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Matric Biology Jeev Janan Kaise Karate Hain Long Subjective Questions [ जीव विज्ञान ] जीव जनन कैसे करते हैं ( दीर्घ )सब्जेक्टिव क्वेश्चन

जीवविज्ञान ( Biology) जीव जनन कैसे करते हैं  सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Biology जीवविज्ञान का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Biology vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th जीवविज्ञान 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Biology Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Biology Jeev Janan Kaise Karate Hain Subjective Questions [ जीव विज्ञान ] जीव जनन कैसे करते हैं सब्जेक्टिव क्वेश्चन

प्रश्न 1. मानव का मादा जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ ।

उत्तर ⇒ निषेचन प्रक्रिया एवं भ्रूण विकास मानव में मैथुन के समय शुक्राणु योनिमार्ग में स्थापित होते हैं, जहाँ से ऊपर की ओर यात्रा करके अंडवाहिका तक पहुँच जाते हैं और अंडकोशिका से मिल जाते हैं। इसे ही निषेचन कहते हैं ।
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निषेचन के पश्चात् निषेचित अण्ड अथवा युग्मनज गर्भाशय में स्थापित हो जाते हैं तथा विभाजन करने लगते हैं। इसे ही भ्रूण कहते हैं । भ्रूण को माँ के रूधिर से पोषण मिलने लगता है। यह काम प्लेसेंटा द्वारा होता है, जो एक तश्तरीनुमा संरचना होती है। प्लेसेंटा गर्भाशय की भित्ति में धँसी होती है । इसमें भ्रूण की ओर ऊतक में प्रवर्ध होते हैं। माँ के उदर में रक्त स्थान होते हैं जो प्रबर्ध को आच्छादित करते हैं। इस प्रकार, विभाजन और पोषण के साथ 9 महीने तक गर्भाशय में भ्रूण विकसित होता रहता है ।

प्रश्न 2. एकल जीवों में प्रजनन की विधि की व्याख्या करें ।

उत्तर ⇒ एकल जीवों में प्रजनन या जनन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं –

(i) अलैंगिक जनन

(ii) लैंगिक जनन ।

अलैंगिक जनन के लिए नर एवं मादा के जनन अंगों का कोई उपयोग नहीं होता है। अतः, एकल जीव प्रायः अलैंगिक जनन ही करते हैं। लैंगिक जनन के लिए नर और मादा जनन अंगों का पारस्परिक सम्मिलन आवश्यक होता है। अतः, इसके लिए किसी जाति के दो व्यक्तियों (एक नर, एक मादा) की आवश्यकता होती है। एकल जीव जैसे अमीबा आदि में जनन अलैंगिक विधियों से होता है। इसमें कूटपाद आगे बढ़ता है। इससे कोशिका पर खींचाव उत्पन्न होता है। सभी कोशिकांग दो भागों में विभक्त हो जाते हैं। दोनों खण्ड बीज से टूटकर अलग हो जाते हैं। इस प्रकार नई पुत्री कोशिका निर्मित होती है ।

प्रश्न 3. नर-जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ एवं उसके कार्यों का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ मनुष्य के नर-जनन तंत्र में निम्नलिखित अंग आते हैं –

(i) वृषण-मनुष्य में एक जोड़ी वृषण होते हैं जो वृषण कोश में बन्द रहते हैं। वृषण में शुक्राणु उत्पन्न होते हैं । वृषण से शुक्राणु निकलने के बाद लगभग 48 घंटे तक जीवित रहते हैं। शुक्राणुओं का निर्माण शुक्रजनन कहलाता है । वृषण कोष शुक्राणुओं को शरीर के ताप से 1-3°C निम्न ताप प्रदान करते हैं ।

वृषण के निम्नलिखित कार्य हैं –

(क) शुक्राणु उत्पन्न करना

(ख) नर लिंग हॉर्मोन-टेस्टोस्टीरोन की उत्पत्ति तथा स्त्रावण । यदि वृषण देहगुहा में ही रह जाते हैं तो बन्ध्यता उत्पन्न होती है ।

(ii) एपीडिडिमिस – यह एक नलिकाकार संरचना होती है जो वृषण के साथ मजबूती से जुड़ी रहती है। यह सेमिनीफेरस नलिकाओं से जुड़ी रहती है ओर शुक्राणुओं के लिए एक संचय घर का कार्य करती है। एपीडिडिमिस से शुक्राणु वाहिनी द्वारा शुक्राणु शुक्राशय में आते हैं जहाँ ये पूरी तरह परिपक्व होते हैं तथा इनमें कुछ स्राव मिल जाते हैं यह ग्रन्थि कुछ विशिष्ट गंध या स्राव स्रावित करती है जो कि शुक्र रस में मिल जाते हैं । PHOTO

यह वह मार्ग है जिसमें से होकर मूत्र बाहर आता है । यह मूत्रमार्ग एक पेशीय अंग से निकलता है जिसे शिश्न कहते हैं। शिश्न का उपयोग मूत्र करने के साथ-साथ शुक्राणुओं (शुक्ररस) को निकालने के लिये भी किया जाता है ।

 

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प्रश्न 4. मादा जनन अंगों का सचित्र वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ मादा जनन तंत्र में निम्नलिखित जनन अंग आते है ।

(i) अण्डाशय – मादा में एक जोड़ी अण्डाशय होते हैं जो कि उदरीय गुहिका में स्थित होते हैं। जन्म के समय प्रत्येक अण्डाशय में 2,50,000 से 5,00,000 तक अण्डाणु होते हैं, लेकिन जीवन काल में उनमें से अधिकतर नष्ट हो जाते हैं और केवल 400 अण्डाणु ही परिपक्व होकर मादा द्वारा अपने जीवनकाल में छोड़े जाते हैं। इसके अतिरिक्त अण्डाशय दो हॉर्मोन एस्ट्रोजन तथा प्रोजिस्टीरोन भी उत्पन्न करता है ।
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(ii) अंडवाहिनी अण्डाशय के पास से अंडवाहिनी एक कीप की तरह प्रारम्भ होती है। यह एक पेशी, पतली तथा कुण्डलित नलिका होती है जो पीछे की ओर गर्भाशय से मिलती है । अंडवाहिनी के आगे कीप वाला हिस्सा अण्डाशय में अंडोत्सर्ग के समय अण्डाणु को पकड़कर अण्डवाहिनी में छोड़ देता है जहाँ से यह गर्भाशय में पहुँच जाता है ।

(ii) गर्भाशय यह एक खोखला पेशीयुक्त अंग है जहाँ भ्रूण का विकास होता है। यह मूत्राशय तथा मलाशय के बीच में होता है। यह सर्विक्स द्वारा योनि में खुलता है । गर्भाशय की दीवार पेशीय तथा मोटी होती है ।

(iv) योनि – यह एक नलिकाकार संरचना होती है, जो पीछे की ओर सर्विक्स द्वारा गर्भाशय से जुड़ी रहती है तथा आगे की ओर बाहर एक सुराख द्वारा खुलती है इसके है जिसे भग कहते हैं। योनि द्वारा ही शुक्राणुओं को ग्रहण किया जाता दो फोल्ड होते हैं लेबिया मेजोरा तथा लेबिया माइनोरा । मूत्र द्वार के सामने कलाइटोरिस होता है। यह शिश्न के समकक्ष होता है ।

प्रश्न 6. जीवों में विभिन्नता, स्पीशीज के लिए तो लाभदायक है, परन्तु व्यष्टि के लिए आवश्यक नहीं है, क्यों ?

उत्तर ⇒ अपनी जनन क्षमता का उपयोग कर जीवों की समष्टि पारितंत्र में स्थान अथवा निकेत ग्रहण करती हैं। जनन काल में DNA प्रतिकृति का अविरोध जीव की शारीरिक संरचना एवं डिजाइन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं जो उसे विशिष्ट निकेत के योग्य बनाती है। यदि एक समष्टि अपने निकेत के अनुकूल है तथा निकेत हैं में कुछ उग्र परिवर्तन आते हैं तो ऐसी अवस्था में समष्टि का समूल विनाश भी संभव है परंतु यदि समष्टि के जीवों में भिन्नता होगी तो उनके जीवित रहने की कुछ संभावना है । अतः, यदि शीतोष्ण जल में पाये जाने वाले जीवाणुओं की कोई समष्टि है तथा वैश्विक ऊष्मीकरण के कारण जल का ताप बढ़ जाता है जो अधिकतर जीवाणु व्यष्टि मर जाएँगी । परन्तु, उष्ण प्रतिरोधी क्षमता वाले कुछ परिवर्त जीवित रहते हैं. तथा वृद्धि करते हैं । अतः, विभिन्नताएँ स्पीशीज की उत्तजीविता बनाये रखने में उपयोगी हैं ।

प्रश्न 8. जंतुओं में लैंगिक जनन से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर ⇒ जंतुओं में लैंगिक जनन विभिन्न विधियों द्वारा होता है । लैंगिक जनन के समय मोनोसिस्टिस जैसे एक कोशिकीय जीव आकार तथा आकृति में समान होते हैं। मलेरिया परजीवी में दोनों जीव असमान होते हैं। बहुकोशिकीय जीवों में नर शुक्राणु तथा मादा अंडा उत्पन्न करती है। उभयलिंगी जीवों में एक ही जीव एक समय में शुक्राणु उत्पन्न करता है तो दूसरे में अंडा । मेंढक में नर तथा मादा दोनों जीव संभोग करते हैं। अपने-अपने युग्मकों को पानी में छोड़ देते हैं। शुक्राणु अंडों को पानी में ही निषेचित करता है। ऐसे निषेचन को बाह्य निषेचन कहते हैं । मवेशी, कुत्ता, कीट, मकड़ी, मनुष्य तथा ऐसे ही अन्य जंतुओं में नर अपने शुक्राणु को मादा के शरीर के अन्दर छोड़ते हैं। शुक्राणु अंडों को मादा के शरीर के अन्दर ही निषेचित करते हैं । ऐसे निषेचन को आंतरिक निषेचन कहते हैं। निषेचन के फलस्वरूप युग्मनज बनता है। निषेचन के तुरन्त बाद युग्मनज विकसित होना आरम्भ कर देता है । युग्मकों में अपने माता-पिता की तुलना में आधी संख्या में गुणसूत्र (क्रोमोसोम) होते हैं। निषेचन से जब दो युग्मक जिनमें आधी संख्या में क्रोमोसोम होते हैं, मिलते हैं तब जीव में क्रोमोसोम की संख्या पूरी हो जाती है ।

प्रश्न 9. रजोधर्म का वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ स्त्रियों में मासिक धर्म – स्त्रियों में यह चक्र 13 -15 वर्ष की आयु में प्रारम्भ होता है। यह यौवनावस्था होती है । स्त्रियों में मासिक धर्म 28 दिन का होता है । यही समय अण्डाणु का पूर्ण जीवन काल होता है ।

इसकी अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं –

(i) 1-5 वें दिन तक पुराना अंडाणु रजोधर्म के समय बाहर आता अंडाशय में नये अंडाणु की वृद्धि प्रारम्भ हो जाती है ।

(ii) 6-12 वें दिन तक अंडाशय से अंडाणु परिपक्व होकर ग्रेफियन फॉलिकिल बन जाता है ।

(iii) 13-14 वें दिन में ग्रफियन फॉलिकिल अंडाशय से बाहर आकर अंडवाहिनी में पहुँच जाता है । ये अंडोत्सर्ग कहलाता है ।

(iv) 15-16 वें दिन अंडाणु अंडवाहिनी और फिर गर्भाशय में आकर शुक्राणु से मिलने की प्रतीक्षा करता है । यदि इस बीच निषेचन होता है हो अंडाणु युग्मनज में परिवर्तित हो जाता है, जो विकास करके 9 माह में शिशु बनकर जन्म लेता है ।

(v) निषेचन नहीं होता है तो 17-28 वें दिन तक यह निष्क्रिय हो जाता है । 28 दिन बाद रजोधर्म से बाहर आता है ।

(vi) यह चक्र एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टीरोन हार्मोन्स द्वारा नियंत्रित रहता है । स्त्रियों में रजोनिवृत्ति 45-50 वर्ष तक होती है। लड़कों में किशोरावस्था का प्रारम्भ 13 से 15 वर्ष में होता है । इनमें कोई चक्र नहीं होता है । शुक्राणओं का निर्माण जीवन भर होता है ।

 

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प्रश्न 10. शिशु जन्म के नियमन की विधियों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ जन्म नियंत्रण के उपाय ये हैं –

1. अंत: गर्भाशय युक्ति

2. योनि डायाफ्राम्स, क्रीम – जैली आदि

3. ऑपरेशन विधि ।

गर्भ निरोधक गोलियाँ हॉर्मोन्स से तैयार की जाती हैं । गर्भाशय में कॉपर – T के रोपण से भ्रूण का पोषण नहीं हो पाता है ।

पुरुष में कण्डोम का प्रयोग किया जाता है । स्त्रियों में अवरोधक उपाय भी अपनाये जाते हैं। जैसे कॉपर-1 का प्रयोग। ऑपरेशन द्वारा भी जन्म नियमन किया जाता है । पुरुषों में नसबन्दी (शुक्राणुनलिका काटकर बाँधना) तथा स्त्रियों में – नलबन्दी (फैलोपियन नलिकाएँ काटकर बाँधना) द्वारा जनसंख्या नियंत्रण करते हैं । 

प्रश्न 12. फूल (पुष्प) के जननांगों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ पुष्प के जननांग फूल के जननांग हैं – पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर ।
1. नर जनन अंग पुंकेसर होते हैं। पुंकेसर के अग्र भाग पर एक चपटी रचना होती है जिसे परागकोप कहते हैं । इनमें परागकोष बनते हैं तथा परिपक्व होते हैं । यह नर युग्मक कहलाते हैं। प्रत्येक पुंकेसर के दो भाग होते हैं-परागकोष तथा फिलामेन्ट । परागकोष में दो कोष होते हैं । इन्हें संयोजी जोड़ता है ।

2. स्त्रीकेसर पुष्प का मादा जननांग है ।इसके तीन भाग हैं :- वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय ।वर्तिकाग्र स्त्रीकेसर का ऊपरी, चौड़ा भाग होता है। इसी पर परागकण चिपकते हैं । इसके नीचे लम्बी वर्तिका होती है। यह अंडाशय तक होती है । अण्डाशय स्त्रीकेसर का निचला फूला हुआ भाग होता है । इसमें बीजाण्ड भरे रहते हैं । निषेचन के बाद यही भाग फल तथा बीज बनता है ।

नर तथा मादा युग्मकों के मिलने से युग्मनज बनता है ।

प्रश्न 13. अमीबा में अलैंगिक जनन का वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ अमीबा में अलैंगिक जनन तीन प्रकार का होता है ।

(i) विखंडन – इसके द्वारा जनन एक कोशिकीय जीव अमीबा में होता है जब जीव पूर्ण विकसित हो जाता है तब यह भागों में विभाजित हो जाता है । पहले केन्द्रक विभाजित होता है और फिर कोशिका द्रव्य । विखंडन से जब दो जीव बनते हैं तो इस प्रक्रिया को द्विखंडन कहते हैं। इसमें दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। यह समसूत्रीय ढंग से होता है तथा अनुकूल परिस्थितियों में होता है ।

(ii) बहुखंडन – अमीबा में केन्द्रक परिकूल दशाओं में अनेक भागों में टूट जाता है तथा प्रत्येक से एक नये जीव का निर्माण होता है ।

       

 

(iii) पुनरुदभवन – अमीबा को अनेकों टुकड़ों में तोड़ने पर प्रत्येक टुकड़े (यदि उसमें केन्द्रक का भाग है) से पूर्ण जीव बनता है ।

 

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