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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
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Matric Geography Krishi vvi Subjective Questions 2024 [ भूगोल ] कृषि सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

भूगोल ( Geography) कृषि  दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Geography भूगोल का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Geography Long Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th भूगोल 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Geography Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Geography Krishi vvi Subjective Questions 2024 [ भूगोल ] कृषि सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

प्रश्न 1. भूखमरी की समस्या के निवारण के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई खाद्य सुरक्षा की विवेचना कीजिए ।

उत्तर⇒ स्वतंत्रता के बाद से आज तक सभी के लिए खाद्य सुरक्षा एक राष्ट्रीय उद्देश्य बन चुकी है। पहले खाद्य सुरक्षा से तात्पर्य भरपेट रोटी उपलब्ध होने से था
वही आज खाद्य सुरक्षा से आशय भौतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थितियों की पहुँच के अलावा संतुलित आहार, साफ पीने का पानी, स्वच्छ वातावरण एवं प्राथमिक स्वास्थ्य रखरखाव जा पहुँचा है ।
भारत में हमेशा खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता दिखाई गई और यही वजह कि वर्ष 1960 में श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में हरित क्रांति की शुरूआत हुई। जिस अनुपात से जनसंख्या बढी उसके हिसाब से अत्र भी उपजाया, लेकिन भुखमरी खत्म नहीं हुई। हरित क्रांति के बाद सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली,
अंत्योदय अन्न योजना, अन्नपूर्णा योजना, डीजल सब्सिडी योजना आदि योजनाएँ लागू की। इसके बदले ‘काम के बदले अनाज’ योजना के माध्यम से गरीबों को राहत देने का प्रयास किया गया। भारतीय संविधान की धारा-47 में यह प्रावधान है कि सरकार लोगों के जीवन-स्तर उठाने,
आहारों की पौष्टिकता में वृद्धि करने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य में सुधार लाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर करेगी एवं खाद्य सुरक्षा में पौष्टिक व कैलोरीयुक्त खाद्यान्नों की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराएगी ।
भारत सरकार द्वारा देश में खाद्यान्न के वितरण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी वर्ष 1965 से ही भारत खाद्य निगम को सौंपी गई है। यह निगम सामग्री को क्रय करने, भंडारण, वितरण एवं बिक्री की व्यवस्था देखता है। इस निगम के माध्यम से अप्रैल 2011 से पिछड़े जिलों और ब्लॉक में रहने वाले गरीबों, अनुसूचित जाति ।
जनजाति परिवारों को हर महीने 3 रु./किलो की दर से चावल और 2 रु./किलो की दर से गेहूँ उपलब्ध कराया जा रहा है ।

प्रश्न 2. भारतीय कृषि की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

उत्तर⇒ भारतीय कृषि अन्य देशों में पाई जाने वाली कृषि से अनेक अर्थों में भिन्न है ।
भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताएँ या महत्त्व निम्नलिखित हैं-

(i) भारतीय कृषि विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई है। देश का कुल क्षेत्रफल का लगभग 47% भाग कृषि के अंतर्गत है । इस दृष्टि से भारत का विश्व का अग्रणी कृषि प्रधान देश है ।

(ii) कृषि प्रधान देश होने के कारण भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में नींव है। देश की लगभग 63% जनसंख्या कृषि से रोजगार प्राप्त करती है ।

(iii) देश के विभिन्न भागों में उच्च कोटि की सम्पन्न मृदा उपलब्ध है। यहाँ विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती संभव हो पाती है ।

(iv) भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु विविधता पाई जाती है। भारत में अनेक प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाता है ।

(v) भारत में कृषि प्राथमिक क्रिया है यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है ।

प्रश्न 3. गेहूँ उत्पादन हेतु मुख्य भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए भारत के गेहूँ उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें ।

उत्तर⇒ भारत में चावल के बाद गेहूँ मुख्य खाद्यान्न है। गेहूँ शीतोष्ण कटिबंधीय फसल है जिसकी खेती और उत्पादन के लिए निम्नांकित भौगोलिक दशाओं की आवश्यकता होती है। कम-से-कम तीन चार महीनों तक हिमांक से ऊपर तापमान, बुआई के समय औसतन 10°C से 15°C तापमान आदर्श माना गया है,
पर पकते समय 21°C से 26°C तापमान रहना आवश्यक है। वर्षा-गेहूँ की खेती के आरंभिक काल में मामूली वर्षा लाभदायक होती है। शीतकालीन हल्की वर्षा आदर्श मानी गयी है। फसल की वृद्धि के लिए 50 cm सं 100 cm वर्षा पर्याप्त होती है। गेहूँ की खेती में पाला पड़ना या ओले गिरना नुकसानदेह होता है
अतः इनसे बचाव करना आवश्यक है । भारत के गेहूँ उत्पादक क्षेत्र- भारत में गेहूँ की खेती मुख्यतः सतलज के नंदान ऊपरी और मध्य गंगा के मैदान तथा मध्यवर्ती भारत में होती है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं- पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश,
राजस्थान और बिहार पंजाब अब देश का सर्वाधिक गेहूँ उत्पादक राज्य है। उत्तरप्रदेश में गंगा दोआब, गंगा-यमुना दोआब और घाघरा के पूरब का क्षेत्र गेहूँ की खेती के लिए विशेष प्रसिद्ध है ।

प्रश्न 4. चाय उत्पादन के प्रमुख भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत के चाय उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख करें ।

उत्तर⇒ चाय रोपन कृषि की फसल है। इसमें एक बार बागान लगाने के बाद कई वर्षों तक इससे उत्पादन लिया जाता है ।
चाय के उत्पादन के लिए आवश्यक उपयुक्त दशाएँ इस प्रकार हैं-

(i) उच्च तापमान (24°C से 30°C के बीच ) यह छायापसंद पौधा है। बीच-बीच में पेड़ लगाना आवश्यक होता है ।

(ii) नित्य दिन अधिक वर्षा (वर्ष भर में 200 cm होनी चाहिए ) ।

(iii) चाय के पौधों की जड़ों में पानी का जमना हानिकारक होता है इसलिए ढालू भूमि आवश्यक होती है ताकि पानी जड़ों में जमने न पाये ।

(iv) गहरी दोमट मिट्टी जिसमें लोहांश, फास्फोरस, पोटाश हो।

(v) सस्ते श्रमिक और कुशल प्रबंधन ।

भारत में उत्तर-पूर्वी राज्य, नीलगिरि पर्वतीय क्षेत्र, उत्तर-पश्चिमी हिमालय क्षेत्र तथा दक्षिण भार के केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि चाय उत्पादक क्षेत्र हैं ।

प्रश्न 5. चावल के उत्पादन के लिए मुख्य भौगोलिक दशाओं का वर्णन करते हुए भारत के चावल उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख करें ।

उत्तर⇒ चावल के उत्पादन की उपयुक्त दशाएँ—धान से चावल बनाया जाता है। धान मानसूनी जलवायु का फसल है जिसके लिए निम्नांकित दशाएँ उपयुक्त होती हैं-

(i) उच्च तापमान (20°C से 30°C के बीच ) ।

(ii) पर्याप्त वर्षा (200 cm वार्षिक वर्षा ) कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उत्तम सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक होती है

(iii) समतल भूमि ताकि खेतों में पानी जमा रह सके ।

(iv) जलोढ़ दोमट मिट्टी धान की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है ।

(v) पर्याप्त सस्ते श्रमिक

प्रमुख उत्पादन क्षेत्र धान की खेती मुख्यतः गंगा, ब्रह्मपुत्र, के मैदान में और डेल्टाई तथा तटीय भागों में की जाती है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, पंजाब, बिहार, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, उड़ीसा, असम, हरियाणा और केरल | इसकी खेती में लगी सर्वाधिक भूमि पश्चिम बंगाल और बिहार में है | परंतु, सिंचाई और खाद के बल पर पंजाब धान का प्रति हेक्टेयर उत्पादन सबसे अधिक करता है। प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन में हरियाणा का दूसरा स्थान है।
दक्षिण भारत में इसकी खेती में सिंचाई का सहारा लेना पड़ता है। कावेरी, कृष्णा, गोदावरी और महानदी के डेल्टाओं में नहरों का जाल बिछा है जिससे इस क्षेत्र में कहीं दो फसल और कहीं तीन फसल तक धान की खेती की जाती है। प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक है। इसलिए यहाँ से दूसरे राज्यों को चावल भेजा जाता है ।

प्रश्न 6. भारत में कृषि के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें ।

उत्तर⇒कृषि आदिकाल से किया जानेवाला आर्थिक क्रियाकलाप है । भारत में पायी जानेवाली विविध भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिवेश ने कृषि तंत्र को समय के अनुरूप प्रभावित किया 1
भारतीय कृषि के प्रकार निम्नलिखित हैं-

(i) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि — यह अति प्राचीन काल से की जानेवाली कृषि का तरीका है । इसमें परंपरागत तरीके से भूमि पर खेती की जाती है । खेती के औजार भी काफी परंपरागत होते हैं जैसे लकड़ी का हल, कुदाल, खुरपी । इसमें जमीन की जुताई गहराई से नहीं हो पाती है ।
कृषि में आधुनिक तकनीक के निवेश का अभाव रहता है । इसलिए उपज कम होती है और भूमि की उत्पादकता कम होने के कारण फसल का प्रति इकाई उत्पादन भी कम होता है। इसमें फसल उत्पादन जीविका निर्वाह के लिए होता है। देश के विभिन्न भागों में इस प्रकार की कृषि को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है ।

(ii) गहन जीविका कृषि – यह कृषि पद्धति वहाँ को अपनायी जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का प्रभाव अधिक है। इसमें श्रम की आवश्यकता होती है। परम्परागत कृषि कौशल का भी इसमें भरपूर उपयोग किया जाता है। भूमि की उर्वरता को बनाए रखने के लिए परम्परागत ज्ञान,
बीजों के रख-रखाव एवं मौसम संबंधी अनेक ज्ञान का इसमें उपयोग किया जाता है। जनसंख्या बढ़ने से जोतों का आकार काफी छोटा हो गया है । वैकल्पिक रोजगार के अभाव में भी जरूरत से ज्यादा जनसंख्या इस प्रकार की कृषि में संलग्न है ।

(iii) व्यापारिक कृषि — इस प्रकार की कृषि में अधिक पूँजी, आधुनिक कृषि तकनीक का निवेश किया जाता है। अतः, किसान अपनी लगाई गई पूँजी से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। आधुनिक कृषि तकनीक से
अधिक पैदा देनेवाले परिष्कृत बीज, रासायनिक खाद, सिंचाई, रासायनिक कीटनाशक आदि का उपयोग किया जाता है। इस कृषि पद्धति को भारत में हरित क्रांति के फलस्वरूप व्यापक रूप से पंजाब एवं हरियाणा में अपनाया गया । भारत में चाय, काफी, रबड़, गन्ना, केला आदि फसलें मुख्यतः व्यापार के लिए उपजाई जाती है । अतः, इसके लिए परिवहन यातायात के साधन एवं संचार का विकसित होना परम आवश्यक है ।

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