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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Civics Subjective Question Answer Class 10th Subjective Question

Matric Civics Lokatantr Ki Upalabdhiyan Subjective Questions 2024 [ नागरिक शास्त्र ] लोकतंत्र की उपलब्धियां सब्जेक्टिव क्वेश्चन

नागरिक शास्त्र ( Civics) लोकतंत्र की उपलब्धियां लघु और दीर्घ  उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Civics नागरिक शास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Civics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th नागरिक शास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Civics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Civics Lokatantr Ki Upalabdhiyan Subjective Questions 2024 [ नागरिक शास्त्र ] लोकतंत्र की उपलब्धियां सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

                                     लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. गुप्त मतदान क्या है ? अथवा, गुप्त मतदान-पत्र क्या है ?

उत्तर ⇒ जब मतदाता गुप्त रूप से मतदान – पत्र द्वारा अपना मत प्रदान करता है उसे गुप्त मतदान कहते हैं।
मतदान की प्राचीन विधि में प्रत्याशियों का चुनाव चिह्न नाम सहित एक पर्चे पर छापा जाता है। मतदाता को मतदान केन्द्र पर यह पत्र मतदान करने के लिए दिया जाता है। मतदाता अपने मत का प्रयोग इसी पत्र पर छपे प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न पर मुहर लगाकर बक्से में डाल देता है। इससे उसका मत कहाँ गया यह अज्ञात होता है। इस पत्र को ही गुप्त मतदान – पत्र कहते हैं।

प्रश्न 2. भारत में लोकतंत्र के भविष्य को आप किस रूप में देखते हैं ?

उत्तर ⇒ भारतवर्ष में लोकतंत्र का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है, क्योंकि प्रारंभ से ही यहाँ पर एक लोक कल्याणकारी सरकार का गठन किया गया है जो जनता को मौलिक अधिकार प्रदान करती है तथा व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाने का प्रयास करती है। भारत सरकार विभिन्न समूहों के मध्य सत्ता का विभाजन करके सामंजस्य स्थापित करती है। यहाँ आर्थिक प्रगति तो होती ही है परंतु सामाजिक दायित्वों का पूर्ण निर्वाह भी किया जाता है।
यह विश्व शांति एवं सौहार्द्र के सिद्धांत पर चलने वाला राष्ट्र है। यही कारण हैं कि इसकी विश्व स्तर पर उत्तम छवि है ।

प्रश्न 3. भारतीय लोकतंत्र की किन्हीं चार समस्याओं का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र की निम्नलिखित चार समस्याएँ निम्नांकित हैं-

(i) वंशवाद,

(ii) पारवाद,

(iii) जातिवाद तथा

(iv) अज्ञानता ।

प्रश्न 4. लोकतंत्र के क्या अवगुण है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र के लाभों को देखने के बाद हम कह सकते हैं कि यह शासन का सबसे अच्छा स्वरूप है परन्तु यह ठीक नहीं है ।
इस व्यवस्था के कुछ अवगुण भी हैं जो निम्नलिखित हैं-

(i) समानता का सिद्धांत अप्राकृतिक है— लोकतंत्र का मुख्य आधार समानता का सिद्धांत है परंतु आलोचक यह कहते हैं कि समानता का सिद्धांत ही अप्राकृतिक है ।

(ii) गुणों की बजाए संख्या को महत्त्व देना – लोकतंत्र में गुणों की बजाए संख्या को अधिक महत्व दिया जाता है ।

(iii) यह जवाबदेह सरकार का गठन नहीं करता लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है लेकिन ऐसा असल में होता नहीं है। चुनाव के बाद नेता जनता की परवाह नहीं करते।

(iv) अस्थिर तथा कमजोर सरकार लोकतंत्र में सरकार अस्थिर तथा कमजोर होती है। बहुदलीय व्यवस्था में सरकार तेजी से बदलती रहती है

प्रश्न 5. लोकतंत्र की सफलता के लिए कौन-कौन सी आवश्यक शर्तें हैं ?

उत्तर ⇒लोकतंत्र की सफलता के लिए निम्न आवश्यक शर्तें हैं-

(i) जनता की लोकतंत्र में पूरी आस्था हो ।

(ii) सुशिक्षा, जिससे मनुष्य अपने अधिकार और कर्तव्य का सही ज्ञान प्राप्त कर सके। सुशिक्षित नागरिक ही
अपने मताधिकार का सही प्रयोग कर सकते हैं।

(iii) आर्थिक समानता की स्थापना हो। कहा भी जाता है कि आर्थिक समानता के अभाव में राजनीतिक स्वतंत्रता बेकार है ।

(iv) स्थानीय स्वशासन की स्थापना हो। इससे नागरिकों को राजनीति एवं शासन के कार्यों में भाग लेने का अधिक अवसर मिलता है ।

प्रश्न 6. ‘लोकतंत्र’ से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में जनता मतदान करती है, अपने चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा शासनच चलाती है और यह शासन जनहित में
काम करते हुए जनता के प्रति उत्तरदायी होता है।

 

नागरिक शास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन लोकतंत्र की उपलब्धियां

प्रश्न 7. भारतीय लोकतंत्र कितना सफल है ?

उत्तर ⇒ आज दुनिया के लगभग 100 से अधिक देशों में लोकतंत्र किसी-न-किसी रूप में विद्यमान है। लोकतंत्र का लगातार प्रसार एवं उसे मिलनेवाला जनसमर्थन यह साबित करता है कि लोकतंत्र अन्य सभी शासन व्यवस्थाओं से बेहतर है। इन व्यवस्था में सभी नागरिकों को मिलनेवाला समान अवसर, व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा आकर्षण के बिन्दु हैं। साथ ही इसमें आपसी विभेदों एवं टकरावों को कम करने और गुण-दोष के आधार पर सुधार की निरंतर संभावनाएँ लोगों को इसके करीब लाती हैं । इस प्रसंग में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि लोकतंत्र में फैसले किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति के आधार पर लिये जाते हैं । लोकतंत्र के प्रति लोगों की उम्मीदों के साथ-साथ शिकायतें भी कम नहीं होती है। लोकतंत्र से लोगों की अपेक्षाएँ इतनी ज्यादा हो जाती है कि इसकी थोड़ी-सी भी कमी खलने लगती है। कभी-कभी तो हम लोकतंत्र को हर मर्ज की दवा मान लेने का भी खतरा मोल लेते हैं और इसे तमाम सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषमता को समाप्त करनेवाली जादुई व्यवस्था मान लेते हैं। इस तरह का अतिवादी दृष्टिकोण लोगों में इसके प्रति अरुचि एवं उपेक्षा का भाव भी पैदा करता है । परन्तु, लोकतंत्र के प्रति यह नजरिया न तो सिद्धांत रूप में और न ही व्यावहारिक धरातल पर स्वीकार्य है । अतः, लोकतंत्र की उपलब्धियों को जाँचने-परखने से पहले हमें यह समझ बनानी पड़ेगी कि लोकतंत्र अन्य शासन व्यवस्थाओं से बेहतर एवं जनोन्नमुखी है । अब नागरिकों का दायित्व है कि वे इन स्थितियों से लाभ उठाकर लक्ष्य की प्राप्ति करें

प्रश्न 8. वैध सरकार किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒वैध सरकार उस सरकार को कहते हैं जो कानूनी रूप से लोगों के द्वारा चुनी जाती है अथवा दूसरे शब्दों में जनता की
सरकार को वैध सरकार कहते हैं

प्रश्न 9. लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लोगों के बीच नियमित संवाद की गुंजाइश बनी रहती है।

प्रश्न 10. लोकतंत्र हर मर्ज की दवा है, कैसे ?

उत्तर ⇒ यह सही है लोकतंत्र कुछ चीजों को प्राप्त करने की स्थितियाँ तो बना सकता है, परन्तु इन स्थितियों से लाभ उठाना नागरिकों का
अपना काम होता है

प्रश्न 11. तानाशाही सरकार किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ एक व्यक्ति अथवा कुछ व्यक्तियों का शासन, जिनके पास देश की संपूर्ण सत्ता होती है। वह सत्ता वह अपने बल से
तथा क्रूरतापूर्वक हासिल किया हो ।

प्रश्न 12. लोकतांत्रिक सरकार में फैसले लेने में विलम्ब क्यों होता है ?

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक सरकार में फैसले को विधायिका की लम्बी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

प्रश्न 13. प्रत्यक्ष लोकतंत्र कहाँ है, उसके उपकरण कौन-कौन से हैं?

उत्तर ⇒ प्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता स्वयं शासन में भाग लेती है। प्रत्यक्ष लोकतंत्र स्विट्जरलैंड में है।

प्रश्न 14. प्रत्यक्ष प्रजातंत्र एवं अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ प्रत्यक्ष प्रजातंत्र में जनता शासन-कार्य में सीधे भाग लेती है। अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र शासन का वह रूप है जो जनता के
प्रतिनिधियों द्वारा चलाया जाए ।

प्रश्न 15. लोकतांत्रिक राजनीति क्या है ?

उत्तर ⇒वह राजनीति जिसमें औपचारिक संविधान हो, जिसमें लगातार चुनाव होते रहते हो, जिसमें राजनीतिक दल हों तथा जो जनता के अधिकारों की गारंटी देती है उसे ही लोकतांत्रिक राजनीति कहते हैं ।

प्रश्न 16. लोकतांत्रिक सरकार किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ वह सरकार जो जनता के द्वारा चुनी गई हो, जो जनता के कल्याण के लिए कार्य करती है तथा जो अपनी जनता को समानता प्रदान करती है, उसे ही लोकतांत्रिक सरकार कहते हैं ।

प्रश्न 17. गैर-लोकतांत्रिक सरकार किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ जिस सरकार के गठन में जनता की भागीदारी नहीं होती है, गैर-लोकतांत्रिक सरकार कहते हैं । ऐसी सरकार में जनता के सारे राजनीतिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं ।

 

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प्रश्न 18. क्या लोकतंत्र, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मताधिकार है ?

उत्तर ⇒ आज हम भारीतय लोकतंत्र में “स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मताधिकार” के करीब हैं। स्वतंत्रता के बाद और आज की इस संदर्भ में तुलतना करें तो स्थिति अपेक्षाकृत काफी बेहतर है।

प्रश्न 19. लोकतंत्र के प्रति लोगों में अविश्वास पैदा होने लगता है, क्यों ?

उत्तर ⇒ अत्यधिक अपेक्षा रखने के कारण तथा यह समझ रखने के कारण कि सभी सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषमताओं को समाप्त करने देने वाली व्यवस्था लोकतंत्र है, अविश्वास पैदा होने लगता है।

प्रश्न 20. हमारा लोकतंत्र पश्चिम के देशों से नायाब है, कैसे ?

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र निरंतर विकास एवं परिवर्द्धन कर रहा है तथा आपातकाल के पूर्व, तत्कालीन एवं पश्चार की स्थितियों को सार्थक रूप से झेलने वाला विश्व का एकमात्र लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के कारण नायाब है।

प्रश्न 21. लोकतांत्रिक सरकार के कोई दो अवगुण लिखिये ।

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक सरकार के दो अवगुण-

(i) इस सरकार में फैसला लेने में बड़ा समय लग जाता है ।

(ii) भ्रष्टाचार पर काबू पाने में ये सरकारें असफल साबित हुई हैं ।

प्रश्न 22. किसी देश का आर्थिक विकास किस पर निर्भर करता है ?

उत्तर ⇒ किसी देश का आर्थिक विकास उस देश की जनसंख्या, आर्थिक प्राथमिकताएँ, अन्य देशों के सहयोग के
साथ-साथ वैश्विक स्थिति पर भी निर्भर करती है ।

प्रश्न 23. भारतीय लोकतंत्र के दो गुणों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र के दो गुण इस प्रकार हैं-

(i) भारतीय लोकतंत्र द्वारा कल्याणकारी राज्य की स्थापना की गई है जिसमें सबों की अधिकतम भलाई होती है।

(ii) जनता में राजनीतिक जागृति उत्पन्न होती है।

प्रश्न 24. भारतीय लोकतंत्र की विशेषता बताएँ ।

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ही उल्लेख कर दिया गया है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है।
इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं वयस्क मताधिकार, प्रतिनिधि शासन एवं नागरिकों के लिए अधिकारों एवं कर्तव्यों का प्रावधान।

प्रश्न 25 लोकतांत्रिक सरकार के कोई दो गुण लिखिये ।

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक सरकार के दो गुण

(i) यह सरकार लोगों द्वारा चुनी गई होती है, चुनाव में जो जीतता है वही अपनी सरकार बनाता है ।

(ii) यह सरकार जनता की होती है और जनता के कल्याण के लिए ही कार्य करती है

प्रश्न 26. क्या लोकतंत्र में ‘नोट से वोट’ या ‘लाठी से वोट’ की स्थिति है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में ‘नोट से वोट’ या ‘लाठी से वोट’ की स्थिति रहती थी, किन्तु अब जागरूक रहने से स्थिति में बदलाव हुआ है तभी तो 15वीं लोकसभा निर्वाचन में जनता ने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को पराजय का मुँह दिखा दिया।
इसके मुख्य उपकरण होते हैं— जनमत-संग्रह, आरंभण, प्रत्यावर्तन, लोकनिर्णय इत्यादि ।

                                      दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. लोकतंत्र किस प्रकार आर्थिक संवृद्धि एवं विकास में सहायक बनता है ?

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था वैध एवं जनता के प्रति उत्तरदायी होती है । इस आधार पर यह सोचना अप्रासंगिक नहीं होगा कि इस व्यवस्था में सरकारें अच्छी होंगी। साथ ही, यहाँ आर्थिक खुशहाली होगी और विकास की दृष्टि से भी अग्रणी होगा । लेकिन, हम जब लोकतांत्रिक शासन और तानाशाही शासन व्यवस्था में आर्थिक खुशहाली और विकास की दरों पर गौर करते हैं तो काफी निराशा होती है । इसे हम नीचे दिए हुए चार्ट से अवलोकन कर देखते और पाते हैं कि आर्थिक संवृद्धि के मामले में लोकतंत्र से तानाशाहियों का रिकॉर्ड थोड़ा अच्छा है ।
विभिन्न देशों में आर्थिक विकास की दरें (1950-2000)
शासन का प्रकार और देश विकास दर
सभी लोकतांत्रिक शासन. 3.95
सभी तानाशाहियाँ 4.42
तानाशाही वाले गरीब देश 4.34
लोकतंत्र वाले गरीब देश 4.28
उपर्युक्त आँकड़ों के अवलोकन से लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से निराशा तो होती है । परन्तु किसी देश का आर्थिक विकास उस देश की जनसंख्या, आर्थिक प्राथमिकताएँ, अन्य देशों से सहयोग के साथ-साथ वैश्विक स्थिति पर भी निर्भर करती है । लोकतांत्रिक शासन में विकास की दर में कमी के बावजूद, लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था का चयन सर्वोत्तम होगा, क्योंकि इसके अनेक सकारात्मक एवं विश्वसनीय फायदे हैं जिसका एहसास धीरे-धीरे होता है ।

प्रश्न 2. लोकतंत्र की सफलता के लिए कौन-सी आवश्यक शर्तें हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक कारकों का भारत में अभाव है। लोकतंत्र के बाधक तत्त्वों का निराकरण किया जाना चाहिए ताकि का देश समग्र विकास हो सके । लोकतंत्र की सफलता की प्रमुख शर्तों का निम्नलिखित बिन्दुओं के अंतर्गत वर्णन किया जा सकता है-

(i) प्रबुद्ध जनमत लोकतंत्र की सफलता का प्रथम शर्त यह है कि जनमत जागरूक एवं प्रबुद्ध हो। क्योंकि यह विभिन्न सरकारों की गतिविधियों को नियंत्रित करती है। लोकतांत्रिक सरकार जनमत की उपेक्षा नहीं कर सकती है।

(ii) राजनीतिक दलों की मजबूत स्थिति लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सफलता के लिए मजबूत राजनीतिक दलों का होना आवश्यक है। हमारे देश में सात राष्ट्रीय दल एवं सैकड़ों क्षेत्रीय राजनीतिक दल कार्यरत हैं।

(iii) सामाजिक सौहार्द्र : लोकतंत्र की सफलता के लिए यह जरूरी है कि विभिन्न प्रजातियों एवं धर्म के माननेवाले लोगों में सामाजिक सौहार्द्र कायम रहे। विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक समूहों के बीच सामंजस्य का होना बहुत जरूरी है।

(iv) आर्थिक समानता : लोकतंत्र की सफलता के लिए यह जरूरी है कि देश भर में आर्थिक समानता की स्थापना हो। भारत सरकार ने आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए पर्याप्त उपाय किये हैं।

प्रश्न 3. भारतवर्ष में लोकतंत्र कैसे सफल हो सकता है ?

उत्तर ⇒नि:संदेह भारतीय लोकतंत्र की साख पूरी दुनिया में बढ़ी है। लोकतंत्र के उत्तरोत्तरं विकास में जनता की भागीदारी में विस्तार हुआ है । फिर भी, भारतीय ‘लोकतंत्र उतना परिपक्व नहीं हुआ है जितना होना चाहिए था । इसका कारण है कि जनता का जुड़ाव उस स्तर तक नहीं पहुँचा है जहाँ जनता सीधे तौर पर हस्तक्षेप कर सके। अतएव इसकी सफलता के लिए आवश्यक है कि सर्वप्रथम जनता शिक्षित हो । शिक्षा ही उनके भीतर जागरूकता पैदा कर सक है । यह सही है कि लोकतांत्रिक सरकारें बहुमत के आधार पर बनती हैं, परन्तु लोकतंत्र का अर्थ बहुमत की राय से चलनेवाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि यहाँ अल्पमत की आकांक्षाओं पर ध्यान देना आवश्यक होता है। भारतीय लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि सरकारें प्रत्येक नागरिक को यह अवसर प्रदान करें ताकि वे किसी-न-किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बन सकें । लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति के साथ-साथ विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं के अंदर आंतरिक लोकतंत्र हो, अर्थात् सार्वजनिक मुद्दों पर बहस-मुबाहिसों में कमी नहीं हो । राजनीतिक दलों के लिए तो यह अति आवश्यक है, क्योंकि सत्ता की बागडोर संभालना उनका लक्ष्य होता है । विडम्बना है कि भारतवर्ष में नागरिकों के स्तर पर और खासतौर पर राजनीतिक दलों के अंदर आंतरिक विमर्श अथवा आंतरिक लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का सर्वथा अभाव दिखता है । जाहिर है कि इसके दुष्परिणाम के तौर पर सत्ताधारी लोगों के चरित्र एवं व्यवहार गैर- लोकतांत्रिक दिखेंगे और लोकतंत्र के प्रति हमारे विश्वास में कमी होगी। इसे जनता अपनी सक्रिय भागीदारी एवं लोकतंत्र में अटूट विश्वास से दूर कर सकते हैं ।

प्रश्न 4. भारतीय लोकतंत्र की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना की गई। भारत का नया संविधान बना । संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट कहा गया है कि भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य होगा । भारतीय लोकतंत्र की चार विशेषताएँ निम्नलिखित है।

(i) वयस्क मताधिकार – भारत में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र है जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा शासन संचालित होता है। इसके लिए निष्पक्ष निर्वाचन की व्यवस्था की गई है। निर्वाचन द्वारा ही जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। भारत में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष को बिना किसी भेदभाव के मताधिकार प्राप्त है।

(ii) संसदीय लोकतंत्र – भारतीय लोकतंत्र की दूसरी विशेषता है कि यहाँ संसदीय लोकतंत्र है। यद्यपि राष्ट्रपति कार्यपालिका का सर्वोच्च पदाधिकारी है, लेकिन वह नाममात्र का प्रधान है। वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद् के हाथ में है जिसका प्रधान प्रधानमंत्री है। मंत्रिपरिषद् अपने कार्यों के लिए सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी है। इसी अर्थ में भारत में संसदीय लोकतंत्र है।
(iii) नागरिकों का मौलिक अधिकार-स्वतंत्रता एवं समानता के सिद्धांत पर ही लोकतंत्र आधृत है। इसी कारण भारत के नागरिकों को संविधान द्वारा मौलिक अधिकार दिए गए हैं और उनके संरक्षण का उत्तरदायित्व सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा गया है।
(iv) स्वतंत्र न्यायपालिका – भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका की व्यवस्था है। संविधान की रक्षा का भार सर्वोच्च न्यायालय पर सौंप दिया गया है।

 

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प्रश्न 5. भारतीय लोकतंत्र कितना व्यापक है? अपने विचारों से इसको सत्यापित करें |

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र व्यवस्था एक सर्वोत्तम शासन व्यवस्था है। यह भारतीय नागरिकों के समक्ष वाद-विवाद के पश्चात् एक सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुँचने में मदद करती है। अपनी बातों को निर्भीकता से रखना, सुनने की परम्परा विकसित करना इसकी व्यापकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था इन सब में सबसे आगे है। यह सामाजिक विषमताओं को पाटती है। यह मत का अधिकार अपने जनता को प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाती है। यदि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुकूल नहीं होती तो जनता मतदान कर उसे सत्ता से बाहर का रास्ता दिखला देती है। अतः,
भारतीय लोकतंत्र हर प्रकार से व्यापक एवं विशिष्ट है।

प्रश्न 6. लोकतंत्र किन स्थितियों में सामाजिक विषमताओं को पाटने में मददगार होता है और सामंजस्य के वातावरण का निर्माण करता है ?

उत्तर ⇒ समाज में विद्यमान अनेक सामाजिक विषमताओं जिसे हम विविधताओं के रूप में भी देख सकते हैं, उनके बीच आपसी समझदारी एवं विश्वास को बढ़ाने में लोकतंत्र मददगार होता है । तात्पर्य यह है कि लोकतंत्र नागरिकों को शांतिपूर्ण जीवन जीने में सहायक होता है 1
यह सच है कि समाज में विभिन्न जातीय, भाषाई एवं साम्प्रदायिक समूहों के बीच मतभेद एवं टकराव बने रहते हैं। लोकतंत्र विभिन्न जातियों एवं धर्मों के बीच वैमनस्य एवं भ्रांतियों को कम करने में सहायक हुआ है। साथ ही उनके बीच टकरावों को हिंसक एवं विस्फोटक बनने से रोका है। ऐसे मतभेदों के बने रहने के कई सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारण हैं । इनके बीच टकराव तब होते हैं जब इनकी बातों की अनदेखी की जाती है अथवा इन्हें दबाने की कोशिश की जाती है । सामाजिक मतभेदों एवं अंतरों के बीच बातचीत एवं आपसी समझदारी के माहौल के निर्माण में लोकतंत्र की अहम् भूमिका होती है। लोकतंत्र लोगों के बीच एक-दूसरे के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं के प्रति सम्मान भाव को विकसित करता है। इस बात को दावे के साथ कहा जा सकता है कि विभिन्न सामाजिक विषमताओं एवं विविधताओं के बीच संवाद एवं सामंजस्य के निर्माण में सिर्फ लोकतंत्र ही सफल रहा है। इसके अतिरिक्त नागरिकों की गरिमा एवं उनकी आजादी की दृष्टि से भी लोकतंत्र अन्य शासन व्यवस्थाओं से सिर्फ आगे ही नहीं है, बल्कि सर्वोत्तम है लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लोगों के बीच नियमित संवाद की गुंजाइश बनी रहती है। संवाद का अर्थ है वाद-विवाद के पश्चात् एक सकारात्मक निष्कर्ष तक पहुँचने की कोशिश, अर्थात् अपनी बातों को निर्भीकता से रखना और दूसरों की बातों को गंभीरता से सुनने की स्वस्थ परंपरा निर्मित करना । इस दृष्टि से लोकतंत्र से बेहतर और कोई दूसरी शासन व्यवस्था नहीं हो सकती है जहाँ हर तरह की आजादी होती है। इस प्रकार, हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि सामाजिक विषमताओं एवं विविधताओं के बीच आपसी समझदारी एवं सामंजस्य के निर्माण में लोकतंत्र अन्य गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं से काफी आगे है ।

प्रश्न 7. लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी एवं वैध सरकार का गठन करता है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र लोगों का शासन है, लोगों द्वारा निर्मित होता है और लोगों की भलाई के लिए ही कार्य करता है। लोकतंत्र किस प्रकार लोगों के प्रति उत्तरदायी है और किस हद तक वैध है, इसे परखने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता होती है क्या लोकतंत्र में लोगों को चुनावों में भाग लेने और अपने प्रतिनिधियों को चुनने अधिकार होता है? नी हुई सरकार लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में प्रभावी हो पाता है तथा क्या सरकार द्वारा फैसले शीघ्र लिये जाते हैं और फैसले कितने जन-कल्याणकारी होते हैं ? उपर्युक्त बातों का मूल्यांकन करने पर हम पाते हैं कि लोग चुनावों में भाग लेते y अपने प्रतिनिधियों को चुनने का कार्य करते हैं। यह अलग बात है कि एवं सामाजिक दृष्टि से मजबूत लोगों का दबदबा होता है। बावजूद इसके जनता में जागरूकता की वृद्धि एवं व्यापक प्रतिरोध से लगातार सुधार की संभावनाएँ बनी रहती हैं। आज शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण लोग अपने मताधिकार का बढ़-चढ़कर उपयोग कर रहे हैं। पहले लोगों को या तो वंचित किया जाता था अथवा उनकी रुचि नहीं रहती थी। आज लोग सिर्फ मताधिकार का ही प्रयोग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सरकार की निर्णय प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप कर रहे हैं । यही कारण है कि सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनना पड़ता है, क्योंकि जनता द्वारा उसे हटाने का खतरा बना रहता है ।
दूसरी बात यह है कि यह सही है कि लोकतंत्र में बहस – मुवाहिसों के बाद ही फैसले किये जाते हैं। फैसलों में विधायिका की लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है । स्वाभाविक है कि फैसलों में अनिवार्य रूप से विलंब होता है । यहाँ पर यह गौर करने की बात है कि गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था में फैसले किसी खास व्यक्ति द्वारा बगैर बहस-मुबाहिसों के लिए किये जाते हैं । इन फैसलों को लंबी विधायी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता है । परंतु, गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था के फैसलों में व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों की अधिकता रहती है जो कभी सामूहिक जनकल्याण की दृष्टि से दुरुस्त नहीं होती है । लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव नियमित रूप से होते हैं। सरकार जब भी कोई कानून बनाती है तो उसपर जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी खुलकर चर्चाएँ होती हैं इस प्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था थोड़ी-बहुत कमियों के बावजूद एक सर्वोत्तम शासन व्यवस्था है । गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था से अगर इसकी तुलना की जाए तो इसमें कोई संदेह नहीं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था एक उत्तरदायी एवं वैध शासन-व्यवस्था है । यही कारण है कि आज पूरी दुनिया में लोकतंत्र के प्रति विश्वास बढ़ता जा रहा और सभी देश अपने को लोकतांत्रिक कहने में गर्व का अनुभव करते हैं ।

प्रश्न 8. भारतवर्ष में लोकतंत्र के भविष्य को आप किस रूप में देखते हैं ?

उत्तर ⇒ आज दुनिया के लगभग 100 से अधिक देशों में लोकतंत्र किसी-न-किसी रूप में विद्यमान है । लोकतंत्र का लगातार प्रसार एवं उसे मिलनेवाला जनसमर्थन यह साबित करता है कि लोकतंत्र अन्य सभी शासन व्यवस्थाओं से बेहतर है। इन व्यवस्था में सभी नागरिकों को मिलनेवाला समान अवसर, व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा आकर्षण के बिन्दु हैं । साथ ही इसमें आपसी विभेदों एवं टकरावों को कम करने और गुण-दोष के आधार पर सुधार की निरंतर संभावनाएँ लोगों को इसके करीब लाती हैं। इस प्रसंग में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि लोकतंत्र में फैसले किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति के आधार पर लिये जाते हैं लोकतंत्र के प्रति लोगों की उम्मीदों के साथ-साथ शिकायतें भी कम नहीं होती है । लोकतंत्र से लोगों की अपेक्षाएँ इतनी ज्यादा हो जाती है कि इसकी थोड़ी-सी भी कमी खलने लगती है। कभी-कभी तो हम लोकतंत्र को हर मर्ज की दवा मान लेने का भी खतरा मोल लेते हैं और इसे तमाम सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषमता को समाप्त करनेवाली जादुई व्यवस्था मान लेते हैं। इस तरह का अतिवादी दृष्टिकोण लोगों में इसके प्रति अरुचि एवं उपेक्षा का भाव भी पैदा करता है । परन्तु, लोकतंत्र के प्रति यह नजरिया ने तो सिद्धांत रूप में और न ही व्यावहारिक धरातल पर स्वीकार्य है। अतः, लोकतंत्र की उपलब्धियों को जाँचने-परखने से पहले हमें यह समझ बनानी पड़ेगी कि लोकतंत्र अन्य शासन व्यवस्थाओं से बेहतर एवं जनोन्नमुखी है अब नागरिकों का दायित्व है कि वे इन स्थितियों से लाभ उठाकर लक्ष्य की प्राप्ति करें । भारतवर्ष में लोकतंत्र के भविष्य को देखने से पहले भारतीय लोकतंत्र की उपलब्धियों की ओर ध्यान से परखने की आवश्यकता है। यह सही है कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के काले पक्षों को दर्शानेवाले उदाहरणों की कमी नहीं है । आजादी के पश्चात् विगत 60 वर्षों के इतिहास में भ्रष्टाचार में डूबे राजनीतिज्ञ और लोकतांत्रिक संविधान के मूल उद्देश्यों को विनष्ट करनेवाले तत्त्वों की कमी नहीं है। : इन तमाम कमजोरियों के बावजूद भारतीय लोकतंत्र पश्चिम के लोकतंत्र से नायाब है जो निरंतर विकास एवं परिवर्तन की ओर अग्रसर है। गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में आनन-फानन तथा शीघ्रता से लिए गये निर्णयों के दुष्परिणामों से जब हम i मुखातिब होते हैं तब लगता है कि लोकतंत्र से बेहतर और कोई शासन-व्यवस्था हो । नहीं सकती है। इसे जब हम भारतीय लोकतंत्र के 60 वर्षों की अवधि के संदर्भ में देखते हैं तो लगता है कि कालक्रम में हम काफी सफल रहे हैं। एक समय था जब शासन व्यवस्था में आम जनता अपने को भगीदार नहीं मानती थी । जनता 5 जज्बातों एवं भावनाओं में अपना वोट करती थी । धनाढ्य एवं आपराधिक छवि के उम्मीदवार जनता के मतों को खरीदने का जज्बा रखते थे। लेकिन, जब हम 2009 ई० में 15वीं लोकसभा के चुनावों का मूल्यांकन करते हैं तो पता चलता है कि भारत की जनता ने एक साथ पूरे देश में आपराधिक छवि के उम्मीदवारों को समूल खारिज कर दिया । जनता को अब विश्वास हो गया है कि वह अपने मतों से किसी को गिरा एवं उठा सकती है । आज पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र की साख बढ़ी है और इसकी सफलता से अन्य लोकतांत्रिक देश अनुप्रेरित हो रहे हैं । आज भारतवर्ष में जनता का लगातार प्रजा से नागरिक बनने की प्रक्रिया जारी है ।

 

Civics vvi Subjective Question answer Notes Hindi

 

9. लोकतंत्र की विभिन्न प्राथमिकताओं पर एक निबन्ध लिखें ।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की प्राथमिकताएँ – लोकतंत्र को सर्वोत्तम शासन व्यवस्था का रूप माना गया है। इस दृष्टि से इसकी कुछेक प्राथमिकताएँ पूर्ण होने पर ही हम इसे सर्वोत्तम मान सकते हैं। प्रथम प्राथमिकता है उत्तरदायी एवं वैध शासन की । जनता द्वारा चुनी हुई सरकार होने के कारण यह स्वभावतः जनता के प्रति उत्तरदायी होती है तथा नियमानुसार चुने जाने के कारण वैध भी । इसकी दूसरी प्राथमिकता है आर्थिक समृद्धि और विकास। चूँकि प्रतिनिधि सम्पूर्ण क्षेत्र से चुनकर आते हैं इसलिए सबका विकास भी इसका लक्ष्य होता है । सामाजिक विषमता में सामंजस्य लाना इसकी तीसरी प्राथमिकता है। समाज में अनेक विषमताएँ विद्यमान होती हैं जिन्हें आपसी समझदारी एवं विश्वास से दूर करना लोकतंत्र का लक्ष्य होता है । विभिन्न जातियों और वर्गों समुदायों के बीच की खाई को पाटना लोकतंत्र का विकट लक्ष्य है । अन्य शासन – व्यवस्था प्रायः इन सब बातों से उदासीन रहती है ।

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