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Matric Hindi Bharat Se Ham Kya Sikhen Subjective Questions 2024 [ हिन्दी ] भारत से हम क्या सीखें सब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Hindi Subjective Question Class 10th Subjective Question

Matric Hindi Bharat Se Ham Kya Sikhen Subjective Questions 2024 [ हिन्दी ] भारत से हम क्या सीखें सब्जेक्टिव क्वेश्चन

हिन्दी ( Hindi ) भारत से हम क्या सीखें लघु उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Hindi हिन्दी का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Hindi Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th हिन्दी 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Hindi Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Hindi Bharat Se Ham Kya Sikhen Subjective Questions 2024 [ हिन्दी ] भारत से हम क्या सीखें सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों ?

उत्तर ⇒ लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन भारतीय ग्रामीण जीवन में हो सकते हैं। भारतीय ग्राम्य संस्कृति में सच्चा भारत निहित है। क्योंकि सच्चाई, प्रेम, करुणा, सहयोग की भावना ग्रामीणों में कूट-कूट कर भरा होता है ।

प्रश्न 2. धर्मों की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है ?

उत्तर ⇒ भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक विकास का केन्द्र रहा है । यहाँ धर्म के वास्तविक उद्भव, उसके प्राकृतिक विकास तथा उसके अपरिहार्य क्षीयमाण रूप का प्रत्यक्ष परिचय मिलता है । भारत वैदिक धर्म की भूमि है, बौद्ध धर्म की यह जन्मभूमि है, पारसियों के जरथुस्त्र धर्म की यह शरण स्थली है।
आज भी यहाँ नित्य नये मत-मतान्तर प्रकट एवं विकसित होते रहते हैं । इस तरह से भारत धार्मिक क्षेत्र में विश्व को आलोकित करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण देश है ।

प्रश्न 3. लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और क्यों ?

उत्तर ⇒ लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स द्वारा 172 दारिस नामक सोने के सिक्के ईस्ट इंडिया कम्पनी के निदेशक मंडल की सेवा में भेजे जाने पर कम्पनी के मालिक द्वारा उसका महत्त्व नहीं समझना एवं मुद्राओं को गला देना दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना कहा है ‘
क्योंकि, वह एक धरोहर था, अन्वेषण का विषय था ।

प्रश्न 4. लेखक ने नया सिकन्दर किसे कहा है ? ऐसा कहना क्या उचित है ? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर ⇒ लेखक ने नया सिकन्दर भारत को समझने, जानने एवं सम्पूर्ण लाभ प्राप्त करने हेतु भारत आनेवाले नवागंतुक अन्वेषकों, पर्यटकों एवं अधिकारियों कों कहा है। उसी प्रकार आज भी भारतीयता को निकट से जानने के नवीन स्वप्नदर्शी को आज का सिकन्दर कहना अतिशयोक्ति नहीं है, यह उचित है ।

प्रश्न 5. भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है ? स्पष्ट करें !

उत्तर ⇒भारत अतीत और भविष्य को जोड़ता है। यहाँ मानवीय जीवन का प्राचीनतम ज्ञान विद्यमान है । यहाँ की भूमि प्राचीन इतिहास से जुड़ी रही है । यहाँ की संस्कृत भाषा के द्वारा विश्व को चिंतन की ऐसी धारा में अवगाहन का अवसर मिलता है जो अभी तक अज्ञात थी ।
अतः यह बीते हुए काल और आने वाले समय के लिए सेतु के रूप में मान्य है

प्रश्न 6. लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?

उत्तर ⇒ लेखक किसी विषय के भूल उद्गम स्रोत तक पहुँचने को उसका वास्तविक इतिहास मानता है । क्योंकि, वहीं से उस विषय की मौलिकता, उसका विकास तथा उसकी शाखाओं, प्रशाखाओं तथा जीवन-मूल्य ज्ञात होता है तथा उसका अध्ययन फलदायी होता है ।

प्रश्न 7. भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण लेखक ने क्या दिखाये हैं ?

उत्तर ⇒ लेखक के अनुसार सोलोमन के समय में ही भारत, सीरिया और फिलिस्तीन के मध्य आवागमन के साधन सुलभ हो चुके थे। साथ ही इन देशों के व्यापारिक अध्ययन के आधार पर प्रमाणित होता है कि हाथी – दाँत, बन्दर, मोर और चन्दन आदि जिन वस्तुओं के ओफिर से निर्यात की बात बाइबिल में कही गयी है, वे वस्तुएँ भारत के सिवा किसी अन्य देश से नहीं लाई जा सकती ।

प्रश्न 8. समस्त भूमंडल में सर्वविद सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से- परिपूर्ण देश भारत है । लेखक ने ऐसा क्यों कहा है ?

उत्तर ⇒ भारत ऐसा देश है, जहाँ मानव मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सर्वप्रथम साक्षात्कार हुआ है । यहाँ जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं के ऐसे समाधान ढूँढ़ निकाले गये हैं जो विश्व के दार्शनिकों के लिए चिंतन का विषय है यहाँ जीवन को सुखद बनाने के लिए उपयुक्त ज्ञान एवं वातावरण का सान्निध्य मिलता है
जो भूमंडल में अन्यत्र नहीं है ।

प्रश्न 9. लेखक ने नीति कथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है ?.

उत्तर ⇒ लेखक ने बताया है कि नीति कथाओं के अध्ययन – क्षेत्र में नवजीवन का संचार हुआ है। समय-समय पर विविध साधनों और मार्गों द्वारा अनेक नीति कथाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित रही हैं ।

प्रश्न 10. भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों ?

उत्तर ⇒भारत को पहचान सकनेवाली दृष्टि की आवश्यकता यूरोपियन लोगों के लिए वांछनीय है, क्योंकि भारत ऐसी अनेक समस्याओं से भरपूर है जिनका समाधान होने पर यूरोपियन लोगों की अनेक समस्याओं का निदान संभव है ।

प्रश्न 11. लेखन ने किन विशेष क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है ?

उत्तर ⇒ लेखक ने बताया है कि जिन्हें भू-विज्ञान में, वनस्पति जगत में, जीवों के अध्ययन में, पुरातत्त्व के ज्ञान में एवं नीतिशास्त्र जैसे विषयों में विशेष अभिरुचि है उन्हें भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक है ।

प्रश्न 12. मैक्समूलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएँ और महत्त्व बतलाये हैं ?

उत्तर ⇒ मैक्समूलर के अनुसार संस्कृत की पहली विशेषता इसकी प्राचीनता है। इसके वर्तमान रूप में भी अत्यन्त प्राचीन तत्त्व भली-भाँति सुरक्षित है । संस्कृत की मदद से ग्रीक- लैटिन, गॉथिक और एंग्लो-सैक्सन जैसी ट्यूटानिक भाषाओं, केल्टिक तथा स्लाव भाषाओं में विद्यमान समानता
की समस्या को आसानी से हल किया जा सका ।

प्रश्न 13. भारत की ग्राम पंचायतों को किस अर्थ में और किनके लिए लेखक ने महत्त्वपूर्ण बतलाया है ? स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ प्राचीन स्थानीय शासन प्रणाली या पंचायत – प्रथा को समझने-समझाने का बहुत बड़ा क्षेत्र भारतीय ग्राम पंचायत में विद्यमान है। जिन लोगों को अत्यंत सरल राजनैतिक इकाइयों के निर्माण और विकास से सम्बद्ध प्राचीनयुगीन कानून के पुरातन रूपों के विषय में हुए अनुसंधान की महत्ता को समझने की क्षमता प्राप्त करना है, उनके लिए भारत की ग्राम पंचायतों को लेखक ने महत्त्वपूर्ण बताया है ।

प्रश्न 14. संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को प्रमुख लाभ क्या-क्या हुए ?

उत्तर ⇒ संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से मानव जाति के बारे में पाश्चात्य जगत के विचार व्यापक और उदार बने हैं। लाखों-करोड़ों अजनबियों
तथा बर्बर समझे जानेवाले लोगों को भी अपने परिवार के सदस्य की भाँति गले लगाने की संस्कृति का विकास हुआ। इसके अध्ययन ने मानव जाति के सम्पूर्ण इतिहास को एक वास्तविक रूप में प्रकट कर दिखाया, जो पहले नहीं हो पाया था।
इसके अध्ययन से पाश्चात्य जगत में विश्व के प्राचीनतम अवस्था का ज्ञान प्राप्त किया जा सका ।

हिन्दी ( Hindi ) भारत से हम क्या सीखें  दीर्घ  उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:-

 

प्रश्न 1. लेखक ने नीति कथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है ?

उत्तर ⇒ लेखक ने बताया है कि नीति कथाओं के अध्ययन – क्षेत्र में नवजीवन का संचार हुआ है । समय-समय पर विविध साधनों और मार्गों द्वारा अनेक नीति कथाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित रही हैं । भारत में प्रचलित कहावतों और दन्तकथाओं का प्रमुख स्रोत बौद्ध धर्म को माना जाने लगा है,किन्तु इसमें निहित समस्याएँ समाधान की प्रतीक्षा में हैं । लेखक ने एक उदाहरण देकर बताया है कि ‘शेर की खाल में गदहा’ वाली कहावत सबसे पहले यूनानी दार्शनिक प्लेटो के कटिलस में मिलती है । इसी तरह संस्कृत की एक कथा यूनान के एक नीति कथा से मिलती है
अर्थात् भारतीय नीति कथाएँ यूनान से कैसे जुड़ी यह एक शोध का विषय है ।

प्रश्न 2. ‘भारत से हम क्या सीखें’ पाठ का सारांश लिखिए ।

उत्तर ⇒विशाल भारत सम्पत्ति और प्राकृतिक सुषमा की खान है । यहाँ नदियाँ हैं, सुरम्य घाटियाँ हैं । मानव मस्तिष्क की उत्कृष्टम उपलब्धियों का साक्षात्कार भी इसी देश ने किया है । प्लेटो और काण्ट से भी पहले यहाँ के लोगों ने अनेक समस्याओं के समाधान ढूँढ़ लिए थे । दरअसल, सच्चा भारत शहरों में नहीं, गाँवों में बसता है । यहाँ सम्प्रति जो समस्याएँ हैं, वे 19वीं सदी के यूरोप की ही समस्याएँ हैं । अतः इनका समाधान होने से यूरोप भी लाभान्वित होगा। ज्ञान – विज्ञान की प्रचुर सामग्री यहाँ मौजूद है, चाहे वह भू – विज्ञान हो, वनस्पति विज्ञान हो, जन्तु विज्ञान या नृवंश विद्या । कनिंघम के अनुसार पुरातत्त्व की जानकारी के लिए तो यहाँ सामग्री – ही – सामग्री है। यहाँ की नीति – कथाएँ अनेक देशों में थोड़े परिवर्तन के साथ देखने को मिल जाएगी । यहाँ की संस्कृत भाषा अनेक भाषाओं की अग्रजा है । संस्कृत के अनेक शब्द ग्रीक और अन्य भाषाओं में कुछ परिवर्तन के साथ मिलते हैं, जैसे – संस्कृत की ‘अग्नि’ लैटिन की ‘इग्निस’ है। संस्कृत का ‘मूष’, ग्रीक में ‘मूस’ लैटिन और जर्मन ‘मुस’ है । इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि हिन्दू, ग्रीक और यूनानी जैसी जातियाँ कालान्तर में अलग – अलग जा बसीं । संस्कृत के अध्ययन से बड़ी सहजता से मानव मन की अतल गहराइयों में उतरा जा सकता हैऔर उदारता तथा सहानूभूति जैसे भावों की प्रचुरता यहाँ देखी जा सकती है । भारत वैदिक या ब्राह्मण धर्म की भूमि के साथ, बौद्ध और जैन धर्म की जन्म-स्थली और पारसियों के जरथ्रुष्ट्र धर्म की शरणस्थली भी है । सुदूर प्रशासन की दृष्टि से यहाँ लोकतंत्र का आदि रूप ग्राम पंचायत मिलता है।दरअसल, भारत आज उस दहलीज पर खड़ा है जिसके पीछे समृद्ध अतीत और भविष्य की अमित संभावनाएँ हैं। अतः यहाँ बहुत कुछ जाना पाया और सीखा जा सकता है ।

 

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