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Class 10th Hindi Grammar Varn Vichar Subjective and Objective Questions [ हिंदी व्याकरण ] वर्ण विचार सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन
Class 10th Sanskrit Subjective Question Answer Class 10th Subjective Question

atric Sanskrit Bharatiyasanskara Subjective Questions 2024 [ संस्कृत ] भारतीयसंस्काराः सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

संस्कृत ( Sanskrit ) भारतीयसंस्काराः सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024:- हैलो दोस्तो अगर आप मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए तैयारी कर रहे है तो यहां पर क्लास 10th Sanskrit संस्कृत का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर ( Class 10th Sanskrit Short Type vvi Subjective Question Answer ) दिया गया है यहां पर क्लास 10th संस्कृत 2024 का मॉडल पेपर ( Class 10th Sanskrit Model Paper ) तथा ऑनलाइन टेस्ट ( Online Test ) भी दिया गया है और PDF डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं । और आप मैट्रिक के फाइनल एग्जाम में अच्छा मार्क्स ला सकते हैं और अपने भाविष्य को उज्वल बना सकते है धन्यवाद –

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atric Sanskrit Bharatiyasanskara Subjective Questions 2024 [ संस्कृत ] भारतीयसंस्काराः सब्जेक्टिव क्वेश्चन 2024

प्रश्न 1. संस्कार का मौलिक अर्थ क्या है ?

उत्तर ⇒ संस्कार का मौलिक अर्थ है जो व्यवस्था हमें समुचित रूप से व्यवस्थित करे |

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प्रश्न 2. विवाह संस्कार में कौन-कौन से मुख्य कार्य किये जाते हैं ?

उत्तर ⇒ विवाह संस्कार से ही लोग गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। विवाह को एक पवित्र संस्कार माना गया है, जिसमें अनेक प्रकार के कर्मकाण्ड होते हैं | उनमें वाग्दान, मण्डप – निर्माण, वधू के घर में वर पक्ष का स्वागत, वर-वधू का परस्पर निरीक्षण, कन्यादान, अग्निस्थापन, पाणिग्रहण, लाजाहोम, सिन्दूरदान इत्यादि कई कर्मकाण्ड शामिल हैं। सभी क्षेत्रों में समान रूप से विवाह संस्कार का आयोजन होता है ।

प्रश्न 3. उपनयन संस्कार का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ उपनयन संस्कार शिक्षा संस्कार के अंतर्गत आता है। गुरु शिष्य का उपनयन संस्कार कर शिक्षा के लिए अपने घर ले जाते हैं। वहाँ शिष्य ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर शिक्षा और वेद का अध्ययन करते हैं।

प्रश्न 4. समावर्त्तन संस्कार का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ समावर्त्तन संस्कार का उद्देश्य शिष्य का गुरु के घर से अलग होकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना होता था। शिक्षा की समाप्ति पर गुरु शिष्यों को ‘उपदेश देकर घर भेजते थे । उपदेशों में प्रायः जीवन के कर्त्तव्यों को बताया जाता था। जैसे – सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, अपने अध्ययन पर प्रमाद मत करो आदि । घर आने पर शिष्य इन उपदेशों को अपने जीवन में व्यवहार में लाते थे।

प्रश्न 5. शैशव संस्कारों पर प्रकाश डालें ।

उत्तर ⇒ भारतीय संस्कार के अनुसार शैशवकाल के पाँच संस्कार हैं- जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म और कर्णबेध |

प्रश्न 6. शिक्षा संस्कार में कौन कौन-से संस्कार होते हैं ?

उत्तर ⇒ शिक्षा संस्कारों में अक्षरारंभ, उपनयन, वेदारंभ, मुण्डन संस्कार और समावर्तन संस्कार आदि आते हैं। अक्षरारंभ में बच्चा अक्षर – लेखन और अंक – लेखन आरंभ करता है । उपनयन संस्कार में गुरु के द्वारा शिष्य को अपने घर में लाना होता है । वहाँ शिष्य शिक्षा – नियमों का पालन करते हुए अध्ययन करते हैं। केशान्त (मुण्डन) संस्कार में गुरु के घर में प्रथम क्षौरकर्म, अर्थात् मुण्डन होता है तथा समावर्तन संस्कार का उद्देश्य शिष्य का गुरु के घर से अलग होकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना होता है ।

 

Class 10th Sanskrit Subjective Question

 

प्रश्न 7. केशान्त संस्कार का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒ गुरुकुल में वेदाध्ययन पूर्ण कर लेने पर आचार्य के समक्ष यह संस्कार सम्पन्न किया जाता था। वस्तुत: यह संस्कार गुरुकुल से विदाई लेने तथा गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने का उपक्रम है। वेद-पुराण में पारंगत होने के पश्चात् पूर्व बालों की सफाई की जाती थी तथा उसे स्नान कराकर स्नातक की उपाधि से विभूषित किया जाता था। यह संस्कार शुभ मुहूर्त्त में किया जाता था। इसे ही केशान्त संस्कार कहते हैं।

प्रश्न 8. गर्भाधान संस्कार का प्रयोजन क्या है ?

उत्तर ⇒ जन्म से पूर्व संस्कार में गर्भधारण, वीर्य उन्नयन आदि । गर्भरक्षा, गर्भस्थ शिशु और गर्भवती को प्रसन्नता के लिए ये सब आयोजन किये जाते हैं।

प्रश्न 9. भारतीय संस्कार का वर्णन किस रूप में हुआ है ?

उत्तर ⇒ भारतीय संस्कृति अनूठी है। जन्म के पूर्व संस्कार से लेकर मृत्यु के बाद अंत्येष्टि संस्कार तक 16 संस्कारों का अनुपम उदाहरण संसार के अन्य देशों में नहीं है । यहाँ की संस्कृति की विशेषता है कि जीवन में यहाँ समय-समय पर संस्कार किये जाते हैं । आज संस्कार सीमित एवं व्यंग्य रूप में प्रयोग किये जा रहे हैं। संस्कार व्यक्तित्व की रचना करता है। प्राचीन संस्कृति का ज्ञान संस्कार से ही उत्पन्न होता है । संस्कार मानव में क्रमशः परिमार्जन, दोषों को दूर करने और गुणों के समावेश करने में योगदान करते हैं ।

प्रश्न 10. जन्म पूर्व व मरणोपरांत कौन-कौन से संस्कार होते हैं ?

उत्तर ⇒ जन्म – पूर्व के संस्कार हैं – गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोनयन | अंत्येष्टि मरणोपरांत संस्कार हैं ।

प्रश्न 11. ‘भारतीयसंस्काराः ‘ पाठ के आधार स्पष्ट करें कि संस्कार कितने हैं तथा उनके नाम क्या हैं ?

उत्तर ⇒ संस्कार कुल 16 हैं। जन्म पूर्व तीन – गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोनयन संस्कार होते हैं । शैशवावस्था में छः संस्कार होते हैं- जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म और कर्णबेध । पाँच शैक्षणिक संस्कार हैं- अक्षरारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त और समावर्तन । यौवनावस्था में विवाह संस्कार होता है तथा व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अन्त्येष्टि संस्कार किया जाता है ।

प्रश्न 12. केशान्त संस्कार को गोदान संस्कार भी कहा जाता है, क्यों ?

उत्तर ⇒ केशान्त संस्कार में गुरु के घर में ही शिष्य का प्रथम क्षौरकर्म (हजामत) होता था। इसमें गोदान मुख्य कर्म था । अतः, साहित्यिक ग्रंथों में इसका दूसरा नाम गोदान संस्कार भी प्राप्त होता है।

प्रश्न 13. ‘भारतीयसंस्काराः’ पाठ के आधार पर बताएँ कि संस्कार कितने हैं । तथा जन्म- पूर्व संस्कारों का नाम लिखें।

उत्तर ⇒ भारतीय संस्कारः पाठ के आधार पर संस्कार 16 प्रकार के होते हैं जन्म – पूर्व संस्कार तीन हैं –

(1) गर्भाधान

(2) पुंसवन और

(3) सीमान्तोनयन

प्रश्न 14. “संस्काराः प्रायः पञ्चविधाः सन्ति । जन्मपूर्वाः त्रयः । शैशवाः षट्, शैक्षणिकाः पञ्च, गृहस्थ- संस्कार- विवाहरूपः एकः मरणोत्तर संस्कारश्चैकः ।

(i) यह उक्ति किस पाठ की है ?

(ii) जन्म – पूर्व संस्कार कितने हैं ?

(iii) ‘गृहस्थ- संस्कार’ कौन हैं ?

उत्तर ⇒ (i) यह उक्ति भारतीयसंस्काराः पाठ की है ।

(ii) जन्म – पूर्व संस्कार तीन हैं ।

(iii) ‘गृहस्थ-संस्कार’ विवाह है ।

प्रश्न 15. पठित पाठ के आधार पर भारतीय संस्कारों का वर्णन अपनी मातृभाषा में करें ।

उत्तर ⇒ भारतीय जीवन में प्राचीनकाल से ही संस्कारों का महत्त्व है। संस्कारों के सम्बन्ध में ऋषियों की कल्पना थी कि जीवन के प्रमुख अवसरों पर वेदमंत्रों का पाठ, गुरुजनों के आशीर्वाद, होम और परिवार के सदस्यों का सम्मेलन होना चाहिए। इन संस्कारों के उद्देश्य हैं मानव जीवन से दुर्गुणों को दूर करना और सद्गुणों का आह्वान करना । जन्म पूर्व तीन- गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोनयन, संस्कार होते हैं, शैशवावस्था में छः संस्कार होते हैं- जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म और कर्णबध । पाँच शैक्षणिक संस्कार हैं – अक्षरारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त और समावर्तन | यौवनावस्था में विवाह संस्कार होता है तथा व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंत्येष्टि संस्कार किया जाता है। इस प्रकार भारतीय जीवन में कुल सोलह संस्कारों का प्रावधान किया गया है।

प्रश्न 16. ‘भारतीयसंस्कारा: ‘ पाठ में लेखक क्या शिक्षा देना चाहता है ?

उत्तर ⇒ लेखक इस पाठ से हमें यह शिक्षा देना चाहता है कि संस्कारों के पालन से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है । संस्कारों का उचित समय पर पालन करने से गुण बढ़ते हैं और दोषों का नाश होता है। भारतीय संस्कृति की विशेषता संस्कारों के कारण ही है । लेखक हमें सुसंस्कारों का पालन करने का संदेश देते हैं ।

प्रश्न 17. संस्कार किसे कहते हैं ? विवाह संस्कार का वर्णन करें। पाँच वाक्यों मेंउत्तर दें ।

उत्तर ⇒ व्यक्ति में गुणों के आधान को संस्कार कहते हैं। वैसे कुल सोलह संस्कार माने गये हैं। विवाह संस्कार होने पर ही वस्तुतः मनुष्य गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है। विवाह एक पवित्र संस्कार है जिसमें अनेक प्रकार के कर्मकाण्ड होते हैं। उनमें वचन देना,मंडप बनाना वधू के घर वरपक्ष का स्वागत, वर-वधू का एक-दूसरे को देखना, कन्यादान, अग्निस्थापना, पाणिग्रहण लाजाहोम, सप्तपदी, सिन्दूरदान आदि मुख्य हैं।

 

Sanskrit Subjective Question Answer

 

प्रश्न 18. ‘भारतीयसंस्काराः ‘पाठ में लेखक का क्या विचार है ?

उत्तर ⇒ भारतीयसंस्काराः पाठ में लेखक का विचार है कि मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण सुसंस्कार से ही होता है। इसलिए विदेशी भी सुसंस्कारों के प्रति उन्मुख और जिज्ञासु हैं ।

प्रश्न 19. ‘भारतीयसंस्कारा: ‘पाठ का पाँच वाक्यों में परिचय दें |

उत्तर ⇒ भारतीय संस्काराः ‘ पाठ भारतीय संस्कारों का महत्त्व बताता है। भारतीय जीवन-दर्शन में चौल कर्म (मुण्डन), उपनयन, विवाह आदि संस्कारों की प्रसिद्धि है | छात्रगण संस्कारों का अर्थ तथा उनके महत्त्व को जान सकें, इसलिए इस स्वतंत्र पाठ को रखा गया है। संस्कार से व्यक्ति संस्कृत होता है। इससे दोष दूर होता है तथा गुण प्राप्त होता है।

प्रश्न 20. भारतीय जीवन में संस्कार का क्या महत्व है ?

उत्तर ⇒ भारतीय जीवन में प्राचीन काल से ही संस्कार ने अपने महत्व को सँजोये रखा है। यहाँ ऋषियों की कल्पना थी कि जीवन के सभी मुख्य अवसरों में वेदमंत्रों का पाठ, वरिष्ठों का आशीर्वाद, हवन एवं परिवार के सदस्यों का सम्मेलन होना चाहिए। संस्कार दोषों का परिमार्जन करता है। भारतीय जीवन दर्शन का महत्वपूर्ण स्रोतस्वरूप संस्कार है ।

 

 

 

 

 

 

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