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Matric Chemistry Metals And Nonmetals Subjective Questions 2024 [ रसायन विज्ञान ] धातु एवं अधातु सब्जेक्टिव क्वेश्चन

रसायन विज्ञान ( Chemistry) धातु एवं अधातु सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Chemistry रसायन विज्ञान का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Chemistry vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th रसायन विज्ञान 2024 का मॉडल पेपर( Class 10th Chemistry Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Chemistry Metals And Nonmetals Subjective Questions 2024 [ रसायन विज्ञान ] धातु एवं अधातु सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. धातुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुणों का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ धातुओं के भौतिक गुण निम्नांकित हैं-

(i) सामान्य ताप पर धातुएँ सामान्यतः ठोस होती हैं। अपवाद— सामान्य ताप पर सिर्फ पारा द्रव रूप में पाया जाता है।

(ii) धातुएँ आघातवर्धनीय एवं तन्य होती हैं।

(iii) धातुओं में धातुई चतक होती है।

(iv) ये ऊष्मा एवं विद्युत का सुचालक होती हैं।

(v) इनके द्रवणांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं।

(vi) इनके आपेक्षिक घनत्व उच्च होते हैं।

(vii) ये ध्वानिक होती है।

धातुओं के रासायनिक गुण’ निम्नांकित हैं-

(i) धातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयोग करके क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं जिनमें से कुछ जल में घुलकर क्षार देते हैं।

4Na + O2 → 2Na2O

2Mg + O2 → 2MgO

Na2 + H2O → 2NaOH
                       क्षार

(ii) धातुएँ प्रायः हाइड्रोजन से संयोग नहीं करती हैं, लेकिन कुछ धातुएँ ( Li,Na,Ca ) आदि वैद्युत संयोजक हाइड्राइड बनाती हैं।

2Li + H2 → 2LiH

(iii) धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन मुक्त करती हैं।

2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

(iv) धातुएँ क्लोरीन से संयोग कर ठोस वैद्युत संयोजक यौगिक बनाती हैं।

2Na + Cl2 → 2NaCl

(v) धातुएँ विद्युत धनात्मक होने के कारण अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।

2Na + 2HCl → 2NaCl + H2

Mg + 2HCl → MgCl2 + H2

प्रश्न 2. एल्युमिनियम धातु का निष्कर्षण उसके अयस्क से कैसे किया जाता है ?

उत्तर ⇒ एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट (Al2O3.2H2O) है जिससे उसका निष्कर्षण होता है।
बॉक्साइट के महीन चूर्ण को सोडियम हाइड्रॉक्साड के सान्द्र विलयन में डालते हैं। समूचा बॉक्साइट NaOH से अभिक्रिया कर सोडियम एल्युमिनेट बनाकर घुल जाता है तथा अशुद्धियाँ अवक्षेप के रूप में बच जाती हैं, जिन्हें छानकर अलग कर लिया जाता है।

Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
                              सोडियम एलुमिनेट जल
एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड बाहर से डाला जाता है। यहाँ NaAlO2 जल अपघटित होकर Al(OH)3 का सफेद अवक्षेप बनाता है।

NaAlO2 + 2H2O → Al(OH)3 + NaOH

इस अवक्षेप को छान लेने के बाद धो लिया जाता है और उसके बाद उसे गर्म कर शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त किया जाता है।

Al(OH)3 → Al2O3 + 3H2O

ऐलुमिना को क्रायोलाइट (Na3AIF6) के साथ मिश्रित कर लोहे के एक सेल में पिघलाते हैं। सेल की भीतरी दीवार पर कार्बन का स्तर रहता है जो कैथोड का कार्य करता है। ऐनोड भी कार्बन का बना होता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर द्रवित ऐलुमिना का विद्युत अपघटन होता है जिसके फलस्वरूप Al धातु कैथोड पर मुक्त होती है।

Al2O3 → 3Al3+ + 3O2-

3O2- → 3O + 6e ऐनोड पर

2Al3+ → 2Al कैथोड पर

3O + 3O → 3O2 ऑक्सीजन गैस

प्रश्न 3. मिश्रधातु किसे कहते हैं ? इसके दो उदाहरण दें। मिश्रधातु के तीन उपयोगों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ मिश्रधातु – यह दो या दो से अधिक धातुओं अथवा तथा अधातु का संभागी मिश्रण है । जैसे- पीतल, ताँबा तथा जिंक की मिश्रधातु है, कांसा, ताँबा तथा टिन की मिश्रधातु है ।

उदाहरण-

(i) सोडियम अमलगम (Na + Hg )

(ii) टीन अमलगम (Sn + Hg )

मिश्रधातुओं के उपयोग

(i) कठोरता बढ़ाने के लिए लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में ताँबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम एल्युमिनियम से बना मिश्रधातु है जो अत्यधिक कठोर होता है ।

(ii) शक्ति बढ़ाने के लिए इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्रधातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं ।

(iii) संक्षारण रोकने के लिए — जैसे स्टैनलेस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्रधातु आदि पर जंग नहीं लगता ।

प्रश्न 4. निम्न पदों की परिभाषा दें :

(i) खनिज

(ii) अयस्क

(iii) गैंग

(iv) निस्तापन

(v) भर्जन

उत्तर ⇒ (i) खनिज — ऐसे प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में होती हैं, खनिज कहलाते हैं ये अधिकांश रूप में भूपर्पटी में पाये जाते हैं । कुछ खनिज समुद्री तल में भी पाये जाते हैं।

जैसे – NaCl ( सोडियम क्लोराइड), फैल्सपार, अभ्रक आदि ।

(ii) अयस्क— उन खनिजों को जिनसे लाभप्रद ढंग से धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं ।

जैसे- हेमेटाइट (Fe2O3) लोहे का अयस्क है । एल्युमिनियम का अयस्क बॉक्साइट (AI2O3.2H2O) है ।

(iii) गैंग — खनन क्रिया द्वारा पृथ्वी से निकाले गये अयस्क में उपस्थित अवांछित पदार्थों को गैंग कहते हैं ।

(iv) निस्तापन — सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति या अनुपस्थिति में बिना द्रवित किए बहुत अधिक गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकलती हैं तथा कार्बोनेट अयस्क विघटित होकर धातु के ऑक्साइड में परिणत होते हैं, निस्तापन कहलाती है।

(v) भर्जन — मुख्यत: सांद्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ वायु की नियंत्रित मात्रा की उपस्थिति में बिना द्रवित किये गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क ऑक्साइड में उपचयित हो जाता है, भर्जन / जारण कहलाती है। इसका ताप निस्तापन के ताप से कुछ अधिक होता है।

प्रश्न 5. अयस्कों से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त चरणों को लिखिए ।

उत्तर ⇒ अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ores) – अयस्क से अशुद्धियों को दूर कर धातु की प्रतिशत मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया अयस्क का सांद्रण कहलाती है । अयस्क के सांद्रण की अनेक विधियाँ हैं।
सांद्रित अयस्क का ऑक्साइड में परिवर्तन – सांद्रित अयस्क के ऑक्साइड में परिवर्तन की निम्नांकित दो विधियाँ हैं-

(a) निस्तापन (Calcination) – सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति या अनुपस्थिति में बिना द्रवित किए बहुत अधिक गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकलती हैं तथा कार्बोनेट अयस्क विघटित होकर धातु के ऑक्साइड में परिणत होते हैं, निस्तापन कहलाती है।

(b) जारण (Roasting ) – मुख्यत: सांद्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ वायु की नियंत्रित मात्रा की उपस्थिति में बिना द्रवित किए गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क ऑक्साइड में उपचयित हो जाता है, जारण कहलाती है। इसका ताप निस्तापन के ताप से कुछ अधिक होता है।

धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन – धातु के ऑक्साइड विभिन्न अपचयन की क्रियाओं द्वारा धातु में परिणत होते हैं।

धातु का शोधन (Purification of Metal) – अयस्क से प्राप्त धातु में अशुद्धियाँ (अन्य धातु, धातु के ऑक्साइड, SiO2,C,P आदि) मिश्रित होती हैं जिनकी प्रकृति के अनुरूप शोधन की अलग-अलग क्रियाएँ की जाती हैं।

प्रश्न 6. जारण और निस्तापन से आप क्या समझते हैं? एक उदाहरण देकर समझाएँ । अभिक्रिया श्रेणी (Reactivity Series) के मध्य के तत्त्वों का निष्कर्षण उनके Oxides से किस प्रकार करते हैं ?

उत्तर ⇒ जारण या भर्जन ( Roasting) – भर्जन में सान्द्रित अयस्क को की अधिकता में खूब गर्म किया जाता है जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क का ऑक्सीकरण हो जाता है । यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए परावर्तनी भट्ठी में किया जाता है।

जैसे जिंक ब्लैण्ड (ZnS) का जारण 2ZnS + 3O2, 2ZnO + 2SO2

निस्तापन ( Calcination) – सान्द्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे गर्म करने पर उसमें से वाष्पशील अशुद्धियाँ अलग हो जाती हैं तथा अयस्क सरन्ध्र (Porous) हो जाता है। यह मुख्य रूप से कार्बोनेट, हाइड्रेटेड अयस्कों में किया जाता है ।

Fe2O3.nH2O → Fe2O3 + nH2O

अभिक्रिया श्रेणी के मध्य के तत्त्वों का निष्कर्षण उनके ऑक्साइड को कार्बन द्वारा अपचयन से करते हैं ।

ZnO + C → Zn + CO

Fe2O3 + 3C → 2Fe + 3Co

प्रश्न 7.( a)रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए ।

प्रश्न (b). दिये गये धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम से व्यवस्थित करें: (i) Zn (ii) Fe (iii) Ca (iv) Mg (v) K (vi) Na

उत्तर ⇒ (a)

 S.N           धातुएँ            अधातुएँ
 1.  धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जिसमें से कुछ क्षार बनाती हैं । अधातुएँ अम्लीय तथा उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं ।
 2.  धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस पुनः स्थापित करती हैं तथा अनुरूप लवण बनाती हैं ।  अधातुएँ अम्लों में से हाइड्रोजन गैस को पुनः स्थापित नहीं करती हैं ।
 3.  धातुएँ धनात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं । अधातुएँ ऋणात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं ।
 4.  धातुएँ क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं जो वैद्युत् संयोजक होते हैं अधातुएँ क्लोरीन से संयोग कर क्लोराइड बनाती हैं, परन्तु वे सहसंयोजक होते हैं ‘
 5.  कुछ धातुएँ हाइड्रोजन से संयोग करके हाइड्रोक्साइड बनाती हैं जो विद्युत् संयोजक होते हैं । अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ अनेक स्थाई हाइड्राइड बनाती हैं जो सहसंयोजक होते हैं ।
 6. धातुएँ अपचायक हैं । अधातुएँ ऑक्सीकारक हैं ।
 7. धातुएँ जल विलयन में धनायन अधातुएँ जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं ।

(b). K > Na > Ca> Mg > Zn > Fe

प्रश्न 8. धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे ?

उत्तर- धातुओं और अधातुओं के गुणों में विभेद-

 S.N       धातुएँ          अधातुएँ
 1. धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परन्तु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है । अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H,, O,, N, गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं ।
 2. धातुएँ तन्य. तथा आघातवर्ध्य तथा लगिष्णु होती हैं वे प्रायः भंगुर होती हैं ।
 3. धातुएँ प्रायः चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती हैं । अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती परंतु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसके अपवाद हैं
 4. धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं परंतु बिस्मथ इसका अपवाद है । ग्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएँ कुचालक हैं ।
 5. धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं । अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं
 6. धातुएँ अधिकांशतः कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटैशियम चाकू से काटी जा सकती है। इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।
 7. धातुओं का आपेक्षित घनत्व अधिक होता है, परन्तु Na, K इसके अपवाद हैं अधातुओं का आपेक्षित ताप प्रायः कम होता है।
 8. धातुएँ अपारदर्शक होती हैं। गैसीय अधातुएँ पारदर्शक हैं।

 

प्रश्न 9. धातु और अधातु के सामान्य गुणधर्मों के प्रमुख चार अपवाद लिखिए ।

उत्तर ⇒

   S.N                 धातु                   अधातु
   1 धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परन्तु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है।  अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों – अवस्थाओं में पाई जाती हैं। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H, O, N, गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं।
    2  धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं परंतु बिस्मथ इसका अपवाद है।  ग्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएँ कुचालक हैं।
    3  धातुएँ अधिकांशत: कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटैशियम चाकू से काटी जा सकती है।  इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।
    4  धातु ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करके अम्लीय एवं क्षारीय गुण प्रदर्शित करते हैं। अधातु ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करके अम्लीय गुण प्रदर्शित करते हैं

 

प्रश्न 10. अयस्क क्या है ? अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियों का परिचय दीजिए ।

उत्तर ⇒ अयस्क –वैसे खनिज जिनसे कम खर्च में धातु का निष्कर्षण किया जाय उसे अयस्क कहते हैं।
अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियाँ— अयस्क या खनिज पृथ्वी से निकाले जाते हैं जिनके साथ अनेक प्रकार के व्यर्थ पदार्थ होते हैं जिन्हें गैंग कहते हैं । निष्कर्षण की प्रक्रिया से पहले उन्हें हटाना आवश्यक होता है।
इस प्रकार गैंग का साथ हटाने से अयस्क में धातु की मात्रा अधिक हो जाती है जिसे सांद्रण कहते हैं ।

           

अतः, किसी अयस्क को अगले प्रक्रमों के लिए तैयार करने के लिए अयस्क का सांद्रण करना होता है । अयस्क से गैंग हटाने की विधि अयस्क के तथा गैंग के भीतर या रासायनिक गुणों के अंतर पर आधारित होती है ।

सांद्रण की भौतिक विधियाँ-

(i) चुंबकीय विधि : यह विधि आयरन, कोबाल्ट, निकिल; जैसे- चुंबकीय पदार्थों की अशुद्धियों को अलग करने के लिए स्वीकार की जाती है । जो खनिज चुंबकीय प्रकृति के होते हैं वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं जबकि गैंग आदि आकर्षित नहीं होते ।
क्रोमाइट तथा पाइरोल्युसाइट के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं । इस विधि में पीसे हुए अयस्क को एक कन्वेयर बैल्ट के ऊपर रखते हैं । कन्वेयर बैल्ट दो रोलरों के ऊपर से गुजरती है जिनमें से एक चुंबकीय होता है ।
जब अयस्क चुंबकीय किनारे पर से नीचे आता है, तो चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ दो अलग-अलग ढेरों में एकत्रित हो जाते हैं। लोहे के अयस्क मैग्नेटाइट का सांद्रण इसी विधि द्वारा किया जाता

(ii) द्रवचालित धोना : इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को पानी की तेज धार में धोया जाता है। इस तेज धार में हल्के गैंग कण बह जाते हैं जबकि भारी खनिज कण तली में बैठ जाते हैं। टिन और लैड के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं ।

(iii) फेन प्लावन विधि : इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को जल एवं किसी उपयुक्त तेल के साथ एक बड़े टैंक में मिलाया जाता है। खनिज कण पहले ही तेल से भींग जाते हैं जबकि गैंग के कण पानी से भींग जाते हैं। अब इस मिश्रण में से बुलबुलों के रूप में वायु प्रवाहित की जाती है जिससे खनिज कण युक्त
तेल के झाग या फेन बन जाते हैं जो जल की सतह पर तैरने लगती है जिन्हें बड़ी सरलता से जल के ऊपर से निकाला जा सकता है । ताँबा, सीसा तथा जिंक के सल्फाइड का सांद्रण करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता

(iv) रासायनिक विधियाँ : रासायनिक पृथक्करण में खनिज तथा गैंग के मध्य रासायनिक गुणों के अंतर का उपयोग किया जाता है । इसकी एक मुख्य विधि है— बेयर की विधि, जिसके द्वारा बॉक्साइट से एल्युमिनियम ऑक्साइड प्राप्त किया जाता है।

बेयर विधि द्वारा एल्युमिनियम अयस्क का सांद्रण- इस विधि में बॉक्साइट को गर्म सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अपचयित किया जाता है जिसे NaAIO2 जो जल में घुलनशील हैं, गैंग को छानकर अलग कर दिया जाता है। NaAlO2
की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करवाई जाती है जिससे एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड प्राप्त होता है। जिसके बाद एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड को गर्म करके शुद्ध एल्युमिनियम ऑक्साइड प्राप्त होता है ।

विभिन्न अभिक्रियाएँ निम्नलिखित प्रकार से हैं-

Al2O3 + 2NaOH → 2NaAl2 + HO2

NaAlO2 + HCl + HO2 → Al(OH)3 + NaCl

2Al(OH)3 → Al2O3 + 3HO2

प्रश्न 11. जस्ता के दो मुख्य अयस्कों के नाम उनके आणविक जस्ता का अयस्क से निष्कर्षण का वर्णन करें ।
सूत्र के साथ लिखें ।

उत्तर ⇒ जस्ता के मुख्य अयस्क – जिंक ब्लेंड (ZnS), कैलामाइन (ZnCO3) जस्ता का निष्कर्षण – सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान है।
इसलिए सांद्रित सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में उच्च ताप ( 900°C) पर गर्म करने पर वह जिंक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस क्रिया को जारण कहते हैं।
2ZnS(s) + 3O2(g) →2ZnO(s) + 2SO2 (g)

सांद्रित कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में उच्च ताप पर गर्म करने पर वह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं।
ZnCO3(s) →ZnO(s) + CO2 (g)

जिंक ऑक्साइड तथा कोक के मिश्रण ( 2 : 1 ) को उदग्र बकयंत्र में लेकर उच्च ताप (1400°C) पर गर्म करने पर ऑक्साइड जिंक धातु में अपचयित हो जाता है।
ZnO(s) + C(s) →ZnO(s) + CO2(g)

जस्ते का वाष्प संघनक में संघनित हो जाता है तथा CO गैस असंघनित अवस्था में ही बाहर निकल जाती है। यह जस्ता अशुद्ध होता है तथा जिंक स्पेल्टर कहलाता है।

प्रश्न 12. (a) लोहा के एक प्रमुख अयस्क का नाम एवं इसका सूत्र लिखें ।और इसका अयस्क का सांद्रण कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ (a) हेमेटाइट – Fe2O3 xH2O, मैग्नेटाइट — Fe3O4 लोहा के अयस्क का सान्द्रण : लोहा के अयस्क का सान्द्रण चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा किया जाता है।
इस विधि में दो पूलियों के ऊपर का अचुम्बकीय बेल्ट चढ़ा होता है। एक पूली अचुम्बकीय होती है तथा दूसरी पूली एक विद्युत चुम्बक की बनी होती है । अचुम्बकीय पूली पर चूर्णित अयस्क गिराया जाता है जो बेल्ट के सहारे चुम्बकीय पूली तक जाता है
और वहाँ चुम्बकीय अयस्क अचुम्बकीय अशुद्धियों से पृथक हो जाता है।

प्रश्न 13. मिश्रधातु किसे कहते हैं ? इनके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ मिश्रधातु- किसी धातु का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया संगामी मिश्रण मिश्रधातु कहलाता है। जैसे टांके में कलई तथा सीसा समान मात्रा में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए, स्टेनलेस स्टील, टांका, पीतल,
कांसा बैलमैटल आदि सभी मिश्रधातुएँ हैं ।

मिश्रधातुओं के उपयोग-

(i) कठोरता बढ़ाने के लिए – लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलैस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में ताँबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम एल्युमिनियम से बना मिश्र धातु है जो अत्यधिक कठोर होता है ।
(ii) शक्ति बढ़ाने के लिए : इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्र धातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं ।
(iii) संक्षारण रोकने के लिए : जैसे स्टैनलेस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्रधातु आदि पर जंग नहीं लगता हैं ।
(iv) ध्वनि उत्पन्न करने के लिए : ताँबे तथा कलई से बनाई गई मिश्र धातु बैल मैटल होती है जिससे अधिक ध्वनि उत्पन्न हो जाती है।
(v) गलनांक कम करने के लिए जैसे रोज-मैटल मिश्र धातु है । इसका गलनांक कम होता है । यह बिस्मथ कलई और सीसे बनती है।
(vi) उचित साँचे में ढालने के लिए : काँसा तथा टाइप मैटल ।
(vii) रंग परिवर्तन के लिए : ताँबे तथा एल्युमिनियम से बनी एल्युमिनियम ब्रांज मिश्र धातु का सुनहरी रंग होता
(viii) घरेलू उपयोग घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्र धातुओं का उपयोग होता है जैसे घर के बर्तन, आलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषणों आदि में मिश्र धातुओं का उपयोग होता है ।

प्रश्न 14. बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र लिखें। एल्युमीनियम का शोधन कैसे किया जाता है ?

उत्तर ⇒ बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र : Al2O3.H2O
एल्युमीनियम का शोधन वैद्युत अपघटन विधि द्वारा होता है। इसमें अशुद्ध एल्युमीनियम को ऐनोड एवं शुद्ध एल्युमिनियम की प्लेट को कैथोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एल्युमीनियम के एक लवण का विलयन वैद्युत अपघट्य का कार्य करता है।
विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध धातु निकलकर विलयन में जाती है और विलयन में से उतनी ही शुद्ध धातु कैथोड पर एकत्रित हो जातीं है। विलेय अपद्रव्य विलयन में चले जाते हैं, जबकि अविलेय ऐनोड के नीचे पेंदी में एकत्र हो जाते हैं जो ‘
ऐनोड मड’ कहलाते हैं।

प्रश्न 15. लोहे के एक प्रमुख अयस्क का नाम और अणुसूत्र लिखें। लोहे के निष्कर्षण में वात्याभट्ठी में होने वाली अभिक्रियाओं को समीकरण द्वारा व्यक्त करें ।

उत्तर ⇒ लोहे का प्रमुख अयस्क हेमेटाइट, Fe2O3 है ।

लोहे के निष्कर्षण में वात्याभट्टी में होने वाली अभियाएँ- वात्याभट्ठी में चार्ज के रूप में निस्तापित अयस्व 8 भाग), (4 भाग) तथा चूने का पत्थर (1 भाग) का मिश्रण डाला जाता है। भट्ठी में चार्ज अधिक ताप की ओर आता जाता है और उसमें क्रमिक रूप से रासायनिक परिवर्तन होते जाते हैं ।

बिल्कुल ऊपर शीर्ष का क्षेत्र तप्तीकरण क्षेत्र कहलाता है, इसमें चार्ज की नमी, आदि दूर हो जाती है ।
इसके बाद का क्षेत्र अपचयन का ऊपरी क्षेत्र (Upper zone of reduction) कहलाता है जिसका ताप लगभग 900°C होता है । यहाँ निम्न अभिक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं और CO के द्वारा फेरिक ऑक्साइड का आयरन में अपचयन हो जाता है ।
CO2 + C → 2CO
3Fe2O3 + CO → Fe2O4 + CO2
3Fe3O4 + CO → 2FeO + CO2
FeO + CO → Fe + CO2

प्रश्न 16. प्रमुख मिश्रधातुओं के नाम, उनके घटक तथा उपयोग लिखिए ।

 S.N मिश्रधातु अवयव घटक उपयोग
 1. स्टील लोहा, कार्बन जहाजों, भवनों तथा यातायात के साधनों के निर्माण में ।
 2. स्टेनलेस स्टील लोहा, कार्बन, क्रोमियम

 

बर्तन, मशीनों के पुर्जे, चाकू, ब्लेड, खाद्य एवं दुग्ध उद्योगों के लिए उपकरण । बर्तन, फिटिंग, नट, बोल्ट, टूटियाँ आदि ।
 3. पीतल तांबा, जिंक

 

बर्तन, मूर्तियाँ, जहाज, तगमे, भाप-जनक गाड़ियों के पुर्जे ।
 4. कांसा तांबा, टिन जोड़ों में टांका लगाना
 5. टांका (सोल्डर) सीसा, टीन बर्तन तथा अन्य उपकरण
 6. जर्मन सिल्वर

 

तांबा, निकिल, जिंक घंटियाँ आदि के लिये
 7. बैल मैटल

 

कॉपर, टिन

 

वायुयान के पंख तथा वायुयान रसोई के बर्तन तथा सामान आदि के लिए

 

 8. ड्यूरेलियम एल्युमिनियम, तांबा तथा मैग्नीशियम और मैंगनीज अल्प मात्रा में

 

 

वायुयान उपकरणों के लिए

 

 9. मैग्नोलियम

 

एल्युमिनियम, मैग्नीशियम

 

हल्के भार के औजार तथा सस्ते बर्तन बनाने में ।

 

 10. गन मैटल ताँबा, टिन, जस्ता मशीनों और वाहनों के गेयर बनाने में।

प्रश्न 17. किस धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आए ऐनाड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे ?

उत्तर ⇒ इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड बनाया जाता है तथा शुद्ध धातु की एक पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है । धात्विक लवण का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में किया जाता है ।
उपकरणों को दिये गये चित्र के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है
ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण | अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन का विलयन विद्युत अपघट्य है । अशुद्ध ताँबा ऐनोड है जबकि शुद्ध ताँबे की पट्टी कैथोड का कार्य करती है । विद्युत धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध ताँबा कैथोड पर निक्षेपित हो जाता है । विद्युत अपघट्य से विद्युत प्रवाहित करने पर ऐनोड पर स्थित शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाता है । शुद्ध धातु की इतनी ही मात्रा कैथोड पर जमा हो जाती है । विलयशील अशुद्धियाँ विलयन में पहुँच जाती हैं जबकि अविलयशीलअशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे जम जाती हैं, जिन्हें ऐनोड पंक कहा जाता है।

 

 

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