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“Matric Biology Our Environment Long Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] हमारा पर्यावरण दीर्घ सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024”
Class 10th Biology Subjective Question Answer 2024 Class 10th Subjective Question

“Matric Biology Our Environment Long Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] हमारा पर्यावरण दीर्घ सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024”

“Matric Biology Our Environment Long Subjective Questions 2024 [ जीव विज्ञान ] हमारा पर्यावरण दीर्घ सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024”:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Science ( Biology ) हमारा पर्यावरण दीर्घ सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर 2024 ( Class 10th Biology Our Environment Long Subjective Questions Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th जीव विज्ञान 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Biology Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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“Matric Biology Our Environment Long Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] हमारा पर्यावरण दीर्घ सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024”

प्रश्न 1. आहार – श्रृंखला क्या हैं ? या खाद्य – श्रृंखला क्या हैं ? वर्णन करे ।

उत्तर ⇒ पौधे अपने विभिन्न अंगों में सौर ऊर्जा एकत्र करते हैं। इन पौधों को शाकाहारी प्राणियों द्वारा खाया जाता है जिन्हें मांसाहारी प्राणियों द्वारा भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस प्रकार से खाद्य के आधार पर विभिन्न प्राणियों में एक श्रृंखला निर्मित हो जाती है जिसे आहार श्रृंखला या खाद्य-श्रृंखला कहते हैं।

खाद्य-श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी पोषी स्तर कहलाती है।

एक खाद्य या आहार-श्रृंखला निम्नलिखित हैं।

 

पादप → कीट → मेढ़क → सर्प → चील (पक्षी)

 

उपरोक्त वर्णित खाद्य-श्रृंखला में पाँच पद (कड़ियाँ) हैं।

प्रथम पोषी : यह स्वयंपोषी कहलाता है। इस पद में हरे पौधे निहित होते हैं जो सौर ऊर्जा को अपने विभिन्न भागों में संचित कर लेते हैं।

 

द्वितीय पोषी : इस स्तर में शाकहारी प्राणी आते हैं। इसे प्रथम परपोषी स्तर कहते हैं। इसमें कीट जो अपने भोजन के लिए पादपों पर आश्रित होते हैं, सम्मिलित होते हैं। वे पौधों में निहित ऊर्जा का प्रयोग करते हैं।

 

तृतीय पोषी : इस स्तर में माँसाहारी प्राणी आते हैं। मेढ़क, शेर, बाघ आदि । ऊर्जा जो कीटों अथवा अन्य शाकाहारियों में निहित होती है मांसाहारियों में हस्तान्तरित हो जाती है।

 

चतुर्थ पोषी : इस स्तर में सर्प को रखा जाता है जो ऊर्जा प्राप्ति के लिए मेढ़क का भक्षण करता है।

पंचम पोषी : इस स्तर में गिद्ध,को रखा जाता है चील (पक्षी) ऊर्जा प्राप्ति के लिए सर्प का भक्षण करते हैं,

इस स्तर के पौधों द्वारा संचित सौर ऊर्जा पूर्ण रूप से समाप्त हो चुकी होती है।

प्रश्न 2. ओजोन का निर्माण एवं अवक्षय किस प्रकार होता है ?

उत्तर ⇒ ओजोन का निर्माण – पृथ्वी की सतह से लगभग 16 km की ऊँचाई पर सूर्य की किरणों के प्रभाव से वायुमंडल की कुछ ऑक्सीजन गैस ओजोन में परिवर्तित हो जाती है। ओजोन परत पृथ्वी की सतह से 15-60 km की ऊँचाई पर स्थित है । ओजोन की सबसे अधिक मात्रा 23 km की ऊँचाई पर पाई जाती है। ओजोन वायुमंडल में अणु ऑक्सीजन तथा सूर्य की किरणों की अभिक्रिया से बनती है ।
ओजोन का अवक्षय – कुछ रसायन; जैसे फ्लोरोकार्बन (FC) एवं क्लोरोफ्लोरो – कार्बन (CFC), ओजोन (O3) से अभिक्रिया कर, आण्विक (O) तथा परमाण्विक (O) ऑक्सीजन में विखंडित कर ओजोन स्तर को अवक्षय (Deplection) कर रहे हैं । कुछ सुगंध (सेंट), झागदार शेविंग क्रीम, कीटनाशी, गंधहारक ( Deodorant ) आदि डब्बों में आते हैं और फुहारा या झाग के रूप में निकलते हैं, इन्हें ऐरोसॉल कहते हैं। इनके उपयोग से वाष्पशील CFC वायुमंडल में पहुँचकर ओजोन स्तर को नष्ट करते हैं। CFC का व्यापक उपयोग एयरकंडीशनरों, रेफ्रीजरेटरों, शीतलकों, जेट इंजनों, अग्निशामक उपकरणों आदि में होता है। वैज्ञानिकों के अध्ययन से पता चला कि 1980 के बाद ओजोन स्तर में तीव्रता से गिराई आई है। अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन स्तर में इतनी कमी आई है कि इसे ओजोन छिद्र (Ozone Hole) की संज्ञा दी जाती है ।

प्रश्न 4. हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन – सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं ?

उत्तर ⇒ मानव अनेकों प्रकार के कचरे को उत्पन्न करता है जिन्हें दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है –

(क) जैव निम्नीकृत

(ख) अजैव निम्नीकृत ।

अजैव निम्नीकृत कचरे में धातु के टुकड़े, काँच की बोतलें, पॉलीथीन थैलियाँ, थैले प्लास्टिक की बोतलें तथा प्लास्टिक की टूटी हुई वस्तुएँ तथा औषधियाँ कीटनाशी, पीड़कनाशी, रासायनिक उर्वरक आदि रसायन सम्मिलित होते हैं । एल्युमिनियम की ढापन वाली शीट, सिगरेट की पन्नी आदि भी इसी प्रकार में सम्मिलित हैं ।
इस प्रकार का कचरा वायु, जल तथा मृदा को प्रदूषित करते हैं । ये कचरे के ढेर मक्खी, मच्छर, जीवाणु तथा अन्य अनेकों सूक्ष्मजीवों के आवास बन जाते हैं जिससे इन जीवों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। इनसे मानव तथा अन्य जंतुओं में अनेकों प्रकार के रोग फैल जाते हैं।
जलीय प्राणियों एवं वनस्पतियों के शरीरों में जल में उपस्थित रसायनों का एकत्रण हो जाता है। जब मानव द्वारा इन जलीय पादपों एवं जंतुओं का भक्षण किया जाता है तो मानव में अनेकों प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। कुछ प्रकार के रसायन मृदा में मिश्रित हो जाते हैं जो पौधों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। ये रसायन पादपों के शरीर में एकत्र हो जाते हैं। जब इन पादपों का प्रयोग मानव द्वारा खाने में किया जाता है तो वे सभी रसायन मानव के शरीर में पहुँच जाते हैं ।

 

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