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Matric Disaster Management Subjective Questions [ आपदा प्रबंधन ] भूकंप एवं सुनामी सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024
Class 10th Biology Subjective Question Answer 2024 Class 10th Subjective Question

Matric Biology Anuvanshikata Avan Jaiv Vikas Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] आनुवांशिकता एवं जैव विकास सब्जेक्टिव क्वेश्चन

जीवविज्ञान ( Biology) आनुवांशिकता एवं जैव विकास लघु उत्तरीय सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Biology जीवविज्ञान का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Biology Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th जीवविज्ञान 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Biology Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Biology Anuvanshikata Avan Jaiv Vikas Subjective Questions 2024 [ जीवविज्ञान ] आनुवांशिकता एवं जैव विकास सब्जेक्टिव क्वेश्चन

 

प्रश्न 1. समजात अंग को परिभाषित कीजिए ।

उत्तर ⇒ जीव-जंतुओं के वे अंग, जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना में समानता होती है पर समय, परिस्थिति और कार्य के कारण उनकी बाहरी रचना में अंतर आ जाता है, उन्हें समजात अंग कहते हैं ।

  उदाहरण – पक्षी के पंख, मेढ़क की टाँगें, सील के फ्लीपर, चमगादड़ के पंख, घोड़े की अगली टाँगें और मनुष्य की बाजू की उत्पत्ति और संरचना समान है पर इनके कार्यों में अंतर है । ये इस बात को प्रमाणित करते हैं कि कभी सभी के पूर्वज
। एक जैसे ही थे । परिस्थितियों और समय ने उनमें परिवर्तन किये हैं ।

  चित्र: समजात अंग

प्रश्न 2. हम यह कैसे जान पाते हैं कि जीवाश्म कितने पुराने हैं ?

उत्तर ⇒ जीवाश्म की प्राचीनता ज्ञात करने के दो सामान्य तरीके हैं। अगर हम जीवाश्म प्राप्त करने हेतु पृथ्वी की चटानों की खुदाई करे तो जो जीवाश्म हमें सतह से कम गहराई पर स्थित मिलेंगे, वे निश्चित तौर पर अधिक गहराई प्राप्त जीवाश्म नूतन होंगे। एक जीवाश्म की आयु ज्ञात करने का वैज्ञानिक तरीका रेडियो कार्बन काल-निर्धारण है। समस्थानिक अनुपात के अध्ययन द्वारा भी जीवाश्म की आयु की गणना की जा सकती है।

प्रश्न 3. मनुष्य / मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ मनुष्य में लिंग निर्धारण गुणसूत्रों द्वारा होता है। मानव में कोशिकाओं के केन्द्रक में 46 गुणसूत्र होते हैं जिनमें 44 ओटोसोम्स तथा दो लिंग गुणसूत्र होते हैं। पुरुष विषमयुग्मजी होता है तथा मादा समयुग्मजी होती है । गुणसूत्र दो प्रकार के होते हैं— दैहिक गुणसूत्र तथा लैंगिक गुणसूत्र । मनुष्य में X तथा Y लिंग गुणसूत्र होते हैं जबकि स्त्री में दो X लिंग गुणसूत्र होते हैं। शेष सभी गुणसूत्र दैहिक गुणसूत्र होते हैं । ड्रोसोफिला तथा मनुष्य में लिंग निर्धारण गुणसूत्र के आधार पर होता है । मनुष्य में Y गुणसूत्र का होना नर की उत्पत्ति के लिए आवश्यक है, चाहे X गुणसूत्रों की संख्या कितनी भी हो ।

प्रश्न 4. विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है ?

उत्तर ⇒ विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज की उत्तरजीविता की. संभावना बढ़ जाती है। प्राकृतिक चयन ही किसी स्पीशीज की उत्तरजीविता का आधार बनता है जो वातावरण में घंटित होता है। समय के साथ उनमें जो प्रगति की प्रवृत्ति दिखाई देती है उसके साथ ही साथ उनके शारीरिक अधिकल्प में जटिलता की वृद्धि हो जाती है। ऊष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं में अधिक गर्मी से बचने की संभावना अधिक होती है। पर्यावरण द्वारा उत्तम परिवर्तन का चयन जैव विकास प्रक्रम का आधार बनता है।

प्रश्न 5. जीवाश्म क्या हैं ? यह जैव विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं ?

उत्तर ⇒ जीवाश्म प्राचीन समय में मृत जीवों के सम्पूर्ण, अपूर्ण, अंग आदि के अवशेष तथा उन अंगों के ठोस मिट्टी, शैल तथा चट्टानों पर बने चिह्न होते हैं जिन्हें पृथ्वी को खोदने से प्राप्त किया गया है। ये चिह्न इस बात का प्रतीक हैं कि ये जीव करोड़ों वर्ष पूर्व जीवित थे लेकिन वर्तमान काल में लुप्त हो चुके हैं ।

(i) जीवाश्म उन जीवों के पृथ्वी पर अस्तित्व की पुष्टि करते हैं ।

(ii) इन जीवाश्मों की तुलना वर्तमान काल में उपस्थित समतुल्य जीवों से कर सकते हैं। इनकी तुलना से अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्तमान में उन जीवाश्मों के जीवित स्थिति के काल के सम्बन्ध में क्या विशेष परिवर्तन हुए हैं जो जीवधारियों को जीवित रहने के प्रतिकूल हो गये हैं।

प्रश्न 6. जीवाश्म क्या है ? उदाहरण दें

उत्तर ⇒ लाखों वर्ष पूर्व जीवित जीवों के अवशेष चिह्नों के रूप में मिलते हैं, जिन्हें जीवाश्म कहते हैं। ये जीवाश्म स्तरीकृत चट्टानों में पाये जाते हैं

उदाहरण- आर्किओोप्टेरिक्स- यह विलुप्त जीव सरीसृपों व पक्षियों के बीच की कड़ी
| इसके लक्षण पक्षियों तथा सरीसृपों से मिलते हैं। इससे स्पष्ट होता कि पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ है। आर्किऑप्टेरिक्स एक संयोजक कड़ी है।

प्रश्न 7. यदि एक लक्षण (trait) A अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10% सदस्यों में पाया जाता है तथा B उसी समष्टि में 90% जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न और क्यों ?

उत्तर ⇒ लक्षण (B) पहले उत्पन्न होगा क्योंकि यह समष्टि 90% के जीवों में पाया जाता है।
चूँकि जीव अलैंगिक प्रजनन हैं तो वह लक्षण जो 90% समष्टि में है वह पहले प्रकट होगा।

प्रश्न 8. मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षा स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं ?

उत्तर ⇒ मेंडल ने दो विभिन्न विकल्पों, लक्षणों वाले मटर के पौधों का चयन कर उनसे पौधे उगाए गए थे। लम्बे पौधे तथा बौने पौधे का संकरण कराकर प्राप्त संतति में लंबे एवं बौने पौधों की गणना की। प्रथम संतति पीढ़ी (F) में कोई पौधा बीच की ऊँचाई का नहीं था। सभी पौधे लंबे थे। दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया था लेकिन दूसरी पीढ़ी (F) में सभी पौधे लंबे नहीं थे बल्कि उनमें से एक चौथाई बौने पौधे थे। इससे स्पष्ट हुआ कि किसी भी लक्षण के दो विकल्प लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न होने वाले जीवों में किसी भी लक्षण के दो विकल्प की स्वतंत्र रूप से वंशानुगति होती है।

 

Biology Anuvanshikata Avan Jaiv Vikas Subjective Question Answer 2024

 

प्रश्न 9. क्या एक तितली तथा एक चमगादड़ के पंखों की समजात अंग कहा जा सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?

उत्तर ⇒ तितली के पंख तथा चमगादड़ के पंख कार्य में तो समान हैं 1 परन्तु, उत्पत्ति में दोनों असमान हैं। अतः ये समजात अंग नहीं हैं

प्रश्न 10. क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागत स्पीशीज के पौधों के जाति उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है ? क्यों या क्यों नहीं ?

उत्तर ⇒ हाँ, स्वयं परागित होने वाले पौधों में जाति उद्भव के लिए भौगोलिक पृथक्करण एक प्रमुख कारण है।

प्रश्न 11. बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिन्ता का विषय क्यों है ?

उत्तर ⇒ पर्यावरण में परिवर्तन वाबों की संख्या में ह्रास का मुख्य कारण पर्यावरण में परिवर्तन से जीव के बाह्य लक्षणों में परिवर्तन होते हैं। जननकीय लक्षण प्रतिकूल पर्यावरण में भी यथावत् रहते हैं। अतः, पर्यावरण की प्रतिकूलता बाघों की मृत्यु का कारण बनती है। इसी कारण से बाघों की संख्या में कमी चिन्ता का विषय बनी हुई है।

प्रश्न 12. जैव विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र किस प्रकार परस्पर संबंधित है ?

उत्तर ⇒ जीवों में वर्गीकरण का अध्ययन उनमें विद्यमान समानताओं और भेदों के आधार पर किया जाता है। उनमें समानता इसलिए प्रकट होती है कि वे किसी समान पूर्वज से उत्पन्न हुए हैं और उनमें भिन्नता विभिन्न प्रकार के पर्यावरणों में की जाने वाली अनुकूलता के कारण से है। उनमें बढ़ती जटिलता को जैव विकास के उत्तरोत्तर क्रमिक आधार पर स्थापित कर अंतर्संबंधों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 13. क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप इतने भिन्न दिखायी पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज के सदस्य हैं ?

उत्तर ⇒ मानव परस्पर बहुत भिन्न दिखाई पड़ते हैं जिनकी भित्रता का कारण भौतिक पर्यावरण के कारकों से भौतिक लक्षणों में होने वाले परिवर्तन हैं। उनके जननकीय लक्षणों में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसी कारण उनके अंगों में कोई परिवर्तन नहीं आता, परंतु भौगोलिक परिस्थितियों में परिवर्तनों के कारण उनके आकार, रंग तथा दिखायी देने वाली आकृति में परिवर्तन दिखाई पड़ते हैं जबकि वे एक ही स्पीशीज के सदस्य हैं

प्रश्न 14. संतति में नर तथा मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है ?

उत्तर ⇒ एक स्पीशीज के प्रत्येक सदस्य की कोशिका में गुण सूत्रों की संख्या समान होती है। लैंगिक प्रजनन में प्रत्येक गुणसूत्र दो समान लम्बाई वाले भागों में बँट जाता है। प्रत्येक भाग को क्रोमेटिड कहते हैं। प्रत्येक क्रोमेटिड लैंगिक प्रजनन में सक्रिय भाग लेता है जिन्हें नर तथा मादा युग्मक कहते हैं। केवल एक युग्मक ही लैंगिक जनन में भाग नहीं ले सकता। अतः, नर तथा मादा पित्रों के युग्मक लैंगिक जनन में सक्रिय भाग लेते हैं तथा आनुवंशिकता को सुनिश्चित करते हैं।

प्रश्न 15. वे कौन से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती ?

उत्तर ⇒ निम्नलिखित विधियों से जीव जिसमें विशेष लक्षण होते हैं जनसंख्या में वृद्धि करता है

(i) प्रजनन में रंग विभेद संभव है जिससे जनसंख्या में विशेष लक्षणों वाले व्यष्टि जीवों में वृद्धि हो जाएगी।

(ii) रंग विभेद प्रथम, द्वितीय पीढ़ियों में पुनः विभेद संभव है जो जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

इन दोनों परिस्थितियों में जनसंख्या में बहुत कम रंग-विभेद उभयनिष्ठ होता है।

प्रश्न 16. वे कौन-से कारक हैं जो नयी स्पीशीज के उद्भव में सहायक हैं ?

उत्तर ⇒ नई स्पीशीज के उद्भव में वर्तमान स्पीशीज के सदस्यों का परिवर्तनशील पर्यावरण में जीवित बने रहना है। इन सदस्यों को नये पर्यावरण में जीवित रहने के लिए कुछ बाह्य लक्षणों में परिवर्तन करना पड़ता है। अतः भावी पीढ़ी के सदस्यों में शारीरिक लक्षणों में परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं जो संभोग क्रिया के द्वारा अगली पीढ़ी में हस्तांतरित हो जाते हैं परंतु यदि दूसरी कॉलोनी के नर एवं मादा जीव वर्त्तमान पर्यावरण में संभोग करेंगे तब उत्पन्न होने वाली पीढ़ी के सदस्य जीवित नहीं रह सकेंगे ।

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प्रश्न 17. समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए ।

उत्तर ⇒ समजात अंग विभिन्न जीवों में वे अंग जो आकृति तथा उत्पत्ति में समानता रखते हैं समजात अंग कहलाते हैं।
उदाहरण- मेढ़क के अग्रपाद, पक्षी के पंख, चमगादड़ के पंख, ह्वेल के फ्लैपर्स, घोड़े के अग्रवाद तथा मानव के अग्रपाद आदि उत्पत्ति में समान होते हैं, परंतु वे कार्य में परस्पर भिन्नता रखते हैं समरूप अंग विभिन्न जीवों के वे अंग जो कार्य में समान होते हैं, परंतु उत्पत्ति में भिन्न होते हैं। ऐसे अंगों को समरूप अंग कहते हैं। उदाहरण तितली के पंख, पक्षी के पंख आदि कार्य में समान हैं, परंतु उत्पत्ति में वे भिन्न हैं ।

प्रश्न 18. उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज के विकासीय सम्बन्ध निर्धारण के लिए करते हैं ?

उत्तर ⇒ लगभग दो हजार वर्ष पूर्व जंगली बन्दगोभी को खाद्य पौधे के रूप में उगाया गया था। यह एक बनावटी चयन था न कि प्राकृतिक चयन। अतः, कुछ कृषकों ने इच्छा व्यक्त की कि इस गोभी में पत्तियाँ निकट होनी चाहिए। अतः उन्होंने परस्पर क्रियाविधि द्वारा उस बन्दगोभी को प्राप्त किया जिसका हम आजकल प्रयोग करते हैं। कुछ किसानों ने पत्तियों को पुष्पों के निकट प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। अतः उन्होंने प्रयास करके इस प्रकार का पौधा प्राप्त किया। इसे फूलगोभी का नाम दिया गया जिसे हम आज भी प्राप्त करते हैं तथा सब्जी के रूप में प्रयोग करते हैं। इस प्रकार से बन्दगोभी तथा फूलगोभी दोनों निकट स्पीशीज हैं जो उद्विकसित स्पीशीज है ।

प्रश्न 19, किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है ?

उत्तर ⇒ एक ब्रिटिश वैज्ञानिक जे बी एस. हाल्डेन ने सबसे पहली बार सुझाव दिया था कि जीवों की उत्पत्ति उन अजैविक पदार्थों से हुई होगी जो पृथ्वी की उत्पत्ति के समय बने थे । 1953 में स्टेनल एल. मिलर और हेराल्ड सी० डरे ने ऐसे कृत्रिम वातावरण का निर्माण किया था जो प्राचीन वातावरण के समान था । इस वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी । इसमें अमोनिया, मिथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड थे। उसमें एक पात्र में जल भी था जिसका तापमान 100°C से कम रखा गया था। जब गैसों के मिश्रण से चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं जो आकाशीय बिजलियों के समान थीं मीथेन से 15% कार्बन सरल कार्बनिक यौगिकों में बदल गए। इनमें एमीनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो प्रोटीन के अणुओं का निर्माण करते हैं । इसी आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है ।

प्रश्न 20. विकासीय सम्बन्ध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है

उत्तर ⇒ कालान्तर के जंतुओं एवं पादपों के मृत शरीर के अवशेष जीवाश्म कहलाते हैं । ऐसा माना जाता है कि अवशेषों वाले जंतु लाखों वर्ष पूर्व जीवित थे ।
ये जीवाश्म उद्विकास के लिए प्रमाण प्रस्तुत करते हैं ।
उदाहरण-आर्कियोप्टेरिक्स एक जीवाश्म पक्षी है जो बाहर से देखने पर पक्षी के समकक्षी है, पर उसके अन्य लक्षण सरीसृप श्रेणी के सदस्यों से मिलते-जुलते हैं। आर्कियोप्टेरिक्स में अग्र पाद पंखों के रूप में परिवर्तित हैं जिन पद ‘पर’ भी उपस्थित हैं जो पक्षियों के समान हैं । इसके मुख में दाँत हैं तथा पूँछ भी उपस्थित है जो सरीसृपों के लक्षणों के समान है ।
अतः आर्कियोप्टेरिक्स सरीसृप तथा पक्षी वर्ग के मध्य की एक कड़ी (श्रृंखला) है । इसी कारण से इस बात की पुष्टि होती है कि पक्षी वर्ग सरीसृप वर्ग से उद्विकसित हुआ है । अतः, जीवाश्म से इस बात की पुष्टि होती है कि वर्तमान जंतु एवं पादप उन वस्तुओं तथा पादपों से उद्विकसित हुए हैं जो प्राचीन काल में सक्रिय एवं जीवित थे ।

प्रश्न 21. मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं ?

उत्तर ⇒ जब मेंडल ने मटर के लंबे पौधे और बौने पौधे का संकरण कराया तो उसे प्रथम संतति पीढ़ी F में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए थे । इसका अर्थ था कि दो लक्षणों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई दिया। उन दोनों का मिश्रित प्रमाण दिखाई नहीं दिया । उसने पैतृक पौधों और F पीढ़ी के पौधों को स्वपरागण से उगाया । इस दूसरी पीढ़ी F, में सभी पौधे लंबे नहीं थे । इसमें एक-चौथाई पौधे बौने थे। मेंडल ने लंबे पौधों के लक्षण को प्रभावी और बौने पौधों के लक्षण को अप्रभावी कहा ।
पौधों में दो प्रकार के लक्षण पाये जाते हैं—
जननकीय लक्षण तथा भौतिक लक्षण । जननकीय लक्षण गुणसूत्रों पर उपस्थित DNA के द्वारा हस्तान्तरित होते हैं । गुणसूत्रों की संख्या एवं आकृति ज्यों की त्यों बनी रहती है, परंतु भौतिक लक्षण भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं । जननकीय लक्षण अनुकूलित परिस्थितियों में क्रियाशील रहते हैं । अतः भौतिक लक्षणों में भिन्नता स्वयं परागित पौधों में विभेदन का प्रमुख कारण होती है।

प्रश्न 22. क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति- उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?

उत्तर ⇒ जाति उद्भव में भौगोलिक पृथक्करण ही प्रमुख कारण है विशेष रूप से अलैंगिक जनन करने वाले पादपों में । एक जीवधारी भौतिक परिस्थितियों में जीवित रहता है, परंतु कुछ जीवधारी यदि निकटवर्ती भौगोलिक पर्यावरण में विस्थापित हो जाते हैं जिनमें विभिन्न भौतिक परिवर्तनीय लक्षण हों तो वे जीवित नहीं रहेंगे। यदि जीवित रह रहे जीवधारियों में अलैंगिक जनन होता है तत्पश्चात् वे अन्य पर्यावरण में विस्थापित होते हैं तो वे भी भिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित नहीं रह पाएँगे।

प्रश्न 23 अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करनेवाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है ?

उत्तर ⇒ अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थाई होती हैं। अलैंगिक जनन एक ही जीव से होने के कारण केवल उसी के गुण उसकी संतान में जाते हैं और वे बिना परिवर्तन हुए पीढ़ी-दर-पीढ़ी समान ही रहते
हैं। लैंगिक जनन नर और मादा के युग्मकों के संयोग से होता है जिनमें भिन्न-भिन्न जीन होने के कारण संकरण के समय विभिन्नता वाली संतान उत्पन्न होती है । उदाहरण के लिए सभी मानव युगों पहले अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे पर जब उनमें से अनेक ने अफ्रीका छोड़ दिया और धीरे-धीरे सारे संसार में फैल गए तो लैंगिक जनन से उत्पन्न विभिन्नताओं के कारण उनकी त्वचा का रंग, कद, आकार आदि में परिवर्तन आ गया ।

प्रश्न 24. विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है ? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर ⇒ उद्विकास के आधार पर जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी के शरीरों में जीवधारियों के वंशों की विविधता के अस्तित्व के लक्षण विद्यमान होते हैं । अतः, इनमें शारीरिक आकृति श्रेष्ठ प्रकार की है। ये शरीर की प्रतिकूलता को अनुकूलता में परिवर्तन कर देती है। जैसे गर्म झरने, गहरे समुद्रों के गर्म स्रोत तथा अंटार्कटिका में उपस्थित बर्फ आदि में उपस्थित जीवधारियों में उपस्थित लक्षण जो उन्हें उत्तरजीविता के योग्य बनाते हैं

प्रश्न 25. आनुवंशिक विविधता क्या है ?

उत्तर ⇒ अलग-अलग जीन की उपस्थिति के कारण उत्पन्न विविधता को आनुवंशिक
है विविधता कहते हैं । मनुष्यों में यह विविधता मंगोल, नीगों आदि में देखी जा सकती है ।

प्रश्न 26. विकास का कृत्रिम सिद्धांत क्या है ?

उत्तर ⇒ नई जातियों का विकास पुरानी जातियों के जीन्स में परिवर्तन से होता है। जीन में परिवर्तन के कारण जीवों के आनुवंशिक लक्षणों में परिवर्तन आ जाते हैं ।

प्रश्न 27. गुणसूत्र की संरचना कैसे होती है ?

उत्तर ⇒ गुणसूत्र धागों के समान दो सममित क्रोमोटिड से बना होता है । दोनों क्रोमोटिड गुणसूत्र बिंदु के द्वारा आपस में जुड़े होते हैं ।

प्रश्न 28. ऑटोसोम्स किसे कहते हैं ?

उत्तर ⇒ मनुष्य में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं । लिंग गुणसूत्रों का जोड़ा 23वां होता है। शेष 22 जोड़े ऑटोसोम्स कहलाते हैं ।

प्रश्न 29. बायोजेनेटिक नियम लिखिए ।

उत्तर ⇒ जीव जंतु भ्रूण-विकास के समय अपने पूर्वजों के जातीय विकास की उतरोत्तर अवस्थाओं को प्रकट करता है ।

प्रश्न 30. जनन प्रक्रम में सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम क्या है ?

उत्तर ⇒ जनन प्रक्रम में सबसे महत्त्वपूर्ण संतति के जीवों के समान प्रारूप होते हैं। आनुवंशिकता के नियम पर आधारित उनमें विभिन्न लक्षण वंशागत होते हैं ।

प्रश्न 31. विविधता क्या है ?

उत्तर ⇒ समान माता-पिता और एक ही जाति से संबंधित होकर भी उनके बच्चों में बुद्धिमत्ता, रंग-रूप, शक्ल-सूरत और गुणों में अंतर पाया जाता है। इसी को विविधता कहते हैं ।

प्रश्न 32. जैव विविधता क्या है ?

उत्तर ⇒ जैव विविधता या जीव भिन्नता पृथ्वी पर पाई जाने वाली विविध प्रकार की उन जैवीय प्रजातियों को कहते हैं जो अपने-अपने प्राकृतिक आवास क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इसमें पेड़-पौधे, सूक्ष्मजीव, पशु-पक्षी आदि सभी प्राणी सम्मिलित हैं ।

प्रश्न 33. मानवों में लक्षणों की वंशागति किस बात पर आधारित होती है ?

उत्तर ⇒ मानवों में लक्षणों की वंशागति इस बात पर आधारित होती है कि माता-पिता दोनों अपनी संतान में समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ को स्थानांतरित कहते हैं । संतान का प्रत्येक लक्षण पिता या माता के DNA से प्रभावित होता है ।

 

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प्रश्न 34. जैव विविधता के विभिन्न स्तर कौन-कौन से हैं ?

उत्तर ⇒ जैव विविधता के विभिन्न स्तर निम्न हैं-

(i) आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity)

(ii) प्रजाति विविधता ( Species diversity)

(iii) परिस्थितिगत विविधता (Ecosystem diversity)

प्रश्न 35. लिंग गुण सूत्र क्या है ?

उत्तर ⇒ मानवों में कुल 23 जोड़े गुण सूत्र होते हैं जिनमें से अंतिम 23वाँ जोड़ा लिंग गुण सूत्र (Sex Chromosome) कहलाता है। इसी के कारण कोई मानव नर या मादा के रूप में जन्म लेता है। नर में XY लिंग गुण सूत्र होते हैं पर मादा में XX लिंग गुण सूत्र होते हैं ।

प्रश्न 36. पक्षियों का विकास डायनोसोर से क्यों माना जाता है ?

उत्तर ⇒ डायनोसौर सरीसृप थे। उनके विभिन्न जीवाश्मों में अस्थियों के साथ पंखों की छाप भी स्पष्ट रूप से मिलती है । तब शायद वे सब इन पंखों की सहायता से उड़ नहीं पाते होंगे पर बाद में पक्षियों ने पंखों से उड़ना सीख लिया होगा । इसीलिए पक्षियों की डायनोसोर से संबंधित मान लिया जाता है ।

प्रश्न 37. F, संतति और F, संतति क्या है ?

उत्तर ⇒ प्रथम संतति F, कहलाती है जिसमें माता-पिता के दो लक्षणों में से एक केवल पैतृक लक्षण दिखाई देता है जिसका अर्थ है कि उन दोनों में से केवल एक पैतृक लक्षण ही दिखाई देता है । स्वपरागण की अवस्था में F, संतति दोनों के विकल्पी लक्षणों को प्रकट करती है

प्रश्न 38. समजात अंग और समरूप अंग में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर ⇒

              समजात अंग               समरूप अंग
(i) इन अंगों की मूल रचना और उत्पत्ति एक समान होती है। (i) इन अंगों की मूल रचना और उत्पत्ति एक समान नहीं होती 
(ii) इनके कार्य समान नहीं होते हैं। (ii) इनके कार्य समान होते हैं।

 

प्रश्न 39. आप किस आधार पर प्रमाणित करेंगे कि पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ था ?

उत्तर ⇒ सरीसृप और पक्षी दोनों अंडे देकर अपना वंश वृद्धि करते हैं । सरीसृप रेंग कर चलते हैं। जीवाश्मों से प्रमाणित हो चुका है कि उनकी अगली दो टाँगें परिवर्तित होकर पक्षियों के पंख बन गए थे। सरीसृपों के मुँह में दाँत होते हैं और पक्षियों की चोंच होती है। कबूतर के जन्म से पहले अंडे की अवस्था में भ्रूण के मुँह में दाँत – सी रचना होती है ।

प्रश्न 40. मेंडल के मटर के पौधों पर प्रयोग से क्या परिणाम निकले ?

उत्तर ⇒ मेंडल के मटर के पौधों पर किए प्रयोग से निम्न परिणाम निकले-

(i) पौधों में लक्षण कुछ इकाइयों द्वारा नियंत्रित होते हैं । उन्हें कारक कहा जाता है । प्रत्येक लक्षण के लिए युग्मक में एक कारक होता है। जैसे- लंबाई, फूल का रंग ।

(ii) एक लक्षण को दो कारकों द्वारा ही व्यक्त किया जाता है । जैसे या tt ।

प्रश्न 41. मेंडल के कार्य का संक्षिप्त उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ आस्ट्रिया निवासी मंडल (1882-84) ने आनुवंशिकता को नियंत्रित करने के बारे में महत्त्वपूर्ण कार्य किया था । उसने मटर के पौधे के विभिन्न सात गुणों- पौधे की ऊँचाई, फूल का रंग, बीज की आकृति, फूलों की स्थिति, बीज का रंग, फलों का प्रकार, फली का रंग के बारे में तुलनात्मक अध्ययन किया था और परिणाम निकाला कि मटर के लक्षण कुछ विशेष इकाइयों द्वारा नियंत्रित होते हैं जिन्हें ‘कारक’ कहते हैं । यही बाद में आनुवंशिक सूचनाओं को संचारित करनेवाले ‘जीन’ कहलाये थे ।

प्रश्न 42. जीन लक्षणों को कैसे नियंत्रित करते हैं ?

उत्तर ⇒ कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण के लिए एक सूचना तंत्र होता है, DNA के जिस भाग में प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है वह प्रोटीन का जीन कहलाता है । जीवों के लक्षण इसी हॉर्मोन पर निर्भर करते हैं। हॉर्मोन की मात्रा उस प्रक्रम की दक्षता पर निर्भर करती है जिसके द्वारा वे उत्पादित होते हैं । यदि विशिष्ट प्रोटीन दक्षता से कार्य करेगी तो हॉर्मोन पर्याप्त मात्रा में उत्पन्न होगा और यदि प्रोटीन की दक्षता पर कुछ भिन्न प्रभाव पड़ता है, तो कम दक्षता के कारण हॉर्मोन कम होगा । जीन ही लक्षणों को प्रभावित और नियंत्रित करते हैं ।

प्रश्न 43, समजात, समवृत्ति और अवशेषी अंग क्या है ? प्रत्येक के एक-एक उदाहरण दें।

उत्तर ⇒ समजात अंग विभिन्न जीवधारियों के ऐसे अंग जो उत्पत्ति के आधार पर समान होते हैं, परन्तु कार्य के आधार पर भिन्न होते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। उदाहरण ह्वेल का फ्लिपर और चमगादड़ का पंख । समवृत्ति अंग भिन्न-भिन्न जीवधारियों के ऐसे अंग जो कार्य में तो समान होते परन्तु उत्पत्ति में एक दूसरे से भिन्न होते हैं, समवत्ति अंग कहलाते हैं। उदाहरण- चिड़िया का पंख एवं कीट का पंख ।
अवशेषी अंग-जीवों के ऐसे अंग जिनसे काफी समय पहले कार्य सम्पन्न किये जाते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन अंगों की उपयोगिता नहीं रह गई तथा जो इस कारण पृष्ठभूमि में चले गए, अवशेषी अंग कहलाते हैं। उदाहरण – मानव में वर्मिफार्म एपेंडिक्स, निक्टिटेटिंग झिल्ली, बाह्य कान की पेशियाँ, पुच्छ कशेरूक आदि ।

प्रश्न 44. आर्कियोप्टेरिक्स को सरीसृप और पक्षी वर्ग के बीच की कड़ी क्यों माना जाता है ?

उत्तर ⇒ आर्कियोप्टेरिक्स में कुछ विशेषताएँ सरीसृपों जैसी थीं और कुछ पक्षियों जैसी । इसलिए, उसे इन दोनों के बीच की कड़ी के रूप में स्वीकार किया जाता है ।

(a) सरीसृपों के गुण-

(i) इनकी पूँछ लंबी होती थी ।

(ii) जबड़ों में दाँत होते थे ।

(iii) लम्बे नुकीले नाखुनों से युक्त तीन उँगलियाँ होती थीं ।

(iv) शरीर छिपकली के समान था ।

(b) पक्षियों के गुण-

(i) शरीर पर पँख होते थे ।

(ii) चोंच उपस्थित थी ।

(iii) अग्रबाहु पक्षियों की तरह थे ।

प्रश्न 45. DNA आनुवंशिकता का आधार है, कैसे ?

उत्तर ⇒ DNA आनुवंशिकता का आधार है, क्योंकि-

(i) इसमें द्विगुणन की क्षमता होती है ।

(ii) यह सभी कोशिकाओं में पाया जाता है ।

(iii) DNA की अनुकृति मूल DNA अणु की तरह ही होती है ।

(iv) DNA का द्विगुणन कोशिका विभाजन से पहले हो जाता है ।

(v) यदि DNA की रचना में परिवर्तन हो जाय तो जीव के शरीर में उत्परिवर्तन के लक्षण दिखाई देंगे ।

(vi) DNA स्वयं एक आनुवंशिक पदार्थ |

 

Bihar Board 10th Biology Subjective Question Answer

 

प्रश्न 46. समरूप अंगों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर ⇒ समरूप अंगों में कार्य की समानता होती है लेकिन उनकी उत्पत्ति और मूल संरचना में अंतर होता है । कीड़े, पक्षी और चमगादड़ सभी पंखों का प्रयोग उड़ने के लिए करते हैं पर उनकी उत्पत्ति अलग-अलग ढंग से हुई थी ।

 

प्रश्न 47. अवशेषी अंग क्या है ?

उत्तर ⇒ अनेक प्राणियों में अभी भी अनेक ऐसे अंग पाये जाते हैं जिनकी अब उनके शरीर के लिए कोई उपयोगिता नहीं रह गई है। ऐसे अंगों को अवशेषी अंग कहते हैं। हम मानवों में कर्णपल्लव की पेशियाँ, कृमिरूप परिशेषिका, कशेरुकाएँ, निमेषक पटल और बाल ऐसी ही रचनाएँ हैं ।

प्रश्न 48. मेंडल के आनुवंशिकता के प्रबलता के नियम की व्याख्या कीजिए।

उत्तर ⇒ जब पौधों के विपरीत लक्षणों के बीच संकरण कराया जाता है जो उनकी संतति में उन लक्षणों में से एक लक्षण ही प्रभावी रहता है जबकि दूसरा विपरीत लक्षण अप्रभावी रहता है। प्रभावी लक्षण संतान में दिखाई देता है जबकि अप्रभावी लक्षण विद्यमान होते हुए भी दिखाई नहीं देता ।
शुद्ध मेंडल के द्वारा किए गए मटरों के प्रयोग में पहली पीढ़ी में सभी पौधे लंबे थे परंतु दूसरी पीढ़ी में एक शुद्ध लंबा पौधा, दो संकरे लंबे तथा एक शुद्ध बौना पौधा था ।

 

प्रश्न 49. DNA तथा RNA में कोई तीन अंतर लिखें।

उत्तर ⇒

                  DNA                  RNA
1. यह आनुवंशिक गुणों के वंशागत होने को   नियंत्रित करता है। 1. यह कोशिका में प्रोटीन बनाने का नियंत्रण करता है।
2. न्यूक्लिओटाइड में डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा होती है। 2. न्यूक्लिओटाइड में राइबोज शर्करा होती है।
3. थायमिन और सिस्टोसिन दो पायरीमिडीन क्षार हैं। 3. थायमिन के स्थान पर यूरासिल क्षार होता है, दूसरा पायरीमिडीन क्षार सिस्टोसिन है।
4. DNA केवल एक रूप में ही मिलता है। 4. यह तीन रूपों में होता है- m.RNA, t.RNA, r-RNA
5. इसमें पोली न्यूक्लिओटाइड की दो श्रृंखलाएँ एक-दूसरे के चारों ओर कुंडलित होती हैं। 5. इसमें पॉली न्यूक्लिओटाइड श्रृंखला का केवल एक धागा होता

 

 

 

 

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