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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
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Matric Geography Bihar Krshi Avam Van Sansadhan Subjective Questions 2024 [ भूगोल ] बिहार कृषि एवं वन संसाधन सब्जेक्टिव क्वेश्चन

भूगोल ( Geography) बिहार कृषि एवं वन संसाधन दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Geography भूगोल का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Geography Long Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th भूगोल 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Geography Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Geography Bihar Krshi Avam Van Sansadhan Subjective Questions 2024 [ भूगोल ] बिहार कृषि एवं वन संसाधन सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. बिहार की कृषि की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

उत्तर ⇒ बिहार की 90% आबादी गाँवों में रहती है और 80% जनसंख्या कृषि पर आश्रित है। इसके बावजूद यहाँ का प्रति हेक्टेयर उत्पादन अन्य राज्यों की अपेक्षा कम है । यहाँ राज्य कृषि संबंधी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है ।

(i) मिट्टी कटाय एवं गुणवता का ह्रास भारी वर्षा और बाढ़ के कारण मिट्टी का कटाव होता है एवं लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से भी मिट्टी का हास होता है

(ii) घटिया बीजों का उपयोग – उच्च कोटि के बीज का उपयोग नहीं होने के कारण प्रति एकड़ उपज अन्य राज्यों की अपेक्षा उत्पादन कम होती है ।

(iii) खेतों का आकार छोटा होना – खेतों के छोटा होने से वैज्ञानिक पद्धति से खेती संभव नहीं हो पाती ।

(iv) सिंचाई की समस्या – कृषि मानसून आधारित है। कृषि भूमि की मात्र 46% पर ही सिंचाई उपलब्ध है ।

(v) बाढ़ – प्रत्येक साल नदियों के मार्ग बदलने से नदी मार्ग से बाहर निकली हुई भूमि पर आधिपत्य को लेकर बाहुबलियों एवं नक्सलियों का आतंक दियरा प्रदेश की एक समस्या बन गयी है ।
इन सभी समस्याओं के अलावे पूँजी का अभाव, पशुओं की दयनीय स्थिति, किसानों में रूढ़िवादिता जनसंख्या आर्थिक, सामाजिक समस्याएँ कृषि विकास के बाधक है ।

प्रश्न 2. सोन अथवा कोसी नदी घाटी परियोजना के महत्त्व पर प्रकाश डालिए ।
अथवा, बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाओं का नाम बताएँ एवं सोन अथवा कोसी परियोजना के महत्त्व पर प्रकाश डालें ।

उत्तर ⇒ बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं-

(i) सोन नदी घाटी परियोजना।

(ii) गंडक नदी घाटी परियोजना ।

(iii) कोसी नदी घाटी परियोजना ।

सोन नदी घाटी परियोजना – यह परियोजना बिहार की सबसे पुरानी और पहली नदी घाटी परियोजना है, इसका विकास अंग्रेज सरकार ने 1874 में सिंचाई के लिए किया था । इसने डेहरी के पास से पूरब एवं पश्चिम की ओर नहरें निकाली गईं । इसकी कुल लम्बाई 130 कि० मी० थी ।
इस नहर से पटना एवं गया जिले कई नहरों की कई शाखाएँ और उपशाखाएँ विकसित की गई जिससे औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, रोहतास जिलों की भूमि का सिंचाई की जाती है और अब कुल 4.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है ।
इस परियोजना से सूखा प्रभावित क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्राप्त होने से बिहार का दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र का प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी बढ़ गया और चावल की अधिक खेती होने लगी है इस. कारण से इस क्षेत्र को बिहार का ‘चावल का कटोरा’ (Rice Bowl of Bihar) कहते हैं ।
इस बहुद्देशीय परियोजना के अंतर्गत जल-विद्युत उत्पादन के लिए शक्ति-गृहों की स्थापना की गई है, पश्चिमी नहर पर डेहरी के पास 6.6 मेगावाट उत्पादन क्षमता का शक्ति गृह स्थापित है, इसी प्रकार पूर्वी नहर शाखा पर बारूण नामक स्थान पर 3.3 मेगावाट क्षमता का शक्ति गृह निर्माण किया गया है ।
इस परियोजना के नवीनीकरण पर विचार किया जा रहा है। सोन नदी पर इन्द्रपुरी के पास एक बाँध के निर्माण का प्रस्ताव भी है और 450 मेगावाट पन बिजली उत्पादन का लक्ष्य है ‘कोसी नदी घाटी परियोजना – इस परियोजना की कल्पना 1896 ई० में किया गया था । किन्तु, वास्तविक रूप से 1955 ई० से कार्य प्रारम्भ हुआ ।
यह परियोजना नेपाल सरकार, भारत सरकार तथा बिहार राज्य की सामूहिक प्रयास का फल है। इसका मुख्य उद्देश्य नदी के बदलते मार्ग को रोकना है उपजाऊ भूमि की बर्बादी पर नियंत्रण, भयानक बाढ़ से क्षति पर रोक, जल से सिंचाई का विकास, जल-विद्युत उत्पादन, मत्स्य पालन,
नौका रोहण एवं पर्यावरण पर नियंत्रण आदि है । इस परियोजना को कई चरणों में पूरा किया गया है पहले चरण में मार्ग परिवर्तन पर नियंत्रण, बिहार, नेपाल सीमा पर स्थित हनुमान नगर स्थान पर बैराज का निर्माण, बाढ़ नियंत्रण के लिए दोनों ओर तटबंध का निर्माण, पूर्वी एवं पश्चिमी कोसी नहर एवं उसकी
शाखाओं का निर्माण सम्मिलित किया गया । इसी क्रम में नदी के दोनों ओर 20 कि० मी० लम्बे बाढ़ नियंत्रण बाँध का निर्माण हुआ । पूर्वी नहर तथा इसकी पार प्रमुख सहायक नहरें द्वारा लगभग 14 लाख एकड़ भूमि में सिंचाई की योजना बनाई गई थी। इससे पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों में सिंचाई होती है ।
पूर्वी नहर को और भी विस्तृत किया गया है। इसकी एक शाखा ताजपुर नहर निकाली गई है। पश्चिमी नहर से कई उप-नहरें निकली हैं, पश्चिमी नहर का लगभग 35 कि० मी० का क्षेत्र नेपाल में पड़ता है और शेष भाग मधुबनी एवं दरभंगा जिलों में पड़ता है। कोसी बैराध 12.161.30 मीटर लम्बा है
जो कि 1963 में बनकर तैयार हुआ था ।

प्रश्न 3. बिहार में कौन-कौन सी फसलें लगाई जाती है । किसी एक फसल के मुख्य उत्पादनों की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर ⇒ बिहार में चार फसलें भदई, अगहनी, रबी एवं गरमा लगाई जाती है

(i) भदई – धान ज्वार, बाजरा, मकई के अलावे जूट एवं सब्जी की खेती होती है। इसकी खेती जून से होती है एवं अगस्त सितम्बर में कटाई कर ली जाती है ।

(ii) अगहनी – बिहार की आधी से अधिक कृषिगत भूमि पर अगहनी फसल लगाई जाती है। यह फसल जून से अगस्त तक लगायी जाती है
और नवम्बर-दिसम्बर में काट ली जाती है। धान, बाजरा, अरहर, गन्ना प्रमुख फसल

(iii) रबी इस फसल में अक्टूबर-नवम्बर के मध्य लगाया जाता है एवं अप्रैल में काट लिया जाता है। गेहूँ, जौ, दलहन, तेलहन इसके प्रमुख फसल है।

(iv) गरमा- इस फसल को गर्मी की ऋतु में लगाया जाता है। इसमें गरमा, धान, ग्रीष्मकालीन सब्जियां उगायी जाती है 1
चावल बिहार का प्रमुख खाद्यान्न फसलें हैं। इसकी खेती राज्य के सभी भागों में होती है। 2006-07 में 33.54 लाख हेक्टेयर भूमि पर 50 लाख टन धान का उत्पादन हुआ ।
धान की खेती सबसे अधिक उत्पादन पश्चिम चम्पारण, रोहतास, औरंगाबाद में होता है । इन तीनों राज्य क्रमशः सबसे अधिक चावल उत्पादन करते हैं। लेकिन क्षेत्रफल की दृष्टि से रोहतास प्रथम है। इसके अलावे पूर्वी चम्पारण, मधुबनी आदि ।

प्रश्न 4. बिहार में वन्य जीवों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा करें।

उत्तर ⇒ बिहार में वन, वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए आदि काल से ही कई रीति-रिवाजों का प्रचलन है। कई धार्मिक अनुष्ठान तो वृक्षों के नीचे ही किये जाते हैं। कई ऐसे आंचलिक त्योहार भी है जो वृक्षों से सम्बन्धित है। इस राज्य में परम्परागत रूप से वट, पीपल, आँवला और तुलसी के पेड़ पौधों की पूजा की जाती है ।
हमारे यहाँ चींटी से लेकर सांप जैसे विषैले जन्तु को भोजन दिया जाता है और पूजा की जाती है। पक्षियों को भी दाने देने का प्रचलन है। साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। यहाँ 14 अभ्यारण्य एवं एक राष्ट्रीय उद्यान है जिसके अंतर्गत कुल 2064.41 हेक्टेयर भूमि हैं,
इनमें पटना का संजय गाँधी जैविक उद्यान, बेगूसराय जिला अन्तर्गत मंझौल अनुमंडल में 2500 एकड़ पर फैला कावर झील, दरभंगा जिला में कुशेश्वर स्थान वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं ।
कुशेश्वर स्थान में पहले बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को फँसाया जाता था लेकिन जन जागरण के कारण अब यहाँ पर किसी भी प्रकार का शिकार करना पूर्णतः वर्जित हो गया है ।
वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण में राज्य सरकार की कई संस्थाएँ कार्यरत हैं । इनमें वन, पर्यावरण तथा जल संसाधन विकास विभाग प्रमुख हैं, इनके अतिरिक्त इस क्षेत्र में कई स्वयं सेवी संस्थाएँ भी काम कर रही हैं इनमें प्रयास, तरूमित्र, प्रत्यूष और भागलपुर में मंदार नेचर कलब (Mandar Nature Club) प्रमुख है

प्रश्न 5. बिहार में पाये जानेवाले खनिजों को वर्गीकृत कर किसी एक वर्ग के खनिज का वितरण एवं उपयोगिता को लिखिए ।

उत्तर ⇒ बिहार के खनिजों को निम्नलिखित वर्गों में रखा जा सकता

(i) धात्विक खनिज – इसके अंतर्गत बॉक्साइट, मैग्नेटाइट, सोना और अयस्क आते हैं ।

(ii) अधात्विक खनिज – चूना पत्थर, अभ्रक, डोलोमाइट, सिलिका सैंड, पाइराइट क्वार्टन, फेल्सपार, चीनी मिट्टी, स्लेट एवं शोरा जैसे अधात्विक खनिज मिलते हैं ।
धात्विक खनिज बॉक्साइट का भंडार बिहार में 1.5 हजार मैट्रीक टन है। यह गया, जमुई और बाँका जिलों में मिलता है। इसका उपयोग बिजली के तार, बर्त्तन, हवाई जहाज, बस, रेलवे कोच बनाने में होता है। बॉक्साइट से एल्युमिनियम बनाया जाता है। मैग्नेटाइट पत्थर का कुल भंडार 0.59 हजार मैट्रीक टन है ।
यह बिहारी पहाड़ी क्षेत्र में मिलता है ।
सोना अयस्क यहाँ बहुत अल्प मात्र में दक्षिणी बिहार के नदियों (फाल्गू) के बालू के रेत के साथ मिलता है। जिसमें सोना धातु की मात्रा 0.1 से 0.6 ग्राम प्रतिटन प्राप्त है। सोना अयस्क का कुल भंडार 128.88 मीट्रिक टन है। सोना का उपयोग ज्वेलर बनाने, दवा बनाने तथा दाँत बनाने में किया जाता है ।

प्रश्न 6. बिहार के प्रमुख ऊर्जा क्षेत्रों का वर्णन कीजिए और किसी एक क्षेत्र का विस्तार से चर्चा कीजिए ।

उत्तर ⇒ बिहार के प्रमुख ऊर्जा स्रोतों में मुख्य रूप से जल विद्युत एवं ताप विद्युत है । बिहार में कई तापीय विद्युत केन्द्र है। इनमें कहलगाँव, कांटी और बरौनी तापीय विद्युत केन्द्र प्रमुख हैं, कहलगाँव सुपर थर्मल पावर की उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है ।
कांटी तापीय विद्युत केन्द्र मुजफ्फरपुर है। जिसकी उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट है और बरौनी तापीय विद्युत परियोजना की स्थापना रूस के सहयोग से किया जाता है। इसकी उत्पादन क्षमता 145 मेगावाट है। इसके अलावे बाढ़ एवं नबीनगर तापीय विद्युत परियोजना है ।
बाढ़ तापीय विद्युत परियोजना की प्रस्तावित तापीय विद्युत उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट है। इस परियोजना का निर्माण N.T.P. C. के द्वारा हो रहा है। नवीनगर तापीय विद्युत परियोजना औरंगाबाद जिला में है। जिसकी उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट प्रस्तावित है।
ये रेलवे एवं N. T. P. C. के संयुक्त प्रयास से निर्माण चल रहा है। जल स्रोत जल-विद्युत इसके विकास के लिए 1982 में बिहार राज्य जल विद्युत निगम का गठन किया गया। इसके द्वारा 2055 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है ।
डेहरी, रोहतास में स्थित पश्चिमी स्रोत परियोजना, वारूण, औरंगाबाद, पूर्वी स्रोत लिंकनहर बाल्मिकीनगर, पश्चिमी चम्पारण, कटैया परियोजना है। इनसे मात्र 44.10 मेगावाट जल विद्युत उत्पन्न होता है ।

प्रश्न 7. बिहार में वस्त्र उद्योग पर विस्तार से चर्चा कीजिए ।

उत्तर ⇒ वस्त्र उद्योग बिहार का एक प्राचीन उद्योग है। इस उद्योग में एक विशेष समुदाय की भागीदारी रही है। यह काम यहाँ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र दोनों में होता है। भागलपुर के तसर कपड़े, लूंगी एवं चादर देश-विदेश में प्रसिद्ध है औरंगाबाद जिले के ओबरा तथा दाऊदनगर के नातें कालीन की माँग सम्पूर्ण भारत में है ।
बिहार में सूती, रेशमी एवं ऊनी वस्त्र तैयार किया जाता है। कच्चे माल के अभाव के कारण बिहार में सूती वस्त्र उद्योग का अधिक विकास नहीं हुआ है, लेकिन सस्ते मजदूर तथा बाजार की उपलब्धता के कारण डुमराँव, गया, मोकामा, मुंगेर, फुलवारीशरीफ और माझी, भागलपुर में यह उद्योग विकसित हुआ है।
यहाँ छोटी-छोटी मिलें स्थापित हैं ।

प्रश्न 8. बिहार के कृषि आधारित किसी एक उद्योग के विकास एवं वितरण पर प्रकाश डालिये ।

उत्तर ⇒ बिहार में कृषि आधारित उद्योग, चीनी उद्योग, सूती वस्त्र उद्योग, जूट उद्योग है
चीनी उद्योग – बिहार के उद्योगों में चीनी उद्योग एक महत्त्वपूर्ण है। 20वीं सदी के मध्य तक भारत में चीनी उद्योग के क्षेत्र में बिहार का स्थान महत्त्वपूर्ण था किन्तु 1960 ई० के बाद इस उद्योग में हताश होने लगा। वर्तमान समय में उत्पादन में 7वां स्थान है। यहाँ इस उद्योग के लिए सभी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ वर्तमान है।
बिहार की पहली चीनी मिल डच कम्पनी द्वारा 1840 ई० बेतिया में स्थापित किया गया था।
वर्तमान समय में यहाँ चीनी मिलें 9 हो गयी है एवं चीनी उत्पादन का कुल उत्पादन 4.52 लाख मीट्रिक टन है
बिहार में चीनी की अधिकतर मिलें उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में विकसित है। पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीवान, गोपालगंज और सारण जिला में चीनी मिलें केन्द्रित है। क्योंकि यह क्षेत्र गन्ना उत्पादन के लिए अनुकूल है 1
बिहार में कुछ चीनी मिलें दरभंगा जिला के सकरी लोहार, हसनपुर एवं मुजफ्फरपुर जिला के मोतीपुर में है। राज्य के दक्षिणी भाग में भी चीनी के कुछ कारखाने स्थित है । इनमें विक्रमगंज, बिहटा, गुरारू की चीनी मिलें हैं ।

प्रश्न 9. बिहार के प्रमुख सड़क मार्गों के विस्तार एवं विकास पर प्रकाश डालिए ।

उत्तर ⇒ बिहार में सबसे पहले सड़क मार्ग का विकास हुआ। आजादी के बाद सड़क का विस्तार अधिक हुआ है जो कि आजादी के समय सड़कों की कुल लम्बाई 2104 कि० मी० थी, जबकि वर्तमान में सड़कों की कुल लम्बाई 81,680 कि० मी० थी,
वर्तमान समय में सड़कों को प्रशासनिक एवं कार्यिक दृष्टि से पाँच वर्गों में रखा गया है-
(i) राष्ट्रीय उच्च मार्ग — यह बिहार को अन्य राज्यों एवं क्षेत्रों से जोड़ता है । बिहार की सबसे प्रमुख राष्ट्रीय उच्च मार्ग संख्या 2 है, यह ग्राण्ड ट्रंक रोड के नाम से प्रसिद्ध है। बिहार में राष्ट्रीय उच्च मार्ग की कुल लम्बाई 3734 कि० मी० है । बिहार में सबसे लम्बी सड़क उच्च पथ 31
(ii) राज्य स्तरीय सड़क मार्ग-इन सड़कों की देख-रेख बिहार सरकार करती है और यह मुख्य रूप से जिला मुख्यालयों को जोड़ती है ।
(iii) जिला स्तरीय सड़क—ये सड़कें जिला के मुख्य नगरों एवं अनुमंडलों को जोड़ती है ।
(iv) राज्य में सबसे अधिक विस्तार सड़कों का है। वर्त्तमान में सड़कों के विकास पर अधिक बल दिया जा रहा है। एशियान बैंक के सहयोग से इन्हें दो लेन वाले उच्च पथों में उन्नयन का काम जारी है 1

प्रश्न 10. बिहार में वन्य पदार्थों पर आधारित उद्योगों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ वन्य पदार्थों पर आधारित उद्योगों में यहाँ लकड़ी, कागज, लुग्दी तथा लाख उद्योग विकसित हैं ।
बिहार में नेपाल की सीमा पर नरकटियागंज, जोगबनी, वैसानिया, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना, भागलपुर और कटिहार में लकड़ी के कारखाने हैं। हाजीपुर और बेतिया में प्लाईवुड के कारखाने प्रसिद्ध हैं। गन्ने की खोई एवं चावल के छिलके, बाँस, सवाई घास
मुलायम लकड़ियों की प्रयुक्त उपलब्धता के कारण कागज तथा लुग्दी के कारखानों का यहाँ विकास हो पाया है। यहाँ कागज के प्रमुख कारखाने ठाकुर पेपर मिल्स समस्तीपुर तथा अशोक पेपर मिल, डालमियानगर में स्थापित छोटे कागज के कारखाने बरौनी और पटना में स्थापित है
लाख के कीड़े, प्लास, वेर, कुसुम आदि की वृक्षों पर विशेष रूप से पनपते हैं और यह वृक्ष नवादा, गया, बांका, मुंगेर तथा पूर्णिया जिलों में पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इसलिए लाह (लाख) उद्योग इन्हीं जिलों में विस्तृत हैं।

प्रश्न 11. बिहार की जनसंख्या वितरण के बारे में वर्णन करें।

उत्तर ⇒ बिहार की जनसंख्या वितरण सभी जगह समान रूप से नहीं है। कहीं पर अधिक तो कहीं पर बहुत ही कम है। इसका मुख्य कारण यहाँ की आर्थिक सामाजिक परिवेश भौतिक विविधता है। बिहार राज्य में सबसे अधिक जनसंख्या पटना में है । यहाँ राज्य के कुल 3.40% क्षेत्रफल पर 5.68% जनसंख्या रहती है
गया, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, हाजीपुर, बेतिया, मोतिहारी, छपरा, सीवान, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी एवं समस्तीपुर जिले में 3 से 5% आबादी है। ये जिले बिहार के उच्च आबादी वाले जिले हैं। यह राज्य बिहार के कुल क्षेत्रफल का 39% है और इन जिलों में राज्य की 46% जनसंख्या रहती है।
मध्यम जनसंख्या वाले जिलों में सुपौल, नवादा, औरंगाबाद, अररिया, गोपालगंज, भोजपुर, बेगूसराय, नालंदा, कटिहार, भागलपुर, रोहतास, मुंगेर, कैमूर, किशनगंज, बक्सर, जमुई, सहरसा, जहानाबाद, अरवल मधेपुरा एवं बाँका जिला है। इन क्षेत्र में राज्य के 54.85% क्षेत्रफल पर 45.84% जनसंख्या रहती हैं।
शिवहर शेखपुरा, लखीसराय जिलों में जनसंख्या अत्यधिक कम रहती है। इन तीन जिलों में राज्य के क्षेत्रफल के मात्र 2.48% में 2.22% आबादी रहती है। इस प्रकार बिहार के कुल राज्यों में जनसंख्या का संकेन्द्रण अत्यधिक है अथवा वितरण असमान है ।

प्रश्न 12. बिहार की जनसंख्या घनत्व पर विस्तार से चर्चा कीजिए

उत्तर ⇒ बिहार की जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से पाँच वर्गों में बाँट सकते हैं जो निम्नलिखित हैं-

(i) अत्यधिक घनत्व वाले जिले – इसके अंतर्गत वैसे जिले हैं, जिनका 1200-1400 व्यक्ति वर्ग कि. मी. औसत घनत्व है। पटना, दरभंगा, वैशाली, बेगूसराय, सीतामढ़ी, सारण, सीवान आते हैं ।

(ii) उच्च घनत्व वाले जिले – इसके अंतर्गत वैसे जिले हैं, जिनका औसत घनत्व 1000-1200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गोपालगंज, मधुबनी तथा नालंदा जिले इसके अंतर्गत हैं ।

(iii) मध्यम घनत्व के जिले – इसके अंतर्गत 800-1000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० रहते हैं । पूर्वी चम्पारण, भागलपुर, जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, सहरसा, खगड़िया, मधेपुरा, बक्सर और मुंगेर प्रमुख जिले हैं ।

(iv) कम घनत्व के जिले – इस वर्ग में वैसे जिले आते हैं, जिनका औसत घनत्व प्रति 600-800 व्यक्ति प्रति वर्ग कि. मी. रहते हैं। पूर्णियाँ, कटिहार, अररिया, नवादा, शेखपुरा, सुपौल, गया, किशनगंज, लखीसराय, रोहतास एवं औरंगाबाद जिले आते हैं ।

(v) अत्यंत कम घनत्व वाले जिले – इसके अंतर्गत पः चम्पारण, बाँका जमुई, कैमूर जिले हैं जिनका घनत्व 382 व्यक्ति प्रति कि० मी० है ।

प्रश्न 13. बिहार में नगर विकास पर एक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए ।

उत्तर ⇒ बिहार में नगरों के विकास का इतिहास बहुत पुराना है। यहाँ के प्राचीन नगरों का विकास, राजधानी, शिक्षा, धार्मिक एवं व्यापारिक केन्द्र के रूप में हुआ है। यहाँ के अधिकतर नगर किसी-न-किसी नदी तट पर विकसित है। इनमें पाटलीपुत्र, नालन्दा, गया, वैशाली, बोधगया, सीतामढ़ी आदि प्राचीन नगरें हैं।
मध्यकाल में यहाँ नगरों का विकास सड़कों के विकास एवं प्रशासनिक कारणों से हुआ था ऐसे नगरों में सासाराम, दरभंगा, पूर्णिया, छपरा, सीवान आते हैं। अंग्रेजों के समय नगरों का विकास रेल एवं सड़कों के किनारे हुआ। आजादी के बाद यहाँ नगरों के विकास में तेजी आ गई। राज्य में औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य,
शिक्षा एवं जीवन के मौलिक सुविधाओं के कारण नये नगर विकसित हुए। इनमें बरौनी, हाजीपुर, दानापुर, डालमिया नगर, मुंगेर, जमालपुर, कटिहार आदि । वर्त्तमान समय । कहीं में नगरों के विकास में बिहार भारत के बड़े राज्यों की तुलना में बहुत ही कम हुआ है । यह सबसे कम शहरीकृत राज्य है ।
यहाँ की नगरीय आबादी (2001 ई०) मात्र 10.5% है ।

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