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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Civics Subjective Question Answer Class 10th Subjective Question

Matric Civics Lokatantr Ki Chunautiyan Subjective Questions 2024 [ नागरिक शास्त्र ] लोकतंत्र की चुनौतियां सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

नागरिक शास्त्र ( Civics) लोकतंत्र की चुनौतियां लघु और दीर्घ  उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Civics नागरिक शास्त्र का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Civics Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th नागरिक शास्त्र 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Civics Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Civics Lokatantr Ki Chunautiyan Subjective Questions 2024 [ नागरिक शास्त्र ] लोकतंत्र की चुनौतियां सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

                                    लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र सिद्धांत एवं व्यवहार में “लोकतंत्र जनता का, जनता द्वारा तथा
के लिए शासन है।” लोकतंत्र में यह व्यवस्था रहती है कि लोग अपनी मर्जी से सरकार चुने । लोकतंत्र एक प्रकार का शासन है, एक सामाजिक व्यवस्था का सिद्धांत है, विशेष प्रकार की मनोवृत्ति है तथा आर्थिक आदर्श है। एक अच्छा लोकतंत्र वह है जिसमें राजनैतिक और सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक न्याय की व्यवस्था भी है। देश में यह शासन-प्रणाली लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक, राजनैतिक समानता न केवल सैद्धांतिक रूप से, अपितु व्यवहारिक रूप से भी दे ।

प्रश्न 2. आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है । कैसे ?

उत्तर ⇒ आतंकवाद की समस्या भी लोकतंत्र के लिए चुनौती है, क्योंकि इससे देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाती है। आतंकवाद की समस्या आज विश्व के हरेक देशों में कुछ-न-कुछ दिखाई पड़ता है । आतंकवाद के कारण देश का विकास अवरुद्ध हो जाता है । अतः, आज जरूरत है कि इस समस्या से निपटारा के लिए संकीर्ण दलीय राजनीति से ऊपर उठकर इसे हल करने में । आतंकवाद की समस्या आज के लोकतांत्रिक देशों की गंभीर चुनौती है ।

प्रश्न 3. अशिक्षा लोकतंत्र के लिये अभिशाप है, कैसे ?

उत्तर ⇒ शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है। शिक्षा विशेषकर राजनीतिक शिक्षा के अभाव में कोई भी नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से अनभिज्ञ रहता है । नागरिकों का शिक्षित होना स्वस्थ लोकतंत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण होता है । विशेषकर महिलाओं को शिक्षित करना अति आवश्यक है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत महिलाओं में निरक्षरता दूर करने, शिक्षा में आनेवाली बाधाओं के निराकरण करने तथा उन्हें प्रारंभिक शिक्षा में बनाये रखने के लिए सर्वाधिक प्राथमिकता सरकार की ओर से दी जा रही है । जब तक किसी देश के नागरिक चाहे वह पुरुष हो या महिला अशिक्षित रहेंगे, कोई भी देश अपने यहाँ विकसित लोकतंत्र की स्थापना नहीं कर सकता। इस कारण हम कह सकते

कि शिक्षा का अभाव लोकतंत्र की एक गंभीर चुनौती में से एक है ।

प्रश्न 4. भारत में किस तरह की जातिगत असमानताएँ हैं ? स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान में कहा गया है कि भारत में लिंग, जन्म-स्थान, जाति, धर्म इत्यादि के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से अस्पृश्यता का अंत कर दिया गया है। इतना होने पर भी भारत में आज भी कई जातिगत असमानताएँ वर्तमान हैं –

(i) जाति का आधार कर्म न होकर जन्म हो गया है।

(ii) जाति-पाति का भेदभाव समाप्त नहीं हुआ है। अस्पृश्यता जैसे आचरण आज भी प्रचलित हैं ।

(iii) राजनीतिक दलों द्वारा टिकट का बँटवारा भी जाति के आधार पर ही हो रहा है ।

प्रश्न 5. जीवन के विभिन्न पहलुओं का जिक्र करें जिनमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव है या वे कमजोर स्थिति में हैं ।

उत्तर ⇒ स्त्रियों के साथ होनेवाली भेदभाव एवं कमजोरियाँ इस प्रकार हैं –

(i) शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के साथ भेदभाव का प्रमाण है। उनकी साक्षरता दर जो आज सिर्फ 54% है ।

(ii) आज भी अधिक पैसे वाली प्रथा प्रतिष्ठित नौकरियों में महिलाओं का अनुपात बहुत कम है अर्थात् रोजगार के क्षेत्र में भीमहिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है ।

(iii) एक लिंग के रूप में भी महिलाओं के साथ नाव किया जाता है। इससे भी साबित होता है कि देश के कुछ हिस्सों में शिशु लिंगानुपात 850 से 800 तक गिर गया है ।

(iv) राजनीति जीवन में उनकी जनसंख्या के अनुपात में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है ।

प्रश्न 6. लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है । कैसे ?

उत्तर ⇒ क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही सारी शक्तियों का स्रोत होता है, इसलिए लोकतंत्र को जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के
लिए शासन कहा जाता है ।

प्रश्न 7. गठबंधन की राजनीति कैसे लोकतंत्र को प्रभावित करनी है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में गठबंधन की राजनीति भी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं आने पर सरकार बनाने के लिए छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियाँ आपस में गठबंधन करती हैं। गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल अपनी आकांक्षाओं और लाभों की संभावनाओं के मद्देनजर ही गठबंधन करने के लिए प्रेरित होते हैं । इससे प्रशासन पर सरकार की पकड़ ढीली पड़ जाती है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में आज गठबंधन की राजनीति काफी प्रभावकारी साबित हो रही है ।

नागरिक शास्त्र क्लास 10th सब्जेक्टिव क्वेश्चन लोकतंत्र की चुनौतियां

 

प्रश्न 8. वंशवाद से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ भारत के सभी राजनीतिक दलों में नेतृत्व का संकट है अधिकांश राजनीतिक दलों में कोई ऐसा नेता नहीं है जो सर्वमान्य हो । प्रायः सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को यह देखा गया है कि शीर्ष पर बैठे नेता अपने सगे-संबंधियों, दोस्तों और रिश्तेदारों को दल के प्रमुख पदों पर बैठाते हैं और यह सिलसिला पीढ़ी-दर-पीढ़ी कायम रहता है। सामान्य कार्यकर्त्ता को दलों में ऊपर के पदों पर बैठने की गुंजाइश काफी कम रहती है। वंशवाद की समाप्ति राजनीतिक दलों के सामने प्रमुख चुनौती है ।

प्रश्न 9. बंधुआ मजदूर किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ किसी के अधीनं में रहकर काम करने वाले मजदूर को बंधुआ मजदूर कहते हैं ।

प्रश्न 10. परिवारवाद क्या है ?

उत्तर ⇒ जब किसी जनप्रतिनिधि के निधन या इस्तीफे के कारण कोई सीट खाली हुई और उसे उसके ही किसी परिजन को
टिकट दे दिया जाए तो यह परिवारवाद कहलाता है ।

प्रश्न 11. “लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है ।” किसने कहा था ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है।” यह वक्तव्य अब्राहम लिंकन का था ।

प्रश्न 12. राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं का क्या योगदान हैं ?

उत्तर ⇒ राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं की भी काफी भूमिका रही है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक महिलाएँ भी राष्ट्र की प्रगति में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। खेतीबाड़ी से लेकर वायुयान उड़ानें, अंतरिक्ष में जाने का भी काम कर रही हैं। पंचायती राज व्यवस्था में महिलाएँ पंच और सरपंच चुनी जा रही हैं। आज महिलाएँ विधायिका और संसद सदस्या के रूप में जन प्रतिनिधि का भी कार्य कर रही हैं। महिला शिक्षा में वृद्धि के कारण आज महिलाएँ काफी जागरूक होकर आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक रूप से सशक्त हुई हैं तथा राष्ट्र की प्रगति में अपनी-अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका को निभा रही हैं ।

प्रश्न 13. आर्थिक अपराध का अर्थ स्पष्ट करें

उत्तर ⇒ विदेशी मुद्रा का अवैध आगमन या विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा की गई बड़ी धनराशि आर्थिक अपराध है ।

प्रश्न 14. केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच आपसी टकराव से लोकतंत्र कैसे प्रभावित होता है ?

उत्तर ⇒ केन्द्र और राज्यों के बीच आपसी टकराव से आतंकवाद से लड़ने और जन-कल्याणकारी योजनाओं (शिक्षा, जाति, भेदभाव, लिंग-भेद, नारी शोषण, बाल- मजदूरी एवं सामाजिक कुरीतियों इत्यादि) के सुचारुरूप से क्रियान्वयन में बाधा पहुँचती है। कोई भी अपेक्षित लक्ष्य हासिल करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर सामंजस्य एवं तालमेल अतिआवश्यक है।

प्रश्न 15. गठबंधन की राजनीति लोकतंत्र के लिए चुनौती है। कैसे ?

उत्तर ⇒ चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं आने पर सरकार बनाने के लिए छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियाँ आपस में गठबंधन कर सरकार बनाती हैं। इसमें वैसे उम्मीदवारों को भी चुन लिया जाता है जो दागी प्रवृत्ति या आपराधिक पृष्ठभूमि के होते हैं । यह लोकतंत्र के लिए एक अलग प्रकार की चुनौती है। गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल अपनी आकांक्षाओं और लाभों की संभावनाओं के मद्देनजर ही गठबंधन करने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे प्रशासन पर सरकार की पकड़ ढीली हो जाती है । अतः गठबंधन की राजनीति भी लोकतंत्र के लिए चुनौती साबित हो रहे हैं ।

प्रश्न 16. नेपाल में किस तरह की शासन व्यवस्था है ? लोकतंत्र की स्थापना में वहाँ क्या- क्या बाधाएँ हैं ?

उत्तर ⇒ नेपाल में अभी राजशाही शासन को समाप्त कर लोकतांत्रिक शासन स्थापित करने का प्रयास किया गया है जो सफलता एवं असफलता के बीच फँस गया है। लोकतंत्र की स्थापना में वहाँ बहुत सारी बाधाएँ हैं, जैसे माओवादी नेताओं की समस्या । माओवादी नेताओं को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में और वह भी मिली-जुली सरकार में अपनी इच्छा लादना संभव नहीं है। दूसरी समस्या संविधान सभा का चुनाव तराई क्षेत्र में असंतोष तथा माओवादियों द्वारा हथियार नहीं सौंपना है

प्रश्न 17. भारतीय लोकतंत्र के तीन अंग कौन-कौन हैं ?

उत्तर ⇒ कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका भारतीय लोकतंत्र के अंग हैं

प्रश्न18. भारतीय लोकतंत्र कैसा लोकतंत्र है ?

उत्तर ⇒भारतीय लोकतंत्र प्रतिनिध्यात्मक लोकतंत्र हैं। इसमें शासन का संचालन जन प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है

 

Civics Lokatantr Ki Chunautiyan Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 19. लोकतांत्रिक सुधारों के प्रस्ताव क्या हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक सुधारों के प्रस्ताव में लोकतांत्रिक आंदोलन, नागरिक संगठन और मीडिया पर भरोसा करने वाले उपाय शामिल हैं।

प्रश्न 20. लोकतंत्र की बड़ी चुनौतियाँ क्या है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की बड़ी चुनौतियों में लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव में होने वाले अंधाधुंध चुनावी खर्च, उम्मीदवारों के टिकट वितरण और चुनावों की पारदर्शिता शामिल हैं ।

प्रश्न 21. लोकतंत्र की चुनौतियों का अर्थ स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र को अनेक समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन्हें ही लोकतंत्र की चुनौतियाँ माना जाता है। लोकतंत्र की चुनौतियों का अर्थ उन समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करना है जो इसके मार्ग में आती है। कठिनाईयों के बावजूद चुनौतियों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 22. केन्द्र तथा राज्यों के बीच सामंजस्य क्यों आवश्यक है ?

उत्तर ⇒ केन्द्र तथा राज्यों के बीच आपसी टकराव से आतंकवाद से लड़ने और जनकल्याणकारी योजनाओं (शिक्षा, जाति भेदभाव, लिंग-भेद, नारी शोषण, बाल-मजदूरी एवं सामाजिक कुरीतियों इत्यादि) के सुचारू क्रियान्वयन में बाधा पहुँचती है, जबकि कोई भी अपेक्षित लक्ष्य हासिल करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर सामंजस्य एवं तालमेल की काफी आवश्यकता है ।

प्रश्न 23. लोकतंत्र की मुख्य चुनौतियों का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की तीन मुख्य चुनौतियाँ स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आती हैं— बुनियादी चुनौती अर्थात् लोकतंत्र की स्थापना अथवा लोकतंत्र की वापसी की चुनौती, लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती तथा लोकतंत्र को मजबूत करने की चुनौती | इन चुनौतियों का सामना करके ही लोकतंत्र की बाधाओं को दूर कर लोकतंत्र को सफल बनाया जा सकता है।

प्रश्न 24. भारतीय लोकतंत्र की दीर्घकालिक और समसामयिक समस्याएँ क्या हैं ?

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र में अनेक दीर्घकालिक और समसामयिक समस्याएँ हैं जो हमारा ध्यान आकर्षित करती है । इनमें से प्रत्येक समस्याओं को संकीर्ण दलीय राजनीति से ऊपर उठकर हल किये जाने की आवश्यकता है । इन समस्याओं में निश्चित रूप से महँगाई, बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, विदेश – नीति, आंतरिक सुरक्षा, रक्षा तैयारियाँ आदि हैं तथा देश की एकता और अखंडता, आतंकवाद, नक्सलवाद, अवैध शरणार्थी तथा बढ़ते आर्थिक अपराध है

प्रश्न 25. बिहार में लोकतंत्र की चुनौतियाँ का वर्णन करें ?

उत्तर ⇒ भारत के अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी स्वस्थ लोकतंत्र स्थापित है । इसके बावजूद यहाँ क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर चुनौतियाँ मौजूद हैं । आज भ्रष्टाचार, जातिवाद, परिवारवाद जैसी बुराइयाँ यहाँ निर्णायक भूमिका निभाती हैं। हाल के दशकों में यह परम्परा बनी कि जिस जन प्रतिनिधि के निधन या इस्तीफे के कारण कोई सीट खाली हुई उसके ही किसी परिजन को चुनाव का टिकट दे दिया जाए। यह लोकतंत्र की खामियों को दर्शाता है ।

 

                                          दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती क्यों है ?

उत्तर ⇒ शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है। शिक्षा विशेषकर राजनीतिक शिक्षा के अभाव में कोई भी नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से अनभिज्ञ रहता है । नागरिकों का शिक्षित होना स्वस्थ लोकतंत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण होता है। विशेषकर महिलाओं को शिक्षित करना अति आवश्यक है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत महिलाओं में निरक्षरता दूर करने, शिक्षा में आनेवाली बाधाओं का निराकरण करने तथा उन्हें प्रारंभिक शिक्षा में बनाये रखने के लिए सर्वाधिक प्राथमिकता सरकार की ओर से दी जा रही है। जब तक किसी देश के नागरिक चाहे वह पुरुष हो या महिला अशिक्षित रहेंगे, कोई भी देश अपने यहाँ विकसित लोकतंत्र की स्थापना नहीं कर सकता। इस कारण हम कह सकते हैं कि शिक्षा का अभाव लोकतंत्र की एक गंभीर चुनौती में से एक है।

प्रश्न 2. भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियों का वर्णन करें

उत्तर ⇒ वर्त्तमान भारतीय लोकतंत्र में अनेक दीर्घकालिक और समसामयिक समस्याएँ हैं, जो हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं। इनमें से प्रत्येक समस्याओं को संकीर्ण दलीय राजनीति से ऊपर उठकर हल किए जाने की आवश्यकता है । इन समस्याओं में मुख्य रूप से महँगाई, बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा, रक्षा तैयारियाँ आदि कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिनपर काफी संजिदा बहस (चर्चा) की आवश्यकता है । देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन रही शक्तियों पर व्यापक परिचर्चा होनी चाहिए । यह खतरा केवल आतंकवादी गतिविधियों पूर्वोत्तर के अलगाववादी या नक्सली गतिविधियों एवं अवैध शरणार्थियों से नहीं, बल्कि बढ़ते आर्थिक अपराधों से भी है। विदेशी मुद्रा का अवैध आगमन, विदेशी बैंकों में भारतीय द्वारा जमा की गई बड़ी धन राशि, उच्च एवं न्यायिक पदों पर व्याप्त भ्रष्टाचार, असमानता और असंतुलन जैसे भारतीय राजनीति में लोकतंत्र की विभिन्न समस्या या चुनौतियाँ हैं । केन्द्र और राज्यों के बीच आपसी टकराव से, आतंकवाद से लड़ने और जन कल्याणकारी योजनाओं (शिक्षा, जाति भेदभाव, लिंग-भेद, नारी शोषण, बाल मज़दूरी एवं सामाजिक कुरीतियाँ इत्यादि) भी वर्तमान भारतीय राजनीति में लोकतंत्र की चुनौतियाँ हैं । लोकतंत्र की बड़ी चुनौतियों में लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव में होनेवाले अन्धाधुन्ध चुनावी खर्च, उम्मीदवारों के टिकट वितरण और चुनावों में पारदर्शिता भी शामिल हैं। वंशवाद, परिवारवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद, गठबंधन की राजनीति, आपराधिक प्रवृत्ति के उम्मीदवारों का चुनाव में टिकट देना इत्यादि भारतीय राजनीति में लोकतंत्र की गंभीर चुनौती है ।

प्रश्न 3. परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करते हैं ?

उत्तर ⇒ अगर हम बिहार में लोकतंत्र की चुनौतियों पर नजर डालते हैं तो आज बिहार में भ्रष्टाचार, जातिवाद, क्षेत्रवाद, परिवारवाद जैसी बुराइयाँ यहाँ निर्णायक, भूमिका निभाती है। हाल के दशकों में यह परंपरा बनी कि जिस जनप्रतिनिधि के निधन या इस्तीफे के कारण कोई सीट खाली हुई उसके ही किसी परिजन को चुनाव का टिकट दे दिया जाए। बिहार में परिवारवाद की यह स्वरूप लोकतंत्र की खामियों को दर्शाता है । सत्तारूढ़ जद (यू) ने 2009 में सम्पन्न हुए बिहार विधानसभा के उपचुनावों के दौरान यह कह दिया था कि किसी परिजन को पार्टी होनेवाले चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाएगी । इस बात को लेकर जद (यू) में आंतरिक कलह की स्थिति पैदा हो गई थी। बिहार में अभी भी राजनीति में परिवारवाद हावी है जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है । बिहार में दूसरी समस्या जातिवाद की है। बिहार की राजनीति में जातिवाद काफी हद तक अपनी जड़ें जमा चुकी है । जातीय वोट बैंक बनाकर वर्षों तक चुनाव जीतनेवाले कुछ नेता तथा राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर काफी परेशान हैं। अगामी 2010 का बिहार विधानसभा का आम चुनाव यह बता देगा कि जातीय वोट बैंक की राजनीति कारगर रहेगी या नहीं। ऐसा देखा गया है कि जो नेता अपने लिए जातीय बोट बैंक का सुरक्षित किला बना लेते हैं वे सत्ता में आने के बाद आम लोगों के सामान्य विकास में कोई रूचि नहीं रखते हैं। वैसे नेतागण कुछ खास जातीय समूहों व व्यक्तियों के लिए ही सरकारी स्तर से सामूहिक व व्यक्तिगत लाभ पहुँचाने की कोशिश करते रहते हैं । इस शैली की राजनीति से बिहार को बड़ा नुकसान पहुँच रहा है तथा बिहार अभी भी भारत के मानचित्र पर एक पिछड़े हुए राज्य के रूप में जाना जाता है ।

 

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प्रश्न 4. न्यायपालिका की भूमिका लोकतंत्र की चुनौती है । कैसे ? इसे सुधारने के क्या उपाय हैं ?

उत्तर ⇒ वर्तमान समय न्यायपालिका की भूमिका भी लोकतंत्र की एक बड़ी चुनौती है। भारतीय लोकतंत्र प्रतिनिध्यात्मक लोकतंत्र है। इसमें शासन का संचालन जन प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है । भारतीय लोकतंत्र के तीन अंग हैं कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका । इसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी है और विधायिका न्यायपालिका के प्रति । किसी भी लोकतंत्र की सफलता में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका ही भूमिका एक सर्वमान्य सत्य है । अमेरिका का और ब्रिटेन की लोकतांत्रिक सफलता बहुत हद तक उनकी न्यायपालिका की सफलता है। भारत में भी न्यायपालिका को संविधान में ही विशेष अधिकार दिये गये हैं, लेकिन कानून का निर्माण चूँकि संसद में होता है, इसलिए न्यायपालिका सिफ्र उन कानूनों की रक्षा भर ही कर सकती है। जरूरत है विधायिका के ऊपर न्यायपालिका का पूर्ण नियंत्रण । जब तक विधायेका के ऊपर न्यायपालिका का पूर्ण नियंत्रण नहीं होगा तब तक लोकतंत्र की सफलता संभव नहीं है । न्यायपालिका की भूमिका में सुधार के उपाय निम्नलिखित हैं-
(i) न्यायिक पदों पर बैठे लोगों में फैले भ्रष्टाचार को दूर करना (ii) न्यायपालिका पर लोगों का पूरा विश्वास तथा न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब को रोका जाना । त्वरित गति से किसी भी केस का न्यायालय में निपटारा हो ।

प्रश्न 5. क्या चुने हुए शासक लोकतंत्र में अपनी मर्जी से सबकुछ कर सकते हैं ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र में जनता प्रतिनिधि का चुनाव करती है । प्रतिनिधि जनता क विकास हेतु कार्य करते हैं, किन्तु चुने हुए शासक अपनी मन मर्जी नहीं कर सकता। अगर चुने हुए शासक मनमानी करेंगे तो कानून उनके लिए बाधक होंगे। ऐसे शासक को विरोध विरोधी दल भी करते हैं तथा जनता भी उनके विरुद्ध उठ खड़ी होती है और वे लोगों का विश्वास खो देते हैं जिससे भविष्य में उनके लिए खतरा तथा रूकावट खड़ी हो जाती है। बेरोजगारी उन्मूलन, महँगाई पर नियंत्रण, वैश्विक तापन, जलवायु परिवर्तन, वैदेशिक नीति, आन्तरिक सुरक्षा, रक्षा तैयारियाँ, देश की एकता एवं अखण्डता, आतंकवाद एवं अलगाववाद, नक्सली गतिविधियों, बढ़ती आर्थिक अपराधों तथा विदेशी मुद्रा का अवैध आगमन, विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा की गयी बड़ी धनराशि आदि पर नियंत्रण, उच्च एवं न्यायिक पदों पर व्याप्त भ्रष्टाचार, असमानता एवं असंतुलन, राजनीति में परिवारवाद एवं जातिवाद आदि भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियों के समक्ष शासक वर्गों की मनमानी नहीं चलने वाली है।

प्रश्न 6. क्या आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है ? स्पष्ट करें

उत्तर ⇒ आज भारत सहित दुनिया के अधिकांश देश आतंकवाद की समस्या
से ग्रसित हैं, जो लोकतंत्र की एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आया है। आतंकवाद के कारण किसी भी देश की अखंडता एवं एकता के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है । यह खतरा केवल आतंकवादी गतिविधियों, अलगाववादी या नक्सली गतिविधियों एवं अवैध शरणार्थियों के साथ-साथ बढ़ते हुए आर्थिक अपराधों से भी है । आतंकवाद आज पूरी तरह अपनी जड़े जमा चुका है तथा देश के विकास में पूरी तरह बाधा बना हुआ है । केन्द्र और राज्यों के बीच आपसी टकराव से आतंकवाद से लड़ने और जनकल्याणकारी योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन में बाधा पहुँचती है । जबकि आज दुनिया के अधिकांश देशों में आतंकवाद अपना पैर जमा चुका है दुनिया के देशों को मिलकर इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने की आवश्यकता । आतंकवादी गतिविधियाँ किसी भी लोकतांत्रिक देश की सबसे गंभीर चुनौती है, देश के विकास में बाधक है तथा लोकतंत्र के लिए खतरा है ।

प्रश्न 7. बिहार के विकास में महिलाओं के योगदान का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ बिहार भारत का एक पिछड़े हुआ राज्य की श्रेणी में आता है । यहाँ की महिलाओं में शिक्षा का काफी आभाव है । शिक्षा के आभाव के कारण महिलाएँ अपने राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हो पाई हैं । भारत के अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी स्वस्थ लोकतंत्र स्थापित है । आज की महिलाएँ राष्ट्र की प्रगति के लिए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं । खेतीबाड़ी से लेकर वायुयान उड़ाने और अंतरिक्ष तक जा रही है । इसके बावजूद वे दोयम दर्जे की शिकार है। बिहार सरकार ने पंचायतीराज अधिनियम में महिलाओं के लिए 50% सीट आरक्षित कर उनके राजनीतिक भागीदारी को स्पष्ट कर दिया है। अब महिलाएँ मुखिया, पंच, सरपंच तथा जिला परिषद में प्रमुख निर्वाचित हो रही है कोई भी राज्य या देश में बिना महिलाओं के शिक्षित हुए लोकतंत्र का विकास नहीं कर सकता है । आज जरूरत है – पंचायतों की तरह राज्य की विधानसभाओं में भी महिलाओं को सीट आरक्षित कर उनके राजनीतिक स्तर पर ऊँचा उठाया जा सके । संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव जो अभी लंबित है, उनके राजनीतिक क्षेत्र में ऊँचा उठाने का एक अच्छा प्रयास माना जा सकता है । अत: बिहार में चाहे पंचायत स्तर पर विधानसभा या लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होती, तभी लोकतंत्र का विकास हो सकता है ।

प्रश्न 8. आतंकवाद एवं अलगाववाद लोकतंत्र की चुनौती है। स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ आतंकवाद लोकतंत्र में आवाम के मनोबल को तोड़ने का साधन है। अलगाववाद मनोबल को तोड़ने के साथ-साथ राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को तोड़ता है। इस प्रकार दोनों ही लोकतंत्र के लिए चुनौतियाँ हैं। हिंसा के द्वारा ये दोनों ही बड़े पैमाने पर धन एवं जन की हानि करना चाहते हैं। आतंकवाद विश्वस्तरीय समस्या बन चुका है। आतंकवादी अपनी गतिवधियों से राष्ट्र को सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक क्षति पहुँचाना चाहते हैं, लोकतांत्रिक मूल्यों से संबंधित ढाँचे को दुष्प्रभावित करते हैं। लोकतंत्र अमनचैन तथा विकास में विश्वास रखता है जबकि आतंकवाद इसका विरोधी है। आतंकवादियों यह समझ रखा है कि आतंकी घटनाएँ जितनी तीव्र होंगी उन्की व्यापकता उतनी ही तीव्र होगीं व्यापकता के आधार पर वह जितना चाहे ज्यादा प्रभाव क्षेत्र बनायेगा। लोग उतना ही ज्यादा भयभीत होंगे। 11 सितम्बर को अमेरिका स्थित ट्विन टावर पर आतंकी हमला, ब्रिटेन का आतंकी हमला आदि ने शक्तिशाली एवं विकसित देशों को यह अहसास करा दिया कि आतंकवाद लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। भारतीय संसद पर आतंकी ताज होटल आतंकी घटना ये लोकतंत्र के विकास में जबरदस्त अवरोध है।

प्रश्न 9., विभिन्न जन-आंदोलनों में महिलाओं की क्या भूमिका थी?

उत्तर ⇒लोकतंत्र की स्थापना में महिलाओं ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष भूमिकाओं से अपनी भागीदारी दी।
प्रमुख महिलाओं में भीखाजी कामा, जो राष्ट्रीय आंदोलन में तिरंगा लहराने वाली प्रथम महिला थीं, नलनी सेन गुप्ता 1933 ई० में कॉंग्रेस पार्टी की महिला अध्यक्षा बनी और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। कल्पना दत्त ने चटगाँव विद्रोह के समय महत्वपूर्ण कार्य निभाते हुए स्वतंत्रता संग्राम को गति दी। रानी लक्ष्मीबाई के योगदान को सारा विश्व जानता है। बंगाल की क्रांतिकारी प्रीतिलता वादेदार ने सूर्यसेन के नेतृत्व में चटगाँव में हुए विद्रोह में अपनी जान की बलि दे दी और भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गयीं। एनी बेसेंट 1917 ई में काँग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्षा बनीं और काँग्रेस की नीतियों एवं स्वतंत्रता आंदोलन को नेतृत्वकारी बनाया। सरोजनी नायडू 1925 ई. में कॉंग्रेस की महिला अध्यक्षा बनीं और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पं. जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम में अर्पित कर दिया। सुचेता कृपलानी की स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण कार्यवाही को स्मारित करने के लिए ही उत्तरप्रदेश की जनता ने उन्हें अपने राज्य का प्रथम मुख्यमंत्री बनाया। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के सक्रिय योगदान के लिए श्रीमती इंदिरा गाँधी ने वह भारत की सर्वप्रथम महिला मुख्यमंत्री थी। महिला बिग्रेड की स्थापना की। इंदिराजी ने स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करवायी । उपर्युक्त तथ्य इस बात को प्रमाणित करते हैं कि महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में काफी योगदान दिया ।

 

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प्रश्न 10. भारतीय लोकतंत्र के मार्ग में कौन-कौन सी बाधाएँ हैं? सुधार ‘हेतु आप क्या सुझाव देंगे ।

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र के मार्ग में आने वाली मुख्य बाधाएँ निम्न हैं- (i) अशिक्षा व राजनीतिक जागरुकता का अभाव, जिसके कारण नागरिक
अपने अधिकारों व कर्त्तव्यों का सही उपयोग नहीं कर पाते ।
(ii) गरीबी के कारण निम्न वर्ग राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी नहीं कर पाता है ।

(iii) भ्रष्टाचार के कारण जन-कल्याण के कार्यक्रम उचित रूप में लागू नहीं हो पाते ।

(iv) चुनावों में हिंसा व धनशक्ति के कारण सही प्रतिनिधि चुनावों में सफल नहीं हो पाते ।

(v) जातिवाद, साम्प्रदायिक भावना, भाषावाद के कारण वास्तविक जनहित के मुद्दे राजनीति से बाहर हो जाते हैं ।

(vi) स्वार्थी व संकीर्ण राजनीतिक दल व नेतृत्व भी लोकतंत्र के मार्ग में एक बड़ी बाधा है ।

लोकतंत्र की बाधाओं को दूर करने के उपाय-

(i) नागरिकों में राजनीतिक जागरुकता का विकास ।

(ii) प्रशासन व सरकार के कामकाज में खुलापन ।

(iii) जाति व धर्म के आधार पर राजनीतिक लाभ पर प्रतिबंध ।

(iv) समाज के सभी वर्गों का समुचित विकास व आर्थिक व सामाजिक समानता ।

(v) राजनीति में जन भागीदारी को बढ़ावा ।

(vi) राजनीतिक सत्ता के विकेन्द्रीकरण, त्वरित न्याय व्यवस्था की स्थापना तथा जवाबदेही की व्यवस्था

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