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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Economics Subjective Question Class 10th Subjective Question

Matric Economics Rojagar Avam Sevaen Subjective Questions [ अर्थशास्त्र ] रोजगार एवं सेवाएं सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

अर्थशास्त्र ( Economics) रोजगार एवं सेवाएं लघु और दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Economics अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10thEconomics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th अर्थशास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Economics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Economics Rojagar Avam Sevaen Subjective Questions [ अर्थशास्त्र ] रोजगार एवं सेवाएं सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

                                            लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. सरकारी सेवा किसे कहते हैं ?.

उत्तर ⇒ जब देश या राज्य की सरकार काम के बदले वेतन देते हैं और इनसे विभिन्न क्षेत्रों में काम लेते हैं, तो इसे सरकारी सेवा की सूची में रखा जाता सरकारी सेवा के कुछ व्यापक क्षेत्र का उदाहरण इस प्रकार है। सैन्य सेा, शिक्षा सेवा, स्वास्थ्य सेवा, अभियंत्रण सेवा, वित्त सेवा आदि ।

प्रश्न 2. आर्थिक आधारभूत संरचना का क्या महत्त्व है ?

उत्तर ⇒ भारत में बुनियादी सुविधाएँ को विकसित करने का परंपरा के तौर पर सरकार का ही पूरा दायित्व था । इसी कारण 1991 के बाद आर्थिक सुधारों के दौर में निजी क्षेत्र में भी स्वयं एवं सरकार के साथ संयुक्त भागीदारी कर आधारभूत संरचना के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है । आज संयुक्त रूप से आधारभूत संरचना में निवेश हो रहा है तथा इसकी स्थिति में भी काफी सुधार हुआ है । परन्तु खासकर आर्थिक दृष्टिकोण से अपेक्षाकृत पिछड़े राज्यों में तो बहुत ही कम बुनियादी सुविधाओं का विकास हो पाया है ।

प्रश्न 3. आधारभूत संरचना किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ आधारभूत संरचना एक ऐसी सुविधा है जो देश के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। बेहतर बुनियादी सुविधाएँ ही आर्थिक विकास को बेहतर बना सकती है ।

प्रश्न 4. बाह्य स्रोती (Out Sourcing) किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ जब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों या अन्य कम्पनियाँ अपने लिए सम्बन्धिता नियमित स्वयं अपनी कम्पनी की बजाए किसी विदेशी या बाहरी स्रोती अथवा संस्था या समूह से प्राप्त करती है, यह स्थिति बाह्य स्रोती कही जाती है। सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रसार से ऐसी गतिविधियाँ अत्यधिक महत्त्वपूर्ण और विशिष्ट आर्थिक गतिविधियाँ बन गयी हैं। दूरसंचार, यातायात, स्वास्थ्य, स्वरोजगार तथा अन्य गैर सरकारी सेवाएँ आती सेवा क्षेत्र का महत्त्व रोजगार प्राप्ति में काफी है। सेवा क्षेत्र का विस्तार जितना ही ज्यादा होगा रोजगार के अवसर उतना ही बढ़ेगा।

प्रश्न 5. ‘रोजगार’ और ‘सेवा’ में क्या संबंध है ?

उत्तर ⇒ रोजगार एवं सेवा का अर्थ इन बातों से है जब व्यक्ति अपने परिश्रम एवं शिक्षा के आधार पर जीविकोपार्जन के लिए धन एकत्रित करता है जब इस धन को पूँजी के रूप में व्यवहार किया जाता है और उत्पादन के क्षेत्र में निवेश किया जाता है तो सेवा उत्पन्न होता है । अतः, रोजगार एवं सेवा क्षेत्र एक-दूसरे के परस्पर हैं ।

प्रश्न 6. गैर-सरकारी सेवा किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ जब सरकार अपने द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों को गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग से लोगों तक पहुँचाने का कार्य करती है अथवा लोग अपनी प्रयास से ऐसी सेवाओं के सृजन से लाभान्वित होते हैं । उन्हें गैर सरकारी सेवा के अंतर्गत रखा जाता है । |

प्रश्न 7. सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े पाँच सेवा क्षेत्र को बतलाएँ ।

उत्तर ⇒ वस्तुत: सूचना प्रौद्योगिकी ( Information Technology) के व्यापक प्रसार से काफी महत्त्वपूर्ण और विशिष्ट आर्थिक गतिविधियाँ बन गई है । भारत में होटल व्यापार परिवहन अथवा यातायात एवं संवाद वाहन सेवाएँ काफी तेजी से बढ़ी है। इनमें भी टेलीफोन विशेषकर मोबाइल फोन का सर्वाधिक योगदान रहा

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन रोजगार एवं सेवाएं

प्रश्न 8. मंदी का असर भारत में क्यों पड़ा ?

उत्तर ⇒ भारत पर इसका असर कम पड़ा क्योंकि यहाँ की पूँजी बाजार काफी हुए मजबूत अवस्था में अभी है । यहाँ के इंजीनियर आज भी बाह्य स्रोतों में लगे हैं। खासकर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र काफी मजबूत है और पूरे विश्व में हमारे इंजीनियर का स्थान अव्वल है। हमारा आधारभूत संरचना कमजोर होने के बाद भी वर्तमान मंदी का असर भारत पर नहीं पड़ा ।

प्रश्न 9. वैश्वीकरण का प्रभार सेवा क्षेत्र पर क्या पड़ा ?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण के कारण लोगों को आर्थिक विकास क्षेत्र के खासकर सेवा क्षेत्र का लाभ प्रत्यक्ष रूप से मिलने लगा । लोगों को दूसरे राष्ट्र में जाकर रोजगार करने का खुला अधिकार प्राप्त हो गया । आलोचकों के अनुसार वैश्वीकरण से श्रम बाजार में श्रमिक संगठनों की भूमिका नगण्य हो जायेगी और आम लोग विकास के क्षेत्र में केवल मूक दर्शक ही रह जायेंगे। धीरे-धीरे यह मान्यता लोगों के मत में बदलाव आ रहा है और लोग उदारवादी इन नीतियों के लाभ समझने लगे हैं।

प्रश्न 10. नागरिक सेवाएँ क्या हैं ?

उत्तर ⇒ सामाजिक चेतना, सफाई, सामाजिक मान्यता का सम्मान नागरिक सेवाओं के अंतर्गत आता है ।

प्रश्न 11. आर्थिक विकास के मुख्यतः कितने क्षेत्र हैं ?

उत्तर ⇒ आर्थिक विकास के मुख्यतः तीन क्षेत्र हैं-

(i) कृषि क्षेत्र

(ii) उद्योग क्षेत्र और

(iii) सेवा क्षेत्र ।

प्रश्न 12. सेवा क्षेत्र का विकास क्यों हुआ ?

उत्तर ⇒ सेवा क्षेत्र का विकास कृषि एवं उद्योग में पाई जाने वाली अनिश्चितता के कारण हुआ ।

प्रश्न 13. भारत में बेरोजगारी में कैसे कमी आई ?

उत्तर ⇒ भारत में योजनात्मक विकास के क्रम में सेवा क्षेत्र का पर्याप्त विकास एवं विस्तार हुआ है, जिसके कारण बेरोजगारी में कमी आयी है

प्रश्न 14. कुशल मानव पूंजी का रोजगार में क्या योगदान है।

उत्तर ⇒ कुशल मानव पूँजी रोजगार के विभिन्न क्षेत्र को जन्म देता है । भारतवर्ष को आज इस क्षेत्र में खासकर सूचना तकनीक में विश्व के अव्वल देशों में गिनती की जा रही है।

प्रश्न 15. सरकार और निजी दोनों के ही सहयोग से चलने वाली सेवाएँ कौन-कौन सी हैं ?

उत्तर ⇒ सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं में कुछ ऐसी सेवाएँ हैं, जिसका विकास सरकार एवं निजी दोनों के सहयोग से किया जा रहा है। जैसे -यातायात सेवा, दूरसंचार सेवा, बैंकिंग सेवा, स्वास्थ्य सेवा इत्यादि प्रमुख उदाहरण हैं

प्रश्न 16. सेवा क्षेत्र के विस्तार में ‘गुणवत्ता में वृद्धि’ के महत्त्व को दर्शाएँ ?

उत्तर ⇒ जब किसान अपने उत्पादन को अपने श्रम एवं दक्षता के कारण गुणवत्ता में वृद्धि करता है, तो उससे रोजगार के नये आयाम खुलते हैं, जिससे सेवा इससे का विस्तार होता है । और जब वस्तु की गुणवत्ता वृद्धि की जाती है तो उसे ऊँची कीमत पर बेचा जा सकता है। उत्पादन में गुणवत्ता के इस वृद्धि को Value Aided कहते हैं ।

प्रश्न 17. विकसित राष्ट्र ही आर्थिक मंदी के शिकार हुए, कैसे ?

उत्तर ⇒ विकसित राष्ट्र की आधारिक संरचना में कृषि और कृषि जनित उद्योग का अभाव था जिसके कारण सीधा प्रभाव विकसित राष्ट्रों पर पड़ा । यही कारण है कि विकसित राष्ट्रों से तकनीकी वैज्ञानिकों को छाँटकर रोजगार से मुक्त किया गया । उत्पादकों को उत्पादन क्रिया शिथिल करना पड़ा। इस प्रकार कई वित्तीय संस्थाओं को अमेरिका को बंद करना पड़ा। इस प्रकार वर्त्तमान मंदी का प्रभाव विकसित राष्ट्रों पर प्रतिकूल पड़ा।

प्रश्न 18. रोजगार सृजन में सेवाओं की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ सेवा का क्षेत्र सरकारी हो या गैर-सरकारी दोनों ही परिस्थितियों में रोजगार का सृजन होता है । सरकारी क्षेत्र के सहयोग से रोजगार का सृजन निम्न सेवाओं के द्वारा किया जाता है। काम के बदले अनाज- 2004, राष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रम – 1980, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम – 1983, युवा स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम – 1980, समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम – 1980, जवाहर रोजगार योजना, स्वर्ण सहायता समूह, नरेगा इत्यादि ।

 

Economics Rojagar Avam Sevaen Subjective Question Answer pdf hindi

 

प्रश्न 19. बिहार की आर्थिक प्रगति को प्राकृतिक आपदा प्रभावित करती है, वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ विगत कुछ वर्षों में बिहार में आर्थिक प्रगति परिलक्षित होने लगे हैं, किन्तु प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा विकास में बाधा के रूप में उभरती रहती है । सड़क का विस्तार एवं स्वास्थ्य सेवाएँ प्रगति पर होती है पर बाढ़ के कारण सड़कें पुन: जर्जर या फिर खत्म हो जाती हैं। कभी बाढ़ की धारा मुख्य मार्ग होती है तो कभी आबादी वाले क्षेत्र । इस प्रकार यह आपदा एक अवरोधक की तरह कार्य करती है पर सेवा क्षेत्र के लगातार प्रयासों से सकारात्मक विकास संभव हो सका है।

प्रश्न 20. बीमारू ( BIMARU) शब्द से क्या अभिप्राय है ? इससे प्रभावित होनेवाले राज्यों के नाम बताएँ ।

उत्तर ⇒ भारत के काफी पिछड़े राज्यों जिन्हें बीमारू के नाम से जाना जाता है वे हैं – बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि । इन राज्यों में बुनियादी सुविधाएँ जैसे बिजली, सिंचाई, यातायात, परिवहन, दूरसंचार इत्यादि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। बीमारू शब्द से नकारात्मक ध्वनि व्यक्त होने के कारण ये राज्य इस नाम से पुकारा जाता है। योजना आयोग भी इस नाम को स्वीकार नहीं करती। ऐसे भी इन राज्यों में खासकर बिहार आर्थिक विकास की ओर उन्मुख हुआ है जिसके कारण लोग अब ‘बीमारू’ नाम से परहेज करते हैं ।

प्रश्न 21. मानव संसाधन किस प्रकार सुदृढ़ एवं सशक्त हो सकती है ? वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ मानव संसाधन के सुदृढ़ एवं सशक्त करने हेतु यदि परिश्रम द्वारा जनसंख्या के समग्र भाग को पर्याप्त भोजन, तन पर वस्त्र एवं सर छिपाने के लिए आवास, इन तीन प्रारंभिक आवश्यकताएँ को पूरा कर दिया जाए तो समस्या का आधा समाधान संभव हो जाता है। पुनः सबल बनाने के लिए अगर स्वास्थ्य पर जोर देने की आवश्यकता है तो ये चार अवयवों के सहयोग एवं शिक्षा के माध्यम उसे उस स्तर तक पहुँचाया जा सकता है, जो कि आर्थिक विकास का एक सुदृढ़ सूचक बन जायेगा । इसी सूचक का ही देन है कि जो पूँजी का निर्माण करेगा और आर्थिक विकास का परचम पूरे विश्व में लहरायेगा ।

प्रश्न 22. वैश्वीकरण, निजीकरण एवं उदारीकरण आर्थिक विकास को नये आयाम दिए हैं। कैसे ?

उत्तर ⇒ वैश्वीकरण, निजीकरण एवं उदारीकरण के कारण सेवा क्षेत्र का लाभ प्रत्यक्ष रूप से मिलने लगा है । लोगों को दूसरे राष्ट्र में जाकर रोजगार करने का खुला अधिकार प्राप्त हो गया है । यद्यपि आर्थिक विचारकों का ऐसा समूह भी है जो मानता है कि वैश्वीकरण, निजीकरण और उदारीकरण से आम आदमी का जीवन कठिन हो जायेगा । कुछ हद तक इस आलोचना में बल भी है, क्योंकि वैश्वीकरण एवं उदारीकरण से श्रम व्यापार में श्रमिक संघटकों की भूमिका नगण्य हो जायेगी और आम लोग विकास के क्षेत्र में मूक दर्शक ही रह जायेंगे । धीरे-धीरे इस मान्यता के लोगों के मत में बदलाव आ रहा है और लोग उदारवादी इन नीतियों को समझने लगे हैं ।

                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. विश्व के लिए भारत सेवा प्रदाता के रूप में किस तरह जाना जाता है ? उदाहरण सहित लिखें।

उत्तर ⇒ भारत विश्व में दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। अतः, यहाँ मानव संसाधन सर्वाधिक मात्रा में उपलब्ध है। उदारीकरण के बाद अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भारत में अपने उत्पादों के लिए कारखाने खोले जिसमें सर्वाधिक भारतीयों ने सेवा प्रदान किया।
देश के बाहर भी भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक इत्यादि के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। बाह्यस्रोती रोजगार के कारण भी भारतीयों को कॉल सेंटर इत्यादि में लाखों की संख्या में रोजगार मिले हैं। भारत में उत्तम एवं सस्ता श्रम उपलब्ध होने के कारण विदेशी कम्पनियों का जमघट शुरू हो गया है। विश्व के लिए भारत एक उत्तम सेवा प्रदाता के रूप में जाना जाता है। लगातार विदेशी पूँजी निवेश, कॉल सेंटरों का विस्तार इत्यादि इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं ।

प्रश्न 2. गैर-सरकारी संस्था किस प्रकार सेवा क्षेत्र के विकास को सहयोग करता है, उदाहरण लिखें ।

उत्तर ⇒ जब सरकार अपने द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों को गैर-सरकारी संस्थाएँ के सहयोग से लोगों तक पहुँचाने का काम करती है अथवा लोग स्वयं अपने प्रयास से ऐसी सेवाओं के सृजन से लाभांवित होते हैं तो उसे गैर-सरकारी सेवा के अंतर्गत रखा जाता है । इस क्षेत्र के भी कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं- ब्यूटी पार्लर, दूरसंचार सेवाएँ, बैंकिंग सेवाएँ, स्वरोजगार सेवाएँ, बस सेवा, विमान सेवा इत्यादि । इनमें से कुछ सेवाएँ ऐसी हैं जो सरकारी एवं गैर-सरकारी दोनों ही स्तर पर चलाई जाती हैं । खासकर यातायात सेवाएँ शिक्षा सेवाएँ, स्वास्थ्य सेवाएँ, दूरसंचार सेवाएँ, बैंकिंग सेवाएँ इत्यादि का क्षेत्र इतना व्यापक है कि सरकार अकेले सक्षम नहीं है ।

 

Economics Subjective Question Answer

 

प्रश्न 3. वर्त्तमान आर्थिक मंदी का प्रभाव भारत के सेवा क्षेत्र पर क्या पड़ा ? लिखें ।

उत्तर ⇒ वर्तमान मंदी के कारण सेवा क्षेत्र काफी प्रभावित हुआ है। उपभोक्ता की मांग बढ़ी है, परन्तु उत्पादकों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इन उत्पादकों को लागत मूल्य से भी कम आय प्राप्त हो रहा है। यही कारण है कि विकसित राष्ट्रों से तकनीकी वैज्ञानिकों को छँटनी कर रोजगार से मुक्त कर दिया गया | इसका प्रभाव भारत के उन वैज्ञानिकों पर भी पड़ा जो दूसरे राष्ट्र में रोजगार कर रहे हैं। उत्पादकों को उत्पादन क्रिया शिथिल करना पड़ गया । अत्यधिक घाटे के कारण विकसित राष्ट्रों में आत्महत्या करने जैसी घटनाएँ होने लगी। कई वित्तीय संस्थाओं को अमेरिका में अपनी सेवा बन्द कर देनी पड़ी। भारत की सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की मजबूती के कारण आर्थिक मंदी का प्रभाव कम पड़ा है। पर, बिहार राज्य में आर्थिक मंदी का प्रभाव देखने को मिल रहा है । हमारे राज्य के जो इंजीनियर मंदी पड़े राष्ट्र में रोजगार में थे उन्हें वहाँ से निकाल दिया गया, फलस्वरूप नये रोजगार हासिल करने की आवश्यकता आ गई । उन राष्ट्रों से जो आय हमारे राष्ट्र में आता था वह घट गया ।
मंदी की वर्तमान दौर में इस बात की आवश्यकता होने लगी कि बिहार में कृषि और कृषि जन उद्योगों को अत्यधिक मजबूत बनाया जाए। हालांकि वर्तमान मंदी का बुरा प्रभाव भारत में उतना नहीं देखने को मिला पर इसका बुरा प्रभाव विकसित देशों पर पड़ा है। भारतीय पूँजी बाजार की मजबूती मानवीय श्रम की उच्च दक्षता एवं विशाल श्रमशक्ति के कारण यह आशा व्यक्त किया जाने लगा है कि 21वीं शताब्दी में भारत विकास की उच्चतम सीमा पर पहुँचकर विश्व के अत्यधिक विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ जायेगा ।

प्रश्न 4. आधारिक संरचना पर प्रकाश डालें ।
अथवा, आर्थिक संरचनाओं में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल किये गये

उत्तर ⇒ आर्थिक आधारभूत संरचनाएँ प्रत्यक्ष रूप से उत्पादन एवं लोगों की खुशहाली में वृद्धि करती है। आर्थिक विकास के सभी क्षेत्रों से इसका संबंध होता है । आर्थिक संरचनाएँ के अंतर्गत निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता वित्त (Finance) बैकिंग क्षेत्र बीमा क्षेत्र, अन्य सरकारी वित्तीय क्षेत्र । ऊर्जा (Energy)—कोयला, विद्युत, तेल, पेट्रोलियम गैस, गैर-पारंपरिक ऊर्जा एवं अन्य । यातायात (Transport) रेलवे, सड़कें, वायुयान, जलयान संचार ( Telecom) – डाक, तार, टेलीफोन, टेली – संचार, मीडिया एवं अन्य । आज संयुक्त रूप से आधारभूत संरचना में निवेश हो रहा है, जिससे इसको आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है । परन्तु, ग्रामीण भारत में विश्व के उच्च तकनीकि उन्नति के बावजूद भी आधारभूत संरचनाओं की सुविधाओं का एकदम अभाव है। खासकर आर्थिक दृष्टिकोण से अपेक्षाकृत पिछड़े राज्यों में तो बहुत हो कम बुनियादी सुविधाओं का विकास हो पाया है

प्रश्न 5. आर्थिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों की विवेचना कीजिए। सेवा क्षेत्र में शिक्षा की क्या भूमिका है ?

उत्तर ⇒ एक देश के आर्थिक विकास के लिए तीन क्षेत्रों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है । तीनों को विकसित किए बिना देश का आर्थिक विकास नहीं हो
सकता । आर्थिक विकास के प्रमुख तीन क्षेत्र हैं –

(i) प्राथमिक क्षेत्र,

(11) द्वितीयक क्षेत्र,

(iii) तृतीयक क्षेत्र / सेवा क्षेत्र ।

(i) प्राथमिक क्षेत्र – प्राथमिक क्षेत्र में कृषि व उससे सम्बन्धित क्रियाओं को शामिल किया जाता है, जैसे-फलों का उत्पादन, वनोत्पादन, पशुपालन, मछली पालन इत्यादि ।

(ii) द्वितीयक क्षेत्र- इस क्षेत्र में निर्माण एवं विनिर्माण को सम्मिलित किया जाता है । इसमें छोटे व बड़े उद्योगों की क्रियाओं को शामिल किया जाता है, जैसे- विद्युत् उत्पादन, गैस उत्पादन, जलापूर्ति एवं अन्य ।

(iii) तृतीयक क्षेत्र/ सेवा क्षेत्र – इस क्षेत्र में सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है । जैसे- परिवहन, भंडारण, संचार, होटल एवं व्यापार, बैंकिंग एवं बीमा, लोक प्रशासन एवं सामाजिक सामुदायिक एवं वैयक्तिक सेवाएँ आदि ।
सेवा क्षेत्र में शिक्षा की भूमिका सेवा क्षेत्र में शिक्षा की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षित व्यक्ति इस क्षेत्र में अपने कार्य को सही गति प्रदान करते हैं। क्योंकि शिक्षा लोगों को कौशल सिखाती है अतः वस्तुओं के उत्पादन में गुणवत्ता की दृष्टि से शिक्षा काफी महत्वपूर्ण है । जिस प्रकार एक कारखाने के निर्माण में निवेश करने से परिणाम प्राप्त होते हैं ठीक उसी प्रकार शिक्षा साधनों में निवेश से देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त होते हैं

प्रश्न 6. सेवा क्षेत्र में सरकारी प्रयास क्या किये गये हैं? वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ सेवा क्षेत्र में लगातार सेवाओं का सृजन किया जा रहा है, जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार के उद्योगों का विस्तार हो रहा है, नये-नये कल-कारखाने खोले जा रहे हैं, इनके लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जा रहा है। इन संरचनाओं के विकास के लिए हमें प्रशिक्षित और अप्रशिक्षितों की आवश्यकता होती है और यही मानव पूँजी के धरोहर होते हैं। मानव पूँजी को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए शिक्षा क्षेत्र के विकास पर व्यापक स्तर पर प्रयास करना पड़ता है । जितना ही शिक्षा का स्तर मजबूत होगा, उतना ही अधिक मात्रा में मानव बल का प्रयोग आधुनिक उद्योग-धंधों में किया जायेगा । जिससे हमारा उत्पादन बढ़ेगा और लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल होगा । सरकार का अनुमान है कि देश के बेरोजगार लोगों के करीब 62% लोगों की योजनाओं के द्वारा रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। सेवा क्षेत्र के विस्तार के द्वारा अनुमान है कि 38% शहरी बेरोजगारी दूर किया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी आनेवाली कठिनाई को दूर कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देने के सशक्त योजना बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं ।

प्रश्न 7. सेवा क्षेत्र पर एक संक्षिप्त लेख लिखें ।

उत्तर ⇒ सेवा क्षेत्र के विकास के लिए देश एवं राज्य स्तर पर बुनियादी सुविधाएँ का होना नितांत आवश्यक है, तथा सेवा क्षेत्र का विस्तार, रोजगार का अवसर देगा । सेवा क्षेत्र के विकास के लिए मनुष्य को शिक्षित करना नितांत आवश्यक है । समृद्ध मानव पूँजी ही सशक्त श्रम शक्ति को जन्म देता है, जिसके कारण लोग रोजगार पाने में सक्षम हो जाते हैं । तब लोग हीन भावना से ऊपर उठकर देश और राज्य के हित में काम करना प्रारंभ करते हैं जिससे विकास भाव परिलक्षित होता है । राज्य स्तर पर भी सेवा क्षेत्र की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है सरकारी और गैर-सरकारी दोनों ही स्तर पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिससे काफी लोग लाभान्वित हुए हैं और हो रहे हैं। सेवा क्षेत्र को सामान्यतः दो भागों में
विभक्त किया गया है –

(क) सरकारी क्षेत्र-सरकारी सेवा क्षेत्र का उदाहरण इस प्रकार है इसके अन्तर्गत सरकार सेवा के बदले मासिक वेतन देती है । सैन्य सेवा, शिक्षा सेवा, स्वास्थ्य सेवा, अभियंत्रण सेवा, वित्त सेवा, बैंकिंग सेवा इत्यादि ।

(ख) गैर-सरकारी क्षेत्र – गैर – सरकारी क्षेत्र में लोग स्वयं अपने प्रयास से ऐसी सेवाओं के सृजन से लाभान्वित होते हैं, तो उसे गैर-सरकारी सेवा के अंतर्गत रखा जाता है जैसे- ब्यूटी पार्लर, दूरसंचार, बैंकिंग सेवा, स्वरोजगार बस सेवा, विमान सेवा आदि । इस प्रकार सेवा क्षेत्र लगातार विकास की ओर अग्रसर है ।

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 8. रोजगार एवं सेवाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं, कैसे ?

उत्तर ⇒ रोजगार एवं सेवाएँ’ का अभिप्राय यहाँ इस बात से है कि जब व्यक्ति अपने परिश्रम एवं शिक्षा के आधार पर जीविकोपार्जन के लिए धन एकत्रित करता है, जब एकत्रित धन को पूँजी के रूप में व्यवहार किया जाता है और उत्पादन के क्षेत्र में निवेश किया जाता है तो सेवा क्षेत्र उत्पन्न होता है । अतः, रोजगार एवं सेवा एक-दूसरे के परस्पर सहयोगी हैं । आर्थिक प्रगति के कारण देश के विकास के साथ सेवा क्षेत्र का विस्तार होता है जिसके फलस्वरूप लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर उपलब्ध होते हैं। सेवा क्षेत्र के विकास में शिक्षा की नितांत आवश्यकता है, जिसके कारण लोग रोजगार पाने में सक्षम हो पाते हैं तथा हीन भावना से उठकर देश व राज्य के हित में काम करना प्रारंभ करते हैं जिससे विकास का भाव परिलक्षित होता है । सेवा क्षेत्र का विस्तार ही रोजगार के अवसर को जन्म देता है । उदाहरण से स्पष्ट है कि कोई किसान अपने खेतों में धान उपजाता है, उसमें मेहनत कर चावल प्राप्त करता है। अगर वह किसान अपने घर में चावल चुनकर उसे साफ-सुथरा कर एक किलो का पॉलिथिन पैकेट बनाकर बाजार में बेचने का कार्य करता है तो उसे प्रारंभ से लेकर अंत तक रोजगार मिल जाता है। अगर व्यापार करना चाहता है तो व्यापक स्तर पर कर सकता है, जिसमें अधिक से अधिक किसानों को रोजगार मुहैया करा सकता है। यदि किसान इससे संबंधित तकनीकि जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त करता है तो अपनी आमदनी और भी बढ़ा सकता है इस प्रकार रोजगार एवं सेवा एक – दूसरे के पूरक हैं

 

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