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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
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Matric Economics Raajy Avam Rashtr Ki Aay Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] राज्य एवं राष्ट्र की आय सब्जेक्टिव क्वेश्चन

अर्थशास्त्र ( Economics) राज्य एवं राष्ट्र की आय लघु और दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Economics अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10thEconomics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th अर्थशास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Economics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Economics Raajy Avam Rashtr Ki Aay Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] राज्य एवं राष्ट्र की आय सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

                                            लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. प्रतिव्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में क्या अंतर है ?
प्रतिव्यक्ति आय क्या है ? प्रतिव्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में क्या संबंध है ?

उत्तर ⇒ प्रतिव्यक्ति आय किसी देश के नागरिकों की औसत आय है। कुल राष्ट्रीय आय में कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो भागफल आता है, उसे प्रतिव्यक्ति आय कहते हैं। इस प्रकार, प्रतिव्यक्ति आय की धारणा राष्ट्रीय आय से जुड़ी हुई है । राष्ट्रीय आय में वृद्धि होने पर प्रतिव्यक्ति आय में भी वृद्धि होती है। लेकिन, केवल राष्ट्रीय आय में वृद्धि होने से ही प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि नहीं होगी। यदि आय में होनेवाली वृद्धि के साथ ही किसी देश की जनसंख्या भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है तो प्रतिव्यक्ति आय नहीं बढ़ेगी ओर लोगों के जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं होगा । इसी प्रकार, यदि राष्ट्रीय आय की तुलना में जनसंख्या की वृद्धि दर अधिक है तो प्रतिव्यक्ति आय घट जाएगी।

प्रश्न 2. आय का गरीबी के साथ संबंध स्थापित करें।-

उत्तर ⇒ आय का गरीबी के साथ सीधा सम्बन्ध है । यदि आय कम होगी तब गरीबी उतनी ही अधिक होगी। जीवन-स्तर निम्न होगा और पूँजी का निर्माण भी नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही गरीबी – ही – गरीबी को जन्म देगी। बिहार राज्य इसका उदाहरण है जिसमें प्रति व्यक्ति आय कम होने से गरीबी सर्वाधिक है।

प्रश्न 3. प्रति व्यक्ति आय क्या है ?

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय में देश की कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो भागफल आता है उसे प्रति व्यक्ति आय कहते हैं ।
इसका आकलन निम्न प्रकार से की जाती है- प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय देश की कुल जनसंख्या

प्रश्न 4. राष्ट्रीय आय की गणना में होनेवाली कठिनाईयों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय के आधार पर ही विश्व के विभिन्न देशों को हम विकसित, विकासशील और अर्धविकसित राष्ट्रों की श्रेणी में मूल्यांकन करते हैं। यद्यपि राष्ट्रीय आय राष्ट्र की आर्थिक स्थिति को मापने का सर्वमान्य माप है । फिर भी हमें व्यवहारिक रूप में राष्ट्रीय आय की गणना करने में अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है जिसे हम निम्न प्रकार से व्यक्त करते हैं-

(i) आंकड़ों को एकत्र करने में कठिनाई ।

(ii) दोहरी गणना की संभावना ।

(iii) मूल्य के मापने में कठिनाई ।

प्रश्न 5. सकल घरेलू उत्पाद से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर⇒ एक देश की सीमा के अन्दर किसी भी दी गई समयावधि प्रायः एक वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का कुल बाजार या मौद्रिक मूल्य को उस देश का सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है।

प्रश्न 6. आय से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ शारीरिक अथवा मानसिक कार्य करने के फलस्वरूप किसी व्यक्ति को जो पारिश्रमिक मिलता है, वह पारिश्रमिक उस व्यक्ति का आय कहलाता है। व्यक्ति को प्राप्त होने वाला मौद्रिक रूप अथवा वस्तुओं के रूप में भी हो सकता है।

प्रश्न 8. N.S.S.O. के विस्तारित रूप लिखें।

उत्तर ⇒ National Sample Survey Organisation (राष्ट्रीय सेंपल सर्व संगठन) ।

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन राज्य एवं राष्ट्र की आय

 

प्रश्न 9. G. N.P. के विस्तारित रूप लिखें।

उत्तर ⇒ Gross National Product.

प्रश्न 10. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना किस संस्था द्वारा होती है ?

उत्तर ⇒ देश के आय के मानक को निर्धारित करने वाली संस्था जिसे डायरेक्टोरेट ऑफ इकोनॉमिक्स एण्ड स्टेटिस्टिक्स कहते हैं ।

प्रश्न 11. भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय की गणना कब और किनके द्वारा की गई थी ?

उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के लिए कोई विशेष प्रयत्न नहीं किए गये थे। भारत में सबसे पहले सन् 1868 में दादाभाई नौरोजी ने राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाया था । उन्होंने अपनी पुस्तक “Poverty and Un-British Rule in India” में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 20 रुपये बताया था।

प्रश्न 12. भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय की गणना कब और किसके द्वारा की गई थी ? योजनाकाल में भारत की राष्ट्रीय आय में वृद्धि का अनुमान बताएँ ।

उत्तर⇒ स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व भारत में राष्ट्रीय आय की गणना करने का कोई सर्वमान्य तरीका नहीं था। संभवतः, सर्वप्रथम दादाभाई नौरोजी ने 1868 में अपनी पुस्तक में भारत की राष्ट्रीय आय 340 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया था। स्वतंत्रता – प्राप्ति के पश्चात पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत 1951-52 से भारत में नियमित रूप से राष्ट्रीय आय और इससे संबंधित तथ्यों का अनुमान लगाया जाता है। योजनाकाल में भारत की राष्ट्रीय आय में सामान्यतया वृद्धि हुई है। 1950-51 से 2002-03 के बीच राष्ट्रीय आय एवं कुल राष्ट्रीय उत्पादन 8 गुना से भी अधिक बढ़ गया है। इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वार्षिक विकास दर औसतन 4.2% रही है । वर्त्तमान मूल्यों पर 2006-07 में भारत की कुल आय 33, 25,817 करोड़ रुपये होने का अनुमान था।

प्रश्न 13. व्यवसायिक गणना विधि क्या है ?

उत्तर ⇒ जब व्यवसायिक संरचना के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है, उसे व्यवसायिक गणना विधि कहते हैं ।

प्रश्न 14. शुद्ध उत्पत्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय वास्तव में देश के अंदर पूरे वर्ष भर में उत्पादित उत्पत्ति को कहा जाता है ।

प्रश्न 15. केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के क्या कार्य हैं ?

उत्तर ⇒भारत में सांख्यिकी विभाग के अंतर्गत केंद्रीय सांख्यिकी संगठन राष्ट्रीय आय के आकलन के लिए उत्तरदायी है। इस कार्य में राष्ट्रीय प्रतिवर्ष सर्वेक्षण संगठन, केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन का सहायता करता है

प्रश्न 16. वस्तु के मूल्य में विभिन्नता क्यों होती है ? .

उत्तर⇒ प्रायः एक ही वस्तु को कई व्यापारिक स्थितियों से गुजरने के कारण उस वस्तु के मूल्य में विभिन्नता आती है क्योंकि खर्च और विक्रेताओं की मुनाफे की राशि जुट जाती है।

प्रश्न 1.7. कुल राष्ट्रीय उत्पादन का पता कैसे लगाया जाता है ?

उत्तर ⇒ सकल घरेलू उत्पादन में देशवासियों द्वारा विदेशों में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को जोड़ दिया जाता है तथा विदेशियों द्वारा देश में उत्पादित वस्तुओं के मूल्य को घटा दिया जाता है ।

प्रश्न 18. राष्ट्रीय आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन क्यों जरूरी है ?

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय के आँकड़ों के संग्रहण के क्रम में यह आवश्यक होता है कि पूरे राष्ट्र के लिए एक ही मापदण्ड अपनाया जाए जिससे राष्ट्र की आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन किया जा सके ।

प्रश्न 19. अर्थशास्त्र में वितरण की धारणा से क्या समझते हैं ?
उत्तर ⇒ अर्थशास्त्र में वितरण की धारणा राष्ट्रीय आय का आकलन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है जिसे हम उत्पादन के विभिन्न साधनों की भागीदारी में हिस्सा लेने को कहते हैं । वास्तव में विभिन्न साधनों के सहयोग से राष्ट्रीय आय की प्राप्ति होती है और राष्ट्रीय आय को पुनः उन साधनों के बीच वितरित कर दिया जाता है ।

 

Economics Raajy Avam Rashtr Ki Aay Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 20 समाज का आर्थिक विकास कब संभव नहीं हो पाता ?

उत्तर⇒ जिस अनुपात में राष्ट्रीय आय में वृद्धि हो रही हो, उसी अनुपात या उससे अधिक अनुपात में अगर जनसंख्या में वृद्धि हो रही हो तो समाज का आर्थिक विकास नहीं बढ़ सकता । फिर भी इन परिस्थितियों के बावजूद यदि राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है, तो लोगों के आर्थिक विकास में वृद्धि साधारण तौर पर देखी जा सकती है ।

 

                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में अंतर स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय का मतलब किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से लगाया जाता है । दूसरे शब्दों में वर्ष भर में किसी देश में अर्जित आय की कुल मात्रा को राष्ट्रीय आय कहते हैं । राष्ट्रीय आय में देश की कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो भागफल आता है, उसे प्रति व्यक्ति आय कहते हैं । इसका आकलन निम्न प्रकार से की जाती है – प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय देश की कुल जनसंख्या है,

प्रश्न 2. राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें। इसकी गणना की प्रमुख विधियाँ कौन-कौन सी हैं ?

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय का अर्थ किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से लगाया जाता है। अर्थात्, वर्ष भर में किसी देश में अर्जित आय की कुल मात्रा को राष्ट्रीय आय कहते हैं ‘

इसे तीन प्रकार से गणना करते हैं –

(1) उत्पादन गणना विधि राष्ट्रीय आय की गणना अनेक प्रकार से की जाती है । चूँकि राष्ट्र के व्यक्तियों की आय उत्पादन के माध्यम से अथवा मौद्रिक आय के माध्यम से प्राप्त होता है, इसलिए इसकी गणना जब उत्पादन के योग के द्वारा किया जाता है, तो उसे उत्पादन गणना विधि कहते हैं ।

(2) आय गणना विधि- जब राष्ट्रों के व्यक्तियों की आय के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है तो उस गणना विधि को आय गणना विधि कहते हैं ।

(3) व्यय गणना विधि आय द्वारा व्यक्ति अपने उपभोग के लिए व्यय करता है, इसलिए राष्ट्रीय आय की गणना लोगों के व्यय के माप से किया जाता है। राष्ट्रीय आय की इस गणना को व्यय गणना विधि कहते हैं । मूल्य योग विधि – उत्पादित की हुई वस्तुओं का मूल्य विभिन्न परिस्थितियों में व्यक्तियों के द्वारा किए गए प्रयास से बढ़ जाता है, ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय आय की गणना को मूल्य योग विधि कहते हैं । व्यवसायिक गणना – व्यवसायिक संरचना के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है, व्यवसायिक आधार पर की गई गणना को व्यवसायिक गणना विधि कहते हैं

प्रश्न 3. क्या प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि राष्ट्रीय आय को प्रभावित करती है ? वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में परिवर्तन होने से इसका प्रभाव लोगों के जीवन-स्तर पर पड़ता है । राष्ट्रीय आय वास्तव में देश के अंदर पूरे वर्ष भर में उत्पादित शुद्ध उत्पत्ति को कहते हैं । लेकिन उत्पत्ति में वृद्धि तभी होगी जब उत्पादन में अधिक श्रमिकों को लगाया जाए । इस प्रकार जैसे-जैसे उत्पादन में वृद्धि होगी वैसे-वैसे बेरोजगार लोगों को अधिक रोजगार मिलेगा, श्रमिकों का वेतन बढ़ेगी तथा उनका जीवन-स्तर पूर्व की अपेक्षा बेहतर होगा। इस प्रकार प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होने से व्यक्तियों का विकास संभव हो सकेगा। यदि इस प्रकार राष्ट्रीय आय के सूचकांक में वृद्धि होती है तो इससे लोगों के आर्थिक विकास में अवश्य ही वृद्धि होगी ।

प्रश्न 4. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारतं सरकार ने कब और किस उद्देश्य से राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया ?

उत्तर ⇒ स्वतंत्रता – प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने अगस्त, 1940 ई० में प्रो० पी० सी० महालनोबिस की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय आम समिति का गठन किया जिसका उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय आय के संबंध में अनुमान लगाना था। इस समिति ने अप्रैल 1951 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें सन् 1948-49 के लिए देश की कुल राष्ट्रीय आय 8,650 करोड़ रुपये बताई गई तथा प्रति व्यक्ति आय 246.9 रुपये बताई गई। सन् 1954 के बाद राष्ट्रीय आय के आँकड़ों का संकलन करने के लिए सरकार ने केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन की स्थापना की। वह संख्या नियमित रूप से राष्ट्रीय आय के आँकड़े प्रकाशित करती है। राष्ट्रीय आय के सृजन में अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रों का विशेष योगदान होता है ।

प्रश्न 5. राष्ट्रीय आय में वृद्धि भारतीय विकास के लिए किस-किस तरह से लाभप्रद है ? वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ यदि विकास की क्रिया के तहत् अगर राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो रही है, तो विकास की प्रक्रिया बढ़ती जाती है ।
जनसंख्या में भारी वृद्धि तथा अन्य व्यवसायों में उस गति से विकास न होने के कारण विगत् वर्षों में भूमि पर जनसंख्या का भार निरंतर बढ़ता गया है, जिससे गरीबी और बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई। आज के आधुनिक युग में कृषि क्षेत्र में हुए सुधार, विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं अन्य क्षेत्रों में हो रहे गुणात्मक विकास के पश्चात् भी लोगों को रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता है, जिस कारण स्वभावतः यह बेरोजगारी प्रति व्यक्ति आय को कम करके गरीबी को बढ़ावा देती है। ठीक इसी परिपेक्ष्य में इस अतिरिक्त श्रम शक्ति के बोझ को कम करके और उसे गैर कृषि क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करके कृषि उद्योग, बेरोजगारी उन्मूलन और राष्ट्रीय विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं ।

 

Economics vvi Subjective Question answer Notes Hindi

 

प्रश्न 6. विकास में प्रति व्यक्ति आय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।

उत्तर ⇒ भारत जैसे बड़े देश में, जहाँ जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है यहाँ प्रति व्यक्ति आय कम है, अशिक्षा का स्तर ज्यादा है एवं भाषा, जीवनशैली और संस्कृति की बहुतायत है । इस बात का अहसास निरंतर बढ़ता जा रहा है कि विभिन्न आर्थिक-सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हम अपनी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करें । ऐसा करके ही हम अपने जीवन को खुशहाल तथा अपना जीवन-स्तर (standard of living) ऊँचा करा सकते हैं । यद्यपि पंचवर्षीय योजनाओं में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कायापलट के लिए अनेक उपाय किये गये हैं, पर जनसंख्या में भारी वृद्धि तथा अन्य व्यवसायों में उस गति से विकास न होने के कारण विगत् वर्षों में भूमि पर जनसंख्या का भार निरंतर बढ़ता गया है, जिससे गरीबी और बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई । आज के आधुनिक युग में कृषि क्षेत्र में हुई सुधार, विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं अन्य क्षेत्रों में हो रहे गुणात्मक विकास के पश्चात् भी लोगों को रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता है, जिस कारण स्वभावतः यह बेरोजगारी प्रति व्यक्ति आय को कम करके गरीबी को बढ़ावा देती है । ठीक इसी परिपेक्ष्य में इस अतिरिक्त श्रमशक्ति के बोझ को कम करके और उसे गैर कृषि क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करके कृषि उद्योग, बेरोजगारी उन्मूलन और राष्ट्रीय विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं ।

 

 

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