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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Civics Subjective Question Answer Class 10th Subjective Question

Matric Economics Mudra, Bachat Avan Saakh Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] मुद्रा, बचत एवं साख सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

अर्थशास्त्र ( Economics) मुद्रा, बचत एवं साख लघु और दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Economics अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10thEconomics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th अर्थशास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Economics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Economics Mudra, Bachat Avan Saakh Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] मुद्रा, बचत एवं साख सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

                                            लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. ATM क्या है ?

उत्तर ⇒ वर्तमान बैटबीकल के युग में आदान-प्रदान की समस्त क्रिया साख मुद्राओं द्वारा हो रही है। प्लास्टिक मुद्रा जिसे हम (ATM-Cum Debit Card) कहते हैं । इसे स्वचालित टेलर मशीन भी कहते हैं । यह मशीन 24 घंटे रुपया निकालने की सेवा प्रदान कराता है ।

प्रश्न 2. वस्तु विनिमय प्रणाली को परिभाषित कीजिए ।

उत्तर ⇒ जब दो पक्षों द्वारा एक वस्तु से दूसरी वस्तु का प्रत्यक्ष विनिमय किया जाता है तो इसे वस्तु विनिमय कहा जाता है ।

प्रश्न 3. मौद्रिक प्रणाली क्या है ?

उत्तर ⇒ इस प्रणाली के अंतर्गत व्यक्ति वस्तु के बदले मुद्रा प्राप्त करता है, पुनः अपनी जरूरत के मुताबिक कार्य करता है । .

प्रश्न 4. वस्तु विनिमय क्या है ?

उत्तर ⇒ आदिकाल में मनुष्य का व्यापार पूर्णतः वस्तु-विनिमय पर आधारित था। जब किसी वस्तु या सेवा का विनिमय किसी अन्य वस्तु या सेवा के साथ प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है तब इसे वस्तु विनिमय कहते हैं। इसमें विनिमय के लिए द्रव्य या मुद्रा का प्रयोग नहीं होता । उदाहरण के लिए, जब किसान चावल देकर जुलाहे से कपड़ा लेता है तब इसे वस्तु विनिमय कहेंगे । इस प्रकार, वस्तु विनिमय एक ऐसी
प्रणाली है जिसमें किसी एक वस्तु का दूसरी वस्तु के साथ प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता है तथा दोनों पक्षों में विनिमय की इकाइयाँ भौतिक वस्तुएँ और सेवाएँ होती हैं।

प्रश्न 5. Credit Card क्या है ?

उत्तर ⇒ क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत ग्राहक की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बैंक उसकी साख की एक राशि निर्धारित कर देती है, जिसके अंतर्गत वह अपने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से निर्धारित धन राशि के अन्दर वस्तुओं और सेवाओं को खरीद सकता है।

प्रश्न 6. किसी व्यक्ति की बचत करने की इच्छा किन बातों से प्रभावित होती है ?

बचत दो प्रकार का होता है किसी व्यक्ति की बचत करने की इच्छा निम्न बातों से प्रभावित होती है-
स्तर है।

(i) बचत को प्रभावित करने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व आय का

(ii) आय में वृद्धि होने के साथ बचत का अनुपात भी बढ़ता है।

(iii) व्यय में कमी करके बचत को बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 7. बचत क्या है?

उत्तर ⇒ समाज की कुल आय को वस्तु एवं सेवाओं पर खर्च किया जाता है। कुछ वस्तुओं का उपयोग करते हैं कुछ वस्तुएँ उत्पादन के कार्य में प्रयोग की जाती है। अर्थात् कुल आय का यह भाग जो टिका पर किया जाता है उसे (saving) कहते हैं। ष्ट है कि (income) तथा उपभोग (consumption) का अंतर बचत कहलाता है।

बचत दो प्रकार का होता है

(i) नगद बचत तथा

(ii)वस्तु संचय

(i) नगद बचत – आप का कुछ ऐसा भी अंश होता है जो किसी भी प्रकार की वस्तु पर व्यय नहीं किया जाता है, उसे संचय या कहते हैं।
(ii) वस्तु संचय- जबकि वस्तु संचय को विनियोग कहा जाता है, इस प्रकार वस्तु संचय भी बचत का एक क्रम है

 

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प्रश्न 8. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है ? मुद्रा ने इसकी कठिनाइयों को किस प्रकार दूर कर दिया ?

उत्तर ⇒ जब दो पक्षों द्वारा एक वस्तु से दूसरी वस्तु का प्रत्यक्ष विनिमय किया जाता है तो इसे वस्तु विनिमय कहा जाता है। मुद्रा ने वस्तु विनिमय की सभी कठिनाइयों का निराकरण कर दिया है क्योंकि मुद्रा के जन्म के बाद प्रत्येक वस्तु का मूल्य मुद्रा के द्वारा मापा जा सकता है-

(1) मुद्रा ने मूल्य मापने की कठिनाई दूर कर दी है।

ii) दोहरे संयोग की कठिनाई मुद्रा के प्रयोग से समाप्त हो गयी है।

iii) वस्तुओं के विभाजन की कठिनाई मुद्रा के द्वारा दूर हो गयी है।

(iv) मुद्रा ने संचय सम्बन्धी कठिनाई का भी निराकरण कर दिया है।

प्रश्न 9. साख से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर⇒ आज प्रायः सभी प्रकार की उत्पादक क्रियाओं के लिए साख की आवश्यकता होती है। शब्दकोश के अनुसार, साख का अर्थ विश्वास या भरोसा करना है। परन्तु, साख शब्द का यह व्यापक अर्थ है। आर्थिक शब्दावली में जब हम किसी व्यक्ति या संस्था की साख का उल्लेख करते हैं तब इससे उसकी ईमानदारी तथा ऋण लौटाने की क्षमता का बोध होता है। जिस व्यक्ति को आसानी से ऋणयाअधार मिल जाता है, हम कहते हैं कि उसकी साख अच्छी है। नकद लेन-देन में किसी वस्तु के मूल्य का भुगतान तत्काल कर दिया जाता है। लेकिन, साख के लेन-देन में इस भुगतान को एक निश्चित अवधि के लिए टाल दिया जाता है। यदि माल बेचनेवाले को खरीदनवाले पर विश्वास नहीं हो तो भुगतान को टालना संभव नहीं होगा। इस प्रकार, विश्वास हो साख का आधार है।

प्रश्न 10. मुद्रा की परिभाषा दीजिए।

उत्तर ⇒ विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा की अलग-अलग परिभाषा दी है तथा इसकी एक सर्वसम्मत परिभाषा देना कठिन है। प्रो० मार्शल, रॉबर्टसन, सेलिगमैन आदि अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषा मुद्रा की सर्वमान्यता के गुण पर आधारित है। मार्शल के अनुसार, “मुद्रा में वे सभी वस्तुएँ सम्मिलित की जाती हैं, जो बिना संदेह अथवा विशेष जाँच के वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने तथा खर्चों को चुकाने में साधारणतया प्रचलित रहती है।” इसके विपरीत कुछ अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई मुद्रा की परिभाषा सबसे सरल है। इनके अनुसार, “मुद्रा वह है, जो मुद्रा का कार्य करती हो।” परन्तु कुछ अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मुद्रा के लिए वैधानिक स्वीकृति भी अनिवार्य है। प्रो नैपके अनुसार, “कोई भी वस्तु जो राज्य द्वारा मुद्रा घोषित कर दी जाती है, मुद्रा कहलाती है।

प्रश्न 11. पत्र – मुद्रा क्या है ? भारत में इसे कौन जारी करता है ? विवेचना कीजिए।

उत्तर ⇒ पत्र – मुद्रा विशेष किस्म के कागज पर छपा हुआ एक प्रतिज्ञा-पत्र होता है, जिसमें निर्गमन अधिकारी सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक वाहक को माँगने पर उसमें लिखित राशि देने का वचन देता है । यह प्रतिज्ञा पत्र माँग पर देय होता है। पत्र मुद्रा प्रायः एक निश्चित विधान के अंतर्गत निर्गमित की जाती है और इसके पीछे केन्द्रीय बैंक द्वारा नियमानुसार स्वर्ण अथवा विदेशी प्रतिभूतियाँ कोष में रखी जाती हैं।

विशेषताएँ-

(1) पत्र मुद्रा ही प्रमुख मुद्रा होती है तथा असीमित विधिग्राह्य होती है

(ii) पत्र – मुद्रा का निर्गमन देश की सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक द्वारा किया जाता है । पत्र-मुद्रा विशेष प्रकार के कागज पर निकाली जाती है और उसकी छपाई भी ऐसे तकनीकी ढंग से की जाती है, ताकि उसकी नकल न की जा सके। भारत में पत्र मुद्रा का निर्गमन-
भारत में पत्र मुद्रा का निर्गमन देश के केन्द्रीय बैंक “ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया” द्वारा किया जाता है तथा दो रुपये से लेकर दो हजार रुपये के नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं तथा प्रादिष्ट पत्र मुद्रा का निर्गमन सरकार द्वारा किया जाता है। जैसे-एक रुपया का नोट ।

प्रश्न 12. आय और उपभोग में क्या अन्तर है ? विवेचना कीजिए ।

1. आर्थिक प्रयत्नों के द्वारा जो धन प्राप्त होता है, उसे आय कहते हैं

2. आय अर्जन से प्रत्यक्ष संतोष नहीं उपभोग से प्रत्यक्ष संतोष प्राप्त होता है । मिलता है ।

3. आय से वस्तु की उपयोगिता नष्ट नहीं होती है। नहीं होती है।

प्रश्न 13. प्रतिज्ञा पत्र क्या है ?

उत्तर ⇒ प्रतिज्ञा – पत्र में ऋणी की माँग पर या एक निश्चित अवधि के बाद उसमें अंकित ब्याज सहित देने का वादा करता है ।

प्रश्न 14. मुद्रा देश कल्याण में कैसे मदद करती ?

उत्तर ⇒ चूँकि मुद्रा द्वारा किसी देश की राष्ट्रीय आय से प्रतिव्यक्ति आय की माप होती है । इस तरह मुद्रा कल्याण में मदद करती है ।

प्रश्न 15. मुद्रा का ही संचय क्यों किया जाने लगा ?

उत्तर ⇒ शीघ्र नष्ट होनेवाली वस्तुओं को संचय करना कठिन था तथा लम्बी अवधि से वस्तुएँ नष्ट होने के कारण मुद्रा का संचय किया जाने लगा ।

प्रश्न 16. चेक क्या है ? चेक साख पत्र है, कैसे ?

उत्तर⇒ चेक एक प्रकार का लिखित आदेश है, जो बैंक में रुपया जमा करनेवाला अपने बैंक को देता है। साख की तरह ही यह मुद्रा का कार्य करता है

 

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प्रश्न 17. क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत और कौन से कार्ड आते हैं ?

उत्तर ⇒ क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत विश्व में प्रचलित क्रेडिट में टैपए मास्टर कार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस आदि हैं ।

प्रश्न 18. क्रय या विक्रय दोनों में ही मुद्रा मध्यस्थ का कार्य करती है । कैसे ?

उत्तर ⇒ क्रय या विक्रय दोनों में ही मुद्रा मध्यस्थ का कार्य करती है, क्योंकि व्यक्ति सेवा या वस्तु बेचकर मुद्रा प्राप्त करता है तथा पुनः मुद्रा का प्रयोग अन्य जरूरत के लिए करता है ।

प्रश्न 19. बैंक ड्राफ्ट क्या है ?

उत्तर ⇒ बैंक ड्राफ्ट वह पत्र है जो एक बैंक अपनी किसी शाखा या अन्य किसी बैंक को आदेश देता है कि पत्र में लिखी हुई
रकम उसमें अंकित व्यक्ति को दे दी जाए। बैंक ड्राफ्ट के द्वारा आसानी से कम खर्च में ही एक रुपया एक स्थान से दूसरे स्थान
भेजा जा सकता है

प्रश्न 20. ATM मशीन से पैसा कैसे निकाला जाता है ?

उत्तर ⇒ ATM कार्ड मिलने के बाद एक गुप्त पिन अंकित होता है जिसकी सहायता से ATM कार्ड को मशीन में डालने के
बाद रुपया निकाला जा सकता । साथ-ही-साथ अब ATM से रुपया निकालने के लिए ATM – Cum Debit Card होना चाहिए।

प्रश्न 21. मूल्य के मापन में मुद्रा की भूमिका का उल्लेख करें । ।

उत्तर ⇒ प्रारंभ से ही ऐसा कोई सर्वमान्य मापक नहीं होने के कारण मुद्रा की आवश्यकता थी, जिसकी सहायता से सभी प्रकार के
वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को ठीक मापा जा सके। इस प्रकार मुद्रा के आविष्कार से वस्तु विनिमय की सारी कठिनाइयाँ दूर हो गई ।

प्रश्न 22. मुद्रा धूरी की तरह अर्थव्यवस्था में कैसे काम करती है ?

उत्तर ⇒ यदि मुद्रा न होती तो विश्व के विभिन्न देशों में इतनी आर्थिक प्रगति कभी भी संभव नहीं होती। चाहे पूँजीवादी, समाजवादी या
मिश्रित अर्थव्यवस्था हो सभी में मुद्रा एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है, अर्थात् मुद्रा एक ऐसी धूरी है जिसके चारो ओर आर्थिक
विज्ञान चक्कर काटती है ।

प्रश्न 23. वस्तु-विनिमय क्या है ? विनिमय के कितने रूप होते हैं ?

उत्तर ⇒ वस्तु-विनिमय प्रणाली उस प्रणाली को कहा जाता है, जिसमें एक वस्तु के बदले में दूसरी वस्तु का आदान-प्रदान होता है ।
विनिमय के सामान्यतः दो रूप होते हैं-

(i) वस्तु विनिमय प्रणाली तथा

(ii) मौद्रिक विनिमय प्रणाली

प्रश्न 24. मुद्रा साख के आधार पर कैसे काम करती है ?

उत्तर ⇒ साख का अर्थ है विश्वास या भरोसा मगर अर्थशास्त्र में साख का अर्थ ऋण लौटाने और भुगतान करने की क्षमता से है,
अर्थात् बिना विश्वास और भरोसे के उधार लेन-देन नहीं हो पायेगा । इस तरह किसी दिए हुए समय में ऋणी रुपये, सेवाएँ या वस्तुएँ साख के आधार पर प्राप्त करता है और निश्चित अवधि बाद उतनी ही मुद्रा ब्याज सहित लौटाने का वादा करता है ।

प्रश्न 25. मुद्रा एवं साख-पत्रों में क्या अन्तर है ?

उत्तर ⇒ मुद्रा जिसका उपयोग साख पत्रों के आधार पर वे वस्तुएँ एवं सेवाओं के विक्रय-क्रय में विनिमय के माध्यम का कार्य
करते हैं । अतः साख पत्र ठीक मुद्रा की तरह कार्य करते हैं । किन्तु इसका प्रमुख अन्तर यह है कि मुद्रा कानूनी ग्राह्य होते हैं,जबकि साख-पत्रों को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं होती है । अतः, साख-पत्रों को लेन-देन के कार्य में स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता ।

प्रश्न 26. क्रय-शक्ति का हस्तांतरण किस प्रकार आसान हो गया ?

उत्तर⇒ आर्थिक विकास के साथ-ही-साथ विनिमय के क्षेत्र में भी विस्तार हो चला था। चूँकि मुद्रा में सामान्य स्वीकृति का गुण विद्यमान
है, कोई भी व्यक्ति किसी एक स्थान से अपनी सम्पत्ति बेचकर किसी अन्य स्थान पर नयी सम्पत्ति खरीद सकता है । अतः मुद्रा के माध्यम से क्रय शक्ति को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है ।

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प्रश्न 27. मुद्रा द्वारा उत्पादक को लाभ कैसे प्राप्त होता है ?

उत्तर ⇒ मुद्रा के आविष्कार से उपभोक्ता को बहुत लाभ हुआ है । प्रत्येक उपभोक्ता मुद्रा से अपनी इच्छानुसार वस्तुओं को खरीद सकता है । यह सुविधा वस्तु विनिमय प्रणाली में नहीं थी । मुद्रा उपभोक्ता की मांग का आधार है । जिस व्यक्ति के पास मुद्रा अधिक है
       मुद्रा उपभोक्ता की मांग का आधार है । जिस व्यक्ति के पास मुद्रा अधिक है, वह वस्तुओं और सेवाओं की मांग अधिक कर सकता है ।
मुद्रा का अभाव मांग की मात्रा को घटा देता है ।

प्रश्न 28 : मौद्रिक – विनिमय प्रणाली से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ जब किसी वस्तु या सेवा का विनिमय किसी अन्य सेवा के साथ प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है तब इसे वस्तु विनिमय कहते हैं।
वस्तु-विनिमय की कठिनाइयों ने ही मुद्रा विनिमय प्रणाली को जन्म दिया। जब वस्तुओं या सेवाओं का विनिमय मुद्रा के माध्यम से होता है
तब इसे मौद्रिक – विनिमय प्रणाली कहते हैं। इसके अंतर्गत वस्तुओं या सेवाओं का विनिमय प्रत्यक्ष रूप से न होकर परोक्ष रूप से होता है।
मौद्रिक – विनिमय प्रणाली में विनिमय की क्रिया दो उपक्रियाओं-क्रय तथा विक्रय में विभक्त हो जाती है।

 

                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. बचत क्या है ? बचत को निर्धारित करने वाले तत्त्वों की विवेचना करें ।

उत्तर ⇒ आय में से उपभोग पर किये गये व्यय को घटाने से जो शेष बचता है, उसे बचत कहते हैं ।

बचत को निर्धारित करने वाले तत्त्व –

(i) आय में वृद्धि : बचत आय पर निर्भर करती है। अतः, बचत में वृद्धि करने के लिए आय में वृद्धि करना आवश्यक है। अविकसित देशों में लोगों की आय का स्तर विकसित देशों की तुलना में काफी कम होता है। अतः अविकसित देशों में बचत का स्तर भी निम्न होता है जिससे आर्थिक विकास की गति धीमी होती है ।

(ii) उपभोग में कमी : चूँकि बचत आय एवं उपभोग का अन्तर होती है, अतः बचत में वृद्धि करने का सरल तरीका उपभोग में कमी करना है। ऐसा कहा जाता है. कि भारत जैसे निर्धन एवं अविकसित देश में आय का स्तर नीचा है कि उपभोग में कमी करने की गुंजाइश ही नहीं होती । लेकिन भारत जैसे निर्धन देश के लोगों को इस प्रकार का त्याग तो करना ही पड़ेगा क्योंकि बचत में वृद्धि कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का दूसरा सरल विकल्प नहीं है ।

(iii) बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं की संख्या में वृद्धि : निर्धन एवं मध्य वर्ग के लोगों से छोटी-छोटी बचतों को एकत्रित करने के लिए देश में और विशेषकर ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं की संख्या में वृद्धि करना आवश्यक है ।

प्रश्न 2. मुद्रा के आर्थिक महत्त्व पर प्रकाश डालें ।

उत्तर ⇒ आधुनिक आर्थिक व्यवस्था में मुद्रा का काफी महत्त्व है । यदि मुद्रा को वर्तमान समाज से हटा दिया जाए तो सारी आर्थिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जायेगी । यदि मुद्रा न होती तो विश्व के विभिन्न देशों में इतनी आर्थिक प्रगति नहीं होती । चाहे पूँजीवादी व्यवस्था हो या सामाजिक अर्थव्यवस्था हो या मिश्रित अर्थव्यवस्था हो सभी में मुद्रा आर्थिक विकास के मार्ग में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है ।
मुद्रा के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए क्राउथर ने कहा है ” ज्ञान की प्रत्येक शाखा की अपनी-अपनी मूल खोज होती है जैसे अर्थशास्त्र में चक्र, विज्ञान में अग्नि, राजनीतिशास्त्र में वोट ठीक उसी प्रकार मनुष्य के आर्थिक एवं व्यावसायिक जीवन में मुद्रा सर्वाधिक उपयोगी आविष्कार है, जिस पर संपूर्ण व्यवस्था ही आधारित है।”वास्तव में, मुद्रा मानव का एक महत्त्वपूर्ण अविष्कार है अतः, स्पष्ट है कि आधुनिक जीवन प्रत्येक दिशा में मुद्रा द्वारा प्रभावित होती है ।

प्रश्न 3. मुद्रा के कार्य लिखें।
अथवा, मुद्रा के कौन- कौन लाभ हैं ? वर्णन कर ।
अथवा, मुद्रा क्या है ? किन्हीं पाँच लाभों की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर ⇒ कोई भी वस्तु जो विनिमय के माध्यम के रूप में सामान्यतः सर्वग्राह्य हो तथा साथ ही उसके मूल्य मापन एवं संचय का कार्य करती हो, मुद्रा कहलाती है । आधुनिक समय में मुद्रा बहुत से कार्यों को सम्पन्न करती है तथा इसके कार्यों से क्रमशः वृद्धि होती जा रही है । वे हैं –

(i) विनिमय का माध्यम – क्रय या विक्रय दोनों में ही मुद्रा मध्यस्थ का कार्य करती हैं। अब वस्तु या सेवा बेचकर मुद्रा प्राप्त की जाती है तथा मुद्रा से अन्य वस्तुएँ खरीदी जाती है । मुद्रा के द्वारा किसी भी समय विनिमय किया जा सकता है ।

(ii) मूल्य का मापन – वस्तुओं का सही तौर पर मूल्यांकन की समस्या मुद्रा के कारण आसान हो गई। चूँकि मुद्रा विधिग्राह्य भी होती है, अतः इसमें कठिनाई उत्पन्न नहीं होती ।

(iii) विलंबित भुगतान का मान – मुद्रा विलंबित भुगतान का सरल माध्यम है, इसके द्वारा ऋण भुगतान में सरलता आ गई है । मुद्रा ने उधार लेने और देने दोनों ही कार्य को सरल बना दिया है ।

(iv) मूल्य का संचय – वर्तमान के साथ – साथ भविष्य के लिए भी संचय करना जरूरी है, मुद्रा के विशेष गुण होने से इसे संचित कर
रखा जा सकता है

(v) क्रय-शक्ति का हस्तांतरण – कोई भी व्यक्ति एक स्थान पर अपनी सम्पत्ति बेचकर किसी अन्य स्थान पर नयी सम्पत्ति खरीद सकता है । अतः, मुद्रा के माध्यम से क्रय शक्ति को, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है ।

(vi) साख का आधार – यदि नगद मुद्रा कोष अधिक है तो अधिक साख का निर्माण हो सकता है । नगद मुद्रा के कोष में कमी होने से साख की मात्रा में कमी हो जाती है । इस तरह मुद्रा साख का काम करती है ।

 

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प्रश्न 4. वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों का वर्णन करें ।
अथवा वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों पर प्रकाश डालें ।

उत्तर ⇒ वस्तु विनिमय की प्रणाली पुराने जमाने में प्रचलित थी, व्यावहारिक रूप है

1 से इस प्रणाली में लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता

(i) दोहरे संयोग का अभाव – आवश्यकता के दोहरे संयोग का मतलब है कि जरूरत दूसरे से मेल खा जाए लेकिन ऐसा संयोग ही होता था कि एक – दूसरे की जरूरत मेल खा जाए। ऐसी स्थिति में विनिमय में कठिनाई होती है ।

(ii) मूल्य के सामान्य मापक का अभाव -वस्तु विनिमय की दूसरी कठिनाई मूल्य के मापने से संबंधित थी । कोई ऐसा सर्वमान्य मापक नहीं था जिसकी सहायता से सभी प्रकार के वस्तुओं और सेवाओं को मापा जा सके ।

(iii) मूल्य संचय का अभाव – वस्तु – विनिमय प्रणाली में लोगों के द्वारा उत्पादित वस्तुओं के संचय की असुविधा थी । व्यवहार में व्यक्ति कुछ ऐसी वस्तुओं का उत्पादन करता था जो शीघ्र नष्ट हो जाती थी। ऐसी वस्तु को लम्बे समय तक संचय करना कठिन था ।

(iv) सह – विभाजन का अभाव – कुछ ऐसी वस्तुएँ होती हैं जिनका विभाजन संभव नहीं होता । यदि उसका विभाजन कर दिया जाए तो उसकी उपयोगिता नष्ट हो जाती है। अगर एक गाय के बदले में चार वस्तुएँ लेनी है जो अलग-अलग व्यक्ति के पास है ऐसी स्थिति में गाय को टुकड़े करना गाय की उपयोगिता को नष्ट कर देता है ।

(v) भविष्य के भुगतान की कठिनाई वस्तु विनिमय प्रणाली में उधार देने की कठिनाई थी। इस प्रणाली में उधार देने वाले को घाटा होता था तथा उधार लेनेवाले को फायदा होता था ।

(vi) मूल्य हस्तांतरण की समस्या – मूल्य हस्तांतरण में कठिनाई तब और भी. ज्यादा बढ़ जाती थी, जब कोई एक स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर बसना चाहता । ऐसी स्थिति में सम्पत्ति छोड़कर जाना पड़ता था क्योंकि उसे बेचना कठिन था ।

प्रश्न 5. मुद्रा के विकास पर प्रकाश डालें ।

उत्तर ⇒ आर्थिक विकास के वर्तमान युग में अर्थव्यवस्था में तरक्की होने के क्रम में तथा वर्तमान वैश्वीकरण के युग में आदान-प्रदान की समस्त क्रिया पत्र – मुद्रा,’चेक आदि साख मुद्रा द्वारा हो रहा है

मुद्रा के क्रमिक विकास के निम्नलिखित स्तर है –

(i) वस्तु विनिमय इसमें वस्तु का लेन-देन होता है ।

(ii) वस्तु मुद्रा – किसी एक वस्तु को मुद्रा के कार्य सम्पन्न करने के लिए चुन लिया जाता था, पशुपालन युग में गाय या बकरी; कृषियुग में कपास, गेहूँ । इन्हें मुद्रा के रूप में प्रयोग किया जाता था ।

(iii) धात्विक मुद्रा – वस्तुओं के लिए धात्विक मुद्रा का प्रयोग किया जाने लगा था । मुद्रा जो पीतल, ताँबा इत्यादि धातु से बना होता था ।

(iv) सिक्के – वस्तुओं के लिए जिस सिक्के का प्रयोग किये जाते थे, उसपर सरकार का मुहर लगा होता था, जो सोने-चाँदी का बना होता था ।

(v) पत्र – मुद्रा – वर्तमान समय में पूरे विश्व में पत्र – मुद्रा का ही परिचालन है । इसे पत्र-मुद्रा के नाम से जाना जाता है । इसलिए इसे कागजी मुद्रा भी कहते हैं । इस तरह अपने देश में केन्द्रीय सरकार एक रुपये का नोट जारी करता है तथा रिजर्व बैंक 2, 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500, 2000 का नोट जारी करती है। साख, मुद्रा, प्लास्टिक मुद्रा आदि मुद्रा के विकास के उदाहरण हैं ।

प्रश्न 6. साख पत्र क्या है ? कुछ प्रमुख साख-पत्रों पर प्रकाश डालें ।

उत्तर ⇒ साख पत्र से हमारा मतलब उन साधनों से है, जिनका उपयोग साख मुद्रा के रूप में किया जाता है । साख पत्र के आधार पर ही साख या ऋण का आदान-प्रदान होता है। अतः साख पत्र ठीक मुद्रा की तरह कार्य करते हैं । पर साख-पत्रों के लेन-देन के कार्य में स्वीकार करने के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकता ।

ऐसे साख कई तरह के होते हैं –

(i) चेक चेक एक लिखित आदेश है, जो बैंक में रुपया जमा करनेवाला अपने बैंक को देता है कि उसमें लिखित रकम व्यक्ति को दे दी जाय ।
(ii) बैंक ड्राफ्ट – यह वह पत्र है जो एक बैंक अपनी किसी शाखा या अन्य किसी बैंक को आदेश देता है कि अंकित रकम व्यक्ति को दे दी जाए। बैंक ड्राफ्ट देशी-विदेशी दोनों तरह का होता है ।

(iii) यात्री चेक – प्रत्येक यात्री चेक पर एक निश्चित रकम छपी रहती है । यात्री बैंक की किसी भी शाखा से यात्री चेक प्रस्तुत कर
मुद्रा प्राप्त कर सकता ।

(iv) प्रतिज्ञा – पत्र – यह भी एक साख पत्र है । इस पत्र में ऋणी की माँग पर एक निश्चित अवधि के बाद उसमें अंकित रकम ब्याज सहित देने का वादा करता है । आधुनिक समय में साख एवं साख-पत्रों का महत्त्व काफी बढ़ गया है ।

प्रश्न 7. डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड में क्या अन्तर है ?

उत्तर ⇒ डेबिट कार्ड-आर्थिक विकास के इस दौर में बैकिंग संस्थाओं के द्वारा प्लास्टिक के एक टुकड़े को भी मुद्रा के रूप में उपयोग किया जाने लगा है । प्लास्टिक मुद्रा का एक रुप ATM है | ATM से रुपया निकालने के लिए डेबिड कार्ड का प्रयोग किया जाता है । क्रेडिट कार्ड – क्रेडिट कार्ड भी प्लास्टिक मुद्रा का एक रूप है। विश्व में प्रचलित क्रेडिट में टॉप मास्टर कार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस आदि प्रसिद्ध है । क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत ग्राहक की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बैंक उसकी साख की एक राशि निर्धारित कर देती है जिसके अंतर्गत वह अपने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से निर्धारित धन राशि के अन्दर वस्तुएँ और सेवाओं को खरीद सकता है ।

प्रश्न 8. बचत क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है ? संक्षेप में वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ समाज की कुल आय को वस्तुओं एवं सेवाओं पर खर्च किया जाता । कुछ वस्तुओं का उपयोग, तत्काल उपयोग करते हैं तथा कुछ टिकाऊ वस्तुएँ जो उत्पादन के कार्य में प्रयोग की जाती है । अर्थात् कुल आय का वह भाग जो टिकाऊ वस्तुओं पर किया जाता है उसे बचत कहते हैं । अतः, स्पष्ट है कि आय (Income) तथा उपभोग (consumption) का अंतर बचत कहलाता है। बचत दो प्रकार का होता है –

(i) नगद बचत तथा

(ii) वस्तु संचय । नगद बचत : आय का कुछ ऐसा भी अंश होता है जो किसी भी प्रकार की वस्तु पर व्यय नहीं किया जाता है, उसे संचय या नगद बचत कहते हैं । वस्तु संचय : इसे विनियोग कहा जाता है, इस प्रकार वस्तु संचय भी बचत का एक क्रम है ।

प्रश्न 9. अर्थशास्त्र के विभिन्न शाखाओं में मुद्रा की भूमिका एवं लाभ का वर्णन करें ।

 

उत्तर ⇒ मुद्रा हमारे लिए काफी लाभदायक है। मुद्रा से पूरे समाज को लाभ पहुँचता है । अर्थशास्त्र के सभी शाखाओं जैसे-उपभोग, उत्पादन, विनिमय वितरण तथा राजस्व में मुद्रा का महत्त्वपूर्ण स्थान है ।

कुछ प्रमुख स्थान निम्न हैं –

 

(i) मुद्रा से उपभोक्ता को लाभ- मुद्रा के आविष्कार से उपभोक्ता मुद्रा से अपनी इच्छानुसार वस्तुओं को खरीद सकता है।
यह सुविधा वस्तु-विनिमय प्रणाली में नहीं थी ।

 

(ii) मुद्रा से उत्पादक को लाभ- मुद्रा की सहायता से उन्हें उत्पादन के साधनों की आवश्यक मात्रा जुटाने, कच्चे माल को खरीदने तथा संचित रखने एवं समय-समय पर पूँजी की उधार प्राप्त करने में सहायता मिलती है । और साख- मुद्रा साख प्रणाली को संभव बनाया है। बैंक लोगों

 

(iii) मुद्रा

की छोटी-छोटी बचतों को इकट्ठा कर लेते हैं तथा उद्योगों को वह मुद्रा उधार दे

देते हैं । इस तरह मुद्रा साख का आधार है ।

(iv) मुद्रा एवं आर्थिक प्रगति – मुद्रा किसी देश की आर्थिक प्रगति का सूचक है। इस प्रकार मुद्रा पूँजी निर्माण का उत्तम साधन है ।

 

(v) मुद्रा एवं सामाजिक कल्याण-मुद्रा द्वारा किसी देश की राष्ट्रीय आय से प्रति व्यक्ति आय की माप होती है । यदि प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है तो देश आर्थिक कल्याण की ओर अग्रसर है। मुद्रा द्वारा सामाजिक कल्याण को मापा जा सकता है । इस तरह स्पष्ट है कि आर्थिक जीवन में मुद्रा का कितना प्रयोग है ।

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