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Matric Civics Satta Me Sajhedari Ki Karyapranali Subjective Questions 2024 [ नागरिक शास्त्र ] सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली सब्जेक्टिव क्वेश्चन

नागरिक शास्त्र ( Civics) सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली लघु और दीर्घ  उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Civics नागरिक शास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Civics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th नागरिक शास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Civics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Civics Satta Me Sajhedari Ki Karyapranali Subjective Questions 2024 [ नागरिक शास्त्र ] सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

                                                     लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में क्या महत्त्व रखती है ?

उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी ही लोकतंत्र का मूलमंत्र है । लोकतंत्र में जनता ही सारी शक्तियों का स्रोत एवं उपभोग करनेवाली होती है। लोकतंत्र में समाज के विभिन्न समूहों एवं विचारों को उचित सम्मान दिया जाता है। लोकतंत्र में ही विभिन्न सामाजिक समूहों के हितों एवं जरूरतों का सम्मान कर उनके बीच मतभेद तथा टकरावों को दूर किया जाता है तथा देश प्रगति के पथ पर सदा अग्रसर रहता है ।

प्रश्न 2. केन्द्रशासित राज्य क्या है ?

उत्तर ⇒ जब राज्य का शासन केन्द्र द्वारा संचालित होता है उसे केन्द्रशासित राज्य कहा जाता है। जैसे- दमन और अंडमान-निकोबार इत्यादि ।

प्रश्न 3. नगर निगम के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ नगर-निगम नागरिकों की स्थानीय आवश्यकता एवं सुख-सुविधा का ध्यान रखते हुए अनेक कार्य करता है ।
नगर निगम के दो प्रमुख कार्य निम्न हैं-

(i) नगर क्षेत्र की नालियों, पेशाब खाना, शौचालय आदि निर्माण करना एवं उसकी देखभाल करना ।
(ii) नगरीय क्षेत्र में कूड़ा तथा गंदगी की सफाई करना ।

प्रश्न 4. ग्राम पंचायत के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत के सामान्य कार्य –

(i) पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना तथा वार्षिक बजट तैयार करना ।

(ii) प्राकृतिक विपदा में सहायता करने का कार्य ।

(iii) सार्वजनिक सम्पत्ति से अतिक्रमण हटाना ।

(iv) स्वैच्छिक श्रमिकों को संगठित करना और सामुदायिक कार्यों में स्वैच्छिक सहयोग करना ।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण का क्या अर्थ है ?

उत्तर ⇒ जब केन्द्र और राज्य सरकार से शक्तियाँ लेकर स्थानीय सरकारों को दी जाती है तो इसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण कहते हैं।

(i) विकेन्द्रीकरण के पीछे बुनियादी सोच यह है कि अनेक मुद्दों और समस्याओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही बढ़िया ढंग से हो सकता है। लोगों को अपने इलाके की समस्याओं की बेहतर समझ होती है। लोगों को इस बात की अच्छी जानकारी होती है कि पैसा कहाँ खर्च किया जाए और चीजों का अधिक कुशलता से उपयोग किस तरह किया जा सकता है।

(ii) स्थानीय स्तर पर लोगों का फैसलों में सीधे भागीदार बनना भी संभव हो जाता है। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी की आदत पड़ती है। स्थानीय सरकारों की स्थापना स्व- शासन के लोकतांत्रिक सिद्धांत को वास्तविक बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।

प्रश्न 6. महापौर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।

उत्तर ⇒ नगर परिषद् का निर्माण नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्ड के कौंसलरों के द्वारा होता है, जिनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। इसमें सदस्यों के बीच से एक महापौर तथा एक उपमहापौर का चयन किया जाता है। महापौर नगर का प्रथम नागरिक माना जाता है। महापौर के अनुपस्थिति में नगर परिषद् का कार्य उपमहापौर के द्वारा सम्पन्न किया जाता है।

 

नागरिक शास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली

 

प्रश्न 7. संघीय शासन की कोई दो विशेषताएँ बताएँ ।

उत्तर ⇒ संघीय शासन व्यवस्था के दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

(i) संघीय शासन व्यवस्था के सर्वोच्च सत्ता केन्द्र सरकार और उसकी विभिन्न आनुसंगिक इकाइयों के बीच बँट जाती है ।

(ii) संघीय व्यवस्था में दोहरी सरकार होती है। एक केन्द्रीय स्तर की सरकार तथा दूसरी – प्रांतीय या क्षेत्रीय सरकार ।

प्रश्न 8. समवर्ती सूची से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ उत्तर ⇒ हमारे संविधान की सातवीं अनुसूची में केन्द्र व राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन किया गया है । समवर्ती सूची में उन मामलों को शामिल किया गया है जिन पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र व राज्यों दोनों को प्राप्त है 1

प्रश्न 9. पंचायती राज से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ आज का युग लोकतंत्र का युग है। लोकतंत्र में शासन के विकेंद्रीकरण पर विशेष बल दिया जाता है। भारतीय प्रशासन में भी विकेंद्रीकण के सिद्धांत को अपनाए जाने की आवश्यकता प्रतीत हुई। इस सिद्धांत को कार्यरूप देने के उद्देश्य से भारत की संघ सरकार ने बुलवंतराय मेहता समिति का गठन किया। इस समिति ने यह सिफारिश की कि भारत में पचायती राज की स्थापना की जाए। इसके अनुसार ग्राम, प्रखंड एवं जिला स्तर पर स्थानीय संस्थाओं का गठन किया जाए।

प्रश्न 10. सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में सरकार की सारी शक्ति किसी एक अंग में सीमित नहीं रहती है, बल्कि सरकार के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा होता है । यह बँटवारा सरकार के एक ही स्तर पर होता है । उदाहरण के लिए, सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा होता है और ये सभी अंग एक ही स्तर पर अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग करके सत्ता में साझेदार बनते हैं। सरकार के एक स्तर पर सत्ता के ऐसे बँटवारे को हम सत्ता का क्षैतिज वितरण कहते हैं। सत्ता में साझेदारी की दूसरी कार्य प्रणाली में सरकार के विभिन्न स्तरों पर सत्ता का बँटवारा होता है। सत्ता के ऐसे बँटवारे को हम सत्ता का ऊर्ध्वाधार वितरण कहते हैं।

प्रश्न 11. ग्राम रक्षा दल से क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत ग्रामीण क्षेत्रों की स्वायत्त संस्थाओं में सबसे नीचे का स्तर ग्राम रक्षा दल है, लेकिन इसका स्थान सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग में एक अंग ग्राम रक्षा दल भी है। यह गाँव की पुलिस व्यवस्था है जो 18-30 वर्ष के आयु वाले युवक शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा दल का एक नेता भी होता है जिसे दलपति कहते हैं। इसके ऊपर गाँव की रक्षा और शांति का उत्तरदायित्व होता है।

प्रश्न 12. संघ राज्य का अर्थ बताएँ।

उत्तर ⇒ जब सत्ता का विभाजन क्षेत्राधीन स्वायत्तताः केन्द्रीय राज्य या क्षेत्रीय स्तर एवं स्थानीय सरकारों के बीच वितरित कर दी जाती है तो संघीय राज्य कहलाती है, किन्तु सर्वोच्च सत्ता केन्द्र के पास होती है।

प्रश्न 13. वार्ड पार्षद के क्या कार्य हैं?

उत्तर ⇒वार्ड पार्षद के निम्न कार्य हैं-

(i) अपने वार्ड में सफाई की व्यवस्था करना।

(ii) अपने वार्ड में सड़क, नाली तथा गली बनवाना ।

(iii) जलापूर्ति एवं रौशनी की व्यवस्था करना ।

प्रश्न14. लोकतंत्र में सत्ता में साझेदारी का क्या अर्थ है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में सत्ता में साझेदारी का अर्थ है कि राजनीतिक प्रक्रिया में नागरिक अधिकाधिक भागीदारी करें। लोकतंत्र में चुनाव रैली,मतदान आदि
माध्यमों द्वारा जनता राजनीतिक सत्ता में भागीदारी करती है। लोकतंत्र में सत्ता में जनता के विभिन्न वर्गों की जितनी अधिक साझेदारी होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूतव सुदृढ़ होगा। सत्ता में साझेदारी हेतु राजनीतिक जागरुकता अनिवार्य है।

प्रश्न 15, ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग कौन-कौन हैं ?,

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायतों के प्रमुख अंग इस प्रकार अग्रलिखित हैं-

(i) ग्राम सभा

(ii) कार्यकारिणी समिति

(iii) पंचायत सेवक

(iv) ग्राम रक्षा दल

(v) ग्राम कचहरी ।

प्रश्न 16. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी एक ऐसी कुशल राजनीतिक पद्धति है जिसके द्वारा समाज के सभी वर्गों को देश की शासन प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाता है ताकि कोई भी वर्ग यह महसूस न करें कि उसकी अवहेलना हो रही है। वास्तव में सत्ता की भागीदारी लोकतंत्र का मूलमंत्र है। जिस देश ने सत्ता की साझेदारी को अपनाया वहाँ गृहयुद्ध की संभावना समाप्त हो जाती है । सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में भी सत्ता की भागीदारी को अपनाया जाता है। इस प्रकार केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों में भी सत्ता की भागीदारी के सिद्धांत पर शक्ति का बँटवारा कर दिया जाता है

 


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प्रश्न 17. नगर परिषद् के प्रमुख कार्यों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ नगर परिषद् के 11 अनिवार्य एवं 6 ऐच्छिक कार्य हैं अनिवार्य कार्य-

(i) नगर की सफाई,,

(ii) रोशनी का प्रबन्ध,

(iii) पीने के पानी की व्यवस्था ,

(iv) सड़क निर्माण एवं मरम्मत,

(v) नालियों की सफाई,

(vi) प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना,

(vii) महामारी से बचाव एवं टीका लगवाने का प्रबन्ध,

(viii) अस्पताल खोलना,

(ix) आग से सुरक्षा,

(x) श्मशान घाट का प्रबंध और

(xi) जन्म-मृत्यु का निबंधन ऐच्छिक कार्य- ऐच्छिक कार्य

(i) सड़क निर्माण,

(ii) गली गली नाली निर्माण,

(iii) बसने योग्य भूमि का निर्माण,

(iv) गरीबों के लिए गृह निर्माण,

(v) बिजली का प्रबंध करना एवं

(vi) प्रदर्शनी लगाना।

18, नगर निगम की आय के प्रमुख साधनों को बताए ।

उत्तर ⇒ नगर निगम अपने कार्यों के संचालन हेतु कई प्रकार से आय अर्जित करता है। नगर निगम कई प्रकार के कर लगाता है। विभिन्न प्रकार के करों में मकान कर, नल कर, शौचालय कर, पशु कर, छोटे वाहनों पर कर, ठेला, रिक्शा आदि सभी कर प्रमुख है। इन करों से प्राप्त आय की राशि इतनी कम होती है कि नगर निगम का कार्य इससे नहीं चल पाता, जिसके चलते राज्य सरकार समय-समय पर आर्थिक अनुदान देकर निगम के वार्षिक बजट की क्षतिपूर्ति करती है। नगर निगम विभिन्न प्रकार नीलामी के माध्यम से भी आय अर्जित करता है।

प्रश्न 19. राजनीतिक दल किस तरह से सत्ता में साझेदारी करते हैं,
अथवा, राजनीतिक दलों की लोकतंत्र में क्या भूमिका होती है?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दल लोगों के ऐसे संगठित समूह हैं जो चुनाव लड़ने और राजनैतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य काम करता है। अतः, विभिन्न राजनैतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्द्धा के रूप में काम करते हैं। उनकी आपके प्रतिद्वन्दिता यह निश्चित करती है कि सत्ता हमेशा किसी एक व्यक्ति या संगति व्यक्ति समूह के हाथ में न रहे। अगर हम राजनैतिक दलों के इतिहास पर गौर को तो पता चलता है कि सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधाराओं और समु वाले राजनीतिक दलों के हाथ में आती-जाती रहती है।

प्रश्न 20. भारत में सत्ता की साझेदारी के क्या लाभ हैं ?

उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी के निम्नलिखित मुख्य लाभ है

(i) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र का मूलमंत्र है, जिसके बिना प्रजातंत्र की कल्पना ही नहीं किया जा सकती ।

(ii) जब देश के सभी लोगों को देश की प्रशासनिक व्यवस्था में भागीदार बनाया जाता है तो देश और भी मजबूत होता है।

(iii) जब बिना किसी भेदभाव के सभी जातियों के हितों को ध्यान में रखा जाता है और उनकी भावनाओं का आदर किया जाता है तो किसी भी प्रकार के संघर्ष की संभावना समाप्त हो जाती है तथा देश प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है

(iv) सत्ता की साझेदारी अपनाकर विभिन्न समूहों के बीच आपसी टकराव तथा गृहयुद्ध की संभावना को समाप्त किया जा सकता

प्रश्न 21. सत्ता की साझेदारी से आपका क्या तात्पर्य है ?

उत्तर ⇒ जब देश की सत्ता में देश के अन्दर रहनेवाले सभी वर्गों को हिस्सेदार बनाया जाता है, तो इस व्यवस्था को सत्ता की
साझेदारी कहा जाता है।

प्रश्न 22. जिला परिषद् के तीन कार्य लिखें।

उत्तर ⇒ जिला परिषद् के तीन कार्य निम्नलिखित है

(i) पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के बीच संबंध स्थापित करना ।

(ii) विभिन्न पंचायत समितियों द्वारा तैयार कीगई योजनाओंको संतुलित करना।

(iii) शिक्षण संस्थाओं की स्थापना तथा उनका विकास करना।

 

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प्रश्न 23. सत्ता के विकेन्द्रीकरण का क्या अर्थ है ?

उत्तर ⇒ सत्ता के विकेन्द्रीकरण का तात्पर्य सत्ता को एक स्थान पर केन्द्रित न कर उसका विभिन्न स्तरों पर विभाजित किया जाना है। भारत में केन्द्र व राज्यों के मध्य शक्ति विभाजन इसका उदाहरण है ।

प्रश्न 24. भारत में संघवाद का विकास कैसे हुआ ?

उत्तर ⇒ स्वाधीनता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय संघर्ष का नेतृत्व करने वाली काँग्रेस पार्टी शुरू से ही संघीय व्यवस्था का समर्थक रही । उसका अपना संगठनात्मक ढाँचा भी इसी आधार पर बना । 1946 में गठित संविधान सभा का आधार भी संघवाद था क्योंकि इसमें प्रांतों के प्रतिनिधि वहाँ की विधानसभा द्वारा साम्प्रदायिक निर्वाचन प्रणाली के द्वारा चुने गए थे और देशी रियासतों के अधिकतर प्रतिनिधि को उनके शासकों ने नामजद किया था ।

प्रश्न 25. पंचायती राज प्रणाली क्या है ? ग्राम पंचायत को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए आपके क्या सुझाव हो सकते हैं ?

उत्तर ⇒ पंचायती राज प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों के लिए त्रिस्तरीय स्थानीय संस्थाओं का नाम है। जैसे- ग्रामीण स्तर पर ग्राम पंचायत, प्रखण्ड स्तर पर पंचायत समिति तथा जिला स्तर पर जिला परिषद । इसे सत्ता विकेन्द्रीकरण का प्रयास भी कहा जाता है।

प्रश्न 26. सत्ता में साझीदारी करने से सबंधन की राजनीति की भूमिका बताएँ ।

उत्तर ⇒ सत्ता में साझेदारी का प्रत्यक्ष रूप तब दिखता है जब दो या दो से अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं। इसलिए सत्ता की साझेदारी का सबसे अद्यतन रूप गठबंधन की राजनीति या गठबंधन की सरकारों में दिखता है, जब विभिन्न विचारधाराओं, विभिन्न सामाजिक समूहों और विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय हितों वाले राजनीतिक दल एक साथ एक समय में सरकार के एक स्तर पर सत्ता में साझेदारी करते हैं।

प्रश्न 27. सत्ता की साझेदारी का सबसे अद्यतन रूप क्या है ?

उत्तर ⇒ सत्ता की साझेदारी का सबसे अद्यतन रूप गठबंधन की राजनीति या गठबंधन की सरकारों में दिखता

प्रश्न 28. सोवियत संघ के विघटन का प्रमुख कारण क्या था ?

उत्तर ⇒ सोवियत संघ के विघटन का मुख्य कारण वहाँ की शक्तियों का जमाव एवं अत्यधिक केन्द्रीकरण की प्रवृत्तियाँ थीं ।

प्रश्न 29. गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता की साझेदारी की जरूरत क्यों नहीं पड़ती है ?

उत्तर ⇒ गैर-लोकतांत्रिक सरकारें जैसे-राजशाही, तानाशाही या एकदलीय शासन व्यवस्था होती है, इसलिए वहाँ सत्ता की साझेदारी की
जरूरत नहीं पड़ती है।

प्रश्न 30. संघीय शासन व्यवस्था के दो उद्देश्य बताएँ ।

उत्तर ⇒ संघीय शासन व्यवस्था के दो उद्देश्य इस प्रकार है.

(i) क्षेत्रीय एवं अन्य विविधताओं का आदर करना तथा

(ii) राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की रक्षा करना एवं उसे बढ़ावा देना। प्रश्न

31. लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था कैसी व्यवस्था है ?

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था एकमात्र ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें ताकत सभी के हाथों में होती है, सभी को राजनैतिक शक्तियों में हिस्सेदारी या साझेदारी करने की व्यवस्था की जाती हैं।

प्रश्न 32. लोकतंत्र में हित समूह कैसे सत्ता में भागीदारी करते हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में व्यापारी, उद्योगपति, किसान, शिक्षक, औद्योगिक मजदूर जैसे संगठित हित समूह सरकार की विभिन्न समितियों में प्रतिनिधि बनकर सत्ता में भागीदारी करते हैं । ?

 

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प्रश्न 33. समवर्ती सूची पर कानून बनाने की शक्ति किसे प्राप्त

उत्तर ⇒ समवर्ती सूची पर केन्द्र एवं राज्य सरकार दोनों ही कानून बना सकती है, लेकिन जब दोनों के द्वारा बनाए गए कानून में टकराव हो तब केन्द्र द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होगा ।

प्रश्न 34. संघीय शासन व्यवस्था में न्यायपालिका की भूमिका बताएं ?

उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था में एक स्वतंत्र न्यायपालिका होती है जो केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारों और शक्ति के बँटवारे के संबंध में उठने वाले कानूनी विवादों को हल करता है।

प्रश्न 35. सत्ता में साझेदारी का लोकतंत्र में क्या महत्त्व है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में सत्ता में साझेदारी का बहुत महत्त्व होता है। लोकतंत्र जनता का शासन होता है। जनता अपने प्रतिनिधियों द्वारा शासन में अपनी साझेदारी सुनिश्चित करती है। सत्ता में साझेदारी से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना समाप्त हो जाती है। समाज के सभी लोगों के शासन व्यवस्था से जुड़े रहने के कारण शासन की कार्यकुशलता बढ़ती है।

प्रश्न 36. स्थानीय स्वशासन का क्या अर्थ है ? इसके विभिन्न प्रकारों का उदाहरण सहित वर्णन करें।

उत्तर ⇒ जब किसी स्थानीय क्षेत्र का शासन वहाँ के निवासियों द्वारा ही किया जाता है तब उसे स्थानीय स्वशासन कहते हैं। स्थानीय स्वशासन दो प्रकार के होते हैं शहरी क्षेत्र का एवं ग्रामीण क्षेत्र का। नगर पंचायत, नगर परिषद् एवं नगर निगम शहरी क्षेत्र की संस्थाओं के तथा ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद् ग्रामीण क्षेत्र की संस्थाओं के उदाहरण हैं।

प्रश्न 37. पंचायत समिति के कार्यों का वर्णन करें ?

उत्तर ⇒ पंचायत समिति सभी ग्राम पंचायतों की वार्षिक योजनाओं पर विचार-विमर्श करती है तथा समेकित योजना को जिला
परिषद् में प्रस्तुत करती है। यह ऐसे कार्यकलापों का सम्पादन एवं निष्पादन करती है जो राज्य सरकार या जिला परिषद् इसे सौंपती है | इसके अतिरिक्त सामुदायिक विकास कार्य एवं प्राकृतिक आपदा के समय राहत का प्रबंध करना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। पंचायत समिति अपना अधिकांश कार्य स्थायी समितियों द्वारा करती है ।

प्रश्न 38. संघीय शासन व्यवस्था की विशेषताओं का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ संघीय शासन व्यवस्था की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

(i) संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता केन्द्र सरकार और उसकी विभिन्न आनुसंगिक इकाइयों के बीच बँट जाती है ।

(ii) संघीय व्यवस्था में दोहरी सरकार होती है- एक केन्द्रीय स्तर की सरकार जिसके अधिकार क्षेत्र में राष्ट्रीय महत्त्व के विषय होते हैं, दूसरे स्तर पर प्रांतीय या क्षेत्रीय सरकारें होती हैं जिनके अधिकार क्षेत्र में स्थानीय महत्त्व के विषय होते हैं ।

(iii) प्रत्येक स्तर की सरकार अपने क्षेत्र में स्वायत्त होती है और अपने-अपने कार्यों के लिए लोगों के प्रति जवाबदेह या उत्तरदायी होती है ।

(iv) अलग-अलग स्तर की सरकार एक ही नागरिक समूह पर शासन करती है ।

प्रश्न 39. 1993 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय स्वशासन में दो महत्त्वपूर्ण अंतर बताएँ ।

उत्तर ⇒ दो महत्त्वपूर्ण अंतर हैं-

(i) 1993 के 73वें एवं 74वें संशोधन के पूर्व स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं थी, परंतु संशोधन के
बाद इसे संवैधानिक मान्यता प्राप्त हो गई है।

(ii) संशोधन के पूर्व स्थानीय स्वशासन की संस्थओं में महिलाओं को आरक्षण प्राप्त नहीं था, संशोधन के बाद उन्हें आरक्षण प्राप्त हो गया है।
इसका मुख्य उद्देश्य जनता में लोकतांत्रिक चेतना जागृत करना तथा उन्हें अपने अधिकार और कर्तव्य के प्रति सजग रखना है । यह ग्रामीण विकास का सर्वोत्तम कारगर हथियार है । बशर्ते जनता अपना प्रतिनिधि चुनने में निष्पक्ष हों तथा प्रतिनिधि अपने कर्त्तव्य के प्रति ईमानदार हों । –

प्रश्न 40. संघीय व्यवस्था का गठन कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था आमतौर पर दो तरीकों से गठित होती है। कई बार स्वतंत्र और संप्रभु राज्य आपस में मिलकर सामान्य संप्रभुता स्वीकार कर एक संघीय राज्य का गठन करते हैं। आमतौर पर इस तरह से गठित संघीय व्यवस्था में राज्यों की स्वायत्तता या पहचान की भावना प्रबल होती है, अंत: संघ में शामिल होने वाले राज्यों के अधिकार समान होते हैं। वे केन्द्र सरकार की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होते हैं क्योंकि इस तरह से गठित संघीय व्यवस्था में आमतौर पर अवशिष्ट अधिकार राज्यों के हिस्से में आते हैं । संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विटजरलैंड, आस्ट्रेलिया इस तरह से गठित संघीय राज्य के उदाहरण हैं ।

 

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                                                   दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ग्राम कचहरी की संरचना एवं कार्यों का वर्णन करें ।
अथवा, ग्राम कचहरी के गठन एवं शक्ति का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में न्यायिक कार्यों को सम्पन्न करने के लिए एक ग्राम कचहरी का गठन किया जाता है। बिहार में पंचायत राज अधिनियम, 2006 के अनुसार ग्राम कचहरी का गठन निर्वाचन द्वारा किया जाता है जिसमें एक निर्वाचित सरपंच और निश्चित संख्या में निर्वाचित पंच होते हैं। प्रत्येक पंच लगभग 500 आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। ग्राम कचहरी में भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ों तथा महिलाओं के लिए ग्राम पंचायत जैसा ही आरक्षण का प्रावधान है। ग्राम कचहरी का प्रधानं सरपंच होता है। निर्वाचन के बाद प्रत्येक ग्राम कचहरी अपनी पहली बैठक में निर्वाचित पंचों में से बहुमत द्वारा एक उपसरपंच का चुनाव करती है। ग्राम कचहरी का एक सचिव होता है जिसे न्यायमित्र के नाम से जाना जाता है। इसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है।
ग्राम कचहरी को भारतीय दंडसंहिता की अनेक धाराओं से संबंधित मुकदमों की सुनवाई करने का अधिकार है। यह दीवानी और फौजदारी दोनों प्रकार के मुकदमों की सुनवाई करती है। ग्राम कचहरी को दस हजार रुपये तक के दीवानी मुकदमे सुनने का अधिकार प्राप्त है। ग्राम कचहरी की न्यायपीठ किसी अपराधी को एक हजार रुपये से अधिक जुर्माना नहीं कर सकती है।

प्रश्न 2. भारत में संघीय शासनया की विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था की सबसे पहली शर्त के रूप में भारतीय संविधान मेंदो तरह की सरकारों की व्यवस्था की गई है-एक सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए जिसे संघीयसरकार या केन्द्रीय सरकार कहते हैं और दूसरी प्रत्येक प्रांतीय इकाई या राज्य के लिए सरकार जिसे हम प्रांतीय या राज्य सरकार कहते हैं।संविधान में स्पष्ट रूप से केन्द्र और राज्य सरकार के कार्य क्षेत्र और अधिकार को बाँटा गया है। विधायी अधिकारों को तीन सूचियों में यथा केन्द्र सूची या संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची में उल्लेखित किया गया है।संघीय व्यवस्था में साझी इकाइयों को बराबर अधिकार नहीं मिलते हैं। भारतीय संघ में भी कुछ राज्यों को विशेषाधिकार प्राप्त है। जैसा कि भारत में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त है। उसका अपना संविधान है, बिना उसकी सहमति के भारतीय संविधान के कई प्रावधानों को वहाँ लागू नहीं किया जा सकता है। उसके स्थानीय निवासियों के अतिरिक्त कोई भारतीय नागरिक वहाँ जमीन या मकान नहीं खरीद सकता है आदि।भारतीय संघवाद की एक विशेषता यह भी है कि भारतीय संविधान को कठोर बनाया गया है, ताकि केन्द्र और राज्य के बीच अधिकारों के बँटवारे में आसानी से एवं राज्यों की सहमति के बिना फेर-बदल नहीं किया जा सके।स्वतंत्र एवं सर्वोच्च न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है जिसे संविधान की व्याख्या, केन्द्र और राज्य के झगड़े निपटाने के साथ केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा बनाये गये कानूनों की जाँच करने, उन्हें संविधान के विरुद्ध या गैरकानूनी घोषित करने की भी शक्ति प्रदान होती है

प्रश्न 3. ग्राम पंचायत के संगठन, कार्यों एवं शक्तियों का वर्णन करें।

अथवा, बिहार में ग्राम पंचायत के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत के प्रमुख संगठन निम्नलिखित

मुखिया प्रत्येक ग्राम पंचायत का प्रधान मुखिया होता है। मुखिया की सहायता के लिए एक उप मुखिया का पद सृजित किया गया है।

ग्रामसभा यह पंचायत की व्यवस्थापिका सभा है। पंचायत क्षेत्र के अन्दर रहनेवाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम नहीं है, इसके सदस्य होते हैं।

ग्राम रक्षा दल यह गाँव की एक पुलिस व्यवस्था है। गाँव के 18 वर्ष से 30 वर्ष तक की आयु वाले युवक इसके सदस्य हो सकते हैं।

ग्राम कचहरी यह ग्राम पंचायत का न्यायालय है। यह ग्राम पंचायत के अंतर्गत

न्यायिक कार्यों को देखता है। ग्राम पंचायत के कार्य-

(i) ग्राम पंचायत का प्रथम काम पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना एवं बजट तैयार करना है।

(ii) ग्राम पंचायत प्राकृतिक आपदा के समय लोगों की सहायता करता है।

(iii) सार्वजनिक सम्पत्ति से अतिक्रमण हटाना ग्राम पंचायत का एक अन्य कार्य है।

(iv) ग्राम पंचायत स्वैच्छिक श्रमिकों को संगठित करता है और सामाजिक कार्यों में स्वैच्छिक सहयोग करता है।

ग्राम पंचायत की शक्तियाँ-

सम्पत्ति अर्जित करने धारण करने और उसके निपटने की तथा उसकी संविदा करने की शक्ति ।

(i) करारोपण (वार्षिक कर) जैसे जलकर, स्वच्छता कर मेलों-हाटों में प्रबंध कर वाहनों के निबंधन पर फीस तथा क्षेत्राधिकार में चलते व्यवसायों, नियोजनों पर कर।

(ii) राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर संचित निधि से सहायक अनुदान प्राप्त करने का अधिकार ।

प्रश्न 4. नगर-निगम के प्रमुख कार्यों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ नगर निगम नागरिकों की स्थानीय आवश्यकता एवं सुख-सुविधा का ध्यान रखते हुए अनेक कार्य करता है।

नगर निगम के प्रमुख कार्य निम्न है

(i) नगर क्षेत्र की नालियों, पशाब खाना, शौचालय आदि निर्माण करना एवं उसकी देखभाल करना।

(ii) नगरीय क्षेत्र में कूड़ा तथा गंदगी की सफाई करना ।

( iii) स्वच्छ पेय जल का प्रबंध करना।

(iv) गलियों, पूलों तथा उद्यानों की सफाई एवं निर्माण करना। (v) मनुष्यों तथा पशुओं के लिए चिकित्सा केन्द्र की स्थापना करना एवं छुआ-छूत जैसी बीमारी पर रोक लगाने का प्रयास करना ।

(vi) प्रारंभिक स्तरीय सरकारी विद्यालयों, पुस्तकालयों, अजायब घर की स्थापना तथा व्यवस्था करना।

(vii) विभिन्न कल्याण केन्द्रों जैसे मातृ केन्द्र, शिशु केन्द्र, वृद्धाश्रम की स्थापना एवं देखभाल करना इत्यादि नगर निगम के प्रमुख कार्यों में आते हैं।

प्रश्न 5. भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान की विशेषताएँ-

(i) भारतीय संविधान संसार के सभी संविधानों से विशाल है। इसमें संसार के सभी संविधानों के अंश हैं।

(ii) यह अंशत: लचीला तथा अंशतः कठोर है ।

(iii) यह संविधान कई संविधानों का सम्मिश्रण है।

(iv) इसमें अन्य देशों की अच्छाइयों को अपनाया गया है।

(v) यह एक संघीय संविधान है।

(vi) इसमें एकात्मक तथा संघात्मक दोनों संविधानों के गुणों को अपनाया गया है।

(vii) यह लोक कल्याणकारी राज्यों का उद्देश्य अपनाया गया है।

(viii) भारतीय संविधान राज्यों के नीति-निर्देशक तत्त्वों की व्यवस्था करता है।

(ix) यह धर्म निरपेक्ष राज्य की स्थापना करता है।

प्रश्न 6. राजनैतिक दल किस तरह से सत्ता में साझेदारी करते हैं ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दल सत्ता में साझेदारी का सबसे जीवंत स्वरूप है । राजनीतिक दल सत्ता के बँटवारे के वाहक से मोल-तोल करने वाले सशक्त माध्यम होते हैं। राजनीतिक दल लोगों के ऐसे संगठित समूह हैं जो चुनाव लड़ने और राजनैतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है । अतः, विभिन्न राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्द्धा के रूप में काम करते हैं । उनकी आपसी प्रतिद्वंद्विता यह निश्चित करती है कि सत्ता हमेशा किसी एक व्यक्ति या संगठित व्यक्ति समूह के हाथ में न रहे। राजनैतिक दलों के इतिहास पर गौर से अध्ययन करने पर पता चलता है कि सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधाराओं और समूहों वाले राजनीतिक दलों के हाथ में आती-जाती रहती है । अतः,
है। लोकतंत्र में विभिन्न राजनैतिक दल आपस में प्रतिद्वन्द्विता करके सत्ता में साझेदारी करते हैं । जनता भी अपने हितों की पूर्ति के लिए इन राजनीतिक दलों को चुनाव में जीताकर उनको सत्ता में भागीदार बनाते रहते हैं ।

 

Civics Satta Me Sajhedari Ki Karyapranali Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 7. राजनीतिक दलों के गठबंधन से आप क्या समझते हैं ? क्या गठबंधन समय की मांग है ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दलों के गठबंधन का तात्पर्य कई राजनीतिक दलों द्वारा सरकार बनाने अथवा चुनाव लड़ने के लिये मिलजुल कर गठबंधन बनाना । दलों के गठबंधन बनाना । दलों के गठबंधन दो प्रकार के होते हैं । प्रथम चुनाव पूर्व राजनीतिक दलों के गठबन्धन । दूसरे, चुनाव बाद सरकार बनाने के लिये गठबंधन । चुनाव पूर्व बनने वाले गठबन्धन अधिक स्थायी होते हैं । गठबंधनों की प्रवृत्ति तब अधिक होती है जब कोई भी दल अकेले बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में नहीं होता । भारत में वर्तमान युग गठबंधनों का युग है । क्योंकि क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव के कारण कोई भी राष्ट्रीय दल अकेले ही बहुमत प्राप्त कर सरकान बनाने हेतु सक्षम नहीं है । अतः सरकार बनाने हेतु आवश्यक बहुमत जुटाने के लिये दलों में गठबंधन की सरकार है । भारत में 1989 के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की सरकारों का युग चल रहा है। गठबंधन की सरकारों की मुख्य कमी यह है कि इसमें सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों के निर्धारण में एकरूपता नहीं होती तथा निर्णय निर्माण में अधिक समय लगता है ।

प्रश्न 8. त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से आप क्या समझते हैं ? बिहार में इसका क्या स्वरूप है ?

उत्तर ⇒ त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का तात्पर्य है कि इसमें पंचायतों का गठन तीन स्तरों पर किया जाता है। प्रथम ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, द्वितीय सबसे ऊपर जिला स्तर पर जिला पंचायत तथा तीसरा इन दोनों के मध्य, बीच के स्तर पर क्षेत्र पंचायत या ब्लॉक पंचायत ।
वैसे तो भारत में पंचायतों का अस्तित्व लम्बे समय से रहा है लेकिन त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का आरम्भ 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा 2 अक्टूबर 1959 को किया गया था। 73वें संविधान संशोधन द्वारा 1992 में पंचायतों का पुनर्गठन करके उन्हें संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई । बिहार में भी वर्तमान में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है। ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत का चुनाव ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा पाँच वर्ष के लिये किया जाता है ब्लाक या खण्ड स्तर पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों का चुनाव उस ब्लॉक में सम्मिलित ग्राम सभाओं द्वारा किया जाता है। चुने हुये सदस्य अपने में से अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। बिहार में क्षेत्र पंचायत को पंचायत समिति कहते हैं। जिला स्तर पर जिला परिषद् के सदस्यों का चुनाव भी जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है । इसका भी कार्यकाल 5 वर्ष है

प्रश्न 9. गठबंधन की सरकारों में सत्ता में साझेदारी कौन-कौन होते हैं ?

उत्तर ⇒ जब दो या दो से अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं और सरकार का गठन करती हैं, तब ऐसी सरकार को गठबंधन सरकार कहते हैं । सत्ता की साझेदारी का सबसे अद्यतन रूप गठबंधन की राजनीति या गठबंधन की सरकारों में दिखता है । गठबंधन की सरकार में सत्ता की साझेदारी विभिन्न विचारधाराओं, विभिन्न समाजिक समूहों और विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय हितों वाले राजनीतिक दल एक साथ एक समय में सरकार के एक स्तर पर सत्ता में साझेदारी करते हैं । भारत में 1990 ई० के बाद गठबंधन की राजनीति काफी बढ़ गयी है । केन्द्र में UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की पिछली सरकार गठबंधन सरकार का ही उदाहरण थी

प्रश्न 10. दबाव समूह किस तरह से सरकार को प्रभावित कर सत्ता में साझेदार बनते हैं ?

उत्तर ⇒ दबाव समूह का निर्माण तब होता है जब समान पेशे, हित, आकांक्षा अथवा मत के लोग एक समान उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होते हैं । एक संगठन के रूप में दबाव समूह सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन राजनीतिक पार्टियों के समान दबाव समूह का लक्ष्य सत्ता पर प्रत्यक्ष नियंत्रण करने अथवा उसमें हिस्सेदारी करने का नहीं होता है । दबाव समूह राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। लोकतंत्र में हम व्यापारी, उद्योगपति, किसान, शिक्षक, औद्योगिक मजदूर जैसे संगठित हित समूह सरकार की विभिन्न समितियों में प्रतिनिधि बनकर सत्ता में भागीदारी करते हैं या अपने हितों के लिए सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डालकर उनके फैसलों को प्रभावित कर सत्ता में अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदारी करते हैं । यदि कोई एक समूह सरकार अपने हित के लिए नीति बनाने के लिए दबाव डालता है तो दूसरा समूह उसके प्रतिकार में दबाव डालता है कि नीतियाँ इस तरह से न बनाई जाए। ऐसे में सरकार को भी यह पता चलता है कि समाज के विभिन्न वर्ग क्या चाहते हैं तथा उन्हें सत्ता में कैसे और कितनी मात्रा में हिस्सेदार बनाया जाए ।

प्रश्न 11. ग्राम पंचायतों की आय के स्रोत क्या हैं ?

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत की आय के स्रोत निम्नलिखित हैं-

(i) कर स्रोत : होल्डिंग, व्यवसाय, व्यापार, पेशा और नियोजन ।

(ii) फीस और रेंट : वाहनों का निबंधन, तीर्थ-स्थानों, हाटों और मेलों, जलापूर्ति, गलियों और अन्य स्थानों पर प्रकाश, शौचालय और मूत्रालय ।

(iii) वित्तीय अनुदान : राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर राज्य सरकार द्वारा पंचायतों को संचित निधि से अनुदान भी दिया जाता है

 

Class 10th Civics Subjective Question

 

प्रश्न 12. पंचायत समिति का गठन कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का दूसरा या मध्य स्तर है । वास्तव में यह ग्राम पंचायत और जिला परिषद् के बीच की कड़ी है। बिहार में 5000 की आबादी पर पंचायत समिति के एक सदस्य को चुने जाने का प्रावधान हैं
इसके अतिरिक्त पंचायत समिति के क्षेत्र के अन्दर आनेवाले समिति के प्रमुख का चुनाव अप्रत्यक्ष रीति से किया जाता है । प्रमुख/उपप्रमुख के उम्मीदवार प्रत्यक्ष निर्वाचित सदस्यों में से होते हैं तथा उन्हीं के मतों से बनाये जाते हैं ।
। प्रमुख पंचायत समिति का प्रधान अधिकारी होता है । वह समिति की बैठक बुलाता है और उसकी अध्यक्षता करता है । वह पंचायत समिति के कार्यों की जाँच-पड़ताल करता है और प्रखण्ड विकास पदाधिकारी पर नियंत्रण रखता है । प्रखण्ड विकास पदाधिकारी पंचायत समिति का पदेन सचिव होता है। वह प्रमुख के आदेश पर पंचायत समिति की बैठक बुलाता है । वह पंचायत समिति के निर्णयों को क्रियान्वित करता है तथा उसके कोष के धन को खर्च करता है । वह पंचायतों का निरीक्षण करता है और अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों का सम्पादन करता है ।

प्रश्न 13. जिला परिषद् का गठन एवं उसके कार्यकाल का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ जिला परिषद् पंचायती राज व्यवस्था का तीसरा स्तर है। 50,000 की आबादी पर जिला परिषद का एक सदस्य चुना जाता है। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के चुनाव की तरह इसमें भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है। जिला परिषद् के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत जिला की सभी पंचायत समितियाँ आती हैं । जिला परिषद् का कार्यकाल पाँच बर्ष का होता है। जिले के सभी पंचायत समितियों के प्रमुख इसके सदस्य होते हैं । प्रत्येक जिला परिषद् का एक अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष होता है । उनका निर्वाचन जिला परिषद् के सदस्य अपने सदस्यों के बीच से पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ और शक्तिशाली बनाने के लिए करते हैं । प्रत्येक पाँच वर्ष के अवसान पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति का पुनरावलोकन करने हेतु ‘राज्य वित्त आयोग’ का गठन किया जाता है ।

 

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