Join For Latest Government Job & Latest News

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Economics Subjective Question Class 10th Subjective Question

Matric Economics Hamari Vittiy Sansthaen Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] हमारी वित्तीय संस्थाएं सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

अर्थशास्त्र ( Economics) हमारी वित्तीय संस्थाएं लघु और दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Economics अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10thEconomics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th अर्थशास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Economics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

Join us on Telegram

Matric Economics Hamari Vittiy Sansthaen Subjective Questions 2024 [ अर्थशास्त्र ] हमारी वित्तीय संस्थाएं सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

                                            लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. स्वयं सहायता समूह से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तियों का औपचारिक समूह होता है, जो अपनी बचत तथा बैंकों से ऋण लेकर अपनी आवश्यकताओं को पूरा
करते हैं और विकास गतिविधियाँ चलाकर गाँवों का विकास और महिला सशक्तिकरण में योगदान देते हैं ।

प्रश्न 2. सूक्ष्म वित्त योजना को परिभाषित करें ।

उत्तर ⇒ छोटे पैमाने पर गरीब जरूरतमंद लोगों को स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से कम ब्याज साख अथवा ऋण की व्यवस्था को सूक्ष्म वित्तीय संस्थाएँ कहते हैं।

प्रश्न 3. सहकारिता की परिभाषा लिखें ।

उत्तर ⇒ सामान्य अर्थों में सहकारिता का अर्थ है- एक साथ मिल-जुल कर कार्य करना । लेकिन अर्थशास्त्र में सहकारिता की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है – सहकारिता वह संगठन है जिसके द्वारा दो या दो से अधिक व्यक्ति स्वेच्छापूर्वक मिल-जुलकर समान स्तर पर आर्थिक हितों की वृद्धि करते हैं । इस प्रकार सहकारिता उस आर्थिक व्यवस्था को कहते हैं जिसमें मनुष्य किसी आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए मिल-जुलकर कार्य करते हैं ।

प्रश्न 4. किसानों को वित्त या साख की आवश्यकता क्यों होती है ? इन्हें किन संस्थाओं से साख या ऋण मिलता है ?

उत्तर ⇒ हमारे देश के किसानों को कृषि कार्यों के लिए कई प्रकार की साख की आवश्यकता होती है। इन्हें खाद, बीज आदि खरीदने, मजदूरी चुकाने तथा ब्याज आदि का भुगतान करने के लिए अल्पकालीन साख की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, उन्हें कृषि-यंत्र, हल-बैल आदि खरीदने तथा कृषि के क्षेत्र में स्थायी सुधार लाने के लिए मध्यकालीन और दीर्घकालीन साख की भी आवश्यकता होती है। भारतीय किसानों को संस्थागत एवं गैर-संस्थागत दो साधनों से साख की प्राप्ति होती है । कृषि वित्त के संस्थागत साधनों में सहकारी साख समितियाँ तथा व्यावसायिक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक महत्त्वपूर्ण हैं। ये संस्थाएँ मुख्यतया इनके अल्पकालीन और मध्यकालीन साख की आवश्यकताओं को पूरी करती हैं। भूमि विकास बैंक इनके लिए दीर्घकालीन साख की व्यवस्था करते हैं। लेकिन, संस्थागत
साधनों से प्राप्त होनेवाले साख की मात्रा अपर्याप्त होने के कारण किसानों अधिकतर निजी साधनों से साख या ऋण लेना पड़ता है जिनमें महाजन, साहूकार आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 5. वित्तीय संस्थान से आप क्या समझते हैं ? यह कितने प्रकार के होते हैं ?

उत्तर ⇒ ऐसा वित्तीय संस्था जो देश के लिए काम करती है तथा वित्त और साख का निर्धारण एवं निर्देशन एवं राष्ट्रीय स्तर पर वित्त प्रबंधन के कार्यों का सम्पादन करती है, उसे हम राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान कहते हैं ।
इसके दो महत्त्वपूर्ण अंग हैं-

(क) भारतीय मुद्रा बाजार-

(i) केन्द्रीय बैंक

(ii) वाणिज्यक बैंक

(iii) सहकारी बैंक

(ख) भारतीय पूँजी बाजार ।

प्रश्न 6. एस० एच० जी० (S.H.G.) के विस्तारित रूप लिखें ।

उत्तर ⇒ S. H. G. – Self Help Group (स्वयं सहायता समूह )

प्रश्न 7. नाबार्ड (NABARD) के विस्तारित रूप लिखें ।

उत्तर ⇒ नाबार्ड (National Bank for Agricultural & Rural Develop- ment )
कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय बैंक ।

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन हमारी वित्तीय संस्थाएं

 

प्रश्न 8. वित्तीय संस्थाओं से आप क्या समझते हैं ? इनका मुख्य कार्य क्या है ?

उत्तर ⇒आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के संचालन में साख की भूमिका अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होती है। आज प्रायः सभी प्रकार की उत्पादक क्रियाओं के लिए वित्त या साख की आवश्यकता होती है। वित्तीय संस्थाओं के अंतर्गत बैंक, बीमा कंपनियों, सहकारी समितियों, महाजन, साहूकार आदि देशी बैंकरों को सम्मिलित किया जाता जो साख अथवा ऋण के लेन-देन का कार्य करते हैं। लोग प्राय: अपनी बचत को बैंक आदि संस्थाओं में जमा अथवा निवेश करते हैं वित्तीय संस्थाएँ इस बचत को स्वीकार करती है और इसे ऐसे व्यक्तियों को उधार देती है जिन्हें धन की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, वित्तीय संस्थाएँ ऋण लेने और देनेवाले व्यक्तियों के बीच मध्यस्थ का कार्य करती है।

प्रश्न 9. वित्तीय संस्थान से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ हमारे देश में वे संस्थाएँ जो आर्थिक विकास के लिए काम करती हैं, एवं उद्यम और व्यवसाय के वित्तीय आवश्यकताओं
की पूर्ति करता है ऐसी संस्थाओं को वित्तीय संस्थान कहते हैं।

प्रश्न 10. R.B.I. के विस्तारित रूप लिखें।

उत्तर ⇒ Reserve Bank of India.

प्रश्न 11. राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ कर ? संगृहीत बैंकिंग प्रणाली के विभिन्न प्रकारों की विवेचना कीजिए।

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ ऐसी संस्थाएँ जो व्यापार व उद्योग तथा जरूरतमन्द लोगों को वित्त उपलब्ध कराती हैं उन्हें वित्तीय संस्थाएँ कहते हैं। राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ हैं- राष्ट्रीयकृत बैंक, राज्य वित्त निगम, स्टेट बैंक, सहकारी बैंक, भूमि विकास बैंक, औद्योगिक बैंक इत्यादि । संग्रहीत बैंकिंग प्रणाली के प्रकार-
(i) व्यापारिक बैंक

(ii) औद्योगिक बैंक,

(iii) कृषि बैंक सहकारी बैंक, भूमिबंधक बैंक,

(iv) विनिमय बैंक,

(v) केन्द्रीय बैंक,

(vi)निर्यात-आयात बैंक,

(vii) विनियोग बैंक ।

प्रश्न 12. स्वयं सहायता समूह की महत्ता किस बात से चलता है ?

उत्तर ⇒ सभी सरकारी, गैर सरकारी बैंक व आर्थिक व सामाजिक संगठन उसकी महत्ता को स्वीकार कर इसके विकास को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी गरीबी का दंश झेल रहे परिवारों को गरीबी से निजात दिलाने के लिए स्वयं सहायता समूह एक आशा की किरण लेकर आया है

प्रश्न 13. व्यावसायिक बैंक कितने प्रकार की जमा राशि को स्वीकार करते हैं ? संक्षिप्त विवरण दें।

उत्तर ⇒ व्यावसायिक बैंक चार तरह की जमा राशि स्वीकार करते हैं-

(i) स्थायी जमा – इसके अंतर्गत निश्चित अवधि में ही राशि को निकालने की सुविधा होती है। बैंक ऐसे राशि पर आकर्षक ब्याज भी देती है ।

(ii) चालू जमा – इस तरह के खाते में रुपया जमा करना एवं निकालने के बीच किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होता है ।

(iii) संचयी जमा- इस तरह के खाते में रुपया जब चाहे जमा हो जाता है, पर निकालने का अधिकार सीमित होता है ।

(iv) आवर्ती जमा – इस प्रकार के खाते में ग्राहकों से प्रतिमाह एक निश्चित रकम जमा के रूप में ग्रहण करता है जैसे 60 माह या 72 माह के लिए ग्रहण करता है ।

प्रश्न 14. राज्य की वित्तीय संस्थान को कितने भागों में बाँटा जाता है ? संक्षिप्त वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ मुख्यतः राज्य के वित्तीय संस्थान को तीन भागों में बाँटा जाता है-

(i) सरकारी वित्तीय संस्थाएँ – सरकार द्वारा स्थापित एवं संपोषित वित्तीय संस्थाओं को सरकारी वित्तीय संस्थाएँ कहते हैं ।

(ii) अर्द्ध-सरकारी वित्तीय संस्थाएँ – ऐसी संस्थाएँ सरकार के केन्द्रीय बैंक के निर्देशन में उनके द्वारा स्थापित मापदंडों पर समाज
के लोगों की वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, उसे अर्द्ध-सरकारी वित्तीय संस्थाएँ कहते हैं ।

(iii) सूक्ष्म वित्तीय संस्थाए – छोटे पैमाने पर जरूरतमंद लोगों को स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से कम
ब्याज पर ऋण की व्यवस्था को सूक्ष्म वित्तीय संस्था कहते हैं ।

प्रश्न 15. भारत में सहकारिता की शुरुआत किस प्रकार हुई ? संक्षिप्त वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ पिछली शताब्दी में ही देश ने सहकारिता की जरूरत को समझा तथा ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 1904 ई० में सहकारिता साख
समिति विधान पारित किया गया । अब गाँव या नगर में कोई दस व्यक्ति मिलकर सहकारी साख समिति की स्थापना कर सकते थे।
1912 ई० के अधिनियम द्वारा 1904 ई० अधिनियम में संसोधन करते हुए सहकारी समितियों की कार्य-प्रणाली में सुधार लाया गया।
अब अन्य उद्देश्यों के लिए भी सहकारी समितियाँ स्थापित की जा सकती थीं । पुनः इसमें सुधार हेतु 1914 ई० में मैलेगन समिति को नियुक्ति हुई। 1919 ई० में सहकारिता केन्द्रीय दायित्व से मुक्त होकर राज्य के क्षेत्रान्तर्गत आ गयी। 1929 ई० के आर्थिक मंदी से प्रभावित होने के बावजूद 1935 ई० में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना के बाद सहकारिता आन्दोलन को बल मिला। आज भी सहकारी बैंक गाँवों में मददगार सिद्ध हो रहे हैं।

प्रश्न 16 नगद साख क्या है ?

उत्तर ⇒ इस व्यवस्था के अंतर्गत बैंक अपने ग्राहकों को ऋण – पत्र (Bonds) व्यापारिक मान स्वीकृत प्रतिभूतियों के आधार पर ऋण देती हैं।

प्रश्न 17. नाबार्ड क्या है ?

उत्तर ⇒ कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए पुनर्वित्त प्रदान करनेवाली शिखर की संस्था है ।

प्रश्न 18. भारतीय मुद्रा बाजार किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ उद्योग एवं व्यवसाय के क्षेत्र के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन वित्तीय व्यवस्था एवं प्रबंधन को भारतीय मुद्रा बाजार कहते हैं ।

प्रश्न 19. राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ क्या हैं ?

उत्तर ⇒राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ साख नीतियों का निर्धारण एवं निर्देशन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर वित्त प्रबंधन के कार्य सम्पादन करती है ।

 

Economics Hamari Vittiy Sansthaen Subjective Question Answer pdf hindi

प्रश्न 20. केन्द्रीय बैंक के क्या कार्य हैं ?

उत्तर ⇒ यह देश के शीर्ष बैंकिंग संस्था के रूप में बैकिंग वित्तीय और आर्थिक क्रियाओं का दिशा-निर्देश एवं संचालन में सहयोग करती हैं।

प्रश्न 21. दलाल स्ट्रीट किसे कहा जाता है ?

उत्तर ⇒ मुंबई में जिस जगह पर पूँजी बाजार का प्रधान क्षेत्र है, उसे दलाल स्ट्रीट कहते हैं ।

प्रश्न 22. किसानों को साख अथवा ऋण की आवश्यकता क्यों होती है ?

उत्तर ⇒ किसानों को अपने उत्पादन एवं उपयोग संबंधी सभी कार्यों के लिए ऋण की आवश्यकता होती है ।

प्रश्न 23. अधिविकर्ष क्या है ?

उत्तर ⇒जब कोई भी व्यावसायिक बैंक अपने ग्राहकों को उसके खाते में जमा रकम से अधिक रकम निकालने की सुविधा देता है, उसे अधिविकर्ष की सुविधा कहते हैं ।

प्रश्न 24. आवर्ती जमा क्या है ?

उत्तर ⇒व्यावसायिक बैंक साधारणतया अपने ग्राहकों से प्रतिमाह एक निश्चित रकम जमा के रूप में एक निश्चित अवधि जैसे 60 माह – 72 माह के लिए ग्रहण करती है तथा एक निश्चित रकम देती है, उसे आवर्ती जमा कहते हैं ।

प्रश्न 25. एजेंसी संबंधी कार्य व्यावसायिक बैंक किस प्रकार सेवा करते हैं ?

उत्तर ⇒ व्यवसायिक बैंक ग्राहकों की एजेंसी जिस रूप में सेवा करती हैं, वे हैं—

(i) चेक,

(ii) बिल या ड्राफ्ट का संकलन

(iii) ब्याज तथा लाभांश का वितरण,

(iv) ब्याज ऋण की किस्त तथा

(v) प्रतिमूतियों का क्रय-विक्रय आदि ।

प्रश्न 26. वित्तीय संस्थाओं के ग्राहक कौन है ?

उत्तर ⇒ वे समस्त व्यक्ति अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान जो विकास के काम में लगे हुए हैं और जो अपने कार्यों के लिए रुपये पैसों की संस्थागत माँग करते हैं, वे सभी इन वित्तीय संस्थाओं के ग्राहक हैं । अतः, आर्थिक विकास के लिए वित्तीय संस्थाओं की सहभागिता आवश्यक है जिसके बिना विकास की क्रिया सम्पन्न नहीं की जा सकती ।

                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. सहकारिता के मूल तत्त्व क्या है ? राज्य के विकास में इसकी भूमिका का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ सहकारिता के द्वारा जीवन को उन्नत और उच्च स्तर की वास्तविक सिद्धि की आशा की जाती है, जिसमें श्रेष्ठतम कृषि तथा समूह जीवन संभव हो सके ।

इसके तीन आधारभूत तत्त्व हैं –

(i) यहाँ संगठन की सदस्यता स्वैच्छिक होती है । उनपर कोई बाहरी दबाब नहीं होगा ।

(ii) इसका प्रबंधन एवं संचालन जनतंत्रात्मक आधार पर होता है ।

(iii) इसके आर्थिक उद्देश्यों में नैतिक और सामाजिक तत्त्व भी शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य लूट-खसोट करना नहीं बल्कि समूह के लाभ और सुख-समृद्धि को बढ़ाना है । राज्य के विकास में इसका सराहनीय योगदान है –
झारखंड एकीकृत बिहार के पास अपार धन संसाधन थे परन्तु अलग होने के बाद अनेक तरह की आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हुई । बिहार का 80% आबादी खेती पर निर्भर है और पूरी खेती मौनूसन पर। चूँकि खेती बिहारवासियों के जीविका का आधार है, इसलिए आर्थिक तंगी के बावजूद खेती करने पर विवश है । पर अब छोटे-छोटे उद्यम सहकारिता के सहयोग से चलाये जा रहे हैं तथा अनुकूल प्रभाव भी देखने को मिल रहा है । फलस्वरूप व्यक्ति की आय धीरे-धीरे बढ़ रही है और लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठ रहा है । ग्रामीण स्तर पर धनकुट्टी, अगरबत्ती निर्माण, बीड़ी निर्माण, जूता निर्माण, ईंट निर्माण इत्यादि जैसे महत्त्वपूर्ण रोजगार चलाये जा रहे हैं । इसके लिए राज्य स्तरीय सहकारी बैंक ऋण मुहैया कराती है । इस सहकारी बैंक से रोजगार को ग्रामीण स्तर पर काफी हद तक किया जा रहा है

प्रश्न 2. व्यावसायिक बैंक के प्रमुख कार्यों की विवेचना करें ।

उत्तर ⇒ व्यावसायिक बैंक विभिन्न प्रकार के कार्यों के द्वारा समाज और राष्ट्र की सेवा करते हैं ।

व्यावसायिक बैंक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –

(i) जमा राशि को स्वीकार करना – अधिकांश लोग अपनी बचत को चोरी हो जाने के भय से या ब्याज कमाने के उद्देश्य से किसी बैंक में ही जमा करते हैं। इस प्रकार का जमा महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी के आधार पर कर्ज देकर वे अपने लाभ का एक प्रमुख भाग प्राप्त करते हैं ।
इन राशियों को विभिन्न प्रकार से जमा लेते हैं जैसे स्थायी जमा द्वारा चालू जमा, संचयी जमा, आवर्ती जमा आदि ।

(ii) ऋण प्रदान करना व्यावसायिक बैंक का दूसरा मुख्य कार्य लोगों को ऋण प्रदान करना है। एक निश्चित राशि को नगद कोष में रखकर बाकी रुपया बैंक द्वारा दूसरे व्यक्तियों को उचित जमानत के आधार पर दे दी जाती है, ऋण प्रदान करने का माध्यम निम्नलिखित होते हैं

(a) अभिचायित एवं अल्पकालीन ऋण

(b) नगद साख,

(c) अधिविकर्षन,

(d) विनिमय बिलों को भुनाना तथा

(c) ऋण एवं अग्रिम ।

(iii) सामान्य उपयोगिता संबंधी कार्य व्यावसायिक बैंक अन्य भी कार्यों को करती है, कुछ उपयोगिता संबंधी कार्य निम्न है

(a) यात्री चेक एवं साख प्रमाण-पत्र जारी करना,

(b) लॉकर की सुविधा,

(c) ATM एवं क्रेडिट कार्ड सुविधा तथा

(d) व्यापारिक सूचनाएँ एवं आँकड़े एकत्रीकरण |

(iv) एजेंसी संबंधी कार्य वर्तमान समय में व्यावसायिक बैंक ग्राहकों की एजेंसी के रूप में सेवा करते हैं।

इसके अंतर्गत बैंक

(a) चेक बिल और ड्राफ्ट का संकलन,

(b) ब्याज तथा लाभांश का संकलन,

(c) ब्याज ऋण की किस्त, बीमे की किस्त का भुगतान,

(d) प्रतिभूतियों का क्रय – विक्रय तथा

(e) ड्राफ्ट तथा डाक द्वारा कोयों का हस्तांतरण आदि क्रियाएँ करते हैं ।

 

Economics 10th Civics Model Paper And Question Bank 2024 PDF Download

 

प्रश्न 3. भारत में सहकारिता के विकास का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ भारत में सहकारिता की शुरुआत विधिवत् रूप से सहकारी साख अधिनियम, 1904 के पारित होने के बाद ही हुई। इसके अनुसार गाँव या नगर में कोई भी दस व्यक्ति मिलकर सहकारी साख समिति की स्थापना कर सकते हैं।
लेकिन 1904 में जो अधिनियम पारित हुआ, उसके क्षेत्र को विस्तृत करने के लिए 1912 में सहकारी समिति अधिनियम पारित किया गया, जिसके अनुसार सहकारी साख एवं गैर- सहकारी साख समितियों की स्थापना की व्यवस्था की गई।
1929 के महान आर्थिक मंदी के कारण इसके विकास में कुछ बाधाएँ आ गई, लेकिन रिजर्व बैंक ने 1935 से ही इसमें सक्रिय सहयोग देकर प्रोत्साहित किया है। भारत में योजना काल के 53 वर्षों की अवधि में सहकारिता की अच्छी प्रगति हुई है। 1950-51 में यहाँ 1.8 लाख सहकारी समितियाँ थी, जिनके सदस्यों की संख्या 173 लाख थी जो बढ़कर 2001-02 में क्रमश: 5.28 लाख हो गई। इस काल में सहकारी समितियों की संख्या तीन गुनी समितियों के सदस्यों की संख्या में 13 गुनी वृद्धि हुई है ।

प्रश्न 4. राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान किसे कहते हैं ? इसे कितने भागों में बाँटा जाता है ? वर्णन करें।

उत्तर ⇒ ऐसी वित्तीय संस्थाएँ जो देश के लिए काम करती है तथा वित्तीय और साख का निर्धारण एवं निर्देशन एवं राष्ट्रीय स्तर पर वित्त प्रबंधन के कार्यों का सम्पादन करती है उसे हम राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ कहते हैं इसके दो महत्त्वपूर्ण अंग हैं

(क) भारतीय मुद्रा बाजार- भारतीय मुद्रा बाजार को संगठित और असंगठित क्षेत्रों में विभक्त किया जाता है। संगठित क्षेत्र में वाणिज्य बैंक, निजी बैंक, सार्वजनिक बैंक एवं विदेशी बैंक शामिल की जाती है 1

देश के संगठित बैंकिंग प्रणाली निम्नलिखित तीन प्रकार की बैंकिंग व्यवस्था के रूप में कार्यशील है –

(i) केन्द्रीय बैंक (Central Bank) भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) केन्द्रीय बैंक है। यह देश की शीर्ष बैकिंग संस्था के रूप में बैंकिंग, वित्तीय और आर्थिक क्रियाओं का दिशा-निर्देशन संचालन में सहयोग करती है ।

(ii) व्यवसायिक बैंक ( Commercial Bank) अधिकतर वाणिज्य बैंक सरकार के सीधे नियंत्रण में काम करती है, जिसे राष्ट्रीयकृत वाणिज्य बैंक कहते हैं और अन्य ऐसे भी वाणिज्य बैंक है, जो निजी क्षेत्र की वाणिज्य बैंक कही जाती है।

(iii) सहकारी बैंक ( Co-operative Bank) सहकारी बैंक अलग – अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से जानी जाती है, यद्यपि ये बैंक केन्द्रीय बैंक दिशा निर्देशन में ही काम करती है। इसके द्वारा भारत के उद्योगकर्ता एवं कृषक को
वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है (ख) भारतीय पूँजी बाजार भारतीय पूँजी बाजार मूलत: इन्हीं चार वित्तीय संस्थानों पर आधारित है जिनके चलते राष्ट्र स्तरीय सार्वजनिक विकास जैसे सड़क, रेलवे अस्पताल, शिक्षण संस्थान, विद्युत उत्पादन संयंत्र एवं बड़े-बड़े निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग संचालित किये जाते हैं। फलस्वरूप राष्ट्र निर्माण इन वित्तीय संस्थाओं का काफी योगदान होता है ।

प्रश्न 5. राज्य स्तरीय संस्थागत वित्तीय स्रोत के कार्यों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ राज्य स्तरीय संस्थागत वित्तीय स्रोत के कार्य इस प्रकार

(i) सहकारी बैंक ( Co-operative Bank) हमारे राज्य में सहकारी बैंक द्वारा उपलब्ध सहकारी साख-व्यवस्था त्रिस्तरीय है –

A. गाँवों में प्राथमिक सहकारी साख समितियाँ

B. जिला स्तर पर केन्द्रीय सहकारी बैंक

C. राज्य स्तर पर राज्य सहकारी बैंक

इनके माध्यम से बिहार के किसानों को अल्पकालीन, मध्यकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण की सुविधा उपलब्ध होता है। राज्य में 25 केन्द्रीय सहकारी बैंक जिला स्तर पर तथा राज्य स्तर पर एक बिहार राज्य सहकारी बैंक कार्यरत है ।

(ii) प्राथमिक सहकारी समितियाँ ( Primary Co-operative Socities) इस प्रकार की समितियाँ उत्पादक कार्यों के लिए ऋण देती है, परन्तु विशेष परिस्थिति में इनकी अवधि तीन वर्ष तक के लिए बढ़ाई जा सकती है। राज्य के ड्राफ्ट 10वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार बिहार में 6842 प्राथमिक सहकारी कृषि साख समितियाँ कार्यरत हैं ।

(iii) भूमि विकास बैंक (Land Development Bank) राज्य में किसानों को दीर्घकालीन ऋण प्रदान करने के लिए भूमि प्रबंधक बैंक खोला गया था जो किसानों को दीर्घकालीन ऋण प्रदान करता है। प्राथमिक इकाई को सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक कहते हैं जिसे राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक कहा जाता है ।

(iv) व्यावसायिक बैंक (Commercial Bank) देश में बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण की नीति (1968) तथा बाद में उनका राष्ट्रीयकरण
( 1969 ) के बाद व्यावसायिक बैंक अधिक मात्रा में किसानों को ऋण प्रदान करने लगे । बिहार में अनुमानत: 700 करोड़ रुपये से अधिक की कृषि साख की जरूरत जबकि उपलब्धता मात्र 548 करोड़ रुपये की ही हुई ।

(v) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Bank) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक देश में 1975 ई० में स्थापित किए गये जो सीमांत छोटे किसानों, कारीगरों तथा अन्य कमजोर वर्ग की जरूरतों को पूरा कर सके। राज्य में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जो साख की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, उससे वृद्धि हो रही है, फिर भी छोटे और सीमांत किसानों की जरूरतों को पूरा करने में सफल नहीं हुए हैं।

(vi) नाबार्ड (NABARD) यह कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए सरकारी संस्थाओं, व्यावसायिक बैंकों तथा ग्रामीण बैंकों को वित्त की सुविधा प्रदान करता है, जो बाद में किसानों को सुविधा प्रदान करते हैं ।

प्रश्न 6 स्वयं सहायता समूह में महिलाएँ किस प्रकार अपनी अहम् भूमिका निभाती है ? वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ स्वयं सहायता समूह वास्तव में ग्रामीण क्षेत्र में व्यक्तियों खासकर महिलाओं का एक औपचारिक समूह होता है जो अपनी बचत और बैंकों से लघु ऋण लेकर अपने सदस्यों के पारिवारिक जरूरतों को पूरा करते हैं और विकास गतिविधियाँ चलाकर गाँवों का विकास और महिला सशक्तिकरण में योगदान देते हैं । के सदस्य स्वयं लेते हैं । समूह बचत और ऋण संबंधी ज्यादातर निर्णय समूह में दिए जाने वाले ऋण इसका लक्ष्य, उसकी रकम, ब्याज दर वापस लौटाने की जिम्मेदारी समूह की होती की होती है। एक भी सदस्य अगर ऋण वापस नहीं लौटाता तो समूह के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं। इसी कारण बैंक निर्धन वर्ग को ऋण देने के लिए तैयार हो जाती है। यद्यपि इसका कोई ऋणाधार नहीं होता । इससे न केवल महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाती हैं बल्कि समूह की नियमित बैठकों के जरिये लोगों को एक आम मंच मिलता है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि स्वयं सहायता समूह कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं।

प्रश्न 7. रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के विभिन्न कार्यों की विवेचना कीजिए ।

उत्तर ⇒ रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के प्रमुख कार्य निम्नलिखित

(i) रिजर्व बैंक को नोट निर्गमन का एकाधिकार प्राप्त है।

(ii) रिजर्व बैंक केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों के बैंकिंग सम्बन्धी समस्त कार्य करता है ।

(iii) रिजर्व बैंक बैंकों का बैंक है। यह आवश्यकता के समय उनकी सहायता करता है तथा समय-समय पर उनका उचित मार्गदर्शन करता है तथा उन पर पूर्ण नियंत्रण रखता है

(iv) रुपये की विनियम दर को स्थिर रखना रिजर्व बैंक का एक महत्त्वपूर्ण कार्य है ।

(v) रिजर्व बैंक मुद्रा व साख का नियमन एवं नियंत्रण करता है ।

(vi) यह देश के अनुसूचित बैंकों को समाशोधन गृह की सुविधाएँ प्रदान करता है ।

(vii) यह महत्त्वपूर्ण आर्थिक एवं मौद्रिक आँकड़े एकत्रित कर उन्हें एक वार्षिक रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित करता है ।

प्रश्न 8. व्यावसायिक बैंक कितने प्रकार से राशि स्वीकार करते हैं ?

उत्तर ⇒ व्यावसायिक बैंक प्रायः चार प्रकार से जमा राशि स्वीकार करते हैं –

(i) स्थायी जमा (Fixed Deposit) स्थायी जमा खाते में रुपया एक निश्चित अवधि जैसे 1 वर्ष या इससे अधिक के लिए भी जमा किया जाता है। इस निश्चित अवधि के अंदर साधारणतया यह रकम नहीं निकाली जा सकती प्रकार के जमा को सावधि जमा ( Time Deposit) भी कहा जाता है । इस अवधि के अंदर जमा किए गए राशि पर बैंक आकर्षक ब्याज भी देती हैं ।

(ii) चालू जमा (Current Deposits ) – चालू जमा खाते में रुपया जमा करनेवाला अपनी इच्छानुसार रुपया जमा कर सकता है अथवा निकाल सकता इसमें किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं रहता । सामान्यतया इस प्रकार का जमा व्यापारियों तथा बड़ी-बड़ी संस्थाओं के लिए विशेष सुविधाजनक होता है । इसे माँग जमा भी कहते हैं ।

(iii) संचयी जमा (Saving Deposits) – इस प्रकार के खाते में रुपया जमा करनेवाला जब चाहे रुपया जमा कर सकता है, किन्तु रुपया निकालने का अधिकार सीमित रहता है, वह भी एक निश्चित रकम से अधिक नहीं। इसमें चेक की सुविधा भी प्रदान की जाती है ।

(iv) आवर्ती जमा ( Recurring Deposits ) – इस प्रकार के खाते में व्यावसायिक बैंक साधारणतया अपने ग्राहकों से प्रतिमाह एक निश्चित रकम जमा के रूप में एक निश्चित अवधि जैसे 60 माह या 72 माह के लिए ग्रहण करता है और इसके बाद एक निश्चित रकम भी देता है। इसी प्रकार का एक अन्य जमा संचयी समयावधि जमा ( Cumulative ) भी होता है । व्यावसायिक बैंक का दूसरा मुख्य कार्य लोगों को ऋण प्रदान करना है। बैंक के पास जो रुपया जमा के रूप में आता है, उसमें से एक निश्चित राशि नकद कोष में रखकर बाकी रुपया बैंक द्वारा दूसरे व्यक्तियों को उधार दे दिया जाता है। ये बैंक प्रायः उत्पादक कार्यों के लिए ऋण देते हैं तथा उचित जमानत की माँग करते से कम होती है । हैं । ऋण की रकम प्रायः जमानत के मूल्य करते हैं –

 

Economics Hamari Vittiy Sansthaen Subjective Question Answer 2024

प्रश्न 9. व्यावसायिक बैंक किस प्रकार ऋण प्रदान करते हैं ?

उत्तर ⇒ व्यावसायिक बैंक निम्न प्रकार से ऋण प्रदान करते हैं –

(i) अभियाचित एवं अल्पकालिक ऋण (Loans at Call and Short Notice) इस प्रकार का ऋण अति अल्पकाल यानि एक दिन से लेकर एक सप्ताह तक के लिए या केवल माँगने पर वापस करने के लिए दिया जाता है। मुद्रा बाजार की संस्थाएँ साधारणतया इस प्रकार का ऋण लेती है

(ii) नकद साख ( Cash Credit)– इस प्रकार की व्यवस्था के अंतर्गत बैंक अपने ग्राहकों को ऋण-पत्र (Bonds), व्यापारिक माल अथवा अन्य स्वीकृत प्रतिभूतियों (Securities) के आधार पर ऋण देते हैं ।

(iii) अधिविकर्ष (Overdraft) जब कभी भी कोई व्यावसायिक बैंक अपने ग्राहकों को उसके खाते में जमा रकम से अधिक रकम निकालने की सुविधा देता है तो उसे अधिविकर्ष की सुविधा कहते हैं । किंतु इस अधिक रकम के लिए बैंक अपने ग्राहक से उचित जमानत भी लेता है। साथ ही, इस प्रकार का ऋण पर बैंक सूद भी बहुत अधिक लेता है ।

(iv) विनिमय बिलों को भुनाना (Discounting of Bill of Exchange)-

व्यावसायिक बैंक विनिमय बिलों को भुनाकर भी ग्राहकों को ऋण प्रदान करता है इस प्रकार के ऋण में बैंक बिलों में से कुछ कटौती करके बाकी राशि का भुगतान ऋणी को कर देता है। सामान्यतः कटौती दर ब्याज दर के समान होती है ।

(v) ऋण एवं अग्रिम (Loans and Advances) – जब ऋण एक पूर्व निश्चित अवधि के लिए दिया जाता है तो उसे ऋण अथवा अग्रिम कहते हैं । इस प्रकार के ऋण के लिए बैंक उचित जमानता लेता है और इस पर ब्याज की दर भी अधिक रहती है ।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *