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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Economics Subjective Question Class 10th Subjective Question

Matric Economics Vaishveekaran Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] वैश्वीकरण सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

अर्थशास्त्र ( Economics) वैश्वीकरण लघु और दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Economics अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10thEconomics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th अर्थशास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Economics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Economics Vaishveekaran Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] वैश्वीकरण सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

                                            लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. बहुराष्ट्रीय कम्पनी किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कम्पनी वह है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण व स्वामित्व रखती है। जैसे-फोर्ड मोटर्स, सैमसंग, कोकाकोला, नोकिया, इंफोसिस, टाटा मोटर्स आदि ।

प्रश्न 2. उदारीकरण से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर ⇒ इसका अर्थ है सरकार द्वारा लगाये गये सभी अनावश्यक नियंत्रणों तथा प्रतिबंधों जैसे- लाइसेंस, कोटा आदि को हटाना है । आर्थिक सुधारों के अंतर्गत सन् 1991 से भारत सरकार ने उदारीकरण की नीति अपनाई है ।

प्रश्न 3. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण का अर्थ विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में सामंजस्य स्थापित करना और उन्हें एक-दूसरे से जोड़ना है। इस प्रक्रिया में हम आर्थिक रूप से वैश्विक अथवा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पारस्परिक रूप से निर्भर होते हैं। मुक्त व्यापार वैश्वीकरण का आधार है। इस व्यवस्था में वस्तुओं के आयात एवं निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। इसके अंतर्गत विश्व की सभी अर्थव्यवस्थाएँ एक बाजार या एक अर्थव्यवस्था हो जाती है। विश्व अर्थव्यवस्थाओं के युग्मन अथवा एकीकरण से उत्पादन के साधनों का इस प्रकार आवंटन होता है। जिससे उत्पादन और कुशलता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होते हैं ।

प्रश्न 4. बिहार में वैश्वीकरण के कोई दो नकारात्मक प्रभाव बताइए ।

उत्तर ⇒ बिहार में वैश्वीकरण के दो नकारात्मक प्रभाव —

(i) कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों की उपेक्षा – राज्य में कृषि पर किया गया निवेश संतोषजनक नहीं है । इन उद्योगों में वैश्वीकरण के पश्चात् जितना निवेश होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ है ।

(ii) कुटीर एवं लघु उद्योग पर विपरीत प्रभाव – कुटीर एवं लघु उद्योग द्वारा उत्पादित वस्तु बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं से अच्छी और आकर्षक नहीं होती । ऐसी स्थिति में, इन उद्योगों पर खतरा उत्पन्न हो जाता है ।

प्रश्न 5. विश्व व्यापार संगठन क्या है और यह कब और क्यों स्थापित किया गया ?

उत्तर ⇒ विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1995 में हुई। द्वितीय महायुद्ध के समय विश्व के प्रायः सभी देशों में विदेशी व्यापार पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगा दिये गये थे। इन प्रतिबंधों के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र क्रमशः – संकुचित होता जा रहा था। अतः, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 1947 में जेनेवा सम्मेलन में एक समझौता हुआ। यह समझौता ही ‘सामान्य प्रशुल्क एवं व्यापार समझौता’ (GATT) कहा जाता है। इस समझौत का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक प्रतिबंधों को कम करना तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विभेदात्मक नीति का बहिष्कार करना था। अब इस संगठन का स्थान विश्व व्यापार संगठन ने ले लिया है।

प्रश्न 6. वैश्वीकरण क्या है ? इसके प्रमुख दो अंगों की विवेचना कीजिए ।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं का समन्वय या एकीकरण किया जाता है, ताकि वस्तुओं एवं सेवाओं, प्रौद्योगिकी, पूँजी और श्रम या मानवीय पूँजी का भी निर्वाध प्रवाह हो सके। इसके अंतर्गत पूँजी, वस्तु तथा प्रौद्योगिकी का निर्बाध रूप से एक देश से दूसरे देश में प्रवाह होता है। वैश्वीकरण के विभिन्न अंगों में निम्नलिखित दो प्रमुख अंग हैं-

(i) व्यवसाय एवं व्यापार-संबंधी अवरोधों की कमी इसका अभिप्राय है कि विदेशी कम्पनियाँ भारतीय बाजार में अपनी वस्तुएँ एवं सेवाएँ बेच सकती हैं।

(ii) पूँजी का निर्बाध प्रवाह ऐसा वातावरण कायम करना जिससे विभिन्न देशों में पूँजी का प्रवाह स्वतंत्र रूप से हो सके । अर्थात् विदेशी पूँजीपति अब भारत में निवेश कर सकते हैं और भारतीय पूँजीपति विदेशों में निवेश कर सकते हैं।

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन वैश्वीकरण

 

प्रश्न 7. निजीकरण से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ निजीकरण का अभिप्राय निजी क्षेत्र द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से स्वामित्व प्राप्त करना तथा उनका प्रबंध करना 1 आर्थिक सुधारों के अंतर्गत भारत सरकार ने सन् 1991 से निजीकरण की नीति अपनाई ।

प्रश्न 8. विश्व व्यापार संगठन ( W.T.O ) क्या है ? यह कब और क्यों स्थापित किया गया ?

उत्तर ⇒ विश्व व्यापार संगठन (W.T. O World Trade Organization) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन है जिसका लक्ष्य व्यापार को उदार तथा लचीला बनाना है। इसकी स्थापना जनवरी 1995 में की गई थी। भारत इसका संस्थापक सदस्य रहा है। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। यह सभी देशों से मुक्त व्यापार की सुविधा देता है । किन्तु विकसित देशों के द्वारा कुछ व्यापार अवरोधक कभी-कभी पैदा किये जाते हैं। विश्व व्यापार संगठन के कारण आज सभी देशों के आपस में व्यापार बढ़े हैं और रिश्तों में मजबूती आई है।

प्रश्न 9. वैश्वीकरण क्या है ? एक आदमी पर पड़ने वाले अच्छे प्रभावों की विवेचना कीजिए ।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं का समन्वय या एकीकरण किया जाता है ताकि वस्तुओं एवं सेवाओं, प्रौद्योगिकी, पूँजी और श्रम या मानवीय पूँजी का भी निर्बाध प्रवाह हो सके। इसके अंतर्गत पूँजी, वस्तु तथा प्रौद्योगिकी का निर्बाध रूप से एक देश से दूसरे देश में प्रवाह होता है । वैश्वीकरण के अच्छे प्रभाव- वैश्वीकरण के एक व्यक्ति पर पड़ने वाले अच्छे प्रभाव निम्न हैं-

(i) रोजगार के अवसरों में वृद्धि यह आशा की जाती है कि विभिन्न क्षेत्रों के बीच समाकलन होने पर घरेलू देश में उत्पादन अधिक होता है। इससे रोजगार के अवसर में वृद्धि होती है ।

(ii) गुणवत्ता में सुधार अन्य फर्मों के साथ कड़ी प्रतियोगिता होने के कारण वस्तु की गुणवत्ता में सुधार होता है।

प्रश्न 10. भारत में सन् 1991 के आर्थिक सुधारों से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ आर्थिक सुधारों का मतलब उन नीतियों से है जिसका प्रारंभ 1991 के आर्थिक व्यवस्था में कुशलता, उत्पादकता, लाभदायकता एवं प्रतियोगिता की शक्ति के स्तरों में वृद्धि करने के दृष्टिकोण से किया गया है। यह उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण भी नीतियों पर आधारित है। इसे हम नई आर्थिक नीति के नाम से भी जानते हैं ।

प्रश्न 11. मॉल से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ इसमें एक ही छत के नीचे उपभोक्ता के लिए हर छोटी एवं बड़ी वस्तुएँ उपलब्ध होती है, उसे मॉल कहते हैं।

प्रश्न 12. भारत में रोजगार मिलने की संभावना क्यों बढ़ गई है ?

उत्तर ⇒ पूँजी और उद्योग क्षेत्र में विदेशी पूँजी लगने के कारण रोजगार की संभावना बढ़ गई है।

प्रश्न 13. बेरोजगारी की समस्या बढ़ने की संभावना कैसे बढ़ गई है ?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण आधुनिक संयंत्रों से मशीनी उत्पादन को बढ़ावा मिला है, जिसके कारण बेरोजगारी की संभावना बढ़ रही है।

प्रश्न 14. बिहार में विकास की गति तेज नहीं होने के क्या कारण है ?

उत्तर ⇒ बिहार में शक्ति साधन के रूप में बिजली पर्याप्त रूप में उपलब्ध नहीं है, साथ ही सड़क का भी अभाव है जिसके कारण विकास की गति तीव्र नहीं है ।

प्रश्न 15. आर्थिक सुधारों के दो उद्देश्य बताएँ ।

उत्तर ⇒ आर्थिक सुधारों के दो उद्देश्य इस प्रकार हैं-

(i) उत्पादन इकाईयों की क्षमता बढ़ाना ।

(ii) आर्थिक विकास दर को बढ़ाना ।

प्रश्न 16. नई आर्थिक नीति LPG से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ये आर्थिक सुधार उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण की नीतियों पर आधारित है । अतः, इन्हें हम LPG नीति भी कहते हैं, और इन्हीं आर्थिक सुधारों है को हम नई आर्थिक नीति के नाम से पुकारते हैं ।

प्रश्न 17. बहुराष्ट्रीय कंपनी की कार्य प्रणाली क्या है ?

उत्तर ⇒ ये कंपनियाँ उत्पादन लागत में कमी करने एवं अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उन जगहों या देशों में उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती है, जहाँ उन्हें सस्ता भूमि एवं श्रम एवं कच्चा माल या अन्य संसाधन मिल सके ।

प्रश्न 18. वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कौन-कौन से कारक हैं ? उत्तर- वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले निम्न कारक हैं-

(i) प्रौद्योगिकी में प्रगति

(iii) विदेशी निवेश का उदारीकरण ।

(ii) विदेशी व्यापार तथा

प्रश्न 19. संचार माध्यमों का महत्त्वपूर्ण योगदान वैश्वीकरण में प्राप्त है । कैसे ?

उत्तर ⇒ दूरसंचार सुविधाएँ (टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स) के द्वारा दुनिया के किसी कोने में संपर्क बना सकते हैं । इस तरह वैश्वीकरण में संचार का महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है ।

 

Economics Vaishveekaran Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 20. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण में कैसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है ?

उत्तर ⇒ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन विश्व स्तर पर करके एवं विश्व भर के उत्पादन को एक-दूसरे के साथ जोड़कर वैश्वीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है ।

प्रश्न 21. ‘व्यापार अवरोधक’ से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ इसे अवरोधक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता । सरकार व्यापार अवरोध का प्रयोग विदेश व्यापार में वृद्धि या कटौती करने एवं कौन-सी वस्तु देश में कितनी मात्रा में आयात होनी चाहिए यह निर्णय करने के लिए करती हैं ।

प्रश्न 22. वैश्वीकरण का किस प्रकार श्रम संगठन पर बुरा प्रभाव पड़ा है ?

उत्तर ⇒ श्रमिक संगठनों के द्वारा आम मजदूरों की न्यूनतम मांगों को संगठित रूप से मांग की जाती है जिससे श्रमिकों को सामान्य वेतन एवं सुविधा उपलब्ध होती है। अब वैश्वीकरण के कारण श्रम कानूनों में लचीलापन आया है, जिससे श्रमिक संगठन भी कमजोर हो गया है। इससे आम श्रमिकों की उचित पारिश्रमिक मिलने में कठिनाई आने लगी है ।

                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. 1991 के आर्थिक सुधारों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ सन् 1991 में भारत के वित्तमंत्री के रूप में डॉ॰ मनमोहन सिंह थे। जिनके प्रयास से LPG की नीति अर्थात् उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण की नीति चलाई गई, जिससे भारत में अनेक आर्थिक प्रगति हुई –

(i) उदारीकरण के कारण सरकार ने जब कोटा, परमिट और तरह-तरह के अनावश्यक प्रतिबंधों को हटाया तो तेजी से विदेशी निवेश भारत में होने लगे

(ii) निजीकरण की नीति के अंतर्गत घाटे में चल रहे अनेक उद्योग को निजी कम्पनियों के हवाले किया। परिणामस्वरूप यही कम्पनियाँ लाभ प्रदान
करने लगीं ।

(iii) वैश्वीकरण के कारण जहाँ भारत में अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने निवेश किए वहीं भारतीय कम्पनियों ने भी उद्योगों एवं पूँजी का विस्तार प्रारंभ कर दिया। इन आर्थिक प्रगतियों ने भारत का कायाकल्प कर दिया ।

प्रश्न 2. वैश्वीकरण का बिहार पर पड़े प्रभावों को बताएँ ।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण बिहार का आर्थिक परिवेश भी बदलता जा रहा है । वैश्वीकरण के वर्तमान युग में उपभोग एवं उत्पादन के क्षेत्र में पूरी दुनिया एक देश हो गया है और इस कारण वैश्वीकरण के सुखद परिणाम बिहार राज्य में दृष्टिगोचर होने लगे हैं। प्रगति के वर्तमान स्थिति में और अधिक मजबूती लाना होगा, तभी हमें वैश्वीकरण का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है। बिहार में वैश्वीकरण के कुछ सकारात्मक तथा कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं ।

कुछ सकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित हैं –

(i) कृषि उत्पादन में वृद्धि हमारी खेती मौनसून पर आधारित है, पर आज वैश्वीकरण का ही प्रभाव है कि कृषि उत्पादन के गिरावट की स्थिति में भी खाद्यान्न की भरपाई की जा सकती है ।

(ii) निर्यातों में वृद्धि वैश्वीकरण के कारण ही बिहार से कुछ प्रमुख वस्तुएँ जैसे- फल, आम, मखाना, लीची तथा कुटीर और लघु उद्योगों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ निर्यात हो पा रही हैं ।

(iii) विदेशी प्रत्यक्ष विनियोग वैश्वीकरण के कारण ही विदेशी प्रत्यक्ष विनियोग संभव हुआ है ।

(iv) प्रति व्यक्ति शुद्ध राज्य की घरेलू उत्पादन में वृद्धि – इस अवधि में राज्य कुल आय तथा प्रति-व्यक्ति शुद्ध घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई है !

(v) निर्धनता में कमी बिहार में निर्धनता रेखा के नीचे आनेवाली जनसंख्या 1993-94 में 54.96 था. जो 1999-2000 में घटकर 42.6% हो गया है

(vi) विश्व स्तरीय उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता – वैश्वीकरण के कारण ही विश्वस्तरीय वस्तुओं तथा विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मोबाइल फोन, जूते, रेडिमेड वस्त्र आदि अब बिहार के बाजार में उपलब्ध है

(vii) रोजगार के अवसरों में वृद्धि – वैश्वीकरण का ही प्रभाव है कि बिहार के बहुत सारे सॉफ्टवेयर इंजीनियर आज विदेशों में नौकरी कर रहे हैं । यू० एस० ए० तथा यू० के० में बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी कर रहे हैं ।

(viii) बहुराष्ट्रीय बैंक और बीमा कंपनियों का आगमन, विगत् वर्षों में बिहार के आधारभूत संरचना के विकास के कारण विदेशी पर्यटन बड़ी संख्या में बिहार आने लगे हैं और विश्व की बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनी पूँजी निवेश की रुचि दिखाने लगे हैं ।

नकारात्मक प्रभाव –

(i) कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों की उपेक्षा राज्य में कृषि पर किया गया निवेश संतोषजनक नहीं है। इन उद्योगों में वैश्वीकरण के पश्चात् जितना निवेश होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ है ।

(ii) कुटीर एवं लघु उद्योग पर विपरीत प्रभाव – कुटीर एवं लघु उद्योग द्वारा उत्पादित वस्तु बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं से अच्छी और आकर्षक नहीं होती । ऐसी स्थिति में, इन उद्योगों पर खतरा उत्पन्न हो जाता है

(iii) रोजगार पर विपरीत प्रभाव – बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के कारण बहुत सारी औद्योगिक इकाईयाँ बन्द होने से श्रमिकों को स्थायी रोजगार उपलब्ध नहीं होता इस तरह रोजगार अब सुनिश्चित नहीं है ।

(iv) आधारभूत संरचना के कम विकास के कारण कम निवेश—बिहार में पूँजी निवेश उतना नहीं हुआ है जितना वैश्वीकरण के फलस्वरूप देश के अन्य राज्यों में हुआ है। इसका कारण है कि बिहार में आधारभूत संरचना की कमी है इसके बावजूद सकारात्मक प्रभाव ही ज्यादा प्रभावशाली रहे हैं। वास्तव में वैश्वीकरण एक उभरती हुई एवं सशक्त अंतर्राष्ट्रीय वास्तविकता है जिसकी अपनी एक गति है। हमें वैश्वीकरण के लाभों को अधिकतम एवं इसके जोखिमों को न्यूनतम बनाने का प्रयास करते रहना होगा ।

 

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3. भारत में सामान व्यक्ति पर वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर ⇒ पूँजी और उद्योग के क्षेत्र में विदेशी पूँजी के लगने से लोगों को अधिक रोजगार मिलने की संभावना व्यक्त की जाती रही है ।

प्रश्न 4. आर्थिक सुधारों का अर्थ तथा आर्थिक नीति के उद्देश्य एवं विशेषताओं का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ भारत में आर्थिक सुधारों का मतलब उन नीतियों से है जिसके द्वारा अर्थव्यवस्था में कुशलता, उत्पादकता लाभदायकता एवं प्रतियोगिता की शक्ति के स्तरों में वृद्धि करने के दृष्टिकोण से किया गया है ।
आर्थिक सुधारों अथवा नई आर्थिक नीति के उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

(i) उत्पादन इकाईयों की कार्य-कुशलता एवं उत्पादन स्तर में सुधार करना ।

(ii) उत्पादन इकाईयों की प्रतियोगी क्षमता को बढ़ाना ।

(iii) भूतकाल की तुलना में विदेशी विनियोग एवं तकनीक का अधिक-से-अधिक उपयोग करना ।

(iv) आर्थिक विकास की दर को बढ़ाना ।

(v) आर्थिक विकास के लिए विश्वव्यापी संसाधनों का प्रयोग करना ।

(vi) वित्तीय क्षेत्र में सुधार लाना तथा इसे आधुनिक बनाना ताकि यह अर्थव्यवस्था की जरूरतों को प्रभावशाली ढंग से पूरा कर सके ।

(vii) सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य संपादन में सुधार लाना तथा उसके क्षेत्र को अधिक युक्तिसंगत बनाना । आर्थिक सुधारों की मुख्य विशेषताएँ निम्न है- नई आर्थिक नीति की मुख्य विशेषताएँ अर्थव्यवस्था का उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण करना है । उदारीकरण – – इसका अर्थ है सरकार द्वारा लगाए गए सभी अनावश्यक नियंत्रणों तथा प्रतिबंधों जैसे- लाइसेंस कोटा आदि को हटाना है आर्थिक सुधारों के अन्तर्गत सन् 1991 से भारत सरकार ने उदारीकरण की नीति अपनायी । निजीकरण- निजीकरण का अभिप्राय निजी क्षेत्र द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से स्वामित्व प्राप्त करना तथा उनका प्रबंध करना है । आर्थिक सुधारों के अंतर्गत भारत सरकार ने सन् 1991 से निजीकरण की नीति अपनायी । वैश्वीकरण – निजीकरण और उदारीकरण की नीति की परिणति वैश्वीकरण के रूप में विश्व के सामने आई है। इन्हीं नीतियों के कारण दुनिया भर के देश एवं लोग एक-दूसरे के अपेक्षाकृत अधिक संपर्क में आये हैं ।

प्रश्न 5. वैश्वीकरण का सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालें ?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण का आम सामाजिक प्रभाव लाभप्रद नहीं दिखता क्योंकि यह सत्य है कि वैश्वीकरण से पूँजी, उत्पाद और आय में वृद्धि होगी किन्तु वृद्धि का यह लाभ समाज के मुट्ठी भर धनी एवं उच्च शिक्षा प्राप्त लोग ही प्राप्त कर सकेंगे । वैश्वीकरण की स्थिति में ऊँची आय के अमीर व्यक्तियों की आय बढ़ती चली जायेगी और 85% की सर्वाधिक संख्या में आम लोगों का जीवन कठिन हो जाने की संभावना है।

प्रश्न 6. वैश्वीकरण के कितने अंग होते हैं ? संक्षेप में वर्णन करें ।

उत्तर ⇒वैश्वीकरण के चार मुख्य अंग हैं-

(i) व्यवसाय अथवा व्यापार संबंधी अवरोधों की कमी- व्यापार अवरोधकों को कम करना ताकि वस्तुओं एवं सेवाओं का बेरोकटोक आदान-प्रदान हो सके । इसका अभिप्राय यह हुआ कि विदेशी कंपनियाँ बाजार में अपनी वस्तुएँ तथा सेवाएँ.. मुफ्त में बेच सकती है।

(ii) पूँजी का निर्बाध प्रवाह—ऐसा वातावरण कायम करना जिससे विभिन्न . देशों में पूँजी का प्रवाह स्वतंत्र रूप से हो सके । इसका अर्थ यह हुआ कि विदेशी पूँजीपति अब भारत में निवेश कर सकते हैं और भारतीय पूँजीवादी विदेशों में निवेश कर सकते हैं

(iii) प्रौद्योगिकी का निर्बाध प्रवाह ऐसा वातावरण कायम करना कि प्रौद्योगिकी का निर्बाध या बिना बाधा के प्रवाह हो सके। इसका मतलब है कि बिना किसी प्रतिबंध के किसी भी देश से प्रौद्योगिकी आयात कर सकते हैं।

(iv) श्रम का निर्बाध प्रवाह – ऐसा वातावरण कायम करना कि विभिन्न देशों में श्रम का निर्बाध प्रवाह हो सके। ऐसा देखने को मिल रहा है कि विकसित देश राष्ट्र श्रम के निर्बाध प्रवाह में बाधाएँ उत्पन्न कर रहे हैं ।

 

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प्रश्न 7. वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारकों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने वाले दो मुख्य कारक हैं-

(i) प्रौद्योगिकी में प्रगति प्रौद्योगिकी के मामले में हमने काफी विकास किया है। प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया है । आज हम ऐसे प्रौद्योगिकी के युग में जी रहे हैं जब समय व अंतराल की दूरियाँ सिमट गई हैं और दुनिया एक वैश्विक गाँव बन गई है । यातायात व दूरसंचार के क्षेत्र में हुई प्रौद्योगिकी प्रगति ने भौगोलिक दूरियों को पार करने में न सिर्फ समय कम कर दिया है, बल्कि खर्च भी घटा दिया है ।
परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति हुई है इसने लंबी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर संभव किया है । अब माल ढोने के लिए कंटेनरों का उपयोग किया जाता है । जिसमें माल के ढुलाई लागत में कमी आयी है । इसी प्रकार रेल एवं हवाई यातायात की लागत में गिरावट आयी है । जिससे वायुमार्ग से अधिक मात्रा में वस्तुओं का परिवहन संभव हुआ है । सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को काफी तेज किया है। दूरसंचार सुविधाओं (टेलीफोन, मोबाईल फोन, फैक्स) के द्वारा हम दुनिया के किसी भी कोने से तुरंत सम्पर्क बना सकते हैं । इसमें संचार उपग्रहों ने काफी मदद किया है I आज कम्प्यूटर का प्रवेश घर-घर में हो रहा है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में . कम्प्यूटर का प्रवेश हो गया है । आज इंटरनेट की दुनिया है जहाँ हम जो चाहते हैं, घर के कोने में बैठे-बैठे दुनिया की सारी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। इसके द्वारा हम तुरंत इलेक्ट्रॉनिक डाक (ई-मेल भेज सकते हैं और कम मूल्य पर दुनिया भर में बात कर सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग वैश्वीकरण का प्रक्रिया में मददगार सिद्ध हो रहा है I इस तरह हम देखते हैं कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने लोगों को नजदीक लाकर वैश्वीकरण की प्रक्रिया को काफी तेज किया है !

(ii) विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश का उदारीकरण-अपनी योजना को शुरू के वर्षों में भारत ने अपने यहाँ विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था । यही नीति घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए थी । सन् 1991 से उदारीकृत व्यापारी नीति प्रारंभ की गई, विदेश व्यापार एवं हटा दिया गया। दूसरे शब्दों में अब आयात-निर्यात बेरोक-टोक किया जा सकता विदेशी निवेश पर से अवरोधकों (जैसे आयात पर कर आदि) को काफी हद तक था । विदेशी कंपनियाँ यहाँ पर अपने कार्यालय और कारखाने स्थापित कर सकती थी । अवरोधों को हटाने की प्रक्रिया को उदारीकरण का नाम दिया गया ।

 

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