Join For Latest Government Job & Latest News

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Matric Civics Lokatantr Me Pratispardha Avam Sangharsh Subjective Questions [ नागरिक शास्त्र ] लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

नागरिक शास्त्र ( Civics) लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष लघु और दीर्घ  उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Civics नागरिक शास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Civics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th नागरिक शास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Civics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

Join us on Telegram
Contents hide
16 उत्तर ⇒ भ्रूण हत्या का तात्पर्य गर्भ में ही कन्या शिशु की गर्भपात द्वारा हत्या करना है । आज की वैज्ञानिक तकनीकि द्वारा गर्भ काल के दौरान ही पता चल जाता है कि गर्भ में पल रहा शिशु कन्या है या बालक | चूँकि अधिकांश दम्पत्ति लड़की की तुलना में लड़के को अधिक चाहते हैं । अतः, वे गर्भ में कन्या शिशु की गर्भपात द्वारा हत्या करवा देते हैं । भारत में भ्रूण हत्या विरोधी कानून अधिक सफल नहीं हो पाया है। क्योंकि इस कानून का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है । दूसरा भ्रूण हत्या जनता की मान्यताओं व विश्वासों से सम्बन्धित है, जिसे आसानी से नहीं बदला जा सकता । भ्रूण हत्या पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता का प्रतीक है ।
45 उत्तर ⇒ 1971 के आम चुनाव में सत्तारूढ़ काँग्रेस ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा देकर लोक सभा में बहुमत प्राप्त कर केन्द्र में सरकार का निर्माण किया था। लेकिन देश की सामाजिक-आर्थिक दशा में कोई सुधार नहीं हुआ । बाँग्लादेश से आये शरणार्थियों के चलते अर्थव्यवस्था और लड़खड़ा गयी । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बाँग्लादेश की स्थापना के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को हर तरह की सहायता पर पाबंदी लगा दिया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ने भारत की आर्थिक स्थिति को असंतुलित कर दिया। वर्ष 1972-73 में मानसून की असफलता के चलते पूरे देश की कृषि पैदावार दुष्प्रभावित हुई । परिणामस्वरूप, पूरे देश में असंतोष का माहौल था । मार्च, 1974 में बिहार प्रदेश में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार एवं खाद्यान्न की कमी और कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के चलते बिहार के छात्रों ने सरकार के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया। बिहार के छात्रों ने अपने आंदोलन की अगुआई के लिए जयप्रकाश नारायण को आमंत्रित किया । जयप्रकाश नारायण ने छात्रों का निमंत्रण इस शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन अहिंसक रहेगा जो बिहार तक अपने को सीमित नहीं रखेगा। बिहार का छात्र आन्दोलन ने एक राजनीतिक स्वरूप ग्रहण किया । जयप्रकाश नारायण के निवेदन पर जीवन के हर क्षेत्र से संबंधित लोग आंदोलन में कूद पड़े । जयप्रकाश नारायण ने बिहार की काँग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की माँग कर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया । जयप्रकाश नारायण की ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का उद्देश्य भारत में सच्चे लोकतंत्र की स्थापना करना था। जयप्रकाश नारायण की इच्छा थी कि बिहार का यह आंदोलन देश के अन्य भागों में भी फैले। 12 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय देकर इंदिरा गाँधी के निर्वाचन को अवैधानिक करार दिया। इस प्रकार एक बड़े राजनैतिक संघर्ष के लिए मैदान तैयार हो चुका था। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इंदिरा गाँधी के इस्तीफे के लिए, दबाव डालना प्रारंभ किया। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल प्रदर्शन कर जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गाँधी से इस्तीफा की माँग करते हुए राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह की घोषणा की। उन्होंने अपने आह्वान में सेना और पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों को भी सरकार का आदेश नहीं मानने के लिए निवेदन किया । इंदिरा गाँधी ने इस आंदोलन को अपने विरुद्ध एक षड्यंत्र मानते हुए 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा करते हुए जयप्रकाश नारायण सहित प्रायः सभी विपरीत विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को जेल में डाल दिया। इस प्रकार बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया ।

Matric Civics Lokatantr Me Pratispardha Avam Sangharsh Subjective Questions [ नागरिक शास्त्र ] लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

                                                  लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. दल-बदल कानून क्या है ?

उत्तर ⇒ विधायकों और सांसदों के दल-बदल को रोकने के लिए संविधान में दल-बदल संशोधन कानून बनाया गया है। इस कानून के तहत कोई भी विधायक या सांसद जिस दल के प्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित होते हैं यदि वह प्रतिनिधि अपने निर्वाचन वाले दल को छोड़कर नये दल में जाना चाहता है तो उसे अपनी सीट गँवानी होगी । यह दल-बदल कानून भारतीय राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कानून के रूप में उभर कर आया है।

प्रश्न 2. बिहार में 1974 में हुए ‘छात्र आंदोलन’ के प्रमुख कारण क्या थे ?

उत्तर ⇒ बिहार में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार एवं खाद्यान्न की कमी और कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ही छात्र आंदोलन के प्रमुख थे ।

प्रश्न 3. विपक्षी दल के कार्यों का संक्षिप्त वर्णन करें ।

 

उत्तर ⇒   लोकतंत्र में विपक्षी दल एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विपक्षी दल के तीन महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं-

(i) सत्तारूढ़ दल पर उचित नियंत्रण रखना और जनता की शिकायतों को सरकार के समक्ष करना ।

(ii) विपक्षी दल कानून के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(iii) सरकार के साथ सकारात्मक कदम उठाकर देश के विकास में सहायता करना ।

प्रश्न 4. सूचना का अधिकार का कानून लोकतंत्र का रखवाला है, कैसे ?

उत्तर ⇒ सूचना का अधिकार का कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने का अच्छा उदाहरण साबित हुआ है। सूचना का अधिकार सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम करता है । इस कानून के पारित होने के बाद अब जनता काफी जागरूक हो गयी है ।

प्रश्न 5. भारत ने बहुदलीय प्रणाली को क्यों अपनाया ?

उत्तर ⇒ भारत विविधताओं का देश है। सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अधिकार दिए गए हैं। सत्ता में सभी वर्गों की साझेदारी संभव हो सके इसलिए भारत ने बहुदलीय प्रणाली को अपनाया। एकदलीय या द्विदलीय प्रणाली में सत्ता की सही साझेदारी संभव नहीं है। साथ ही लोकतंत्र की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए जनता के लिए विकल्प की बहुलता तथा निरंकुशता से बचने के लिए बहुदलीय शासन प्रणाली श्रेयस्कर है। अतः, भारत ने बहुदलीय प्रणाली को अपनाया है।

प्रश्न 6. राजनीतिक दल की परिभाषा दें ।

उत्तर ⇒ सामान्य तथा राजनीतिक दल का आशय ऐसे व्यक्तियों के किसी भी समूह से है जो एक समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कार्य करता है । यदि उस दल का उद्देश्य राजनीतिक कार्य-कलापों से संबंधित होता है तो उसे हम राजनीतिक दल कहते हैं। किसी भी राजनीतिक दल में व्यक्ति एक समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एकजुट होते हैं, जैसे मतदान करना, चुनाव लड़ना, नीतियाँ एवं कार्यक्रम तय करना आदि ।

प्रश्न 7. दबाव समूह से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर⇒ लोगों का ऐसा समूह जो अपनी माँगों की ओर सरकार का ध्यान दिलाने के लिए सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डालने के लिए संगठन बनाता है, समूह कहलाता है ।

 

नागरिक शास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष

 

प्रश्न 8. चिपको आंदोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे ?.

उत्तर ⇒‘चिपको आंदोलन’ का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे– दबाव

(i) वन सम्पदा की सुरक्षा,

(ii) वन जीव की सुरक्षा,

(iii) मिल मालिकों के शोषण से मुक्ति तथा

(iv) पर्यावरण सुरक्षा |

प्रश्न 9. राजनीतिक दल लोकतंत्र में क्यों आवश्यक है ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दल, शासन व्यवस्था के पक्ष-विपक्ष से अवगत कराते
हुए जनता के समक्ष बेहतर विकल्प पेश करता है । जनमत निर्माण की इस प्रक्रिया में जनता को निर्णय लेने में सुविधा होती है। राजनीतिक दलों के अभाव में चुनाव का कोई अस्तित्व नहीं होता । चुनाव एवं राजनीतिक दल में जरूरी संबंध है। अतएव राजनीतिक दल लोकतंत्र का प्राण हैं

प्रश्न 10. राजनीतिक दलों को प्रभावशाली बनाने के दो सुझाव दें।

 

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के सामने आज अनेकों चुनौतियाँ हैं, जिसका सामना करने के लिए राजनीतिक दलों को प्रभावशाली बनाने के उपाय निम्न हैं-

(i) दलबदल कानून लागू हो-विधायकों और सांसदों के दलबदल को रोकने हेतु जो कानून बनाया गया है उसे पूर्णतः लागू होना चाहिए।

 

(ii) न्यायपालिका के आदेश का पालन-आय से अधिक सम्पत्ति, काले घन का दुरुपयोग तथा अपराधी प्रवृत्ति के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक संबंधित न्यायालय के आदेश लागू होने से राजनीतिक दल प्रभावशाली होंगे।

प्रश्न 11. सूचना के अधिकार आंदोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे ?

उत्तर ⇒ सूचना के अधिकार आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकारी दस्तावेजों की प्रतिलिपि की प्राप्ति था ।

प्रश्न 12. भारतीय किसान यूनियन की मुबा है?

उत्तर ⇒ भारतीय किसान यूनियन किसानों के हितों की रक्षा के लिये समय समय पर आन्दोलन करता रहता है। इसकी मुख्य किसानों को सस्ती दरों पर बिजली, खाद व बीजों की आपूर्ति, कृषि उत्पाद के लिये उचित मूल्य की व्यवस्था, किसानों की ऋण माफी आदि हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश व हरियाणा में किसानों की मुख्य माँग गन्ना की कीमतों में वृद्धि तथा सस्ती बिजली की अबाध आवृति है ।।

प्रश्न 13. राजनीति दलों के प्रमुखों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ राजनीति दलों के प्रमुख चुनौतियों इस प्रकार है –

(i) दलों के अन्दर आंतरिक लोकतंत्र के अभाव के कारण बहुत सारे नेता अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।

(ii) दलों में वंशवादी उत्तराधिकार का चलन बढ़ गया है। यह दल को सक्षम नेतृत्व प्राप्त करने से बचित रखता है।

(iii) दल चुनाव जीतने के लिए धन एवं बल के प्रयोग में संलग्न हैं। यह लोकतंत्र के विकास को रोकता है तथा पल के
अच्छे नेताओं के महत्त्व को कम करता है।

(iv) आजकल दलों की विचारधाराओं में मामूली सा अंतर रह गया है। फलतः जनता के लिए विकल्पों का चुनाव सीमित हो गया है।

प्रश्न 14. राष्ट्रीय राजनीति दल किसे कहते हैं

उत्तर ⇒ भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रीय राजनीतिक दल जैसे फल हैं जिनका अस्तित्व पूरे देश में होता है। इनके कार्यक्रम एवं नीतियाँ राष्ट्रीय स्तर के होते हैं। इनकी इकाइयाँ राज्य स्तर पर भी होती हैं। इन्हें राष्ट्रीय राजनीतिक स कहते हैं। राष्ट्रीय राजनीतिक दल को मान्यता प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों को लोकसभा या विधान सभा के चुनावों में 4 या अधिक राज्यों द्वारा कूल डाले गये वैध मतों का 6% प्राप्त करने के साथ किसी यया से लेकर की कम से कम 4 सीटों पर विजयी होना आवश्यक है

प्रश्न 15. जनता दल यूनाइटेड का परिचय दे

उत्तर ⇒ जनता दल यूनाइटेड को जदयू के दाम से भी जन्म जाता है। यह एक क्षेत्रीय दल है। जिसका चुनाव चिह्न है। में उतर मा की सरकार
तीर है। जिसके मुख्यमंत्री श्री वीतिश कुमार जो है।

प्रश्न 16. राजनीतिक दलों को प्रधानको संक्षेप में लिखें।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के सामने आज अनेकों चुनौतियों है, जिसका सामना करने के लिए राजनीतिक दलों को
प्रभावशाली बनने से सोम पाय निम्नलिखित हैं-

(i) दलबदल कानून लागू हो विधायकों और सांसदों के दल बदल को रोकने हेतु जो कानून बनाया गया है,
उसे बिना किसी लाभ के पूर्णतः लागू चाहिए ।

(ii) न्यायपालिका के आदेश का पालन आय से अधिक सम्पत्ति, काले धन का दुरुपयोग तथा अपराधी प्रवृत्ति के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक संबंधित न्यायालय के आदेश लागू होने से राजनीतिक दल प्रभावशाली होंगे ।

(iii) दलों के बीच आंतरिक लोकतंत्र बहाल हो राजनीतिक दलों को प्रभावी बनाने के लिए यह भी आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दल अपने-अपने संविधान का पालन करें।

प्रश्न 17. भ्रूण हत्या क्या है ? क्या कानून इसे रोकने में सफल हुआ है ?

उत्तर ⇒ भ्रूण हत्या का तात्पर्य गर्भ में ही कन्या शिशु की गर्भपात द्वारा हत्या करना है । आज की वैज्ञानिक तकनीकि द्वारा गर्भ काल के दौरान ही पता चल जाता है कि गर्भ में पल रहा शिशु कन्या है या बालक | चूँकि अधिकांश दम्पत्ति लड़की की तुलना में लड़के को अधिक चाहते हैं । अतः, वे गर्भ में कन्या शिशु की गर्भपात द्वारा हत्या करवा देते हैं । भारत में भ्रूण हत्या विरोधी कानून अधिक सफल नहीं हो पाया है। क्योंकि इस कानून का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है । दूसरा भ्रूण हत्या जनता की मान्यताओं व विश्वासों से सम्बन्धित है, जिसे आसानी से नहीं बदला जा सकता । भ्रूण हत्या पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता का प्रतीक है ।

 

Civics Lokatantr Me Pratispardha Avam Sangharsh Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 18. ताड़ी विरोधी आन्दोलन क्यों हुआ

उत्तर ⇒ ताड़ी विरोधी आन्दोलन महिलाओं द्वारा शराबबन्दी के लिए चलाया गया था। इसका उद्देश्य पुरुषों में शराब की लत को समाप्त करना था । ताड़ी ताड़ के पेड़ से प्राप्त होने वाली नशीला पेय पदार्थ है ।

प्रश्न 19 स्वतंत्र राजनीतिक संगठन कौन होता है ?

उत्तर ⇒ विभिन्न समूह दलगत राजनीति से अलग होकर जब अपने आंदोलन को व्यापक प्रसार करने हेतु जनता को लामबंद करते हैं तो इसे हम स्वतंत्र राजनीतिक संगठन कह सकते हैं ।

प्रश्न 20. किस आधार पर आप कह सकते हैं कि राजनीतिक दल जनता एवं सरकार के बीच कड़ी का काम करता है ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दल का एक प्रमुख कार्य है- जनता और सरकार के बीच मध्यस्थता करना । राजनीतिक दल ही जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं को सरकार के सामने रखते हैं और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को जनता तक पहुँचते हैं । इस तरह राजनीतिक दल सरकार एवं जनता के बीच कड़ी का काम करता है ।

प्रश्न 21. संगठित राजनीति के अनेक माध्यम कौन-कौन से हैं ?

उत्तर ⇒ संगठित राजनीति के अनेक माध्यम होते हैं जैसे- राजनीतिक दल, दबाव समूह तथा आन्दोलनकारी समूह ।

प्रश्न 22. नेपाल के आंदोलन का मुख्य लक्ष्य क्या था ?

उत्तर ⇒ नेपाल के आंदोलन का मुख्य लक्ष्य था कि शासन की बागडोर राजा के हाथ से लेकर लोकतंत्र की स्थापना करना था ।

प्रश्न 23. राजनीतिक दल और दबाव समूह में एक बड़ा अंतर क्या है ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दल का मुख्य लक्ष्य देश की सत्ता पर नियंत्रण स्थापित करना होता है जबकि दबाव समूह का ऐसा कोई लक्ष्य नहीं होता है ।

प्रश्न 24. भारत के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के नाम बताएँ ।

उत्तर ⇒ भारत में छह राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी ।

प्रश्न 25, नेपाल और बोलिविया के संघर्ष में दो समानताएँ क्या थीं ?

उत्तर ⇒ नेपाल और बोलिविया के संघर्ष में दो समानताएँ इस प्रकार थीं-

(i) दोनों ही घटनाओं में जनता एक बड़े पैमाने पर लामबन्द हुई ।

(ii) दोनों ही घटनाओं में राजनीतिक संगठनों की भूमिका निर्णायक रही ।

प्रश्न 26. दलीय पद्धति के कितने प्रकार हैं ? सोदाहरण लिखें ।

उत्तर ⇒ दलीय पद्धति के तीन प्रकार हैं— एकदलीय, द्विदलीय एवं बहुदलीय । एक दलीय पद्धति का उदाहरण चीन है। द्विदलीय पद्धति का उदाहरण ब्रिटेन एवं अमेरिका है। बहुदलीय पद्धति का उदाहरण भारत, फ्रांस, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि हैं।

प्रश्न 27. चिपको आंदोलन और नर्मदा बचाओ आंदोलन में क्या अंतर था ?

उत्तर ⇒ जहाँ चिपको आंदोलन के द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों के संरक्षण पर बल दिया गया वहीं नर्मदा बचाओ आंदोलन ने कृषि क्षेत्र की सरकार द्वारा अनदेखी पर अपना गहरा रोष प्रकट किया ।

प्रश्न 28. हित-समूह क्या है ?

उत्तर ⇒ समाज में विभिन्न हितोंवाले लोग निवास करते हैं। जब एक प्रकार के हित रखनेवाले लोग संगठित रूप धारण कर लेते हैं तो उसे हित-समूह कहते हैं। इसे इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है कि “हित – समूह ऐसे लोगों का समुदाय है
जिनमें परस्पर हितों की साझेदारी हो ।

 

Civics Lokatantr Me Pratispardha Avam Sangharsh Subjective Question Answer pdf hindi

 

प्रश्न 29. राजनीतिक दलों और दबाव समूहों के बीच रिश्ते के दो रूप कौन-कौन से हैं ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दलों और दबाव समूहों के बीच रिश्ते के दो रूप हैं (i) कुछ एक दबाव समूह राजनीतिक दलों द्वारा ही बनाए जाते हैं । (ii) कभी – कभी दबाव समूह बाद में राजनीतिक दल का रूप धारण कर लेते हैं । जैसे- असम गण परिषद् ।

                                                   दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. लोकतंत्र में विपक्षी दलों की भूमिका का विस्तार से विवेचन कीजिए ।

उत्तर ⇒ विपक्षी दल के चार कार्य इस प्रकार हैं-

(i) दो चुनावों के बीच सत्तारूढ़ दल पर नियंत्रण रखना ।

(ii) कानून निर्माण में सदन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाना ।

(iii) जनता की शिकायतों को सरकार के समक्ष रखना ।

(iv) सरकार के साथ सकारात्मक कदम उठाकर देश के विकास में सहायता करना तथा लोकतंत्र को सफल बनाना ।

प्रश्न 2. राजनीतिक दलों का प्रमुख कार्य बताएँ ।

उत्तर ⇒ किसी भी लोकतंत्र में राजनीतिक दल अनिवार्य हैं । लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दल जीवन के एक अंग बन चुके हैं । इसीलिए उन्हें ‘लोकतंत्र का प्राण’ कहा गया है । लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य निम्न हैं-

(i) नीतियाँ एवं कार्यक्रम तय करना – राजनीतिक दल जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिए नीतियाँ एवं कार्यक्रम तैयार करते हैं । इन्हीं नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर ये चुनाव लड़ते हैं। राजनीतिक दल भाषण, टेलीविजन, रेडियो, समाचार-पत्र आदि के माध्यम से अपनी नीतियाँ एवं कार्यक्रम जनता के सामने रखते हैं और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं । मतदाता भी उसी राजनीतिक दल को अपना समर्थन देते हैं जिसकी नीतियाँ एवं कार्यक्रम जनता के कल्याण के लिए एवं राष्ट्रीय हित को मजबूत करनेवाला होता है ।

(ii) शासन का संचालन — राजनीतिक दल चुनावों में बहुमत प्राप्त करके सरकार का निर्माण करते हैं । जिस राजनीतिक दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है उन्हें विपक्षी दल कहते हैं । जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष शासन का संचालन करता वहीं विपक्षी दल सरकार पर नियंत्रण रखता है और सरकार को गड़बड़ियाँ करने से रोकता है ।

(iii) चुनावों का संचालन — जिस प्रकार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में राजनीतिक दलों का होना आवश्यक है, उसी प्रकार दलीय व्यवस्था में चुनाव का होना भी आवश्यक है । राजनीतिक दल अपनी विचारधाराओं और सिद्धांतों के अनुसार कार्यक्रम एवं नीतियाँ तय करते हैं । यही कार्यक्रम एवं नीतियाँ चुनाव के दौरान जनता के पास रखते हैं जिसे चुनाव घोषणा पत्र कहते हैं । राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को खड़ा करने और उन्हें चुनाव जिताने का प्रयत्न करते हैं

(iv) लोकमत का निर्माण लोकतंत्र में जनता की सहमति या समर्थन से ही सत्ता प्राप्त होती है । इसके लिए शासन की नीतियों पर लोकमत प्राप्त करना होता है और इस तरह के लोकमत का निर्माण राजनीतिक दल के द्वारा ही हो सकता है ।

(v) सरकार एवं जनता के बीच मध्यस्थ का कार्य राजनीतिक दल का एक प्रमुख कार्य है जनता और सरकार के बीच मध्यस्थता करना है। राजनीतिक दल ही जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं को सरकार के सामने रखते हैं और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को जनता तक पहुँचाते हैं ।

(vi) राजनीतिक प्रशिक्षण राजनीतिक दल मतदाताओं को राजनीतिक प्रशिक्षण देने का भी काम करता है । राजनीतिक दल खासकर चुनावों के समय अपने समर्थकों को राजनैतिक कार्य; जैसे- मतदान करना, चुनाव लड़ना, सरकार की नीतियों की आलोचना करना या समर्थन करना आदि बताते हैं ।

(vii) गैर-राजनीतिक कार्य राजनीतिक दल न केवल राजनीतिक कार्य करते हैं, बल्कि गैर-राजनीतिक कार्य भी करते हैं; जैसे- प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सुखाड़, भूकंप आदि) के दौरान राहत संबंधी कार्य आदि ।

प्रश्न 3. ‘सूचना के अधिकार अधिनियम-2005’ का संक्षिप्त विवरण अपने शब्दों में दें।

उत्तर ⇒ सूचना के अधिकार आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य सत्ता में आशिक साझेदारी करना, सरकारी कामकाज पर नियंत्रण रखना तथा सरकार एवं सरकारी मुलाजिमों के कार्यों का सार्वजनिकीकरण करना है। राजस्थान में सरकार ने 1994 ई- और 1996 ई० में जन सुनवाई आयोजित की। इस आंदोलन के दबाव में सरकार को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर पंचायत के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि जनता को उपलब्ध कराने का आदेश निर्गत करना पड़ा। 1996 ई० में दिल्ली में सूचना के अधिकार आंदोलन को लेकर एक राष्ट्रीय समिति का गठन हुआ। 2002 ई० में सूचना की स्वतंत्रता नामक एक विधेयक पारित हुआ, लेकिन इसमें व्याप्त गड़बड़ियों के कारण इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। 2004 ई. में सूचना के अधिकार से संबंधित विधेयक संसद में लाया गया जिसे जून, 2005 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और यह अधिनियम बन गया। इस अधिकार द्वारा जनता को जागरूक कर विकास को समझने परखने के कौशल में विकास लाने का उद्देश्य समाहित है।

 

नागरिक शास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

श्न 4. राजनीतिक दल को ‘लोकतंत्र का प्राण’ क्यों कहा जाता है ?

उत्तर ⇒ किसी भी लोकतंत्र में राजनीतिक दल अनिवार्य है। लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दल जीवन के एक अंग बन चुके हैं। लोकतंत्र के व्यावहारिक पक्ष में राजनीतिक दलों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। राजनीतिक दल सरकार के संचालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।
सामान्यतया राजनीतिक दल का आशय ऐसे व्यक्तियों के किसी भी समूह से है जो एक समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कार्य करता है। यदि उस दल का उद्देश्य राजनीतिक कार्यकलापों से संबंधित होता है तो उसे हम राजनीतिक दल कहते हैं । किसी एक राजनीतिक दल के सदस्य समाज के अन्य लोगों को यह समझाने का प्रयास करते हैं कि उनके सामान्य उद्देश्य दूसरे लोगों के उद्देश्य से बेहतर है। इस संदर्भ में हमें एक और बात समझ लेना आवश्यक है कि व्यक्तियों का समूह जब एक राजनीतिक दल के रूप में संगठित होता है तो उनका उद्देश्य सिर्फ ‘सत्ता प्राप्त करना’ या ‘सत्ता को प्रभावित करना’ होता है। इसके लिए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करते हैं।
राजनीतिक दल लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में काफी महत्त्वपूर्ण कार्य करते । जनता की विभिन्न समस्याओं के समाधान में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक दल इतना महत्त्वपूर्ण है कि उनके अभाव में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था सफल ढंग से नहीं चल सकती है। राजनीतिक दल देश के लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़ने का काम करते हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक दल की आवश्यकता इसलिए भी है कि यदि दल नहीं होगा तो सभी उम्मीदवार निर्दलीय होंगे। उम्मीदवार अपनी नीतियाँ राष्ट्रहित में न बनाकर उस क्षेत्र विशेष के लिए बनाएँगे जिन क्षेत्रों से वे चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में देश की एकता एवं अखंडता खतरे में पढ़ जाएगी तथा देश का विकास रुक जाएगा। राजनीतिक दल की नीतियाँ समग्र एवं व्यापक होता है न कि किसी क्षेत्र विशेष के लिए। एक राजनीतिक दल के सदस्य सभी जाति, धर्म, क्षेत्र एवं लिंग के होते हैं। राजनीतिक दल सभी लोगों की समस्याओं को समेटकर सरकार के सामने रखते हैं और उनके समाधान का प्रयास करते हैं। इसी कारण राजनीतिक दल को ‘लोकतंत्र का प्राण’ कहा जाता है।

प्रश्न 5. राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों की मान्यता कौन प्रदान करते हैं और इसके मापदण्ड क्या हैं ?

उत्तर ⇒ कौन राजनीतिक दल राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और कौन राज्य स्तरीय, इसका निर्धारण निर्वाचन आयोग करता है। राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न का निर्धारण भी चुनाव आयोग करता है। राष्ट्रीय राजनीतिक दल की मान्यता प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों को लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में 4 या अधिक राज्यों द्वारा कुल डाले गये वैध मतों का 6% प्राप्त करने के साथ किसी राज्य या राज्य से लोकसभा की कम-से-कम 4 सीटों पर विजयी होना आवश्यक है या लोकसभा में कम-से-कम 4 सीटों पर विजयी होना आवश्यक है या लोकसभा में कम-से-कम 2% सीटें, अर्थात् || सीटें जीतना आवश्यक है जो कम-से-कम तीन राज्यों से होनी चाहिए। इसी तरह राज्य स्तरीय राजनीतिक दल की मान्यता प्राप्त करने के लिए उस दल को लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में डाले गए वैध मतों का कम-से-कम 6% मत प्राप्त करने के साथ-साथ राज्य विधान सभा की कम-से-कम 3% सीटें या 3 सीटें जीतना आवश्यक है।

प्रश्न 6, राजनीतिक दल राष्ट्रीय विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं।

उत्तर ⇒राजनीतिक दल लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जनता की विभिन्न समस्याओं के समाधान में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। आधुनिक लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की नितांत आवश्यकता है। राजनीतिक दलों के अभाव में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था सफल ढंग से नहीं चल सकती है। दरअसल राजनीतिक दल को ‘लोकतंत्र का प्राण’ कहा जाता है। किसी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में राजनीतिक दलों की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता राजनीतिक दल देश के लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़ने का काम करते हैं। लोकतंत्र में अगर राजनीतिक दल नहीं होंगे तो सभी उम्मीदवार निर्दलीय होंगे। उम्मीदवार अपनी नीतियाँ राष्ट्रहित में न बनाकर उस क्षेत्र विशेष के लिए बनाएंगे जिन क्षेत्रों से वे चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति होने से देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी। और देश का विकास जाएगा। इस समस्या से निजात दिलाने में राजनीतिक दलों का होना नितांत आवश्यक है। राजनीतिक दलों की नीतियाँ एवं कार्यक्रम पूरे देश के लिए होती है न कि किसी क्षेत्र विशेष के लिए। राजनीतिक दल के सदस्य सभी जाति, धर्म, क्षेत्र एवं लिंग के होते हैं। राजनीतिक दल सभी लोगों की समस्याओं को समेटकर सरकार के सामने रखते हैं और उनके समाधान का प्रयास करवाते हैं। अतः, राजनीतिक दल क्षेत्र विशेष से ऊपर उठकर राष्ट्रीय विकास में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं।

प्रश्न 7. किस आधार पर आप कह सकते हैं कि बिहार से शुरू हुआ ‘छात्र आन्दोलन’ का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया ?

उत्तर ⇒ 1971 के आम चुनाव में सत्तारूढ़ काँग्रेस ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा देकर लोक सभा में बहुमत प्राप्त कर केन्द्र में सरकार का निर्माण किया था। लेकिन देश की सामाजिक-आर्थिक दशा में कोई सुधार नहीं हुआ । बाँग्लादेश से आये शरणार्थियों के चलते अर्थव्यवस्था और
लड़खड़ा गयी । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बाँग्लादेश की स्थापना के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को हर तरह की सहायता पर पाबंदी लगा दिया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ने भारत की आर्थिक स्थिति को असंतुलित कर दिया। वर्ष 1972-73 में मानसून की असफलता के चलते पूरे देश की कृषि पैदावार दुष्प्रभावित हुई । परिणामस्वरूप, पूरे देश में असंतोष का माहौल था । मार्च, 1974 में बिहार प्रदेश में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार एवं खाद्यान्न की कमी और कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के चलते बिहार के छात्रों ने सरकार के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया। बिहार के छात्रों ने अपने आंदोलन की अगुआई के लिए जयप्रकाश नारायण को आमंत्रित किया । जयप्रकाश नारायण ने छात्रों का निमंत्रण इस शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन अहिंसक रहेगा जो बिहार तक अपने को सीमित नहीं रखेगा। बिहार का छात्र आन्दोलन ने एक राजनीतिक स्वरूप ग्रहण किया । जयप्रकाश नारायण के निवेदन पर जीवन के हर क्षेत्र से संबंधित लोग आंदोलन में कूद पड़े । जयप्रकाश नारायण ने बिहार की काँग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की माँग कर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया । जयप्रकाश नारायण की ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का उद्देश्य भारत में सच्चे लोकतंत्र की स्थापना करना था। जयप्रकाश नारायण की इच्छा थी कि बिहार का यह आंदोलन देश के अन्य भागों में भी फैले। 12 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय देकर इंदिरा गाँधी के निर्वाचन को अवैधानिक करार दिया। इस प्रकार एक बड़े राजनैतिक संघर्ष के लिए मैदान तैयार हो चुका था। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इंदिरा गाँधी के इस्तीफे के लिए, दबाव डालना प्रारंभ किया। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल प्रदर्शन कर जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गाँधी से इस्तीफा की माँग करते हुए राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह की घोषणा की। उन्होंने अपने आह्वान में सेना और पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों
को भी सरकार का आदेश नहीं मानने के लिए निवेदन किया । इंदिरा गाँधी ने इस आंदोलन को अपने विरुद्ध एक षड्यंत्र मानते हुए 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा करते हुए जयप्रकाश नारायण सहित प्रायः सभी विपरीत विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को जेल में डाल दिया। इस प्रकार बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया ।

 

Class 10th Civics Model Paper And Question Bank 2024 PDF Download

 

प्रश्न 8 जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने पक्ष में उत्तर दें ।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र को मजबूत बनाने एवं उसे और सुदृढ़ करने में जनसंघर्षों की अहम् भूमिका होती है। 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश दासता से मुक्त होकर भारत ने 26 जनवरी, 1950 को अपने गणतांत्रिक संविधान को अंगीकार किया । तब से वह लोकतंत्र की आधारशिला दिनोंदिन सुदृढ़ कर रहा है 19वीं शताब्दी के सातवें दशक के दौरान भारत में अनेक तरह के सामाजिक और जनप्रिय संघर्षों की उत्पत्ति हुई जिसने लोकतंत्र के मार्ग को प्रशस्त किया । भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में 1970 का दशक कई दृष्टियों से इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि यह एक ऐसा दशक था जिसमें भारतीय लोकतंत्र के शीर्षबिन्दु पर पदासीन श्रीमती इंदिरा गाँधी ने 1971 के आम चुनाव में अपने प्रभुत्व एवं सामर्थ्य का प्रदर्शन कर काँग्रेस को पुनर्स्थापित किया और श्रीमती गाँधी के नेतृत्व में भारत की सरकार बनीं। उसके बाद श्रीमती गाँधी ने संविधान के बुनियादी ढाँचे में परिवर्तन करने का प्रयास किया। 1975 में उन्होंने देश के अन्दर आपातकाल की घोषणा कर जिस ढंग से लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया, उसके विरोध में सरकार विरोधी जनसंघर्ष तेज हुई और ये जनसंघर्ष लोकतंत्र को बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए । इस तरह के जनसंघर्ष लोकतंत्र विरोधी सरकार को हटाकर लोकतांत्रिक सरकार को स्थापित करने का प्रयास करते हैं, जैसा कि 1917 में केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार की स्थापना हुई । इस तरह हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र में जनसंघर्ष की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है । अतः, हम इस कथन से सहमत हैं कि ” जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है लोकतंत्र जनसंघर्ष के द्वारा विकसित होता है । लोकतंत्र में फैसले आम सहमति से लिए जाते हैं । यदि सरकार फैसले लेने में जनसधारण के विचारों को अनदेखी करती है तो ऐसे फैसलों के खिलाफ जनसंघर्ष होता है और सरकार पर दबाव बनाकर आम सहमति से फैसले लेने के लिए मजबूर किया जाता है। जनसंघर्ष सरकार को तनाशाह होने एवं मनमाना निर्णय से रोकते हैं, क्योंकि लोकतंत्र में संघर्ष होना आम बात होती है। इन संघर्षों का समाधान व्यापक लामबंदी के जरिए करती है । जनसंघर्षों से राजनीतिक संगठनों का विकास होता है । ये राजनीतिक संगठन जन भागीदारी के द्वारा जन समस्याओं को सुलझाने में सहायक होते हैं। इस तरह से कहा जा सकता है कि ” जनसंघर्ष से लोकतंत्र मजबूत होता है” ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top