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Matric Disaster Management Subjective Questions [ आपदा प्रबंधन ] भूकंप एवं सुनामी सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

आपदा प्रबंधन (Disaster Management) भूकंप एवं सुनामी सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Disaster Management आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Disaster Management vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th आपदा प्रबंधन 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Disaster Management Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test )
भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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Matric Disaster Management Subjective Questions [ आपदा प्रबंधन ] भूकंप एवं सुनामी सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

 

प्रश्न 1. भूकम्प संभावित क्षेत्रों में भवनों की आकृति कैसी होनी चाहिए ?

उत्तर ⇒ भूकम्प संभावित क्षेत्र में भवनों की कृति आयताकर होनी चाहिए।

प्रश्न 2. भूकम्पों के प्रभावों को कम करने वाले किन्हीं चार उपायों को लिखिए ।

उत्तर ⇒ भूकम्पों के प्रभावों को कम करने के लिए सुरक्षित आवास निर्माण कर भीषण क्षति को कम किया जा सकता

इसके लिए चार उपाय निम्नलिखित हैं-

(i) भवनों को आयताकार होना चाहिए और नक्शा साधारण होना चाहिए ।

(ii) मकान के नींव को मजबूत एवं भूकम्प अवरोधी होना चाहिए ।

(iii) लम्बी दीवारों को सहारा देने के लिए ईंट-पत्थर या कंक्रीट के कलम होने चाहिए ।
(iv) निर्माण के पूर्व स्थान – विशेष की मिट्टी का वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए, तभी नींव तथा निर्माण कार्य होना चाहिए ।

प्रश्न 3. सुनामी से बचाव के कोई तीन उपाय बताइए ‘

उत्तर ⇒ सुनामी का विनाशकारी प्रभाव तटीय प्रदेशों में देखने को मिलता है। इसके विनाश से बचाव के लिए निम्नांकित कुछ कारगर उपाय किये जा सकते हैं—-

(i) तटबंधों के निर्माण से

(ii) मैंग्रोव झाड़ियों के विकास से

(iii) तटीय प्रदेशों के लोगों को प्रशिक्षण देकर ।

प्रश्न 4. भूकम्प और सुनामी के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर ⇒ भूकम्प और सुनामी के बीच अंतर -…
भूकम्प (Earthquake ) — भूकम्प का सरल अर्थ भूमि का कंपायमान होना है । भूकम्प एक. भूगर्भीय प्रक्रिया है जिसकी तीव्रता कभी-कभी अत्यन्त भयावह होती है तथा उससे जान-माल की अपार क्षति होती है । यह पृथ्वी के गर्भ में संचित अपार ऊर्जा के मुक्त होने से उत्पन्न होती है जो भूकम्पीय तरंगें कहलाती हैं ।
सुनामी (Tsunami) सुनामी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें झील या महासागर का पानी भूकम्प के आने के कारण बड़े स्तर पर तितर-बितर होता है तो लहरों की एक श्रृंखला उत्पन्न होती है अर्थात् पृथ्वी के गर्भ में संचित अपार ऊर्जा के मुक्त होने से लहरें उत्पन्न होती हैं, जो कम्पीय तरंगें कहलाती हैं।
इस कंपन का केन्द्र जब महासागर की तली पर होता है तब वह सुनामी के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 5. सुनामी के तीन मुख्य प्रभावों को बताएं ।

उत्तर ⇒ सुनामी के प्रभाव

(i) सुनामी लहरें अत्यन्त विनाशकारी होती 1

(ii) सुनामी लहरों से भयंकर बाढ़ आ जाती हैं और हजारों व्यक्ति डूबकर मर जाते हैं।

(iii) सुनामी लहरों से सम्पूर्ण तटवर्ती क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, महान व कल-कारखाने नष्ट हो जाते हैं। करोड़ों रुपये की क्षति हो जाती है

प्रश्न 6. सुनामी से आप क्या समझते हैं ? सुनामी से बचाव के उपायों का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ भूकम्पीय कम्पन का केन्द्र जब स्थल-खंड पर होता है, तो उसे भूकम्प कहते हैं, लेकिन जब वहीं कंपन महासागर की तली पर होता है, तो वह सुनामी के नाम से जाना जाता है। सुनामी के प्रभाव से समुद्री जल में कम्पन होता है जिससे जल में क्षैतिज गति उत्पन्न होती है। आंतरिक ऊर्जा से संचालित क्षैतिज प्रवाह का जलतटीय स्थल से टकराता है और तट पर सुनामी की विनाशलीला देखने को मिलती है। 26 जनवरी, 2004 को दक्षिण पूर्व एशिया से लेकर बंगाल की खाड़ी तक आये सुनामी में सैंकड़ों लोग विलुप्त हो गये। निकोबार द्वीपसमूह के दक्षिण इन्दिरा प्वाइंट इसके प्रभाव से विलुप्त हो गया ।

सुनामी जैसी भयंकर आपदा से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं-

(i) तटबंधों का निर्माण सुनामी के विनाशकारी प्रभाव को कम करने के लिए कंक्रीट तटबंध बनाने की आवश्यकता है। इससे तट से टकराने वाले सुनामी तरंगों का प्रभाव तटीय मैदानों पर सीमित होगा ।

(ii) मैंग्रोव झाड़ी का विकास-तटबंधों पर मैंग्रोव झाड़ियों के विकास से इन तरंगों की गति को कम किया जा सकता है। तटीय दलदली क्षेत्र में सिर्फ सघन मैंग्रोव ही लाभकारी हो सकता है।

(iii) तटीय प्रदेशों के लोगों का प्रशिक्षित करना तटीय प्रदेशों में रहने वाले लोगों को सुनामी से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे सुनामी से होने वाली नुकसान के बाद सामूहिक रूप से बचाव कार्य में लग सके ।

प्रश्न 7. भूकम्प क्या है ? इससे बचाव के किन्हीं दो उपायों का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ भूकम्प का तात्पर्य भूपटल में कम्पन से है । भूकंप का मूल कारण पृथ्वी के आंतरिक भागों में विविध कारणों से ऊर्जा की उत्पत्ति और ऊष्म तरंगीय विवरण है।

भूकम्प से बचाव के दो उपाय निम्न है-

(i) भूकम्प का पूर्वानुमान – भूकम्पलेखी यंत्र के द्वारा भूकंपीय तरंगों का पूर्वानुमान किया जा सकता है।

(ii) भवन निर्माण भवनों का निर्माण भूकम्परोधी तरीकों के आधार पर किया जाना चाहिए। खासकर उन क्षेत्रों में जो भूकम्प प्रभावित हैं।

प्रश्न 8. सुनामी क्या है ? स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ सुनामी शब्द दो जापानी शब्दों से मिलकर बना है-सु (Tsu) तथा नामी (nami)। सु का अर्थ है ‘बंदरगाह’ तथा नामी का अर्थ हैं-‘लहरें’। इस प्रकार सुनामी बंदरगाह अथवा सागर तट पर आनेवाली लहरें हैं।

प्रश्न 9. भूकम्पीय तरंगों से आप क्या समझते हैं ? प्रमुख भूकम्पीय तरंगों के नाम लिखिए।

उत्तर ⇒ भूकम्प के दौरान पृथ्वी में कई प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों को भूकम्पीय तरंग कहा जाता है।

ये तीन प्रकार की होती

(i) प्राथमिक (p) तरंगें

(ii) द्वितीयक (S) तरंगें

(iii) दीर्घ (L) तरंगें।

प्रश्न 10. भूकम्प एवं सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपायों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ भूकंप और सुनामी दो ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ हैं, जिसका संबंध पृथ्वी की आंतरिक संरचना से है। हमलोग ठोस भूपटल पर रहते हैं, लेकिन इसके अंदर आग की लहरें (तापमान 1000) चलती है। इन लहरों के कारण कंपन उत्पन्न होता है। इन कंपन का केन्द्र जब स्थलखण्ड पर होता है तो उसे भूकम्प कहते हैंतथा जब महासागर में होता है तो इसे सुनामी कहते हैं।

भूकम्प से बचाव के उपाय-

(i) भूकम्प का पूर्वानुमान भूकंपलेखी यंत्र के द्वारा भूकंपीय तरंगों का पूर्वानुमान किया जा सकता है।

(ii) भवन-निर्माण भवनों का निर्माण भूकम्परोधी तरीकों के आधार पर किया जाना चाहिए। खासकर उन क्षेत्रों में जो भूकम्प प्रभावित हैं।

(iii) प्रशासनिक कार्य – भूकम्प के बाद राहत कार्य के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विरोध दस्ते का गठन किया जाना चाहिए।

(iv) गैर-सरकारी संगठनों का सहयोग भूकंपीय आपदा से निपटने के लिए गैर-सरकारी संगठनों का भी योगदान हो सकता है। ये संस्थाएँ न सिर्फ राहत कार्य में मदद कर सकते हैं, बल्कि भूकम्प के पूर्व लोगों को भूकम्परोधी भवन निर्माण तथा भूकम्प के समय तत्काल बचाव हेतु लोगों को प्रशिक्षित भी कर सकते हैं I

सुनामी से बचाव के उपाय-

(i) तटबंधों तथा मैंग्रोव झाड़ी का विकास – सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के लिए कंक्रीट के तटबंधों का निर्माण तथा तटबंधों पर मैंग्रोव की झाड़ियों का विकास कर सुनामी के झटके को कम किया जा सकता है।

(ii) तटीय प्रदेश के लोगों को प्रशिक्षण-तटीय प्रदेशों में रहने वाले लोगों को प्रशिक्षण देकर सुनामी के बाद राहत कार्यों में सामूहिक रूप से इनसे मदद लिया जा सकता है।

प्रश्न 11. भूकम्प क्या है ? भारत का प्रमुख भूकम्प क्षेत्रों में विभाजित करते हुए सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दें।

उत्तर ⇒ भूकम्प का तात्पर्य भूपटल में कम्पन से है । भूकम्प का मूल कारण पृथ्वी के आंतरिक भागों में विविध कारणों से ऊर्जा की उत्पत्ति और ऊष्म तरंगीय विवरण है । भूकम्प एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसके कारण जान-माल की काफी क्षति होती है । भूकम्प की स्थिति में भवनों, पुलों का गिर जाना,
जमीन में दरार होना जैसी घटनाएँ सामान्य रूप से होती हैं । इससे भारी बर्बादी होती है । भारत के प्रायः सभी भागों में भूकम्प के झटके आते हैं। लेकिन उसकी गहनता और बारंबारता में काफी अंतर होता है ।

इसी के आधार पर भारत को 5 भूकंपीय जोन में बाँटा गया है-

(i) जोन 1――इस जोन में दक्षिणी पठारी क्षेत्र आते हैं ।

(ii) जोन 2 इस जोन में प्रायद्वीपीय भारत के तटीय मैदान क्षेत्र आते हैं ।

(iii) जोन 3 – इसके अंतर्गत मुख्यतः गंगा-सिन्धु का मैदान, राजस्थान तथा उत्तरी गुजरात के कुछ क्षेत्र आते हैं

(iv) जोन 4 इसमें मुख्यतः शिवालिक हिमालय का क्षेत्र, पश्चिम बंगाल का उत्तरी भाग, असम घाटी तथा पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्र आते हैं ।

(v) जोन 5- इस जोन के अंतर्गत गुजरात का कच्छ प्रदेश जम्मू-काश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड का कुमाऊँ पर्वतीय क्षेत्र, सिक्किम तथा दार्जिलिंग का पहाड़ी क्षेत्र आता है । यह सर्वाधिक भूकम्प प्रभावित क्षेत्र है ।

प्रश्न 12. भूकम्प के केन्द्र एवं अधिकेन्द्र के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर ⇒ भूपटल के नीचे का वह स्थल जहाँ भूकम्पीय कम्पन प्रारम्भ होता है भूकम्प केन्द्र कहलाता है।
साथ ही भूपटल पर वह केन्द्र जहाँ भूकंप के तरंग का सर्वप्रथम अनुभव होता है, अधिकेन्द्र कहलाता है ।

प्रश्न 13. अधिकेन्द्र क्या है ?

उत्तर ⇒ भू-पटल पर वे केन्द्र जहाँ भूकंप के तरंग का सर्वप्रथम अनुभव होता है।

प्रश्न 14. सुनामी के बाद प्रभावित क्षेत्र में मोमबत्ती का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए ?

उत्तर ⇒ जलती मोमबत्ती का प्रयोग सुरक्षित नहीं है। यह आग का कारण बन सकती है। इसके स्थान पर टॉर्च अथवा फ्लैश लाइट का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 15. सुनामी के तीन कारण बताइए ।

उत्तर ⇒ सुनामी की उत्पत्ति निम्नलिखित कारणों से होती है

(i) समुद्र में भूकम्प,

(iii) पानी के नीचे भूस्खलन ।

(ii) ज्वालामुखी उद्गार तथा

प्रश्न 16. भूकम्परोधी भवन का नमूना किस बात पर निर्भर करता है ?
उत्तर ⇒ भूकम्परोधी भवन का नमूना भूकम्प की तीव्रता के स्तर पर निर्भर करता है। मकान भवन निर्माण नियमावली को ध्यान में रखकर बनाये जाने चाहिए ताकि वे भूकम्प की तीव्रता का पूरी तरह सामना कर सकें।

प्रश्न 17. किसी आपदा में क्षति को कम करने का सबसे प्रभाव उपाय कौन-सा है ?

उत्तर ⇒ किस आपदा की क्षति को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय आपदारोधी भवन-निर्माण है। भवन की योजना तथा नमूना तैयार करते समय आरंभिक स्तर पर ही आपदारोधी तत्त्वों को शामिल कर लिया जाना चाहिए।

प्रश्न 18. सुनामी के बाद गैस का प्रयोग करने में क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?

उत्तर ⇒ हाँ, गैस के रिसाव की ओर ध्यान देना चाहिए। यदि गैस का रिसाव हो रहा हो, तो खिड़की खोल दें तथा गैस की आपूर्ति बन्द करके तुरंत घर से बाहर निकल जाएँ। गैस रिसने की सूचना गैस एजेंसी को दे दें।

प्रश्न 19. सुनामी के समय यदि कोई व्यक्ति किसी जहाज पर समुद्र 44 हो, तो उसे क्या करना चाहिए ?

उत्तर ⇒ उसे वापस बंदरगाह पर नहीं आना चाहिए। इसका कारण यह है कि सुनामी जल स्तर में तेजी से बदलाव ला सकती हैं। वे पोताश्रयों तथा पत्तनों पर खतरनाक जलधाराएँ उत्पन्न कर सकती हैं। बड़े पत्तनों पर पत्तन अधिकारी विशेष निर्देश जारी करते हैं। इन पत्तनों पर इन अधिकारियों के सम्पर्क में रहना चाहिए।

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