगर और ग्राम के संबंधों का एक स्वास्थ्यप्रद और नैतिक आधार प्राप्त होगा और समाज की मौजूदा आरक्षित अवस्था और
वर्गों के परस्पर विषाक्त संबंधों की कुछ बड़ी से बड़ी बुराइयों को दूर करने में बहुत सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण जन-जीवन विकसित होगा और गरीब-अमीर का अप्राकृतिक भेद नहीं रहेगा ।

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हिन्दी ( Hindi ) शिक्षा और संस्कृति दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:-

 

प्रश्न 1. शिक्षा और संस्कृति के संबंध में महात्मा गाँधी के विचारों को स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर ⇒ गाँधीजी के विचार से अहिंसक प्रतिरोध सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा है । वर्णमाला सीखने के पहले बच्चे को आत्मा, सत्य, प्रेम और आत्मा की छिपी शक्तियों का पता होना चाहिए। यह बताया जाना चाहिए कि सत्य से असत्य को और कष्ट सहन से हिंसा को कैसे जीता जा सकता है। बुद्धि की सच्ची शिक्षा शरीर की स्थूल इन्द्रियों अर्थात् हाथ, पैर आदि के ठीक-ठीक प्रयोग से ही हो सकती है। इससे बुद्धि का विकास जल्दी-जल्दी होगा।
प्रारम्भिक शिक्षा में सफाई और तन्दुरूस्त रहने के ढंग बताये जाने चाहिए । प्राथमिक शिक्षा में कताई – धुनाई को शामिल करना चाहिए।
ताकि नगर और गाँव एक दूसरे से जुड़ें। इससे गाँवों का ह्रास रूकेगा। शिक्षा का ध्येय चरित्र निर्माण होना चाहिए। दरअसल, लोगों में साहस, बल, सदाचार और बड़े उद्येश्य के लिए आत्मोत्सर्ग की शक्ति विकसित की जानी चाहिए।संसार की सर्वश्रेष्ठ कृतियों का अनुवाद देश की भाषाओं में होना चाहिए ताकि अपनी भाषा में टॉल्सटाय, शेक्सपियर, मिल्टन, रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कृतियों का आनन्द उठा सकें। हमें अपनी संस्कृति के बारे में पहले जानना चाहिए। हमें दूसरी संस्कृतियों के बारे में भी जानना चाहिए,उन्हें तुच्छ समझना गलती होगी। वह संस्कृति जिन्दा नहीं रह सकती जो दूसरों का बहिष्कार करने की कोशिश करती है। भारतीय संस्कृति उन भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य का प्रतीक है जिनके पाँव भारत में जम गये हैं, जिनका भारतीय जीवन पर प्रभाव पड़ा है और वे स्वयं भारतीय जीवन से प्रभावित हुई हैं ।

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