Join For Latest Government Job & Latest News

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Economics Subjective Question

Matric Economics Arthavyavastha Avam Isake Vikas Ka Itihas Subjective Questions [ अर्थशास्त्र ] अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास सब्जेक्टिव क्वेश्चन

अर्थशास्त्र ( Economics) अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास लघु और दीर्घ उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Economics अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10thEconomics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th अर्थशास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Economics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

Join us on Telegram

Matric Economics Arthavyavastha Avam Isake Vikas Ka Itihas Subjective Questions [ अर्थशास्त्र ] अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

                                            लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. आर्थिक नियोजन को परिभाषित करें।

उत्तर ⇒ आर्थिक नियोजन का अर्थ एक समयबद्ध कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व निर्धारित सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अर्थव्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों का नियोजित समन्वय का उपयोग करना है

प्रश्न 2. सतत् विकास क्या है ?

उत्तर ⇒ विकास की एक ऐसी प्रक्रिया अपनायी जाए जो सतत् जारी रहे जिसमें मौजूदा पीढ़ी के विकास के साथ-साथ भावी पीढ़ी के विकास के बीज अंकुरित होते रहे। इसप्रकार सतत विकास ऐसे विकास की वह प्रक्रिया है जिसमें वर्तमान की आवश्यकताएँ बिना भावी पीढ़ी की क्षमता एवं योग्यताओं से समझौता किये ही पूरी की जाती है।

प्रश्न 3. अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं ? इनके दो कार्य कौन-कौन से हैं ?
उत्तर ⇒ अर्थव्यवस्था एक ऐसा तंत्र या ढाँचा है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाएँ सम्पादित की जाती हैं । जैस – कृषि, उद्योग, व्यापार, बैकिंग, बीमा, परिवहन तथा संचार आदि ।

अर्थव्यवस्था निम्नलिखित दो कार्यों को सम्पादित करती है-

(i) लोगों की आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं
एवं सेवाओं का उत्पादन करती है ।

(ii) लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करती है ।

प्रश्न 4. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है ?

उत्तर ⇒ मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत उत्पादन के साधनों पर निजी व्यक्तियों तथा सरकार दोनों के ही पास स्वामित्व होती है और तद्नुरूप उत्पादन भी होता है। आय स्वरूप लाभों का व्यय भी दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में करते हैं, इस प्रकार दोनों ही मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आते हैं। मिश्रित अर्थव्यवस्था समाजवादी तथा पूँजीवादी व्यवस्था का मध्यमार्गी प्रवृत्ति है। मिश्रित अर्थव्यवस्था का उद्देश्य सूक्ष्म लाभ कमाना, उपभोक्ता को जन्म देना या बनाना, आर्थिक समृद्धि एवं समानता लाना आदि ।

प्रश्न 5. आर्थिक नियोजन क्या है ?

उत्तर ⇒ आर्थिक नियोजन का अर्थ राष्ट्र की प्राथमिकताओं के अनुसार देश के संसाधनों का विभिन्न विकासात्मक क्रियाओं में प्रयोग करता है। इस प्रकार अर्थव्यवथा के लिए उपलब्ध संसाधनों का ऐसा नियोजन,समन्वय एवं उपयोग है जिनसे हम समयबद्ध कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व निर्धारित सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त कर डालते हैं। भारत की योजना आयोग, आगामी पाँच वर्षों के लिए राष्ट्रीय आर्थिक विकास की योजना बनाता है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में प्रथम योजना आयोग 1950 ई० के 15
मार्च से कार्य करना शुरू किया था। भारत ने अब तक कुल ग्यारह पंचवर्षीय योजनाएँ तथा तीन वार्षिक योजनाएँ बना कर अपना आर्थिक नियोजन किया है। नियोजित आर्थिक विकास ही भारत के आर्थिक विकास को गति दी है।

प्रश्न 6. समावेशी विकास से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ आर्थिक विकास की वह प्रक्रिया जिसमें समाज के सभी वर्गों के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाया जाता है उसे समावेशी विकास कहते हैं। इस प्रक्रिया के अंतर्गत इस बात का पूर्ण ख्याल रखा जाता है कि समाज का कोई भी वर्ग अछूता न रह जाए।

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास

 

प्रश्न 7. विस्तारित करें :

(i) ATM (ii) HDI

उत्तर ⇒ (i) Automated Teller Machine.

(ii) Human Development Index (मानव विकास सूचकांक ) ।

प्रश्न 8. अर्थव्यवस्था के विभिन्न प्रकारों की विवेचना कीजिए ।

उत्तर ⇒ अर्थव्यवस्था दो आधार पर वर्गीकृत की जाती है-

(A) विकास के आधार पर विकास के आधार पर अर्थव्यवस्था दो प्रकार की होती है

(i) विकसित अर्थव्यवस्था और

(ii) विकासशील अर्थव्यवस्था ।

(B) स्वामित्व के आधार पर स्वामित्व के आधार पर अर्थव्यवस्था तीन प्रकार की होती है—

(i) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था,

(ii) समाजवादी अर्थव्यवस्था और

(iii) मिश्रित अर्थव्यवस्था ।

प्रश्न 9. अर्थशास्त्र में उत्पादन के कौन-कौन से साधन हैं ? उदाहरण दें।

उत्तर ⇒ अर्थशास्त्र में उत्पादन के चार साधन हैं-

(क) श्रम श्रमिक एवं मजदूर ।

(ख) पूँजी – आय के वित्तीय स्रोत, मशीन एवं सम्पत्ति आदि ।

(ग) साहस – उत्पादन के जोखिम को उठाने वाला वर्ग ।

(घ) व्यवस्था – सभी साधनों को संगठित करने वाला व्यक्ति ।

प्रश्न 10. नरेगा का पूर्ण रूप लिखें ।

उत्तर ⇒ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (National Rural Employment Guarantee Act) के तहत शुरू की गई है। यह संक्षेप में नरेगा “NAREGA” कहा जाता है

प्रश्न 11. कम्प्यूटर आर्थिक विकास कार्य में मदद करता है । कैसे ?

उत्तर ⇒ बिजली से चलनेवाला यह मशीन जिसे हम कम्प्यूटर कहते हैं, मनुष्य से भी तेज स्मरण शक्ति वाला बड़ी तेजी से अपनी स्मरण शक्ति के बल पर पैसे के आदान-प्रदान में भी सहयोग करता है। कोर बैकिंग प्रणाली, ए० टी० एम० आदि कम्प्यूटर प्रक्रिया के द्वारा ही संचालित होता है, सुदूर प्रांत का व्यवसायिक आदान-प्रदान बिना विलम्ब कम्प्यूटर द्वारा ही संभव हुआ है ।

प्रश्न 12. भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप क्या है ? विभाजन के पश्चात् बिहार पूर्णत: कृषि प्रधान राज्य हो गया है ?

उत्तर ⇒ अर्थव्यवस्था एक ऐसा तंत्र है, जिसके माध्यम से सम्पूर्ण आर्थिक क्रियाओं का संचालन किया जाता है । अर्थव्यवस्था यह भी निर्धारित करती है कि देश के किन वस्तुओं का उत्पादन किया जायेगा तथा विभिन्न साधनों में इनको किस प्रकार अनुकूलतम अनुपात में बाँटा जायेगा । वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था एक विकासशील अर्थव्यवस्था है, जो देश के विकास निरंतर प्रयत्नशील है; तथा स्वामित्व के आधार पर भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था है जहाँ पर निजी व सार्वजनिक दोनों क्षेत्र कार्यरत हैं । विभाजन के बाद बिहार राज्य में जनसंख्या भूमि अनुपात 6: 7 है, जबकि राज्य में औद्योगिक विकास नहीं के बराबर है । इसलिए बिहार को अपना खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना होगा । इसी को देखते हुए बिहार में सरकार ने भी कृषि क्षेत्र में । सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई है । जैसे- उच्चकोटि के बीज, रासायनिक खाद, सी बहुत किसानों को कम ब्याज पर ऋण, सिंचाई की उत्तम व्यवस्था, कृषि विकास में अनुसन्धान, भूमि सुधार, एस० बी० आई० किसान गोल्ड कार्ड, फसल बीमा योजना आदि । इन सुविधाओं के कारण आज बिहार में कृषि में प्रगति हुई है । इसलिए हम कह सकते हैं कि विभाजन के पश्चात् बिहार पूर्णतः कृषि प्रधान राज्य हो गया है।

प्रश्न 13. गरीबी गरीबी को जन्म देती है। कैसे ?

उत्तर ⇒ गरीब इसलिए गरीब हैं कि इनमें गरीबी के कारण उनकी आय कम होती है। अशिक्षा और अज्ञानता के कारण बच्चों की पैदाईश (जन्म) अधिक होती है, फलतः उनकी अगली पीढ़ी अधिक गरीब हो जाती है। गरीबी का कुचक्र अनवरत चलता रहता है। इसका अर्थ है कि गरीबी-ही-गरीबी को जन्म देती है।

प्रश्न 14. मानव विकास रिपोर्ट क्या है ?

उत्तर ⇒ मानव विकास रिपोर्ट के द्वारा विभिन्न देशों के लोगों की तुलना लोगों के शैक्षिक स्तर, उनकी स्वास्थ्य की स्थित और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर करती है। यह रिपोर्ट पहली बार संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वरा प्रकाशित किया गया था। यह आर्थिक विकास का पैमाना है। इसके अतिरिक्त आर्थिक विकास राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास सूचकांक जिसे राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट भी कहा जाता है। मानव विकास सूचकांक के अंतर्गत फलन हेतु तीन सूचकांकक्षा स्तर, जीवन आशा तथा जीवन स्तर पर विचार किया जाता है । (मानव विकास सूचकांक जीवन आशा सूचकांक + शिक्षा स्तर सूचकांक + जीवन स्तर सूचकांक) मानव विकास सूचकांक तीनों सूचकांकों का औसत है जिसका मूल शून्य से एकत्र होता है। 2006 ई० में मानव विकास सूचकांक की गणना विश्व के 179 देशों के लिए की गयी थी जिसमें भारत का क्रय 0.611 अंक के साथ 126 पर है। बगल का पड़ोसी देश श्रीलंका भारत से 33 क्रम आगे है।

प्रश्न 15. उपनिवेश किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ जब किसी राष्ट्र का निर्देशन एवं नियंत्रण शासक देश का होता है तो ऐसे शासित देश को उपनिवेश कहा जाता है ।

प्रश्न 16. मानव विकास रिपोर्ट क्या है ?

उत्तर ⇒ मानव विकास रिपोर्ट (Human Development Report — HDR) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के द्वारा, विभिन्न देशों की तुलना लोगों की शैक्षिक स्तर, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर किया जाता है ।

 

Economics Arthavyavastha Avam Isake Vikas Ka Itihas Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 17. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ पूँजीवादी अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के पास होता है जिसका उपयोग अपने निजी लाभ के लिए करते हैं

प्रश्न 18. उत्तरी बिहार में हर साल बाढ़ क्यों आती है ?

उत्तर ⇒बिहार में खासकर उत्तरी बिहार में नेपाल से आये जल से बाढ़ का आना बिहार में तय है। इसलिए 2009 में भी नेपाल से आए जल से बागमती नदी में बाढ़ देखने को मिला, जिसमें अपार जान-माल की क्षति हुई ।

प्रश्न 19. सार्वजनिक वितरण प्रणाली से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ सार्वजनिक वितरण प्रणाली ऐसी प्रणाली है जिसके तहत क्षेत्र के नागरिकों को खाने के लिए रोटी उचित सरकारी दर पर उपलब्ध करता है ताकि कोई भी गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले व्यक्ति भी निर्धारित कैलोरी को पूरा कर सके ।

प्रश्न 20. संसाधनों के मामलों में धनी होते हुए भी बिहार की स्थिति दयनीय है। क्यों ?

उत्तर ⇒ साधनों के मामले में धनी होते हुए भी बिहार की स्थिति दयनीय है । आज बिहार पिछड़ा हुआ राज्य माना जाता है । इसके अनेक कारण हैं । हरेक साल बाढ़ तथा सूखा का प्रकोप इस राज्य को झेलना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति – सड़क, बिजली, नहर, स्वास्थ्य साधनों आदि प्रभावित होते हैं ।

प्रश्न 21. गरीबी रेखा का निर्धारण कैसे किया गया है ?

उत्तर ⇒ गरीबी को निर्धारित करने के लिए योजना आयोग द्वारा सीमांकन (Borderline) किया गया है। गरीबी रेखा कैलोरी मापदण्ड पर आधारित है । ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी प्रतिदिन निर्धारित किया गया है । अर्थशास्त्र में गरीबी की माप की यह एक काल्पनिक रेखा है । इस रेखा से नीचे के लोगों को गरीबी रेखा के नीचे माना जाता है ।

प्रश्न 22. उत्तरी बिहार को बाढ़ की विभीषिका से कैसे बचाया जा सकता है ?

उत्तर ⇒ बिहार के विकास में बाढ़ एक बहुत बड़ा बाधक है। फसल का बहुत बड़ा भाग बाढ़ के चलते बर्बाद हो जाता है । जानमाल की भी काफी क्षति होती है । बाढ़ नियंत्रण के लिए नेपाल सरकार से बातचीत कर उचित कदम उठाने की जरूरत है। अन्य नियंत्रण के लिए बाँध बनाना, समुचित नहरों द्वारा पानी का बहाव उन राज्यों को उपलब्ध कराना, जहाँ सूखे की स्थिति पैदा होती है ।

प्रश्न 23. राष्ट्रीय विकास परिषद् के कार्यों का संक्षिप्त वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ भारत में राष्ट्रीय विकास परिषद् का गठन 6 अगस्त, 1952 को किया गया था। इसका गठन आर्थिक नियोजन हेतु राज्य सरकारों तथा योजना आयोग के बीच तालमेल तथा सहयोग का वातावरण बनाने के लिए किया गया था । राष्ट्रीय विकास परिषद् में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके पदेन सदस्य होते हैं । प्रत्येक पंचवर्षीय योजना को बनाने का कार्य योजना आयोग का है और अंत में यह राष्ट्रीय विकास द्वारा अनुमोदित (Approved ) होती है ।

प्रश्न 24. खराब विधि-व्यवस्था आर्थिक विकास को कमजोर करती है । कैसे ?

उत्तर ⇒ किसी भी देश या राज्य के लिए उद्योगों का विकास जरूरी होता है । इसके लिए राज्य में विधि व्यवस्था के साथ-साथ शांति तथा सुव्यवस्था जरूरी होती है, किन्तु खासकर बिहार के संदर्भ में कानून व्यवस्था की कमजोर स्थिति के कारण नागरिक शांतिपूर्वक उद्योग नहीं चला पा रहे हैं । इस तरह अन्य राज्यों से आने वाले आर्थिक आय पर बुरा असर पड़ता है, जो खराब विधि व्यवस्था और आर्थिक हास का परिचायक है ।

                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. मिश्रित अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत उत्पादन के साधनों पर निजी व्यक्तियों तथा सरकार दोनों के ही पास स्वामित्व होती है और तद्नुरूप उत्पादन भी होता है। आय के स्वरूप लाभों का व्यय भी दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में करते हैं, इस प्रकार दोनों ही मिश्रित अर्थव्यवस्था के
अंतर्गत आते हैं ।

मिश्रित अर्थव्यवस्था की तीन प्रमुख विशेषताएँ हैं –

(i) सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों का सह – अस्तित्व – सरकारी स्वामित्व वाली इकाईयाँ सार्वजनिक कहलाती है। इन सार्वजनिक इकाईयों के द्वारा सरकार सामाजिक और आर्थिक समानता के उद्देश्यों को साधने का प्रयास करती है। वहीं निजी क्षेत्र की इकाईयाँ लाभ के उद्देश्य से काम करती हैं। मुक्त बाजार व्यवस्था के साथ निजी क्षेत्र को व्यापारिक स्वतंत्रता होती है। किन्तु सरकार आर्थिक, राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के अंतर्गत अर्थव्यवस्था पर अपना नियंत्रण बनाये रखती है ।

(ii) निजी स्वतंत्रता – हर व्यक्ति को अपनी रुचि अनुसार अपना व्यवसाय अथवा व्यापार चुनने की स्वतंत्रता होती है। अपनी क्षमता के अनुसार हर व्यक्ति आर्थिक गतिविधियों में कार्य करते हुए अपनी आय को बढ़ा सकता है। हर व्यक्ति को निजी सम्पत्ति रखने की स्वतंत्रता रहती है । निजी क्षेत्र की सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु सरकार प्रतिबद्ध होती है । किन्तु, सामाजिक कल्याण हेतु कुछ हद तक सरकार का नियंत्रण भी बना रहता है ।

(iii) आर्थिक नियोजन – सरकार मुख्यतः आर्थिक नियोजन पर ध्यान देती है। अर्थव्यवस्था के संचालन के लिए सरकार योजनाएँ बनाती है। सार्वजनिक क्षेत्र पर तो सीधे तौर पर सरकार का नियंत्रण रहता है। क सहायता और नीतियों के द्वारा सरकार निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहन देती है। सरकार मुक्त बाजार व्यवस्था के द्वारा निजी लाभ के उद्देश्य को प्रोत्साहन देती है। वहीं सब्सिडी जैसे कदम उठाकर कमजोर वर्ग के हितों का भी संरक्षण करती है ।

प्रश्न 2. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के क्या कारण हैं ? बिहार के पिछड़ेपन दूर करने के लिए कुछ मुख्य उपाय बतावें ।

उत्तर ⇒ बिहार का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है लेकिन आज वही बिहार कई तरह की समस्याओं का शिकार है। गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार तथा अशांति का माहौल है । साधनों के मामले में धनी होते हुए भी बिहार की स्थिति दयनीय है । ‘ बिहार के पिछड़ेपन के कारण- आर्थिक दृष्टि से बिहार के पिछड़ेपन के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं –

(1) तेजी से बढ़ती जनसंख्या – बिहार में जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है । इसके चलते विकास के लिए साधन कम हो रहे हैं । अधिकांश साधन जनसंख्या के भरण-पोषण में चला जाता है ।

(ii) आधारिक संरचना का अभाव – किसी भी देश या राज्य के लिए आधारिक संरचनाओं का होना जरूरी होता है। लेकिन बिहार इस मामले में काफी पीछे है। राज्य में सड़क, बिजली एवं सिंचाई का अभाव है। साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ भी कम हैं ।

(iii) कृषि पर निर्भरता – बिहार की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है। यहाँ की अधिकांश जनता कृषि पर ही निर्भर है । लेकिन हमारी कृषि की भी हालत ठीक नहीं है । हमारी कृषि काफी पिछड़ी हुई है। बाढ़

(iv) बाढ़ तथा सुखा की स्थिति – हर साल कम या अधिक बाढ़ बिहार में आना तय होता है, जिसके कारण जान-माल की काफी क्षति होती है, फसल, आवास में बर्बाद हो जाते हैं । इस तरह विकास की स्थिति शून्य पर पहुँच जाता है ।

(v) औद्योगिक पिछड़ापन – किसी भी देश या राज्य के लिए उद्योगों का विकास जरूरी होता है, पर बिहार में ऐसी स्थिति नहीं है। यहाँ के सभी खनिज क्षेत्र एवं बड़े उद्योग प्रतिष्ठित अभियांत्रिकी संस्था सभी झारखंड चले गये । इस कारण बिहार में कार्यशील औद्योगिक इकाईयों की संख्या नगण्य

(vi) गरीबी राज्य में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है । इस तरह बिहार पिछड़ा है ।

(vii) खराब विधि-व्यवस्था बिहार में वर्षों तक कानून व्यवस्था कमजोर स्थिति में थी, जिसके चलते नागरिक शांतिपूर्वक उद्योग नहीं चला पा रहा था । यह खराब विधि-व्यवस्था बिहार को पिछड़ा बना दिया है ।

(viii) कुशल प्रशासन का अभाव – बिहार के पारदर्शिता का अभाव ही पिछड़ेपन का कारण बन जाता है। आए दिन भ्रष्टाचार के अनेक उदाहरण सामने आये हैं ।

बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के उपाय –

(i) बिहार में बाढ़ की समस्या का स्थायी निदान किया जाये ।

(ii) कृषि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए पंजाब व हरियाणा के समान कार्य किये जायें ।

(iii) औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया जाये, ताकि रोजगार के साधनों में भी वृद्धि हो ।

(iv) बिहार में बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार को निजी क्षेत्र के उद्यमी को उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ।

 

Economics Arthavyavastha Avam Isake Vikas Ka Itihas Subjective Question Answer pdf hindi

 

प्रश्न 3. अर्थव्यवस्था की संरचना से क्या समझते हैं ? इन्हें कितने भागों में बाँटा गया है ?

उत्तर ⇒अर्थव्यवस्था की संरचना का मतलब विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों में इसके विभाजन से है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाओं गतिविधियों को सम्पादित की जाती है । जैसे – कृषि, उद्योग, व्यापार, बैकिंग, बीमा, परिवहन, संचार, बिजली आदि ।
सभी अर्थव्यवस्था की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था को तीन भागों में बाँटा जाता है –

(i) प्राथमिक क्षेत्र – इसके अंतर्गत कृषि, पशुपालन, मछली पालन, जंगलों से वस्तुओं को प्राप्त करना जैसे व्यवसाय आते हैं ।

(ii) द्वितीयक क्षेत्र – द्वितीयक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र कहा जाता है । इसके अंतर्गत खनिज, व्यवसाय निर्माण कार्य, जनोपयोगी सेवाएँ, जैसे- गैस और बिजली आदि के उत्पादन आते हैं ।

(iii) तृतीयक क्षेत्र या सेवा क्षेत्र – तृतीयक क्षेत्र को सेवा क्षेत्र कहा जाता है । इसके अंतर्गत बैंक एवं बीमा, परिवहन, संचार एवं व्यापार आदि क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं । ये क्रियाएँ प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों की क्रियाओं को सहायता प्रदान करती है । इसलिए इसे सेवा क्षेत्र कहा जाता है ।

प्रश्न 4. “सतत् विकास समय की आवश्यकता है ।” इस कथन को स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ सतत् पोषणीय विकास एक ऐसा विकास है जिसमें भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकता पूरी करे। ऐसा न हो कि आर्थिक विकास की लालसा में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जाय, अधिक-से-अधिक उत्पादन के लिए कोयला, पेट्रोलियम अधिक-से-अधिक निकाला जाय और भविष्य के लिए कुछ बचे ही नहीं ।

इस सम्बन्ध में भारत और विशेष कर बिहार के संदर्भ में सतत् पोषणीय विकास के अंतर्गत निम्नांकित सुझाव समय के अनुकूल हैं –

(i) नहरी क्षेत्रों में अधिक सिंचाई पर बल नहीं दिया जाना चाहिए इससे पानी की बर्बादी और भूमि की उर्वरता घट जाती है ।

(ii) कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चना, बाजरा, मूंग की खेती करनी चाहिए । असमतल भूमि को समतल बनाकर खेती करनी चाहिए। इसमें जल की आवश्यकता कम होती है ।

(iii) सिंचाई के लिए नई तकनीक को अपनाया जाना चाहिए ।

(iv) खनिज सम्पदा एवं खनिज तेल निकालने में आधुनिक उपक्रम एवं नई तकनीक प्रयोग में लाना चाहिए ताकि निकालने के क्रम में कम – से – कम बर्बादी हो ।

(v) वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ।

प्रश्न 5. आर्थिक विकास के मुख्य क्षेत्रों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ एक अर्थव्यवस्था का मुख्य कार्य मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं को संतुष्ट कराना है। परन्तु इसके लिए कई प्रकार की आर्थिक क्रियाओं का सम्पादन होता है। इनमें निम्नांकित प्रमुख हैं –

(i) उत्पादन किसी भी देश के नागरिकों को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कई प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की जरूरत पड़ती है । एक अर्थव्यवस्था में ही उत्पाद के विभिन्न साधनों के सहयोग से वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है। आर्थिक व्यवस्था या अर्थव्यवस्था का एक मुख्य कार्य उत्पादन के विभिन्न साधनों को एकत्र कर उनमें सामंजस्य स्थापित करना है ।

(ii) विनिमय – सभ्यता के विकास के साथ ही मनुष्य की आवश्यकताएँ भी बहुत बढ़ गई हैं। आज समाज का कोई भी सदस्य अपनी सभी आवश्यकताओं को स्वयं नहीं पूरा कर सकता । वर्तमान समय में, प्रत्येक व्यक्ति केवल एक ही वस्तु का उत्पादन करता है और दूसरों से विनिमय या लेन – देन कर अपनी आवश्यकता की अन्य वस्तुएँ प्राप्त करता है। एक अर्थव्यवस्था ही देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय की व्यवस्था करती है। वितरण – आधुनिक समय में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कई साधनों क सहयोग से होता है। भूमि, श्रम, पूँजी एवं उद्यम उत्पादन के मुख्य साधन हैं, जो उत्पादन – कार्य में हिस्सा लेते हैं। अतः, राष्ट्रीय उत्पादन, अर्थात उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का भी इन्हीं के बीच वितरण कर दिया जाता है। एक अर्थव्यवस्था ही इस बात का भी निर्णय लेती है कि उत्पादन के साधनों या कारकों के बीच उत्पादित संपत्ति का किस प्रकार वितरण हो ।

(iv) आर्थिक विकास – अर्थव्यवस्था का एक अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना है। इसके लिए यह वर्तमान उत्पाद के एक भाग को बचाकर उसका विनियोग करती हैं इससे देश या समाज की भावी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 6. आर्थिक विकास क्या है ? आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर बतावें ।

उत्तर ⇒ आर्थिक विकास आवश्यक रूप से परिवर्तन की प्रक्रिया है । इससे अर्थव्यवस्था के ढाँचे में परिवर्तन होते हैं। आर्थिक विकास के संबंध में अर्थशास्त्रियों के बीच काफी मतभेद रहा है। जैसा कि प्रो० मेयर एवं वाल्डविन आर्थिक विकास के अर्थ को पूर्णतः स्पष्ट करते हैं। इनके अनुसार, “आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके कारण दीर्घकाल में किसी अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है । “
सामान्यतः आर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि में अन्तर नहीं माना जाता है । दोनों शब्दों को एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है । किन्तु अब अन्तर स्पष्ट होने लगा है । जैसा कि मैड्डीसन ने बताया कि धनी देशों में बढ़ता हुआ आय का स्तर आर्थिक वृद्धि का सूचक होता है, जबकि निर्धन देशों में आय का बढ़ता स्तर आर्थिक विकास का सूचक होता है । इस तरह ‘विकास’ शब्द में ‘वृद्धि’ शब्द का अर्थ निहित है ।

प्रश्न 7. आर्थिक नियोजन किसे कहते हैं ? नियोजन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?

उत्तर ⇒ आर्थिक नियोजन का अर्थ एक समयबद्ध कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व निर्धारित सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अर्थव्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों का नियोजित समन्वय एवं उपयोग करना है । योजना आयोग के शब्दों में ” आर्थिक नियोजन का अर्थ राष्ट्र की प्राथमिकताओं के अनुसार देश के संसाधनों का विभिन्न विकासात्मक क्रियाओं में प्रयोग करना है।” नियोजन के मुख्य उद्देश्य भारत में नियोजन के मुख्य उद्देश्य हैं-

(i) आर्थिक विकास की दर को बढ़ाना ।

(ii) कृषि एवं उद्योगों का आधुनिकीकरण करना

(iii) आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना ।

(iv) सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना ।

प्रश्न 8. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था क्या है ? इसके अवगुणों की विवेचना कीजिए ।

उत्तर ⇒ पूँजीवादी अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जिसमें उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में निजी उद्यम पाया जाता है जो निजी लाभ के
लिए काम करता है

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के अवगु –

(i) सम्पत्ति एवं आय की असमानताएँ आय की असमानताओं के कारण देश की सम्पत्ति व पूँजी २ केन्द्रीयकरण कुछ ही व्यक्तियों के हाथों में रहता है और समाज में गरीब व अमीर के बीच खाई बढ़ जाती है ।

(ii) सामाजिक कल्याण का अभाव – पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में स्वहित एवं स्वकल्याण की भावना सर्वोपरि होती है तथा सामाजिक कल्याण की भावना का पूर्ण रूप से अभाव होता है ।

प्रश्न 9. ‘नरेगा’ (NAREGA) क्या है ? यह गरीब मजदूरों के लिए किस प्रकार मदद करता है ?

उत्तर ⇒ देश के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मजदूरों के लिए राष्ट्रव्यापी रोजगार देने की योजना बनाई गई है । यह योजना (Scheme) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (National Rural Employment Guarantee Act – NAREGA) के तहत शुरू की गई है । यह संक्षेप में नरेगा ” NAREGA” कहा जाता है । ग्रामीण रोजगार देने की इस स्कीम को विश्व का सबसे बड़ा रोजगार योजना माना जाता है। इस राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत ग्रामीण मजदूरों को साल में कम-से-कम 100 दिनों के लिए रोजगार देने की व्यवस्था है तथा इसके लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित सरकार के तरफ से की जाती है । इस प्रकार मजदूरों के मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नरेगा एक निश्चित आय उपलब्ध कराता है जो कि संपूर्ण समाज के विकास के लिए आवश्यक योजना है ।

 

अर्थशास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 10. देश के आर्थिक विकास में बिहार के विकास की भूमिका का संक्षिप्त विवरण दें ।

उत्तर ⇒ जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति डा० ए० पी० जे० अब्दुल कलाम ने कहा था कि ” बिहार के विकास के बिना भारत का विकास संभव नहीं है ।”
हालांकि भौगोलिक क्षेत्रफल तथा जनसंख्या दोनों ही दृष्टिकोण से बिहार का स्थान भारत में अपना अलग महत्व रखता है ।
उपरोक्त कथन की सार्थकता इस बात में है कि बिहार को पिछड़ा और गरीब रखकर समृद्ध भारतवर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती ।
बिहार एक ऐसा राज्य है, जहाँ अत्यधिक उर्वरक भूमि (fertile land) है तथा नदियों में अविरल जल-प्रवाह होता है । जल संसाधन का उपयोग कर योजना लागू कर उत्तरी बिहार को बाढ़ की विभीषिका से बचाया जा सकता है । बिहार के दक्ष मानव संसाधन ही दूसरे राज्यों में जाकर वहाँ के विकास को फलीभूत बनाया है । पंजाब के कृषि विकास में बिहार के मानव संसाधनों का प्रमुख योगदान है । विगत वर्षों में बिहार के विकास के कारगर प्रयत्न किए जा रहे हैं । बिहार में प्रगति के इस दौर की प्रशंसा देश भर में की जाने लगी है। यदि देश और बिहार में कंधे से कंधा मिलाकर विकास की वर्तमान दौर को कारगर करे तो आर्थिक विकास में भारत विश्व के अग्रणी देशों में आ जायेगा ।
अतः, स्पष्ट है कि देश के आर्थिक विकास में बिहार की आर्थिक विकास की भूमिका महत्त्वपूर्ण है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *