Join For Latest Government Job & Latest News

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Matric Biology Niyantran Avam Samanvay Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] नियंत्रण एवं समन्वय सब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Biology Subjective Question Answer 2024 Class 10th Subjective Question

Matric Biology Niyantran Avam Samanvay Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] नियंत्रण एवं समन्वय सब्जेक्टिव क्वेश्चन

जीवविज्ञान (Biology) नियंत्रण एवं समन्वय 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Biology जीवविज्ञान का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Biology vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th जीवविज्ञान 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Biology Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

Join us on Telegram

Matric Biology Niyantran Avam Samanvay Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] नियंत्रण एवं समन्वय सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. न्यूरॉन क्या है ? स्पष्ट आरेखी चित्र द्वारा न्यूरॉन को नामांकित करें ।

उत्तर ⇒ तंत्रिका तंत्र में स्थित एक उत्तेजनीय कोशिका है, जिसे हम तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) कहते हैं ।

न्यूरॉन के कार्य – हमारे पर्यावरण से सभी सूचनाओं का पता कुछ तंत्रिका कोशिकाओं के विशिष्टीकृत सिरे द्वारा लगाया जाता है। ये ग्राही प्रायः हमारी ज्ञानेन्द्रियों में स्थित होते हैं। यह सूचना तंत्रिका कोशिका के द्रुमाकृतिक सिरे द्वारा उपार्जित की जाती है तथा एक रासायनिक क्रिया द्वारा एक विद्युत आवेग उत्पन्न करती है । यह आवेग द्रुमिका से कोशिकाय तक जाता है और तंत्रिका कोशिका में होता हुआ इसके अन्तिम सिरे तक पहुँचता है। एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन कराता है। ये रसायन सिनैप्टिक दरार को पार करते हैं तथा अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी प्रकार का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं । इस प्रकार से सूचनाओं को तंत्रिका ग्रन्थि तक ले जाती हैं ।

प्रश्न 2. मानव मस्तिष्क का एक स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए ।

 

प्रश्न 3. मेरुरज्जु का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ मेडूला ऑब्लाँगेटा खोपड़ी के महारंध्र से निकल कर रीढ़ की हड्डी की कशेरुकाओं के बीच में से निकल कर नीचे तक फैली रहती है । इसी को मेरुरज्जु या रीढ़ रज्जु कहते हैं। इसके ऊपर ड्यूरामेटर, ऐरेक्रॉइड और पिओमेट नामक तीन झिल्लियाँ उसी प्रकार होती हैं जैसी मस्तिष्क में ऊपर होती हैं। मेरुरज्जु से निश्चित दूरियों पर 31 जोड़े मेरू तंत्रिकाएँ निकलती हैं। इसकी लम्बाई लगभग 45 सेमी होती है ।

मेरुरज्जु के कार्य –

(i) यह साधारण प्रतिवर्ती क्रियाओं जैसे घुटने के झटके का प्रत्युत्तर, स्वयं चालित प्रतिक्रियाएँ जैसे मूत्राशय का सिकुड़न आदि के समन्वय केंद्र का कार्य करती है ।

(ii) यह मस्तिष्क और सुषुम्ना के मध्य संचार का कार्य करती है ।

प्रश्न 4. प्रतिवर्ती क्रिया को उपयुक्त उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए ।

उत्तर ⇒ बाह्य परिवर्तनों अर्थात् उद्दीपनों के प्रति प्राणियों की प्रक्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं- ऐच्छिक एवं अनैच्छिक। अनैच्छिक क्रियाएँ प्राणी की चेतना या इच्छा शक्ति के अधीन नहीं होती हैं। ये दो प्रकार की होती हैं- स्वायत्त या स्वतंत्र तथा प्रतिवर्ती ।

प्रतिवर्ती क्रियाएँ दैहिक होती हैं अर्थात् रेखित पेशियों एवं ग्रंथियों से संबंधित होती हैं। इस क्रिया में मेरुरज्जु भाग लेती हैं। यदि शरीर के किसी भाग में सुई चुभ जाए तो शरीर उस भाग को वहाँ से हटा लेता है। प्रत्येक स्पाइनल तंत्रिका के दो मूल होते हैं संवेदी तंतुओं से बना पृष्ठ मूल तथा चालक तंतुओं से बना अधरमूल । त्वचा पर पिन चुभाने का उद्दीपन इसमें उपस्थित संवेदांग को उत्तेजित
करता है और वे इस संवेदना को संबंधित सोमेटिक संवेदी तंतुओं के डेंड्राप्स में प्रसारित कर देते हैं । ये तन्तु इस संवेदी प्रेरणा को पास की स्टाइनल तंत्रिका के पृष्ठ मूल के पृष्ठ गुच्छक में उपस्थित म्यूरॉन्स कोशाओं में ले जाते हैं। इन कोशाओं में एक्सॉन फिर इस प्रेरणा को मेरुरज्जु के धूसर द्रव्य तक ले जाते हैं। यहाँ एक एक्सॉन की अंतिम बटनों से ये प्रेरणा निकट की चालक तंत्रिकाओं के डैंड्राइट्स में जाती है । यहाँ संवेदी प्रेरणा चालक प्रेरणा बन जाती है। चालक कोशिकाओं के ऍक्सान अधर मूल के तंतु होते हैं। वे इस प्रेरणा को पादों तक ले जाते हैं। पेशियाँ सिकुड़ती हैं जो कि पादों को गति प्रदान करती हैं । संवेदगों से लेकर अपवाहक अंग तक के पूरे प्रेरणा पथ को प्रतिवर्ती चाप कहते हैं ।

प्रश्न 5. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है ?

उत्तर ⇒ जब वृद्धि करता पादप प्रकाश को संसूचित करता है तब ऑक्सिन नामक पादप हॉर्मोन प्ररोह के अग्रभाग में संश्लेषित होता है तथा कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि करता है। जब पादप पर एक ओर से प्रकाश आ रहा होता है तब ऑक्सिन विसरित होकर प्ररोह के छाया वाले भाग में आ जाता है । प्ररोह की प्रकाश से दूर वाली दिशा में ऑक्सिन का सांद्रण कोशिकाओं को लंबाई में बढ़ने के लिए उद्दीप्त करता है और वह प्रतान की सहायता से किसी दूसरे पादप या बाड़ के ऊपर चढ़ता है । ये प्रतान स्पर्श के लिए संवेदनशील है । जब ये किसी आधार के संपर्क में आते हैं तो प्रतान का वह भाग तेजी से वृद्धि करता है जो वस्तु से दूर रहता है और वह वस्तु को चारों ओर से जकड़ लेता है ।

प्रश्न 6. प्रतिवर्ती क्रिया क्या है ? चित्र की सहायता से इसका वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ प्रतिवर्ती क्रियाएँ स्वायत्त प्रेरक के प्रत्युत्तर हैं । ये क्रियाएँ मस्तिष्क की इच्छा के बिना होती हैं । इसलिए ये अनैच्छिक क्रियाएँ हैं । यह बहुत स्पष्ट और यांत्रिक प्रकार की हैं। जैसे- जब हमारी आँखों पर तेज रोशनी पड़ती है तो हमारी आँख की पुतली अचानक छोटी होने लगती है। यह क्रिया तुरंत और हमारे मस्तिष्क की इच्छा के बिना होती है । प्रतिवर्ती क्रियाएँ मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित पेशियों द्वारा अनैच्छिक क्रियाएँ होती हैं जो प्रेरक के प्रत्युत्तर में होती हैं । यदि शरीर के किसी भाग में अचानक एक पिन चुभोया जाए तो संवेदियों ।
द्वारा प्राप्त यह उद्दीपक इस क्षेत्र के एफैरेंट तंत्रिका तन्तु को उद्दीपित करता है । तंत्रिका तन्तु मेरु तंत्रिका के पृष्ठीय पथ द्वारा इस उद्दीपक को मेरुरज्जु तक ले जाता है । मेरुरज्जु से यह उद्दीपन के अधरीय पथ द्वारा एक या अधिक इफैरेंट तंत्रिका तन्तु में पहुँचता है। इफेरेंट तंत्रिका तंतु प्रभावी अंगों को उद्दीपित करता है। पिन चुभोने के तुरंत बाद इसी कारण प्राणी प्रभावी भाग हटा लेता है। उद्दीपक का संवेदी अंग से प्रभावी अंग तक का पथ प्रतिवर्ती चाप कहलाता है । प्रतिवर्ती चाप तंत्रिका तंत्र की क्रियात्मक इकाई बनाती है ।

प्रतिवर्ती चाप में होता है –

(1) संवेदी अंग वह अंग या स्थान जो प्रेरक को प्राप्त करता है ।

(ii) एफरेंट तंत्रिका तन्तु ( Afferent Nerve Fibre ) – यह संवेदक प्रेरणा को. संवेदी अंग से केंद्रीय तंत्र तक ले जाता है, जैसे मस्तिष्क या मेरुरज्जु ।

(iii) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क या मेरुरज्जु का कुछ भाग ।

(iv) इफैरेंट अथवा मोटर तंत्रिका (Efferent or Motor Nerve ) – यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से मोटर प्रेरणाओं को प्रभावी अंगों तक लाता है, जैसे पेशियाँ अथवा ग्रंथियाँ ।

(v) प्रभावी अंग (Effector ) – यह तंत्रिकाविहीन भाग जैसे ग्रंथियों की पेशियाँ जहाँ मोटर प्रेरणा खत्म होती है और प्रत्युत्तर दिया जाता है ।
कार्य प्रतिवर्ती क्रिया प्रेरक को तुरंत प्रत्युत्तर देने में सहायता करती है और मस्तिष्क को भी अधिक कार्य से मुक्त करती है ।

प्रश्न 7. मानव शरीर में पायी जाने वाली महत्त्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रन्थियों के नाम, उनके स्रावित हॉर्मोंस तथा कार्यों का वर्णन कीजिए ।

 S.n     ग्रंथि का नाम      हॉर्मोन          कार्य
 1. थॉयराइड थॉयराक्सिन उपापचय तथा वृद्धि की दर नियमित करता है। इस हार्मोन की कमी होने से मोटापा बढ़ता है और शरीर में शिथिलता आ जाती है। अधिकता से शरीर अतिसक्रिय हो जाता है तथा भार गिर जाता है।
 2. अग्नाशय इन्सुलिन शक्कर के उपापचय को नियमित करता है। इसकी कमी से रुधिर में शक्कर का स्तर बढ़ जाता है और कमजोरी आती है ऐसी परिस्थिति को मधुमेह कहते हैं।
 3. अधिवृक्क कॉर्टिसोन इस ग्रन्थि का बाहरी भाग कोर्टेक्स रस उत्पन्न करता है। यह प्रोटीन को शक्कर में बदलने में सहायता करता है। पीयूष ग्रन्थि कोर्टेक्स / को उत्तेजित करती है।
 4. पीयूष ग्रंथि (मास्टर ग्रंथि) वृद्धि हॉर्मोन

एन्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (ADH) ACTH

हड्डी तथा ऊतकों की वृद्धि को नियमित करता है। वृक्क द्वारा पुनः अवशोषित पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है। कॉर्टिसोन बनाने के लिए अधिवृक्क कॉर्टेक्स को उत्तेजित करता है। एस्ट्रोजन बनाने के लिए अंडाशय को उत्तेजित करता है। थॉयरॉक्सिन बनाने के लिए थॉयराइड को उत्तेजित करता है।
 5. अंडाशय एस्ट्रोजन  बहुत-से कार्य तथा गुण, जैसे वक्ष का विकास करना ।
 6. वृषण टेस्टोस्टरोन पुरुष के बहुत-से गुण, जैसे मूंछ तथा दाढ़ी में वृद्धि करना।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *