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Matric Biology Prakrtik Sansadhano Ka Prabandhan Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन सब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Biology Subjective Question Answer 2024 Class 10th Subjective Question

Matric Biology Prakrtik Sansadhano Ka Prabandhan Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन सब्जेक्टिव क्वेश्चन

जीवविज्ञान (Biology) प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Biology जीवविज्ञान का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Biology vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th जीवविज्ञान 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Biology Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Biology Prakrtik Sansadhano Ka Prabandhan Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन-से परिवर्तन सुझा सकते हैं ?

उत्तर ⇒ अपने आवास को पर्यानुकूलित बनाने के लिए निम्नलिखित परिवर्तन किये जा सकते हैं।

(i) आवास में तथा उसके निकट जल का संग्रह नहीं किया जाना चाहिए जिससे जल में यदि कचरा उपस्थित हो तो सड़ने न पाए। मच्छर तथा जीवाणु जल को अपना आश्रय स्थल न बना लें ।

(ii)पेय जल में कूड़ा-कचरा न डालें और न अन्य किसी को डालने दें ।

(iii) जल के रिसाव को रोकना चाहिए ।

(iv) जितने जल की आवश्यकता हो, उतना ही जल टोंटी से लें । व्यर्थ ही जल को न बहने दें ।

(v) जल का मितव्ययता से प्रयोग करें ।

(vi) स्नान का जल, रसोई का प्रयोग किया हुआ जल व्यर्थ सीवर में न जाने दें वरन् उसका रसोई वाटिका में पौधों की सिंचाई हेतु प्रयोग करें ।

(vii) आवास, गली एवं निकटवर्ती सड़क को साफ रखें। आवासीय कचरे को कूड़ेदान में एकत्र करें तत्पश्चात् उसका यथोचित स्थान पर निपटान करें

(viii) आवश्यकतानुसार ही विद्युत का उपयोग करें। जरूरत न रहने पर पंखे, बल्ब, टी० वी० आदि बंद रखें ।

प्रश्न 2. ‘चिपको आंदोलन’ पर टिप्पणी लिखिए ।

उत्तर ⇒ ‘चिपको आंदोलन’ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा वनों को अलग करने की नीति का परिणाम है। यह आंदोलन हिमालय की पर्वत श्रृंखला में गढ़वाल के ‘रेनी’ नामक गाँव में घटित एक घटना से प्रारंभ हुआ था। यह घटना 1970 में घटित हुई थी। लकड़ी के ठेकेदार और स्थानीय लोगों के बीच विवाद प्रारंभ हुआ था। गाँव के समीप के वृक्षों को काटने का अधिकार उसे दे दिया गया था। एक निश्चित दिन ठेकेदार के आदमी वृक्ष काटने के लिए आये । वहाँ के निवासी पुरुष वहाँ नहीं थे । वहाँ की महिलाएँ फौरन वहाँ पहुँच गईं और उन्होंने पेड़ों को अपनी बाहों में भर कर ठेकेदार के आदमियों को वृक्ष काटने से रोका। वे पेड़ों से चिपक गई थी, इसलिए विचलित होकर ठेकेदार को अपना काम बंद करना पड़ा।

प्रश्न 3. मनुष्य पर विभिन्न गैसों के हानिकारक प्रभाव क्या होते हैं ?

उत्तर ⇒ सीय प्रदूषकों के हानिकारक प्रभाव

(i) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) सल्फर डाइऑक्साइड वायु की जलवाष्प में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल बना देती है जो फेफड़ों तथा इमारतों को हानि पहुँचाता है ।

(ii) हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) – यह सजीवों तथा पौधों को हानि पहुँचाता है । लेड पेंटिंग काली हो जाती है।

(iii) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) – यह रक्त के लाल वर्णक से मिलकर ऑक्सी हीमोग्लोबिन के स्थान पर कार्बोक्सी हीमोग्लोबीन बनाती है।
इससे फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन संवहन में बाधा होती है। इसके अधिक सेवन से मनुष्य की मृत्यु भी हो सकती है ।

(iv) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) – इसकी अधिकतम मात्रा से ग्रीन हाउस प्रभाव होगा, जिससे कमरे का ताप बढ़ जायेगा ।

(v) नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NO2) – नाइट्रोजन के ऑक्साइड फोटो रासायनिक धूम कोहरा बनाते हैं, जिससे आँखों में जलन होती है तथा पौधों को हानि पहुँचती है।

 

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

प्रश्न 4. मृदा अपरदन क्या है ? इसके कारण एवं प्रभाव क्या हैं ? उन विधियों का वर्णन करें जिनसे इसे रोका जा सके ।

उत्तर ⇒ जल की तीव्रता तथा वायु की तीव्रता के कारण भूमि की ऊपर की परत के विनाश को मृदा अपरदन कहते हैं ।

     मृदा क्षरण के कारण – इसके मुख्य कारक वायु, जल तथा पेड़-पौधों द्वारा निरन्तर पृथ्वी से पोषक तत्त्वों का अवशोषण है ।

इस प्रक्रिया के कारण पदा में निम्नलिखित हानियाँ दिखाई देती हैं –

(i) मृदा का अपरदन

(ii) मृदा की उर्वरा शक्ति का ह्रास

उपरोक्त दोनों हानियाँ, मानव के स्वार्थ द्वारा अधिक वनोन्मूलन तथा अल्पतम वृक्षारोपण है ।

मृदा अपरदन पर निम्न प्रकार से नियंत्रण किया जा सकता है ।

(i) भिन्न-भिन्न प्रकार की मृदा पर अनुकूलित फसलों का प्रबंधन करना ।

(ii) क्षरित मृदा के पुनःस्थापन हेतु अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करना ।

(iii) मृदा की ऊपरी परत के स्थानान्तरण की सुरक्षा हेतु उचित व्यवस्था करना जो निम्नांकित प्रकार से की जा सकती है –

फसल चक्रण – इस प्रक्रिया में एक ही खेत में बदल-बदलकर फसलों का उत्पादन करना । खाद्यान्न फसलों के उत्पादन के पश्चात् भिन्न-भिन्न मटरकुल की फसलों का उत्पादन एकान्तर क्रम में करना जिससे भूमि में नाइट्रोजन तत्त्व का ह्रास न होने पाए। नाइट्रोजन तत्त्व की मात्रा को ही मृदा की उर्वरता कहते हैं । एक फसल के उत्पादन के पश्चात् लम्बी अवधि के पश्चात् दूसरी फसल को उगाना जिससे मृदा को उर्वरता संचित करने हेतु पर्याप्त समय मिल जाता है । प्रत्येक फसल में भिन्न-भिन्न प्रकार के खरपतवार होते हैं । फसल चक्रण से खर-पतवारों का प्रकोप कम हो जाता है। फसल चक्रण से जटिल पीड़कों तथा रोगों का भय कम होता है । मिश्रित खेती में दो या दो से अधिक भिन्न प्रकार की विशेषताओं वाली फसलों की एक ही भूमि पर बारी-बारी से उगाना । रैखिक खेती से भी भूमि की उर्वरा शक्ति कम नहीं होती। पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती से भी मृदा अपरदन में ह्रास होता है ।

प्रश्न 5. कृषि वानिकी से आपका क्या तात्पर्य है ? इसके लाभ बताइए ।

उत्तर ⇒ कृषि वानिकी सामाजिक वानिकी का ही परिवर्तित रूप है । कृषि वानिकी एक तंत्र है जिसमें भूमि का उपयोग वर्षानुवर्षीय उद्देश्य युक्त उसी भूमि का किया जाता है जिस पर वार्षिक कृषि एवं जन्तुओं को पाला जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ प्राप्त करना है जिससे जीवन के आधार को बने रहने में लाभ मिल सके। यह एक सत्य है कि प्राचीन भूमि का उपयोग कृषि वानिकी तथा पशुपालन में किया जाता है ।

कृषि वानिकी के निम्नलिखित लाभ हैं ।

(i) यह जनसंख्या की आवश्यकता की पूर्ति करती है

(ii) यह पर्यावरण को संरक्षित करती है ।

(iii) उससे पशुओं के लिए चारा प्राप्त होता है, ईंधन, फसलें तथा इमारती लकड़ी प्राप्त होती है ।

(iv) ये कार्यक्रम रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं ।

(v) कृषि वानिकी फार्म में अधिक उत्पादन पर बल देती है तथा खेतों में नाइट्रोजन डालकर उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ावा देती है ।

(vi) कॉफी तथा कोको उत्पादन के लिए कृषि वानिकी बहुत उपयोगी है। कृषि वानिकी में बहुफसली कृषि की जाती है। इनसे उत्पन्न होनेवाले वृक्ष छाया देते हैं तथा वृक्षों के नीचे के स्थानों पर नकदी फसल उगाते हैं कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी तथा सामुदायिक वानिकी बहुत ही सामान्य है

Biology Prakrtik Sansadhano Ka Prabandhan Subjective Question Answer 2024

 

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